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Author: dindiaadmin

सावधान: ऊपरवाला सब देख रहा है!

सावधान: ऊपरवाला सब देख रहा है!

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रजनीश कपूरदेश की एक नामी सीसीटीवी कंपनी ने अपने विज्ञापन में एक लाइन को प्रमुखता दी ‘ऊपरवाला सब देख रहा है’। इस कंपनी का उद्देश्य था कि उनके सीसीटीवी कैमरे की निगाह से कोई नहीं बच सकता। परंतु आज हम जिस संदर्भ में इस बात को कह रहे हैं वो सरकार द्वारा जनता पर नज़र रखने से संबंधित है। यह एक ऐसा विषय है जो आप सभी को सोचने पर मजबूर कर देगा। आपने देश के कई शहरों यातायात पुलिस द्वारा लगाए गये स्पीड कैमरे देखे होंगे। जो भी वाहन चालक स्पीड का क़ानून तोड़ता है। लाल बत्ती पार करता है। लाल बत्ती पर वाहन को स्टॉप लाइन के आगे खड़ा करता है। बिना हेलमेट के दुपहिया वाहन चलाता है या ऐसा कोई अन्य उल्लंघन करता है जो ट्रैफ़िक पुलिस के कैमरों में क़ैद हो जाता है तो उसके घर पर एक चालान पहुँच जाता है। ऐसे चालान आजकल ऑनलाइन भी चेक किए जा सकते हैंजहां पर फ़ोटो द्वारा ट्रैफ़िक नियम तोड़ने का प्रमाण भी दिखाई देत...
सरकारी सर्वर की फुलप्रूफ सुरक्षा ज़रूरी

सरकारी सर्वर की फुलप्रूफ सुरक्षा ज़रूरी

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यह अच्छी बात नहीं है,कोविड़ दुष्काल के बाद टीकाकरण के लिये बनाये गये सिस्टम ‘कोविन’ के डाटा में सेंधमारी और उसके बाद आरोप- प्रत्यारोप सनसनी फैला हुए है । चिंता की बड़ी बात यह है इसमें करोड़ों लोगों का निजी डाटा जमा है , जिसमें आम के साथ सुरक्षा की दृष्टि से तमाम खास लोग भी शामिल है । हालांकि, केंद्र सरकार ने तीव्रता से साफ किया कि कोविन का कोई डाटा चोरी नहीं हुआ। फिर भी इस मुद्दे पर विपक्ष ने केंद्र को निशाने पर ले रखा है ।वैसे भारत की सरलता से टीकाकरण की व्यवस्था को अंजाम देने के लिये देश-विदेश में कोविन सिस्टम की सराहना की गई थी।ऐसे कई मामले हैं, गाहे-बगाहे ऐसी खबरें आती ही रहती हैं कि साइबर अपराधियों ने लोगों का निजी डाटा चुरा लिया है। दरअसल, ऑनलाइन सिस्टम से जितनी सुविधा हुई व समय की बचत हुई, उसकी सुरक्षा के लिये खतरा उतना ही ज्यादा बड़ा हो गया है। निजी डाटा में सेंधमारी की चर्चा न...
छत्रपति शिवाजी की निर्माता-वीरमाता जीजाबाई

छत्रपति शिवाजी की निर्माता-वीरमाता जीजाबाई

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मृत्युंजय दीक्षितबालपन से ही वीरता की प्रतिमूर्ति - मां जीजाबाई, बचपन से ही शस्त्र सञ्चालन सीखना चाहती थीं औरउनके पिता लखूजी जाधवराव ने जो अपनी कन्या से अत्यंत स्नेह करते थे उनकी इस इच्छा को पूरा करने में कोई कोई कसर नहीं छोड़ी । शस्त्र कौशल में निपुण जीजा को उनके भाई रणचंडिका कहते थे । समय आने पर पिता जाधवराव वीर पुत्री जीजाबाई के लिए शूरवीर वर खोजा । वीर बालिका जीजा ही शाह जी की पत्नी और छत्रपति शिवाजी की मां के रूप में विख्यात हुईं।जिस समय जीजाबाई अपने भाईयों के साथ शस्त्र चलाना सीख रही थीं उस समय भारत पर मुगल आक्रमण हो रहा था। मुगल आक्रमणकारी भयानक रूप से हिंसा, मारकाट और लूट पाट कर रहे थे। मुगलों के सैनिक सामान्य हिन्दू जनता पर तरह- तरह के अत्याचार कर रहे थे। चारों ओर से मार काट, महिलाओं के अपहरण तथा शीलभंग, मंदिरों के ध्वंस, लूटपाट व आगजनी की ही सूचनाएं आ रही थीं । मुगलों के अमानवीय ...
गेहूं भंडारण पर लगाम ?

गेहूं भंडारण पर लगाम ?

