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Author: dindiaadmin

पंचायत चुनाव प्रबंधन- दीदी जरा सीखें योगी से

पंचायत चुनाव प्रबंधन- दीदी जरा सीखें योगी से

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
आर.के. सिन्हा यूपी में विगत मई महीने में पंचायत चुनाव हुए और पश्चिम बंगाल में इसी जुलाई में। दोनों ही देश के आबादी और क्षेत्रफल के लिहाज से खास राज्य हैं। पर पंचायत चुनावों के दौरान जहां यूपी में पूर्ण शांति रही, वहीं पश्चिम बंगाल ने हिंसा,आगजनी और निर्मम हत्याएं होती देखीं। राजनीतिक एकाधिकार के लिए पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की संस्कृति अन्य भारतीय राज्यों की तुलना में कहीं अधिक विद्रूप रूप धारण कर गई है। देखा जा रहा है कि राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़पों की संस्कृति, खासतौर से ग्रामीण क्षेत्रों में हाल के कुछ वर्षों में यहां कुछ ज्यादा ही फली-फूली है। पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए पंचायत चुनाव के दौरान खूब–खराबा हुआ जिसमें तीन दर्जन से अधिक राजनीतिक हत्याएं हुई हैं। इस बात की पुष्टि करता है कि दीदी यानी ममता बनर्जी की सरकार सत्ता की हनक को बरकरार...
क्या टीपू सुल्तान न्यायप्रिय शासक था?

क्या टीपू सुल्तान न्यायप्रिय शासक था?

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
४ मई को जिहादी गिद्ध टीपू सुल्तान अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध करते हुए मारा गया था। टीपू सुल्तान के समर्थन में पाकिस्तान की सरकार का एका-एक प्रेम उमड़ा और उसने टीपू सुल्तान की याद पढ़े। बुद्धिजीवी समाज में सत्य और असत्य के मध्य भी एक युद्ध लड़ा जाता हैं। इसे बौद्धिक युद्ध कहते है। यहाँ पर तलवार का स्थान कलम ले लेती हैं और बाहुबल का स्थान मस्तिष्क की तर्कपूर्ण सोच ले लेती हैं। इसी कड़ी में इस बौद्धिक युद्ध का एक नया पहलु है टीपू सुल्तान, अकबर और औरंगजेब जैसे मुस्लिम शासकों को धर्म निरपेक्ष, हिन्दू हितैषी ,हिन्दू मंदिरों और मठों को दान देने वाला, न्याय प्रिय और प्रजा पालक सिद्ध करने का प्रयास। इस कड़ी में अनेक भ्रामक लेख प्रकाशित किये जा रहे हैं। इन लेखों में इतिहास की दृष्टी से प्रमाण कम है,शब्द जाल का प्रयोग अधिक किया गया है। परन्तु हज़ार बार चिल्लाने से भी असत्य सत्य सिद्ध नहीं हो जाता। इस ...
सरकारी भ्रष्ट्राचार का प्रमाण मिटाती और जेबें भी गर्म करती है बाढ

सरकारी भ्रष्ट्राचार का प्रमाण मिटाती और जेबें भी गर्म करती है बाढ

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बाढ को सरकारी आमंत्रण भी मिलता है ==================== आचार्य विष्णु हरि सरस्वती मानसून की पहली बर्षा में ही त्राहिमाम मच गया। लाखों नहीं, करोड़ों नहीं, अरबो नहीं बल्कि खरबों रूपयों का नुकसान हो गया। इतना ही नहीं बल्कि इस बाढ में हमारी अर्थव्यवस्था भी डूब गयी है। भविष्य में हमारी अर्थव्यवस्था के लिए बाढ विनाश का कारण भी बनेगी। पर समस्या तो यह भी है कि सरकार बाढ को आमंत्रण भी देती है। क्या सरकार की योजनाएं ग्लेशियरों से छेड़छाड़ नहीं करती हैं, क्या सरकार की योजनाएं नदियों के प्रवाह से छेड़छाड़ नहीं करती हैं, क्या सरकार अपनी रिश्वतखोरी के प्रतीक पुल और सड़कों आदि का भौतिक अस्तित्व मिटाने और अपनी रिश्वतखोरी की सबूत मिटाने के लिए बाढ का इंतजार नहीं करती हैं? सरकारी अधिकारियों के समर्थन के बिना क्या नदियों के प्रवाह क्षेत्र और नालों पर अतिक्रमण संभव है? बाढ़ पीड़ितों के लिए आयी धन राशि सर...
भारत की बाढ़ प्रबंधन योजना का क्या हुआ?

भारत की बाढ़ प्रबंधन योजना का क्या हुआ?

