Shadow

धर्म

कैसे काशी विश्वनाथ मंदिर हो गया ज्ञानवापी मस्जिद

कैसे काशी विश्वनाथ मंदिर हो गया ज्ञानवापी मस्जिद

addtop, BREAKING NEWS, Current Affaires, EXCLUSIVE NEWS, धर्म
कैसे काशी विश्वनाथ मंदिर हो गया ज्ञानवापी मस्जिद आर.के. सिन्हा काशी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मस्जिद के वजूखाने में शिवलिंग मिलने के दावे हो रहे है। इसकी सच्चाई का भी पता चल ही जाएगा पर इस तथ्य से कौन इंकार कर सकता है कि काशी में मुस्लिम शासकों ने सैकड़ों मंदिरों को तोड़ा। ज्ञानवापी मस्जिद तो काशी विश्वनाथ मंदिर के स्थान पर निर्मित है, जिसका निर्माण औरंगजेब ने कराया था। औरंगजेब ने 9 अप्रैल, 1669 को इस मं‌दिर सहित बनारस के तमाम मंदिर तोड़ने का आदेश जारी किया था। इस आदेश की कॉपी एशियाटिक लाइब्रेरी, कोलकाता में सुरक्षित है। मस्जिद का मूल नाम है ‘अंजुमन इंतहाजामिया जामा मस्जिद’। मोहम्मद गोरी के ‌सिपहसालार कुतुबुद्दीन ऐबक से लेकर औरंगजेब तक काशी के मंदिरों को ध्वस्त करने से बाज नहीं आए। अविमुक्तेश्वर को काशी में शिव द्वारा स्थापित आदि‌लिंग माना गया है। उनमें एक का स्थान ज्ञानवापी ...
लक्ष्मण रेखा के बारे में ये रामायणें क्या कहती हैं?

लक्ष्मण रेखा के बारे में ये रामायणें क्या कहती हैं?

TOP STORIES, धर्म, संस्कृति और अध्यात्म, सामाजिक, साहित्य संवाद
श्रीरामकथा के अल्पज्ञात दुर्लभ प्रसंग लक्ष्मण रेखा के बारे में ये रामायणें क्या कहती हैं? प्राय: सभी भाषाओं की श्रीरामकथाओं-रामायणों में स्वर्णमृग (राक्षस मारीच) का कथा प्रसंग है। स्वर्ण मृग मायावी सर्वप्रथम सीताजी को आकर्षित करता है तथा सीताजी उसको प्राप्त करने के लिए श्रीराम को कहती हैं। श्रीराम सीताजी की सुरक्षा का भार लक्ष्मणजी को सौंपकर उस मृग के पीछे चले जाते हैं। श्रीराम के स्वर्ण मृग के पीछे जाने के बाद श्रीरामजी के स्वर में हा सीते, हा लक्ष्मण ध्वनि सीताजी सुनती हैं। सीताजी लक्ष्मण को उनके सहायतार्थ जाने को कहती हैं तब लक्ष्मणजी उन्हें कहते हैं कि श्रीराम बहुत सक्षम हैं, उनको कोई भी तीनों लोकों में हानि नहीं पहुँचा सकता है। वे तो देवों के देव हैं, किन्तु लक्ष्मणजी द्वारा बहुत समझाने के उपरान्त भी सीताजी अत्यन्त दु:खी रहती है। वे अन्त में लक्ष्मणजी से कहती हैं कि यदि...
शिवजी की श्रीराम भक्ति एवं सतीजी का मोह भंग

