भारत के हित और पड़ोसियों के साथ संपर्क
भारत के हित और पड़ोसियों के साथ संपर्क-प्रियंका 'सौरभ'
शीत युद्ध के दौरान रणनीतिक अलगाव, उपेक्षा की नीति और किसी भी गुट में न शामिल होने की घोषणा के बाद भारत की क्षेत्रीय नीति सीमा पार संबंधों को मजबूत करने की दिशा में स्थानांतरित हो गई। भारत ने अपनी प्रगति पर विशेष ध्यान देते हुए नई पाइपलाइन बिछाने, बिजली नेटवर्क का निर्माण, बंदरगाह, रेल और हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे का उन्नयन, और लोगों से लोगों के आदान-प्रदान को मजबूत करना अपनी नीतियों में शामिल किया।
भारत के सामरिक और आर्थिक हितों के लिए पड़ोसियों के साथ क्षेत्रीय संपर्क का महत्व भारत ने अच्छी तरह समझा। मगर कनेक्टिविटी की इस नीति के साथ दशकों के भू-रणनीतिक विचलन, राजनीतिक राष्ट्रवाद और आर्थिक संरक्षणवाद को भी हमने अपने सामने पाया।
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