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राष्ट्रीय बाढ़ आयोग की प्रमुख सिफ़ारिशें जैसे बाढ़ संभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक मूल्यांकन और फ्लड प्लेन ज़ोनिंग एक्ट का अधिनियमन अभी तक अमल में नहीं आया है। सीडब्ल्यूसी का बाढ़ पूर्वानुमान नेटवर्क देश को पर्याप्त रूप से कवर करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा, अधिकांश मौजूदा बाढ़ पूर्वानुमान स्टेशन चालू नहीं हैं। 2006 में केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) द्वारा गठित एक टास्क फोर्स ने बाढ़ जोखिम मानचित्रण का कार्य पूरा नहीं किया। बाढ़ क्षति का आकलन पर्याप्त रूप से नहीं किया गया। बाढ़ प्रबंधन कार्यक्रमों के तहत परियोजनाओं के पूरा होने में देरी मुख्य रूप से केंद्र की सहायता की कमी के कारण होती है। बाढ़ प्रबंधन के कार्य एकीकृत तरीके से नहीं किये जाते हैं। भारत के अधिकांश बड़े बांधों में आपदा प्रबंधन योजना नहीं है- देश के कुल बड़े बांधों में से केवल 7% के पास आपातकालीन कार्य योजना/आपद...
एक और अनोखी उड़ान, क्या होगा भारत का चाँद ?

एक और अनोखी उड़ान, क्या होगा भारत का चाँद ?

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सांप और साधुओं का देश कहा जाने वाला भारत आज स्पेस टेक्नोलॉजी में दुनिया के ताकतवर देशों के साथ खड़ा है। भारत का लक्ष्य अपने चंद्रयान-3 मिशन के साथ चंद्रमा पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बनना है। चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान का रोवर चांद की सतह का अध्ययन करेगा और यह लैंडर के अंदर बैठकर जा रहा है। इसरो ने बताया है कि चंद्रयान-3 मिशन के तहत इसरो 23 अगस्त या 24 अगस्त को चंद्रमा पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ का प्रयास करेगा। लैंडर के मिशन की पूरी अवधि एक चंद्र दिवस की रहने वाली है, जो पृथ्वी के 14 दिन के बराबर है। पिछली बार क्रैश लैंडिंग हुई थी। पर इस बार अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत चांद की सतह पर लैंड करने वाला चौथा देश बनने के लिए तैयार है। 'स्पेस के क्षेत्र में हमारी विशेषज्ञता में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। चांद को चूमने में अब भारत को ज्यादा इंतजार नहीं करना है।' -प्रियंका सौरभ ...
फ्रांस-भारत की दोस्ती से दुनिया की बेहतरी

फ्रांस-भारत की दोस्ती से दुनिया की बेहतरी

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ललित गर्ग- भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विदेश यात्राएं नये भारत-सशक्त भारत की इबारत लिखने के अमिट आलेख हैं। उनके नेतृत्व में उभरता नया भारत विकसित एवं विकासशील देशों के बीच सेतु बन रहा है। हाल ही में अमेरीका एवं मिस्र की ऐतिहासिक एवं सफल यात्राओं के बाद मोदी फ्रांस की दो दिवसीय यात्रा पर हैं। इस वर्ष भारत और फ्रांस के बीच राजनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं और मोदी का यह फ्रांस दौरा काफी अहम है। पिछले 25 वर्षों में दोनों देशों के बीच कई द्विपक्षीय समझौते हुए हैं लेकिन इस बार होने वाले समझौतों से दोस्ती का नया दौर शुरू होगा। भारत की विदेशों में बढ़ती साख को इस यात्रा से एक नई ऊंचाई मिलेगी। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारतीय प्रधानमंत्री मोदी को फ्रांस के सर्वोच्च सम्मान ग्रैंड क्रॉस ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर से सम्मानित किया। मोदी बैस्टिल दिवस परेड में मुख्य अतिथि...
गरीबी उन्मूलन एवं आर्थिक उन्नति के सुखद संकेत

गरीबी उन्मूलन एवं आर्थिक उन्नति के सुखद संकेत

BREAKING NEWS, TOP STORIES, आर्थिक, राष्ट्रीय
- ललित गर्ग-आजादी के अमृत काल में सशक्त भारत एवं विकसित भारत को निर्मित करते हुए गरीबमुक्त भारत के संकल्प को भी आकार देने के शुभ संकेत मिलने लगे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं उनकी सरकार ने वर्ष 2047 के आजादी के शताब्दी समारोह के लिये जो योजनाएं एवं लक्ष्य तय किये हैं, उनमें गरीबी उन्मूलन के लिये भी व्यापक योजनाएं बनायी गयी है। इससे पूर्व मं बनायी मोदी सरकार की योजनाओं के गरीबी उन्मूलन के चमत्कारी परिणाम आये हैं। हाल ही में जारी संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम व ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक अध्ययन रिपोर्ट में यह बताया गया कि पिछले पंद्रह वर्षों में भारत 41.5 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा के ऊपर उठाने में कामयाब हुआ है। निस्संदेह, यह खबर भारतीय अर्थव्यवस्था की सुखद तस्वीर पेश करती है। एक और दूसरी सुखद आर्थिक संकेत देने वाली खबर यह आयी है कि मशहूर वित्तीय एजेंसी गोल्डमेन सैक्स के अनुसार भार...
<strong>सावन यानी शिव को रिझाने का समय</strong>

