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Author: dindiaadmin

अरविन्द केजरीवाल का राजनैतिक भविष्य

अरविन्द केजरीवाल का राजनैतिक भविष्य

विश्लेषण
चार ही वर्ष बीते हैं जिसके पूर्व भारत की जनता अरविंद केजरीवाल को योग्य प्रधानमंत्री के रुप में देखने लगी थी। अन्ना हजारे सहित अनेक लोगों ने उन पर विश्वास किया। अन्ना जी को धोखा देने के बाद भी दिल्ली की जनता ने अरविंद केजरीवाल को ऐतिहासिक समर्थन दिया। एक डेढ वर्ष बीतते बीतते ऐसा लगने लगा कि अरविंद केजरीवाल का भविष्य पागल खाने की तरफ बढ रहा है और अब एक डेढ वर्ष और बीता है तो पागल खाने की जगह जेलखाने की चर्चाएॅ शुरु हो गई हैं। मैंने राजनीति में दो प्रकार के लोगों को देखा हैं-1 वे जो गलत काम भी ऐसे कानून सम्मत तरीके से करते है कि वे हर प्रकार के आरोपों से मुक्त रहते हैं। 2 वे जो सही काम गैर कानूनी तरीके से करते हैं। ऐसे लोगों को समाज में सम्मान मिलता है भले ही वह काम गैर कानूनी ही क्यों न हो। केजरीवाल ने एक तीसरी लाइन पकडी जिसमें उन्होनें गलत कार्य गैर कानूनी तरीके से कर...
युद्ध कला में माहिर नागा साधु These sadues can be very good soldier for Indian Army if given a chance

युद्ध कला में माहिर नागा साधु These sadues can be very good soldier for Indian Army if given a chance

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जीवन शैली इनके आश्रम हरिद्वार और दूसरे तीर्थों के दूरदराज इलाकों में हैं जहां ये आम जनजीवन से दूर कठोर अनुशासन में रहते हैं। इनके गुस्से के बारे में प्रचलित किस्से कहानियां भी भीड़ को इनसे दूर रखती हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि यह शायद ही किसी को नुकसान पहुंचाते हों। हां, लेकिन अगर बिना कारण अगर कोई इन्हें उकसाए या तंग करे तो इनका क्रोध भयानक हो उठता है। कहा जाता है कि भले ही दुनिया अपना रूप बदलती रहे लेकिन शिव और अग्निके ये भक्त इसी स्वरूप में रहेंगे। नागा साधु तीन प्रकार के योग करते हैं जो उनके लिए ठंड से निपटने में मददगार साबित होते हैं। वे अपने विचार और खानपान, दोनों में ही संयम रखते हैं। नागा साधु एक सैन्य पंथ है और वे एक सैन्य रेजीमेंट की तरह बंटे हैं। त्रिशूल, तलवार, शंख और चिलम से वे अपने सैन्य दर्जे को दर्शाते हैं। कुम्भ मेले के दौराना नागा साधुओं का एक समूह ये साधु प्रायः कु...
न सीधी बात, न सीधी कार्रवाई

न सीधी बात, न सीधी कार्रवाई

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक नियंत्रण-रेखा पर दो भारतीय जवानों के सिर काटने की दर्दनाक घटना ने सारे भारत का पारा गर्म कर दिया है। पाकिस्तान के खिलाफ तो भावना का ज्वार उमड़ ही रहा है, भारत सरकार से भी लोग पूछे रहे हैं कि तुम्हारा 56 इंच का सीना कहां दुबकाए बैठे हो? सरकार, तेरी बोलती बंद क्यों है? विदेश मंत्रालय सिर्फ एक रस्मी बयान देकर छुट्टी कैसे पा गया है? पाकिस्तानी फौज कह रही है कि उसने किसी का सिर नहीं काटा। यह खबर ही झूठी है। कश्मीरी बगावत से अपनी जनता का ध्यान हटाने के लिए मोदी सरकार ने यह झूठी खबर फैलाई है। अगर यह खबर सच्ची है तो भारत सरकार इसके प्रमाण दे। इस तरह का बयान कितना मूर्खतापूर्ण और दुस्साहसिक है, यह कहने की जरुरत नहीं। जिन दो फौजी जवानों के सिर काटे गए हैं और जिनके क्षत-विक्षत शव उनके घर ले जाए गए हैं, उनके परिजन का कहना है कि भारत सरकार में दम हो तो एक सिर के बदले वह 50 सिर काट क...
निर्भया और बिल्किस बानो

