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Author: dindiaadmin

पहाड़े याद करके क्या करोगे

पहाड़े याद करके क्या करोगे

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
------------------------------------ एक आदरणीय मित्र ने अपने एक आलेख में एक अमेरिकी मित्र के साथ अपने विमर्श को साझा किया है कि आखिर पहाड़े की जरूरत क्यों है जब आपके पास कैलकुलेटर मोबाइल फोन और कंप्यूटर आदि कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज हैं जो आपसे ज्यादा शीघ्रता से सारी गणनाएं कर देते हैं . हमारे भारतीय मित्र ने अपने अमेरिकी मित्र से कहा कि अगर जंगल में आपके पास जब कुछ भी ना हो तब क्या करेंगे तो अमेरिकी मित्र ने कहा कि फिर पहाड़े सुनाने किसको हैं जंगल में शेर को तो पहाड़े सुनने से रहा. खैर मेरे मित्र अपने अमेरिकी मित्र के हास्य बोध और तर्कों के कायल हुए और यह उनका निजी अधिकार है .परंतु क्या आपको पता है कि अंकों की गणना हमारे मस्तिष्क को और अधिक धारदार बनती हैं शायद इसीलिए सवैया , पौना , ड्यौढ़ा भी बच्चों को रटवाया जाता था दो एकम दो ,दो दुनी चार ... के साथ साथ. मिथिला की प्राचीन परम्परागत श...
“आखिर इन बातों से कब मिलेगी आजादी ?”

“आखिर इन बातों से कब मिलेगी आजादी ?”

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
डॉ. अजय कुमार मिश्रादेश को आजाद हुए 76 वर्ष पुरे हो गए और अभी देश ने 77वां स्वतंत्रता दिवस मनाया है | इन 76 वर्षो में अनेकों अप्रत्याशित बदलाव और उपलब्धियां रही है जिससे देश का प्रत्येक नागरिक अत्यधिक मजबूत हुआ है साथ ही कई बिन्दुओं में हम अंतर्राष्ट्रीय मानकों की भी पूर्ति कर रहें है | राजनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो आजादी का अमृत काल चल रहा है और चारोतरफ खुशहाली दिखाई पड़ रही है | इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता की वर्तमान केंद्र सरकार ने अनेकों निर्णय लेकर देश को बेहतर करने का कार्य किया है | इसके प्रभाव को अभी महसूस किया जा रहा है | विगत 76 वर्षों में हम यदि बारीकी से आकलन करें तो हम संवेदनहीन हुए है और राजनीतिक विचारधाराओं ने वोट गणित में मुद्दों की बलि चढ़ा दी है |अब आम आदमी पर राजनीतिक प्रभाव इतना गहरा दिखाई पड़ने लगा है की वह बड़ी से बड़ी घटनाओं पर प्रश्न करने के बजाय इस तरह का व्य...
इतिहास का सच है गुलाम नबी का कथन

इतिहास का सच है गुलाम नबी का कथन

TOP STORIES, संस्कृति और अध्यात्म
विजयमनोहरतिवारी पश्चिम की दुनिया ने तो इस सदी में 9/11 का स्वाद चखा और इस्लामी आतंक की शक्ल ठीक से देखी। मगर भारत का चप्पा-चप्पा ऐसे अनगिनत 9/11 से भरा हुआ है। एक ही शहर में कई-कई 9/11 हैं। ये हजार साल में इतनी-इतनी बार हुए हैं कि इंसानी याददाश्त ही चकरा जाए। जिस समय यह अंधड़ चल रहे थे उसी समय 50 से ज्यादा लेखकों के लिखे दस्तावेजों में इनकी भयावता दर्ज है और इन लेखकों में सारे ही मुस्लिम थे। मैंने ये दस्तावेज अनेक बार पढ़े-पलटे हैं और इन घटनाओं को रेखांकित किया है। धर्मांतरण के ब्यौरे ऐसे अपमानजनक हैं कि आज कोई भी आत्मसम्मान वाला व्यक्ति अपने अतीत में झांकने भर से खुदकुशी कर ले। इसलिए कश्मीर में गुलाम नबी आजाद ने जो कहा है, उसे इतिहास की रोशनी में देखिए, किंतु राजनीति की आँख से नहीं। अलाउद्दीन खिलजी (1296-1316) के समय दिल्ली में गुलामों के बाजार में बिकती लड़कियों और महिलाओं ...
विभाजन विभीषिका : षड्यंत्र और संदिग्ध भूमिकाएं