शिवजी की श्रीराम भक्ति एवं सतीजी का मोह भंग

धर्म, विश्लेषण, संस्कृति और अध्यात्म, सामाजिक, साहित्य संवाद
श्रीरामकथा के अल्पज्ञात दुर्लभ प्रसंग शिवजी की श्रीराम भक्ति एवं सतीजी का मोह भंग लिंग थापि बिधिवत करि पूजा। सिव समान प्रिय मोहि न दूजा।। सिव द्रोही मम भगत कहावा। सो नर सपनेहुँ मोहि न पावा।। संकर बिमुख भगति चह मोरी। सो नारकी मूढ़ मति थोरी।। श्रीरामचरितमानस लंकाकाण्ड २-३-४ श्रीराम को शिवजी के समान कोई प्रिय नहीं तथा शिवजी की भक्ति न करने वाला भी श्रीराम को कभी भी स्वप्न में नहीं प्राप्त कर सकता है। इस प्रकार श्रीराम एवं शिव की भक्ति एक-दूसरे के बिना अपूर्ण है। इसको विशेष रूप से दृष्टिगत रखते हुए श्रीरामचरितमानस में शिवजी की पत्नी दक्षकुमारी सतीजी का श्रीराम की परीक्षा लेने का वर्णन बड़ा ही रहस्यपूर्ण है। सतीजी के पिता दक्ष प्रजापति के द्वारा शिवजी का यज्ञ में भाग न देने एवं शिवजी की निन्दा करने पर सतीजी ने उस समय योगाग्नि में शरीर भस्म कर डाला। तत्पश्चात शिवजी ने यज्ञ विध्वंस करने हेतु ...
मैथिली रामायण में कालरूपी तापस का श्रीराम के पास आना तथा लक्ष्मण का स्वर्ग जाना

मैथिली रामायण में कालरूपी तापस का श्रीराम के पास आना तथा लक्ष्मण का स्वर्ग जाना

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, धर्म, सामाजिक
मैथिली रामायण में कालरूपी तापस का श्रीराम के पास आना तथा लक्ष्मण का स्वर्ग जाना श्रीरामकथा के अल्पज्ञात दुर्लभ प्रसंग मैथिली रामायण में कालरूपी तापस का श्रीराम के पास आना तथा लक्ष्मण का स्वर्ग जाना भारत के अतीत में सम्पूर्ण उत्तर भारत में लगभग एक ही भाषा थी। आज भी वैसा ही है। समय के चक्र के साथ धीरे-धीरे वैभाषिक अन्तर में वृद्धि हो गई और आज से लगभग एक हजार वर्ष पहले आधुनिक स्थानीय भाषाओं का उद्भव एवं विकास हुआ। बिहार राज्य के पूर्वोत्तर कोने से गंगा, गण्डक और कोसी नदियों से घिरे विशाल क्षेत्र की भाषा मैथिली है। इस भाषा का साहित्य लगभग बारहवीं सदी से उपलब्ध है। विद्यापति प्रभूति अनेक विद्वानों के साहित्य से समृद्ध यह भाषा हिन्दी से प्राय: मिलती जुलती है। इस भाषा में कवि चन्द्रा झा ने मैथिली रामायण की रचना की है। उनका रचनाकाल १८८० के आसपास और प्रकाशनकाल १८९०-९१ है। इनकी रामायण अध्यात्मर...
मुसलमानों का क्या करें?

मुसलमानों का क्या करें?

Current Affaires, धर्म, विश्लेषण, सामाजिक
मुसलमानों का क्या करें? विनीत नारायण सुजलाम, सुफलाम, मलयज शीतलाम, शस्य श्यामलाम, भारत माता इतनी उदार हैं कि हर भारतवासी सुखी, स्वस्थ व सम्पन्न हो सकता है। पर स्वतंत्रता के 75 वर्ष बाद भी अधिकतर आबादी पेट पालने के लिए भी दान के अनाज पर निर्भर है। कई दशकों तक ‘ग़रीबी हटाओ’ के नाम पर उसे झुनझुना थमाया गया। पर उसकी ग़रीबी दूर नहीं हुई। आज ग़रीबी के साथ युवा बेरोज़गारी एक बहुत बड़ी समस्या बन गयी है । जिसका निदान अगर जल्दी नहीं हुआ तो करोड़ों युवाओं की ये फ़ौज देश भर में हिंसा, अपराध और लूट में शामिल हो जाएगी। हर राजनैतिक दल अपने वोटों का ध्रुवीकरण के लिए जनता को किसी न किसी नारे में उलझाए रखता है और चुनाव जीतने के लिए उसे बड़े-बड़े लुभावने सपने भी दिखाता है। पिछले कुछ वर्षों से अल्पसंख्यक मुसलमानों का डर बहुसंख्यक हिंदुओं को दिखाया जा रहा है। आधुनिक सूचना तकनीकी की मदद से ‘इस्लमोफोबिया’ को घर-घ...
श्रीराम का सूक्ष्म सीतान्वेषण, उनकी पीड़ा, लक्ष्मण द्वारा समझाईश तथा जटायु का उत्सर्ग

