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गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में विश्व को राह दिखाता भारत

गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में विश्व को राह दिखाता भारत

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, साहित्य संवाद
भारत में विशेष रूप से कोरोना महामारी के बीच एवं इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा गरीब वर्ग के लाभार्थ चलाए गए विभिन्न कार्यक्रमों के परिणाम अब सामने आने लगे हैं। विशेष रूप से प्रधानमंत्री गरीब अन्न कल्याण योजना के अंतर्गत देश के 80 करोड़ नागरिकों को मुफ्त अनाज की जो सुविधा प्रदान की गई है एवं इसे कोरोना महामारी के बाद भी जारी रखा गया है, इसके परिणामस्वरूप देश में गरीब वर्ग को बहुत लाभ हुआ है। हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत में गरीबी के अनुमान पर एक वर्किंग पेपर जारी किया है। इस वर्किंग पेपर में अलग अलग मान्यताओं के आधार पर भारत में गरीबी को लेकर अनुमान व्यक्त किए गए हैं। इस वर्किंग पेपर के अनुसार, हाल ही के समय में भारत में 1.2 करोड़ नागरिक अतिगरीबी रेखा के ऊपर आ गए हैं। वर्ष 2022 में विश्व बैंक द्वारा जारी किए गए एक अन्य प्रतिवेदन के अनुसार, वर्ष 2011 में भारत में ...
विपक्षी एकता एक स्वप्न

विपक्षी एकता एक स्वप्न

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राजनीति के अन्तर्गत लोकतंत्र में दो प्रमुख स्तम्भ पक्ष एवं विपक्ष की भागीदारी होती है, जिसमें दोनों पक्ष ही महत्वपूर्ण होते हैं। यदि सत्तापक्ष के समक्ष सकारात्मक विपक्ष नहीं है तो देश में सत्तापक्ष हिटलर के सदृश तानाशाह हो जाता है और देश के दुर्दिन प्रारम्भ हो जाते हैं।भारत देश में स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात सत्तापक्ष के समक्ष, विपक्ष का उत्पन्न होना, एक अच्छी शुरुआत थी। सर्वप्रथम भाकपा (भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी) विपक्षी और कांग्रेस सत्तासीन थी और भाकपा ने भारत के कुछ प्रदेशों यथा - पश्चिम बंगाल, आन्ध्र प्रदेश, केरल आदि में अपनी स्थिति सशक्त कर ली थी, परन्तु कुछ समय पश्चात ही उनके मध्य मतभेद प्रारम्भ हो गया और और वे दो भागों में विभाजित हो गए। पुनः कुछ समय पश्चात कांग्रेस पार्टी के सदस्यों में भी मतभेद प्रारम्भ हो गया तत्पश्चात भाजपा और जनता दल का उदय हुआ। दोनो पार्टियो ने अपनी अलग पहच...
कैश बर्निंग मॉडल – ‘कैश बर्न’ हो गया

कैश बर्निंग मॉडल – ‘कैश बर्न’ हो गया

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय
जुलाई 2021 में जोमैटो, नवंबर 2021 में नाइका, पेटीएम और पॉलिसीबाजार, मई 2022 में देहलीवरी ने जनता को शेयर जारी किए। निवेशकों ने बड़े चाव से इन शेयरों को खरीदा था, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण यह रहा कि जल्दी ही इन शेयरों में निवेशकों को भारी नुकसान सहना पड़ा। इसी तरह नवंबर 2022 तक पॉलिसीबाजार के निवेशकों की 69 प्रतिशत राशि डूब चुकी है, पेटीएम में 65.4 प्रतिशत की राशि डूबी, नाइका में 49.34 प्रतिशत, जोमैटो में 41.39 प्रतिशत और देहलीवरी में 31.33 प्रतिशत का नुकसान निवेशकों को सहना पड़ा है। रुपए में जोमैटो के निवेशकों के लगभग 40911 करोड़ रुपए, पॉलिसीबाजार के निवेशकों के लगभग 37277 करोड़ रुपए, नाइका के निवेशकों के लगभग 51469 करोड़ रुपए, देहलीवरी के निवेशकों के लगभग 12175 करोड़ रुपए, पेटीएम के निवेशकों के सबसे अधिक लगभग 66169 करोड़ रुपए नवंबर 2022 तक डूब चुके हैं। सरसरी तौर पर देखें तो पता चलता है कि ये...
<strong>क्यों बिलावल भुट्टो को घास नहीं डाली भारत ने</strong>