विभाजन विभीषिका : षड्यंत्र और संदिग्ध भूमिकाएं

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, घोटाला
~कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटलद्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद अंग्रेजों को देश से खदेड़ने के लिए भारत की जनता आर- पार की लड़ाई में आ चुकी थी। राष्ट्रीयता के मन्त्र से दीक्षित स्वातन्त्र्य वीर-वीराङ्गनाएँ राष्ट्र की स्वतन्त्रता प्राप्त कर लेने के लिए उद्यत हो चुके थे। स्वातन्त्र्य वीर सावरकर - नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आदि की विचार भूमि पर आधारित सशस्त्र क्रान्ति के आन्दोलन से अंग्रेज भयभीत हो चुके थे। इसी बीच जब अंग्रेजों को यह स्पष्टता हो गई कि वे अधिक दिन भारत में शासन नहीं कर सकते हैं। तो वे ब्रिटिश कैबिनेट मिशन के रूप में भारत में हिन्दुस्तानी सरकार की घोषणा के लिए अंग्रेज बाध्य हो गए। इस सम्बन्ध में ध्यातव्य है कि “द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन की कमजोर स्थिति ने भारत में स्वतंत्रता की राह सरल कर दी थी। जल्दी ही भारत के स्टेट सेक्रेटरी, पैथिक लारेंस ने 19 फरवरी 1946 को स्वशासन की ...
ऐसा क्या है डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन क़ानून में?

ऐसा क्या है डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन क़ानून में?

EXCLUSIVE NEWS, राष्ट्रीय, सामाजिक
*रजनीश कपूरआए दिन हमें डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों के बारे में पता चलता है। कैसे कुछ शातिर लोगों का गैंग एकयोजनाबद्ध तरीक़े से भोले-भले लोगों को ठगने की मंशा से उन्हें अपना शिकार बनाते हैं। उनकी मेहनत की कमाईको कुछ ही पल में फुर्र कर देते हैं। उसके बाद ऐसे फ्रॉड का शिकार व्यक्ति अपनी शिकायत लेकर दर-दर की ठोकरेंखाने को मजबूर हो जाता है। परंतु सरकार ने इस फ्रॉड को रोकने और ज़रूरी निजी जानकारी की सुरक्षा की दृष्टिसे ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल’ को संसद में पेश किया है जो अब क़ानून बन गया है।हाल ही में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में डिजिटल पर्सनल डाटाप्रोटेक्शन बिल, 2023 पेश किया। इस विधेयक के तहत नागरिकों के व्यक्तिगत डाटा की सुरक्षा के अधिकारव्यवस्था करता है। यहाँ सवाल उठता है कि यदि यह बिल नागरिकों की निजी जानकारी सुरक्षा कि दृष्टि से ल...
विश्व मानवीय दिवस-19 अगस्त, 2023

विश्व मानवीय दिवस-19 अगस्त, 2023

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
भारत सक्षम है मानवता को बल देने में-ः ललित गर्ग:- विश्व मानवीय दिवस प्रत्येक वर्ष 19 अगस्त को मनाया जाता है। मानव मूल्यों के छीजते दौर में इस दिवस की विशेष प्रासंगिकता एवं उपयोगिता है। इस दिवस पर उन लोगों को याद किया जाता है, जिन्होंने मानवीय उद्देश्यों के कारण दूसरों की सहायता के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी। इस दिवस को विश्वभर में मानवीय कार्यों एवं मूल्यों को प्रोत्साहन दिए जाने के अवसर के रूप में भी देखा जाता है। इसको मनाने का निर्णय संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा स्वीडिश प्रस्ताव के आधार पर किया गया। इसके अनुसार किसी आपातकाल की स्थिति में संयुक्त राष्ट्र देशों द्वारा आपस में सहायता के लिए मानवीय आधार पर पहल की जा सकती है। इस दिवस को विशेष रूप से 2003 में संयुक्त राष्ट्र के बगदाद, इराक स्थित मुख्यालय पर हुए हमले की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाना आरंभ किया गया था जो विश्व में मानवीय क...
काट काट के जंगल, प्रकृति में घोला है जहर।

काट काट के जंगल, प्रकृति में घोला है जहर।

राष्ट्रीय, साहित्य संवाद
कुदरत के कोहराम घनघोर बारिश, भूस्खलन से देश के उत्तरी राज्य हिमाचल प्रदेश में जान-माल को काफी नुकसान पहुंचा है। हिमाचल प्रदेश तो हिमाचल प्रदेश इस बार देश के पंजाब,असम, उत्तराखंड, दिल्ली समेत देश के उत्तरी राज्यों में इस वर्ष भारी बारिश ने काफी कहर मचाया है और बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ है। हिमाचल प्रदेश के हालात तो बहुत ही बुरे हैं। हाल ही में हिमाचल प्रदेश के शिमला में लैंडस्लाइड की चपेट में एक शिव मंदिर आ गया। राज्य मेें बारिश से पिछले कुछ समय में ही कम से कम 60 लोगों की मौत हुई है। कभी लैंडस्लाइड तो कभी बादल फट रहे हैं, नदियां उफान पर बह रही हैं। आज पहाड़ी क्षेत्रों में ढलान वाले क्षेत्र भारी वर्षा से पूरी तरह संतृप्त हैं और इसके कारण बहुत बार भूस्खलन होता है, जो परेशानी का कारण बनता है। वर्तमान में बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया है। जानकारी मिलती है कि हिमाचल प्रदेश म...
भारत जीवन दर्शन के साथ उदित होने की ओर अग्रसर