निर्भया और बिल्किस बानो

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निर्भया के बलात्कार और हत्या करनेवाले चार अपराधियों को आज सर्वोच्च न्यायालय मृत्यु-दंड नहीं देता तो भारत में न्याय की मृत्यु हो जाती। निर्भया कांड ने दिसंबर 2012 में देश का दिल जैसे दहलाया था, उसे देखते हुए ही 2013 में मृत्युदंड का कानून (धारा 376ए) पास हुआ था। छह अपराधियों में से एक ने जेल में आत्महत्या कर ली थी और एक अवयस्क होने के कारण बच निकला लेकिन जो चार लटकाए जानेवाले हैं, उन्होंने अपने बचाव में क्या-क्या तर्क नहीं दिए हैं। उनके वकीलों ने अपनी सारी प्रतिभा लगा दी। मैं कई बार सोचता हूं कि इन वकीलों को क्या बिल्कुल भी शर्म नहीं आती? सिर्फ पैसों के लिए वे इन पापियों पर पर्दा डालने की कोशिश करते रहे। अदालतें यदि इन वकीलों को कोई भी सजा नहीं दे सकती तो कम से कम इनकी भर्त्सना तो करे। मृत्युदंड देनेवाले और उसे पक्का करनेवाले सभी जजों को मैं बधाई देता हूं लेकिन मुझे एक शिकायत है। वह यह कि न...
रोज़े में गोमांस नहीं, गोरस!

रोज़े में गोमांस नहीं, गोरस!

BREAKING NEWS, सामाजिक
राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने इस बार एक जबर्दस्त फैसला किया है। उसके हजारों सदस्य रमजान के दिनों में जो इफ्तार करेंगे, उसमें गोमांस नहीं परोसा जाएगा। उसकी जगह रोज़ादारों का उपवास गोरस याने गाय के दूध से खोला जाएगा। क्या कमाल की बात है, यह! यह बात मैं मुस्लिम देशों के कई मौलानाओं, राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों, प्रोफेसरों और पत्रकारों से वर्षों से कहता आ रहा हूं। कुछ देशों में इसका पालन भी होने लगा है। मैं तो उनसे कहता हूं कि गाय का ही नहीं, किसी भी जानवर का गोश्त क्यों खाया जाए? रोज़ा जैसा महान पवित्र और आध्यात्मिक कार्य आप संपन्न करें और उसके बाद अपना पेट भरने के लिए किसी जानवर को मौत के घाट उतार दें, यह अल्लाह की कौनसी इबादत हुई? यह कौनसी रहमत हुई? यह कौनसी करुणा है? यह कौनसी तपस्या है? कुरान शरीफ या बाइबिल या जेन्दावस्ता में कहां लिखा है कि मुसलमान या ईसाई या यहूदी होने के लिए गोश्त खाना जर...
फ्रांस में नए सूर्य का उदय

फ्रांस में नए सूर्य का उदय

BREAKING NEWS, विश्लेषण
डॉ. वेदप्रताप वैदिक फ्रांस में इमेन्युअल मेक्रों का राष्ट्रपति बनना कई दृष्टियों से असाधारण घटना है। पहली बात तो यह कि वे पिछले 200 साल में फ्रांस के ऐसे पहले नेता हैं, जो सिर्फ 39 साल के हैं। नेपोलियन 40 का था। दूसरी बात, फ्रांसीसी राजनीति के वे नए सूर्य हैं। वे लगभग दो साल तक पिछली ओलांद सरकार में अर्थमंत्री रहे थे। तीसरी बात, न तो वे वामपंथी हैं न दक्षिणपंथी! फ्रांस की अतिवादी राजनीति में वे एकदम नए मध्यममार्गी हैं। चौथी बात, ओलांद के मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने ‘आगे बढ़ो’ (आ मार्शे) आंदोलन चलाया और बिना किसी राजनीतिक दल के ही वे अपने दम पर राष्ट्रपति चुने गए। पांचवीं बात, मेक्रों ने 66 प्रतिशत वोट लेकर ल पेन नामक दक्षिणपंथी महिला को हराया। उनकी इस जीत का सारे विश्व में स्वागत हुआ। अपनी प्रतिद्वंदी और पुरानी विख्यात महिला नेता से दुगुने वोट से जीतना यह बताता है कि फ्रां...
कर्णन_की_सजा_का_सच

कर्णन_की_सजा_का_सच

BREAKING NEWS
मित्रों कल सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने कर्णन को 6 माह की सजा सुना कर अपनी पीठ थपथपा ली है कि न्याय कर दिया गया। पहले इन्ही न्यायधीशों ने इन्हें पागल करार देते हुए मानसिक जांच के आदेश दिए थे परन्तु पागल कर्णन को छूने की हिम्मत किसी को नही हुई।तो अब अवमानना का दोषी करार देते हुए 6 माह की जेल की सजा सुना दी।अब ये समझ मे नही आ रहा है कि कर्णन पागल है या मुजरिम।अगर पागल है तो पुनः जांच करके पागलखाने भेज जाए अगर मुजरिम है तो उसके judgship status की क्या स्थिति होगी सजा पूरी होने के बाद।वो निलंबित हुआ है या बर्खास्त,कुछ तो बताएं।मेरे हिसाब से तो पागल ही है और उसे पागलखाने ही भेजा जाए न कि जेल।क्योंकि हम वकीलों का सामना पागल जजों से रोज होता है।मुजरिम जजों से कम।इन पागल जजों की खोज करके इनके द्वारा दिये गए फैसलों को पलटना होगा वरना judiciary की जो बची खुची साख है वो भी भस्म हो जाएगी। वैस...
नर्मदा कार्ययोजना: कुछ विचारणीय सुझाव