क्यों बिलावल भुट्टो को घास नहीं डाली भारत ने

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आर.के. सिन्हा पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी लंबे समय तक भूलेंगे नहीं अपनी हालिया भारत यात्रा को। वे शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में भाग लेने के लिए भारत आए थे। उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें  भारत की तरफ से किसी राष्ट्राध्यक्ष की तरह का सम्मान मिलेगा। पर बिलावल भुट्टो को भारत साफतौर पर जताना चाहता था कि भारत उनसे नाराज है क्योंकि उन्होंने कुछ समय पहले न्यूयार्क में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ऊँ पर अत्यंत अशोभनीय टिप्पणी की थी। उनकी तब भारत में चौतरफा निंदा भी हुई थी। दरअसल भारत तब ही से उनसे खफा था। बिलावल गोवा में आए। वे चाहते थे कि उनकी भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से अलग से बात हो जाए। पर भारतीय विदेश मंत्री ने उन्हें घास नहीं दी। भारत जानता है कि पाकिस्तान के पैरे के नीचे जमीन नहीं है। वह मुंबई हमलों के गुनाहगारों को दंड देने के मामले पर बात नहीं करेगा...
जद याद करूँ हल्दीघाटी…! (9 मई विशेष)

जद याद करूँ हल्दीघाटी…! (9 मई विशेष)

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हिंदुआ सूरज, वीरशिरोमणि, दृढ़-प्रतिज्ञ, सच्चे राष्ट्रभक्त, अदम्य साहसी,भीष्म प्रतिज्ञा, कर्तव्यनिष्ठ, छापामार युद्ध प्रणाली के जनक, शास्त्र और शस्त्र में सुशिक्षित, अनुशासनप्रिय, कुशल नेतृत्वकर्ता,कष्ट-सहिष्णु, त्याग और तप की प्रतिमूर्ति, सफल राष्ट्र निर्माता, चतुर राजनीतिज्ञ,सफल रण-नीतिज्ञ,प्रबंधन-कौशल,सब पंथों का समान आदर करने वाले, दार्शनिकों, कवियों, रचनाकारों, शिल्पियों व संतों के विशेष संरक्षक, अद्वितीय व्यक्तित्व के धनी, मेवाड़ के महान हिंदू शासक महाराणा प्रताप (सोलहवीं शताब्दी)  ऐसे शासक थे, जो मुगल शासक अकबर को लगातार टक्कर देते रहे थे। महाराणा प्रताप का जन्म राजस्थान के कुंभलगढ़ में महाराणा उदयसिंह के घर 9 मई, 1540 ई. को हुआ था।इनके पिता महाराजा उदयसिंह और माता राणी जीवत कंवर थीं। इसके साथ ही वह महान राणा सांगा के पौत्र थे। कहते हैं कि प्रताप का वजन 110 किलो और हाइट 7 फीट 5...
मणिपुर त्रासदी

मणिपुर त्रासदी

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                     वैसे तो इस घटना पर सभी चैनलों द्वारा व्यापक विमर्श रखा जा रहा है, वही दूसरी ओर राष्ट्रवादी विद्वानों में समूचे नार्थ-ईस्ट में एकमात्र असम के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी अगर छोड़ दी जाए तो सभी अन्य छः स्टेट के भौगोलिक, राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक सहित धार्मिक ज्ञान से शून्य ही देखा जाता है।  भारतीय संघीय ढाँचे में मणिपुर आजादी के दो वर्ष पश्चात ही एक रियासत के रूप में शामिल हुआ था। परन्तु इसे पूर्ण राज्य का दर्जा एक विशेष राज्य अधिनियम के तहत 1972 में किया गया था। कुछ लोग इसी कारण को मणिपुर या कहें, नॉर्थ-ईस्ट त्रासदी का कारण बताते हैं। जबकि जहाँ तक मेरा अध्ययन रहा है इस नॉर्थ ईस्ट के बारे में, "आजादी के साथ से यहाँ तेहरा शाशन प्रणाली" लागू रहा है। अभी तक इतिहास में एकमात्र बंगाल क्षेत्र में ही दोहरा शाशन प्रणाली का उल्लेख मिलता है, परन्तु हमारे भारत का यह ...
1 मई, मजदूर दिवस विशेष