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कितनी अजीब बात है एक तरफ़ देश में गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है और दूसरी तरफ़ सरकार ने प्रचुर आपूर्ति के बीच उसकी स्टॉक लिमिट तय करने का निर्णय सुना दिया है । यह निर्णय इस बात का साफ़ संकेत है कि देश में खाद्य अर्थव्यवस्था भारी कुप्रबंधन की शिकार है। साफ़ समझ आ रहा है कि रबी का मार्केटिंग सीजन अभी समाप्त नहीं हुआ है और किसानों के पास अभी भी गेहूं का ऐसा भंडार मौजूद है जो बिका नहीं है। इस लिहाज से भी यह कदम न केवल गलत बल्कि किसान विरोधी ही कहा जाएगा । और ख़ास बात यह है कि यह निर्णय ऐसे समय आया है जब खाद्य मुद्रास्फीति 2.91 प्रतिशत के साथ 18 महीने के निचले स्तर पर है और सकल खुदरा मुद्रास्फीति 4.25 प्रतिशत के साथ 25 माह के निचले स्तर पर है। मोटे तौर पर खाद्य और ईंधन कीमतों में नरमी की बदौलत हुआ है।इसमें कोई संदेह नहीं है कि गेहूं के मामले में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति क...
सब जीते तो हारा कौन ? – अनुज अग्रवाल

सब जीते तो हारा कौन ? – अनुज अग्रवाल

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भाजपा के असंख्य आरोपों, कोशिशों, जाँच एजेंसियो के छापो और चुनावी माहौल के भगवाकरण करने के बाद भी देश से निपटती व सिमटती जा रही कांग्रेस पार्टी ने बड़े आराम से प्रभावशाली बहुमत के साथ हिमाचल प्रदेश के बाद कर्नाटक में न केवल जीत प्राप्त की वरन् सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच चल रहे शक्ति संघर्ष को भी निबटाकर अपनी सरकार का गठन भी कर लिया। गांधी परिवार तो इस जीत पर फूला न समा रहा और लोकसभा का दावा ठोंक रहा है। तो उधर बीजेपी के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विपक्ष की अनगिनत आलोचनाओ, आरोपों, व्यवधानों क़ानूनी रूकावटो व बहिष्कार के उपरांत भी संसद के नए दिव्य, भव्य व भारतीयता से ओतप्रोत भवन को समय से न केवल पूरा करवाया वरन् उसका उद्घाटन भी कर दिया। अपने नौ साल के कार्यकाल को सफलतापूर्वक पूरा करने का रिकॉर्ड बनाने के साथ ही मोदी जी वि भाजपा ने उन हजारो कामों को गिनाया जो पिछले नौ सा...
लिथियम की प्राप्ति, आधार विरोधाभासी

लिथियम की प्राप्ति, आधार विरोधाभासी

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और भारत के खदान मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने देश में लीथियम और सोने के भंडार खोज निकाले हैं और ऐसे लगभग 51 खनिज ब्लॉक राज्य सरकारों को भी सौंप दिए गए हैं। लीथियम की महत्ता के कारण यह सूचना भारतीय ही नहीं विदेशी समाचारपत्रों में भी छपा। यह खनिज लीथियम-ऑयन बैटरियों का सबसे महत्वपूर्ण घटक है, और स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन तक अनेकानेक बैटरियों में प्रयुक्त होता है। दुनिया जीवाश्म ईंधन से हटकर सतत एवं स्वच्छ ऊर्जा की ओर पहल कर रही है और इस परिवर्तन में एक बड़ी भूमिका लीथियम बैटरियों की है, जो बारम्बार चार्ज होने और लंबे समय तक ऊर्जा का भंडारण करने में सक्षम हैं। इसीलिए लीथियम को अक्सर ‘श्वेत सोना’ या ‘नवीन-तेल’ भी कहा जाता है। देश के भंडारों में जिस भारी मात्रा में लीथियम (5.9 मिलियन टन) होने का संकेत मिला है, उसने विश्वभर को हैरा...
वैश्विक स्तर पर भारतीय अर्थव्यवस्था पुनः वैभवकाल की ओर अग्रसर