नर्मदा कार्ययोजना: कुछ विचारणीय सुझाव

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कोई संदेह नहीं कि नर्मदा सेवा यात्रा ने निर्मलता-अविरलता के लिए आवश्यक जन-सहभागिता का एक अनुकूल वातावरण निर्मित किया है। आवश्यक है कि इस वातावरण का उपयोग किया जाये। बेहतर हो कि शासन, उत्साहित जन-समूहों को नदी को समृद्ध करने लायक कार्य करने के लिए प्रेरित करे और आवश्यकता पड़ने पर स्वयं सहयोगी और प्रोत्साहन प्रदान करने की भूमिका में रहे। समाज तब प्रेरित और प्रोत्साहित होता है, जब शासन उद्देश्य के प्रति पारदर्शी, ईमानदार, सतत् सक्रिय तथा निर्णय में समाज को सहभागी बनाता दिखाई देता है। नेतृत्व की दृष्टि जितनी स्पष्ट होगी, वह उद्देश्य को उतनी बेहतरी के साथ अंजाम दे सकेगा। मध्य प्रदेश शासन की दृष्टि से नर्मदा की समृद्धि हेतु मैने कुछ सुझाव चिन्हित किए हैं। कृपया देखें: नीति पहले, कार्ययोजना बाद में किसी भी कार्ययोजना के निर्माण से पहले नीति बनानी चाहिए। नीतिगत तथ्य, एक तरह से स्पष्ट मार्गदर्...
मुद्दे की बात करो, बकवास न करो चीन

मुद्दे की बात करो, बकवास न करो चीन

विश्लेषण
ओंकारेश्वर पांडेय अरूणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है्र परंतु यह चीन नहीं समझ रहा हैऔर वह गाहे बगाहे भारत को उकसाने वाला कदम उठाता रहता है। चीन का सपना रहा है वन एशिया वन चीन, और शायद इसी सपने को साकार करने के लिए वह नापाक चालें चलता है, चाहे वह दलार्ई लामा का विरोध हो या हाल ही में अरूणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों के नामों को बदलना नी मीडिया आजकल रोज ब रोज भारत के खिलाफ आग उगल रहा है। और यह तब से और ज्यादा बढ़ा है, जबसे दलाई लामा ने अरुणाचल प्रदेश की यात्रा की। दलाई लामा की अरुणाचल प्रदेश यात्रा से बौखलाये चीन की शी जिनपिंग सरकार ने एक बार फिर हमलावर रुख कर अख्तियार कर लिया है। अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा मजबूत करने के इरादे से उसने अपने नक्शे में देश के इस पूर्वोत्तर राज्य की छह जगहों के नाम भी बदल डाले। 19 अप्रैल, 2017 को चीन ने ऐलान किया कि उसने भारत के पूर्वोत्तरी राज्य के छह स्थ...
बेचैन है बंगाल की धरती

बेचैन है बंगाल की धरती

EXCLUSIVE NEWS
दिल्ली की मॉल संस्कृति से परे अपने बंगाल दौरे में हमने बंगाल की हरियाली, खनिज संपदा, संस्कृति, आपसी संवाद, प्रकृति से सहकार और साइंस सिटी में विज्ञान के अद्भुत आयाम देखना अधिक पसंद किया। बंगाल अब कहीँ से भी पिछड़ा और गरीब प्रदेश नहीँ है। देश दुनिया के साथ तेजी से कदमताल करने को आतुर भव्य रूप लेता यह प्रदेश अब देश को नेतृत्व देने के लिए ममता के हाथों से भी निकलने को बेचैन हो उठा है और दूरद्रष्टा नेतृत्व की तलाश में बेचैन है। शालीन और बेफिक्र जीवन के शौकीन बंगालियों ने बंगाली संस्कृति को बड़ी शिद्दत से सहेजकर रखा हुआ है। इसी कारण कलकत्ता या फिर समुद्र तटों पर भी कहीँ भी फूहड़ता और अश्लीलता नजऱ नहीँ आयी। प्रदूषण मुक्त व्यवस्था और सफाई बंगाल विशेषकर कलकत्ता की पहचान बन रही है और यातायात नियंत्रण और अनुशासन भी। लोग ममता की मुस्लिमपरस्ती और हर काम में कमीशन लेने की आदत से तंग आ चुके हैं। विश्लेष...