सावन यानी शिव को रिझाने का समय

BREAKING NEWS, TOP STORIES, धर्म, राष्ट्रीय, साहित्य संवाद
आर.के. सिन्हा सावन का पहला सोमवार बीती 10 जुलाई को पूरी आस्था के साथ मनाया गया। देशभर के शिवालयों में सुबह चार बजे से बारह बजे रात्रि तक तमाम भक्त आते रहे। सूरज की पहली किरण फूटने से पहले ही भक्तों  का तांता मंदिरों में लग गया था। शिव का जीवन ही इस बात का प्रतीक है कि प्रकृति से तालमेल स्थापित कर ही जीवन में सुख-शांति, सरलता, सादगी, शौर्य, योग, अध्यात्म सहित कोई भी उपलब्धि हासिल की जा सकती है। आषाढ़ मास से ही वर्षा ऋतु की शुरूआत होती है। श्रावण मास आते-आते चारों तरफ हरियाली छा जाती है। यह सभी के मन को लुभाने वाली होती है। श्रावण मास में प्रकृति का अनुपम सौंदर्य देखते ही बनता है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चारों तरफ बसंत ऋतु ही छाई हुई है। संंसार के प्राणियों में नई उमंग व नव जीवन का प्रसार होने लगता है। प्रकृति की अनुपम छठा को देखकर भ...
आखिर क्यों नदियां बनती हैं खलनायिकाएं?

आखिर क्यों नदियां बनती हैं खलनायिकाएं?

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
आखिर क्यों नदियां बनती हैं खलनायिकाएं? हाल के वर्षों में नदियों के पानी से डूबने वाले क्षेत्रों में शहरी बस्तियां बसने की रफ़्तार तेज़ हो गई है. इस कारण से भी बाढ़ से होने वाली क्षति का दायरा बढ़ रहा है. क्योंकि किसी भी शहर का भौगोलिक दायरा और आबादी बढ़ने से ज़्यादा से ज़्यादा लोगो के बाढ़ के शिकार होने की आशंका बढ़ जाती है. जैसे ही बाढ़ प्रभावित इलाक़ों में बस्तियां बसने लगती हैं, तो बाढ़ के पानी के निकलने का रास्ता रुक जाता है. इससे बाढ़ का पानी निकल नहीं पाता. फिर बस्तियों को बाढ़ के पानी से बचाने के लिए उनके इर्द गिर्द बंध बनाए जाते हैं. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बस्तियां बसने और इन बंधों के बनने से नदी घाटी और नदियों के इकोसिस्टम पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है. -डॉ सत्यवान सौरभ नदियां हमारी सभ्यता की जड़ों का अभिन्न अंग हैं, तो उनकी वजह से आने वाली बाढ़ भी हमारे देश का हिस्स...
लैंगिक समानता : भारत बहुत पीछे है

लैंगिक समानता : भारत बहुत पीछे है

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इंदौर के मेरे कुछ मित्र संसद में लम्बित “महिला आरक्षण बिल” को लेकर चिंतित हैं । वे सेमिनार, प्रकाशन और जाने क्या-क्या कर रहे हैं और गांधीवादी तरीक़े से आगे भी कुछ करना चाहते हैं । मुझे तो लगता है भारत का नज़रिया इस लैंगिक समानता के मुद्दे पर बदल रहा है और महिलाओं के पक्ष में दूर से दूर होता जा रहा है। बानगी के लिए देखिए भारत के कुल राजदूतों में से महज 13 प्रतिशत महिलाएं हैं, जबकि वर्ष 2021 में यह संख्या 17.4 प्रतिशत थी। जाहिर है, इस सन्दर्भ में हम वैश्विक औसत से बहुत दूर हैं और मध्य-पूर्व के देशों के समक्ष खड़े हैं। लैंगिक समानता के हरेक आयाम में भारत दुनिया के सबसे असमान देशों के साथ ही खड़ा रहता है। यूनाइटेड अरब एमिराट्स की संस्था, अनवर गर्गाश डिप्लोमेटिक अकैडमी की रिपोर्ट मेरे सामने है , यह संस्था वीमेन इन डिप्लोमेसी इंडेक्स प्रकाशित करता है। इसके 2023 वीमेन इन डिप्लोमेसी इंडेक्...