वैश्विक स्तर पर भारतीय अर्थव्यवस्था पुनः वैभवकाल की ओर अग्रसर

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, आर्थिक, विश्लेषण
यदि भारत के प्राचीन अर्थतंत्र के बारे में अध्ययन किया जाय तो ध्यान में आता है कि प्राचीन भारत की अर्थव्यस्था अत्यधिक समृद्ध थी। विश्व के कई भागों में सभ्यता के उदय से कई सहस्त्राब्दी पूर्व, भारत में उन्नत व्यवसाय, उत्पादन, वाणिज्य, समुद्र पार विदेश व्यापार, जल, थल एवं वायुमार्ग से बिक्री हेतु वस्तुओं के परिवहन एवं तत्संबंधी आज जैसी उन्नत नियमावलियां, व्यवसाय के नियमन एवं करारोपण के सिद्धांतों का अत्यंत विस्तृत विवेचन भारत के प्राचीन वेद ग्रंथों में प्रचुर मात्रा में मिलता है। प्राचीन भारत में उन्नत व्यावसायिक प्रशासन व प्रबंधन युक्त अर्थतंत्र के होने के भी प्रमाण मिलते हैं। प्राचीन भारत में कुटीर उद्योग बहुत फल फूल रहा था इससे सभी नागरिकों को रोजगार उपलब्ध रहता था एवं हर वस्तु का उत्पादन प्रचुर मात्रा में होता था। ग्रामीण स्तर पर भी समस्त प्रकार के आवश्यक उत्पाद पर्याप्त मात्रा में उप...
अपने पापों का फल भुगत रहा, कर्ज से कराहता पाकिस्तान

अपने पापों का फल भुगत रहा, कर्ज से कराहता पाकिस्तान

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भारत तथा विश्व में शांति के लिए पाकिस्तान का विश्व के मानचित्र से मिट जाना ही उचितमृत्युंजय दीक्षितपड़ोसी देश पाकिस्तान आज भारी कर्ज व अभूतपूर्व मंहगाई के बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है। यद्यपि पाकिस्तान सरकार इससे मुक्ति पाने के लिए कुछ कदम उठा रही है लेकिन यह कदम पाकिस्तान को इस भंवरजाल से उबारने के लिए नाकाफी हैं। कहा जाता है कि बुरे समय में एक के बाद एक सभी अपका साथ छोड़ कर चले जाते हैं और यही हाल इस पाकितान का हो रहा है धीरे धीरे विश्व के सभी देश उससे किनारा कर रहे हैं ।इन परिस्थितियों में भी पाकिस्तान के राजनेता, सेना, आई.एस.आई सुधरने का नाम नहीं ले रहे, कश्मीर-कश्मीर का गाना और आतंक को पनाह देना आज भी इससे अलग हट कर वो कुछ सोच नहीं सकते। वहीं आंतरिक स्तर पर अल्पसंख्यकों का जीवन दूभर है । हिन्दू बच्चियों का अपहरण, धर्मान्तरण, मार पीट, मंदिरों को नष्ट करना यह पाकिस्तान के दैनिक समाचार ...
योगी सरकार का समावेशी बजट

योगी सरकार का समावेशी बजट

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गांव, किसान और पर्यटन पर विशेष बलमृत्युंजय दीक्षितउत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने प्रदेश का अब तक का सबसे बड़ा 6.90 लाख करोड़ रुपए का बजट प्रस्तुत किया है जिसमें केंद्रीय बजट की तरह ही प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने पर बल दिया गया है और आगामी लोकसभा व नगर निकाय चुनावों को ध्यान में रखते हुए सामाजिक सरोकारों तथा शहरी क्षेत्रों व नगर निकायों के विकास पर भी बल दिया गया है।बजट में पहली बार किसी वर्ग विशेष या फिर धर्म विशेष का तुष्टिकरण भी नहीं किया गया है। वैसे भी जब से योगी सरकार बनी है तब से जितने भी बजट प्रस्तुत किए गये हैं सभी सबका साथ सबका विकास के नारे को ही ध्यान में रखकर प्रस्तुत किये गये हैं। योगी सरकार के वर्तमान बजट में जल तथा पर्यावरण संरक्षण सहित समाज के उच्च वर्ग से लेकर समाज के वंचित तबकों का भी पूरा ध्यान रखा गया है। यह बजट प्रदेश को आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश बनाने की ओर अ...
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की पुण्य तिथि

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की पुण्य तिथि

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26 फरवरी 1966 : पूरा जीवन तिहरे संघर्ष में बीता : दोहरा आजीवन कारावास --रमेश शर्मा स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर अकेले ऐसे बलिदानी क्राँतिकारी हैं जिन्हें दो बार आजीवन कारावास हुआ, उनका पूरा जीवन तिहरे संघर्ष से भरा है । एक संघर्ष राष्ट्र की संस्कृति और परंपरा की पुनर्स्थापना के लिये किया । दूसरा संघर्ष अंग्रेजों से मुक्ति केलिये । और तीसरा संघर्ष भारत के अपने ही बंधुओं के लांछन के झाँछन झेलने का।भारत यदि आक्रांताओं से पराजित हुआ और दासों का दास बना तो यह विदेशियों की शक्ति सामर्थ्य से नहीं अपितु अपने ही लोगों के असहयोग और ईष्या से बना । ये दोनों बातें सावरकर जी ने जीवन भर झेली । उनका संघर्ष सत्ता के लिये नहीं था, राजनीति के लिये नहीं था अपितु भारत राष्ट्र की अस्मिता और हिन्दु समाज के जागरण के लिये था । उनका और उनके परिवार का पूरा जीवन भारत के स्वत्व की प्रतिष्ठापना के लिय...