1 मई, मजदूर दिवस विशेष

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दिहाड़ीदार मजदूरों की दुर्दशा के लिए जिम्मेवार कौन ?* (सामाजिक सुरक्षा कोष में तेजी लाने की आवश्यकता है ताकि देश के सबसे गरीब और कमजोर तबके को यह वित्तीय सुरक्षा की भावना प्रदान कर सके। एक मजदूर देश के निर्माण में बहुमूल्य भूमिका निभाता है। किसी भी समाज, देश संस्था और उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों की अहमियत किसी से भी कम नहीं आंकी जा सकती। इनके श्रम के बिना औद्योगिक ढांचे के खड़े होने की कल्पना भी नहीं की जा सकती।) --- डॉo प्रियंका सौरभ, बदलते दौर में विभिन्न आपदाओ के कारण सबसे बड़ा संकट दिहाड़ीदार मजदूरों के लिए हुआ है। जिनके बारे देश के अंदर बहुत ही कम चर्चा हुई और इनकी आर्थिक सहायता के लिए देश की सरकार ने कुछ नहीं सोचा। कोई संदेह नहीं कि देश का मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा शोषण का शिकार है। दिहाड़ीदार मजदूर के लिए भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। शहरों में रोजी-रोटी की तलाश...
बदलाव का संवाहक बना -मन की बात

बदलाव का संवाहक बना -मन की बात

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बदलाव का संवाहक बना -मन की बातसनातन हिंदू संस्कृति का भी हो रहा विकासमृत्युंजय दीक्षितप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम, “मन की बात” ने अपने सौ एपिसोड सफलतापूर्वक पूर्ण किए, यह आकाशवाणी के इतिहास का एक ऐसा कर्यक्रम बना जिसमें देश के प्रधानमंत्री ने मासिक रूप से आम जनता से सीधा संवाद किया और इसे राजनीति से पृथक अलग रखा। यह एक सुखद अनुभव है कि प्रधानमंत्री का मन की बात अर्यक्रम बदलाव का संवाहक बन बनकर क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहा है। इस कार्यक्रम ने वृहद् भारतीय समाज को निराशा व अंधकार से निकलने में सहायता दी है और विकास व प्रगति के नये पंख लगाए हैं । ”मन की बात“ कार्यक्रम से नया जोश, उत्साह व उमंग पैदा होती रही है तथा भविष्य में भी होती रहेगी। मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से ही भारत की संस्कृतिक व विरासत एक बार फिर पुनजीर्वित हो रही है।हमारा भारतीय समाज जिन परम्पराओं को भूल चुक...
सम्राट चार्ल्स का राज्याभिषेक

सम्राट चार्ल्स का राज्याभिषेक

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आर.के. सिन्हा भारत के मित्र और ब्रिटेन के नए बनने जा रहे  सम्राट चार्ल्स-तृतीय के आगामी 6 मई को होने वाले राज्याभिषेक में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी उपस्थित रहेंगे। सम्राट चार्ल्स का राज्याभिषेक उस वक्त हो रहा है जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री भारत मूल के श्रषि सुनक हैं। सुनक की पत्नी भारत के प्रख्यात उद्योगपति एन. नारायणमूर्ति की सुपुत्री अक्षता हैं। यह भी मानना होगा कि दोनों देशों के आपसी संबंधों को मज़बूत रखने में ब्रिटेन में बसे हुए 15-16 लाख प्रवासी भारतीयों की अहम भूमिका तो रही ही है। इनमें अफ्रीकी और कैरिबियाई  देशों से आकर बसे भारतीय मूल के लोग भी हैं। ये सब ब्रिटेन और भारत के बीच एक पुल का काम कर रहे हैं। प्रवासी भारतीय ब्रिटेन में हर क्षेत्र में मौजूद हैं। अब चाहे वो व्यापार, राजनीति, खेल का क्षेत्र हो या कोई और, इन्होंने सबम...
विश्व पशु चिकित्सा दिवस (29 अप्रैल, 2023)

विश्व पशु चिकित्सा दिवस (29 अप्रैल, 2023)

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पोषण का रामबाण है भारत का पशुधन पशुपालन का अभ्यास अब एक विकल्प नहीं है, बल्कि समकालीन परिदृश्य में एक आवश्यकता है। इसके सफल, टिकाऊ और कुशल कार्यान्वयन से हमारे समाज के निचले तबके की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। पशुपालन को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, कृषि, शोध और पेटेंट से जोड़ने से भारत को दुनिया का पोषण शक्ति केंद्र बनाने की हर संभव क्षमता है। पशुपालन भारत के साथ-साथ विश्व के लिए अनिवार्य आशा, निश्चित इच्छा और अत्यावश्यक रामबाण है। -डॉ प्रियंका सौरभ पशुपालन का तात्पर्य पशुधन पालने और चयनात्मक प्रजनन से है। यह जानवरों का प्रबंधन और देखभाल है जिसमें लाभ के लिए जानवरों के अनुवांशिक गुणों और व्यवहार को और विकसित किया जाता है। भारत का पशुधन क्षेत्र दुनिया में सबसे बड़ा है। लगभग 20.5 मिलियन लोग अपनी आजीविका के लिए पशुधन पर निर्भर हैं। सभी ग्रामीण परिवारों के औसत 14% की तुलना में...