श्रीराम का सूक्ष्म सीतान्वेषण, उनकी पीड़ा, लक्ष्मण द्वारा समझाईश तथा जटायु का उत्सर्ग

Current Affaires, धर्म, संस्कृति और अध्यात्म
श्रीराम का सूक्ष्म सीतान्वेषण, उनकी पीड़ा, लक्ष्मण द्वारा समझाईश तथा जटायु का उत्सर्ग श्रीरामकथा के अल्पज्ञात दुर्लभ प्रसंग श्रीराम का सूक्ष्म सीतान्वेषण, उनकी पीड़ा, लक्ष्मण द्वारा समझाईश तथा जटायु का उत्सर्ग नास्ति गंगासमं तीर्थं नास्ति मातृसमो गुरु:। नास्ति विष्णुसमोदेवो नास्ति रामायणात् परम्।। नास्ति वेदसमं शास्त्रं नास्ति शांतिसमं सुखम्। नास्ति शांतिपरं ज्योतिर्नास्ति रामायणात् परम्।। वाल्मीकि रामायण माहात्म्य अध्याय ५-२१-२२ गंगा के समान तीर्थ माता के समान गुरु भगवान् विष्णु के सदृश देवता तथा रामायण से बढ़कर कोई उत्तम वस्तु (ग्रंथ) नहीं है। वेद के समान शास्त्र, शान्ति के समान सुख शान्ति से बढ़कर ज्योति तथा रामायण से उत्कृष्ट कोई काव्य नहीं है। नास्ति क्षमासमं सारं नास्ति कीर्तिसमं धनम्। नास्ति ज्ञानसमो लाभे नास्ति रामायणयात् परम्।। वाल्मीकि रामायण माहात्म्य अध्याय ५-२३ क्षमा क...
प्रधानमंत्री ने अखिल भारतीय महापौर सम्मेलन का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री ने अखिल भारतीय महापौर सम्मेलन का उद्घाटन किया

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, धर्म, राज्य, संस्कृति और अध्यात्म, सामाजिक
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अखिल भारतीय महापौर सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी भी उपस्थित थे। सभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने प्राचीन शहर वाराणसी में हाल के घटनाक्रमों के बारे में चर्चा की। उन्होंने अपने वक्तव्य को दोहराया कि काशी का विकास पूरे देश का रोडमैप हो सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे देश में ज़्यादातर शहर पारंपरिक शहर ही हैं, पारंपरिक तरीके से ही विकसित हुए हैं। आधुनिकीकरण के इस दौर में हमारे इन शहरों की प्राचीनता की भी उतनी ही अहमियत है। उन्होंने कहा कि ये शहर हमें विरासत और स्थानीय कौशल को संरक्षित करना सिखा सकते हैं। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि मौजूदा संरचनाओं को नष्ट करना कोई समाधान नहीं है, बल्कि कायाकल्प और संरक्षण पर जोर ...
प्रधानमंत्री आज वाराणसी जाएंगे और श्री काशी विश्वनाथ धाम का उद्घाटन करेंगे