भारत जीवन दर्शन के साथ उदित होने की ओर अग्रसर

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, संस्कृति और अध्यात्म
अवधेश कुमारहम अंग्रेजों से अपनी मुक्ति का 75 वर्ष पूरा कर चुके हैं। इसे अमृत महोत्सव नाम दिया गया था। जब सूर्य लालिमा के साथ निकल रहा हो और उसका पूर्ण उदय नहीं हुआ हो उसे ही अमृत काल कहते हैं। स्वीकार करना होगा की स्वतंत्रता के 75 वें वर्ष को अमृत काल नाम देने के पीछे सोच अत्यंत गहरी है। साफ है कि काफी विचार-विमर्श के बाद अमृत काल नाम दिया गया होगा। राजनीति और मीडिया के बड़े वर्ग ने वातावरण ऐसा बना दिया है जिसमें स्वतंत्रत भारत की स्थिति, स्वतंत्रता संघर्ष के सपने, स्वतंत्रता मिलने के समय की परिस्थितियां, नेताओं की भूमिका आदि पर सच बोलना कठिन हो गया है। कौन उसमें से क्या अर्थ निकालकर बवंडर खड़ा कर देगा अनुमान लगाना आज मुश्किल होता है। स्थिति ऐसी बना दी गई है कि आज विभाजनकालीन परिस्थितियों की बात करने से जानकार लोग भी डरने लगे हैं। पता नहीं कौन उन्हें सांप्रदायिक और क्या-क्या घोषित कर देगा...
17 अगस्त 1909 : सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी मदन लाल ढींगरा का बलिदान

17 अगस्त 1909 : सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी मदन लाल ढींगरा का बलिदान

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, साहित्य संवाद
लंदन में अंग्रेज अधिकारी वायली को गोली मारी थी --रमेश शर्मा स्वत्व और स्वाभिमान रक्षा के लिये क्राँतिकारियों ने केवल भारत की धरती पर ही अंग्रेज अधिकारियों को गोली मारकर मौत की नींद नहीं सुलाया अपितु लंदन में भी क्रूर अंग्रेजों के सीने में गोली उतारी है । क्राँतिकारी मदन लाल ढींगरा ऐसे ही क्राँतिकारी थे जिन्होंने लंदन में भारतीयों का अपमान करने वाले अधिकारी वायली के चेहरे पर पाँच गोलियाँ मारकर ढेर कर दिया था ।सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी मदनलाल धींगरा का जन्म 18 सितंबर 1883 को पंजाब प्राँत के अमृतसर नगर में हुआ था । परिवार की पृष्ठभूमि सम्पन्न और उच्च शिक्षित थी । पिता दित्तामल जी सिविल सर्जन थे और आर्यसमाज से जुड़े थे । पर स्थानीय अंग्रेज अधिकारियों के भी विश्वस्त माने जाते थे । जबकि माताजी अत्यन्त धार्मिक एवं भारतीय संस्कारों में रची बसी थीं । वे आर्यसमाज के प्रवचन आयोजनों में नियमित श्र...
बंटवारा जो हम भूले नहीं

बंटवारा जो हम भूले नहीं

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, समाचार
-बलबीर पुंज बीते मंगलवार (15 अगस्त) भारत ने अपना 77वां स्वाधीनता दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया। निसंदेह, यह दिन भारतीय इतिहास का एक मील का पत्थर है। परंतु इसके साथ विभाजन की दुखद स्मृति भी जुड़ी हुई है। विश्व के इस भूक्षेत्र का त्रासदीपूर्ण बंटवारा, कोई एकाएक या तत्कालीन मुस्लिम समाज के किसी तथाकथित उत्पीड़न का परिणाम नहीं था। इसके लिए उपनिवेशी ब्रितानियों के साथ जिहादी मुस्लिम लीग और भारत-हिंदू विरोधी वामपंथियों ने अपने-अपने एजेंडे की पूर्ति हेतु एक ऐसा वैचारिक अधिष्ठान तैयार किया था, जिसने कालांतर में भारत को तीन टुकड़ों में विभाजित कर दिया। यह देश में पिछले 100 वर्षों की सबसे बड़ी सांप्रदायिक घटना थी। दुर्भाग्य से इसकी विषबेल खंडित भारत में अब भी न केवल जीवित है, साथ ही वह देश की राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता और अखंडता के लिए चुनौती भी बन हुई है। भारतीय उपमहाद्वीप में पाकिस्तान कैसे उभर...