प्रधानमंत्री आज वाराणसी जाएंगे और श्री काशी विश्वनाथ धाम का उद्घाटन करेंगे

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, धर्म, राष्ट्रीय, संस्कृति और अध्यात्म, सामाजिक
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 13-14 दिसंबर को वाराणसी के दौरे पर रहेंगे। 13 दिसंबर को दोपहर करीब 1 बजे प्रधानमंत्री श्री काशी विश्वनाथ मंदिर जाएंगे और पूजा-अर्चना करेंगे, इसके बाद करीब 339 करोड़ रुपये की लागत से बने श्री काशी विश्वनाथ धाम के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे। बाबा विश्वनाथ के तीर्थयात्रियों और भक्तों को पवित्र नदी में डुबकी लगाने की सदियों पुरानी परंपरा का पालन करने, खराब रख-रखाव एवं भीड़भाड़ वाली सड़कों से आने-जाने और गंगाजल लेकर मंदिर में अर्पित करने में होने वाली कठिनाइयों को दूर करके उन्हें सुविधा प्रदान करना, प्रधानमंत्री का काफी पुराना सपना था। इस सपने को साकार करने के लिए, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर को गंगा नदी के तट से जोड़ने के लिए एक सुगम मार्ग के सृजन की एक परियोजना के रूप में श्री काशी विश्वनाथ धाम की परिकल्पना की गई। इस पुनीत कार्य को शुरू करने के लिए, 8 मार्च, 20...
रामायण हमें शिक्षा देती है कि कर्तव्यों का निर्वहन भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना अपने अधिकारों के लिए दावा करना: उपराष्ट्रपति

रामायण हमें शिक्षा देती है कि कर्तव्यों का निर्वहन भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना अपने अधिकारों के लिए दावा करना: उपराष्ट्रपति

धर्म, संस्कृति और अध्यात्म, सामाजिक
उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने रामायण को सर्वकालिक महाग्रंथ बताते हुए कहा कि यह हमें शिक्षा देता है कि कर्तव्य निर्वहन भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना अपने अधिकारों के लिए दावा करना। श्री नायडु ने कहा कि परिवार, जनता और साम्राज्य के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में भगवान राम पूरी मानव जाति के लिए आदर्श हैं। श्री शशि किरण की पुस्तक 'श्रीमद् रामायणम' का हैदराबाद में विमोचन करते हुए, श्री नायडु ने भगवान राम के जीवन चरित की चर्चा की और कहा कि एक शासक के रूप में उन्होंने नेतृत्व, सुशासन और कानून के शासन में उच्चतम गुणवत्ता की मिसाल पेश की। यह कहते हुए कि भगवान राम ने समाज के हित में निस्वार्थ जीवन दिया, श्री नायडु ने देश के युवाओं से श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेने को कहा। रामायण के एक प्रसंग का हवाला देते हुए, श्री नायडु ने अपनी मातृभूमि के प्रति भगवान राम के लगाव पर प्रकाश डाल...
भारत में चंद्र ग्रहण दिखने का सही समय, इन मंत्रों का करें जाप

भारत में चंद्र ग्रहण दिखने का सही समय, इन मंत्रों का करें जाप

धर्म, संस्कृति और अध्यात्म, सामाजिक
हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष का अंतिम और सबसे लंबी अवधि का चंद्र ग्रहण कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा शुक्रवार दिनांक 19 नवंबर 2021 को दोपहर 12:48 से प्रारंभ होगा और सायंकाल 4:17 पर समाप्त होगा. चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 28 मिनट और 24 सेकंड होगी, जोकि पिछले 500 सालों में सबसे लंबा आंशिक चंद्रग्रहण होगा. इन मंत्रों का करें जाप पंडितों का कहना है कि ये चंद्र ग्रहण सीधे प्रभावित नहीं करेगा, लेकिन इसका कुछ ना कुछ प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा. इसलिए ग्रहण काल की अवधि में कुछ खास मंत्रों का उच्चारण किया जा सकता है. ऐसा करने से ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव में कमी आती है. ज्योतिषविद का मानना है कि चंद्र ग्रहण के दौरान थोड़ी बहुत सावधानी जरूर बरतनी चाहिए. इस अवधि के दौरान इष्टदेव के मंत्रों का जाप करना चाहिए. इसमें आप भगवान विष्णु के मंत्र ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय, भगवान शिव के मंत्र ऊँ नम: शिवाय, भग...