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क्या कांग्रेस का ‘सत्याग्रह’ का आग्रह दुराग्रह है?-ललित गर्ग

क्या कांग्रेस का ‘सत्याग्रह’ का आग्रह दुराग्रह है?-ललित गर्ग

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दशकों तक भारत पर राज करने वाले गांधी परिवार के राजनीतिक वारिस राहुल गांधी को आपराधिक मानहानि के मामले में अदालत ने सजा सुनाई तो कांग्रेस देशभर में सड़कों पर हंगामा कर रही है, गांधी की समाधि पर सत्याग्रह कर रही है, कांग्रेस एवं उसके तथाकथित सत्याग्रही नेता क्यों नहीं सत्य को समझ रहे कि सजा मोदी सरकार ने नहीं, सूरत की एक कोर्ट ने सुनाई है। क्या कांग्रेस का ‘सत्याग्रह’ का आग्रह कहीं अधिक स्पष्टता से ‘दुराग्रह’ को उजागर नहीं कर रहा है? महात्मा गांधी ने भारत को एकजुट करने के लिए लड़ाई लड़ी, सत्याग्रह को हथियार बनाया। जबकि राहुल गांधी भारत का, गरीब और कमजोर समुदायों, सिख समुदाय और संविधान का अपमान करने के लिये सत्याग्रह का सहारा ले रहे हैं। भले वे यह सब करते हुए स्वयं को सत्याग्रही कैसे मान सकते हैं?कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त होने के विरुद्ध कांग्रेस द्वारा क...
नई तकनीक से 30 सेकंड में ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ 

नई तकनीक से 30 सेकंड में ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ 

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(इंडिया साइंस वायर): दूध में मिलावट एक चुनौती है और इसके कारण स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। भारतीय शोधकर्ताओं ने एक ऐसा उपकरण विकसित किया है, जो दूध का दूध और पानी का पानी’ कहावत को सही अर्थों में चरितार्थ कर सकता है। 3डी पेपर के उपयोग से बनाया गया यह एक पोर्टेबल उपकरण है, जो महज 30 सेकंड के भीतर दूध में मिलावट का पता लगा सकता है।भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित इस उपकरण की मदद से दूध का परीक्षण घर पर भी आसानी से किया जा सकता है। यह उपकरण यूरिया, डिटर्जेंट, साबुन, स्टार्च, हाइड्रोजन पेरोक्साइड, सोडियम-हाइड्रोजन-कार्बोनेट और नमक सहित मिलावट के लिए आमतौर पर उपयोग होने वाले पदार्थों का पता लगा सकता है।दूध की शुद्धता का परीक्षण करने के लिए पारंपरिक प्रयोगशाला-आधारित विधियों, जो महँगी और समय लेने वाली हैं, की तुलना में यह अपेक्षाकृत किफायती त...
भूकंप की तैयारी सिर्फ इमारतों के बारे में नहीं है।

भूकंप की तैयारी सिर्फ इमारतों के बारे में नहीं है।

राष्ट्रीय, विश्लेषण
सोशल मीडिया, टीवी चैनलों और अखबारों के जरिए आम लोगों के जान-माल को भूकंप से बचने के लिए सतर्क और सजग किया जा सकता है। भूकंप से जान-माल से बचाव न हो पाने की वजह यह भी है कि भूकंप आने का वक्त और अंतराल के बारे में वैज्ञानिक कुछ बता पाने की हालात में नहीं हैं। भूकंप आता है, तो लोग मनाते हैं कि वे बचे रहें, लेकिन कुछ साल गुजरता है और फिर भूल जाते हैं कि भूकंप फिर आ सकता है और उससे उनकी जान जा सकती है या गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं। इसलिए मानसिक और आर्थिक दोनों तरह से भूकंप से बचने के लिए तैयार रहना जरूरी है। यह सोच कर हम नहीं बच सकते हैं कि ईश्वर जैसा चाहोगे वैसा ही होगा। और यह सोच बनाना भी ठीक नहीं कि इंसान के हाथ में कुछ भी नहीं है। यह सब खुद को तसल्ली देने के लिए तो हम कर सकते हैं, लेकिन प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए सजगता और छद्म अभ्यास के जरिए बेहतर बचाव का उपाय हो सकता है। - ...
आप भी देश के नागरिक हैं, उससे ऊपर नहीं

आप भी देश के नागरिक हैं, उससे ऊपर नहीं

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देश पर आधी शताब्दी तक राज करने वाली कांग्रेस पता नहीं क्यों, यह समझने को तैयार नहीं है कि उसके सिरमौर गांधी परिवार के राजनीतिक वारिस राहुल गांधी को आपराधिक मानहानि के मामले में अदालत ने सजा सुनाई है? यह सजा सरकार ने नहीं सूरत के एक न्यायालय ने सुनाई है।यह सामान्य समझ की बात है कि अदालत अगर किसी व्यक्ति को किसी मामले में दोषी पाते हुए उसे सजा सुना दे तो दोषी व्यक्ति या उसके समुदाय को सड़कों पर हंगामा करते , क्या आपने कभी देखा है कि यदि कोई जाँच एजेंसी या पुलिस किसी व्यक्ति को पूछताछ के लिए बुलाये या जाँच एजेंसी किसी के पास पूछताछ के लिए जाये तो वह व्यक्ति या उसका परिवार सड़क पर हंगामा करने लगता है? नहीं ना। जब देश का आम व्यक्ति कानून का पालन करता है। नोटिस मिलने पर जांच एजेंसी के समक्ष हाजिर होता है। सजा सुनाये जाने पर जेल जाता है या उस फैसले को चुनौती देता है तो वीआईपी व्यक्ति ऐसा क्यों न...
लड़किया लीडर बनेगी तभी उनकी दुनिया बदलेगी

लड़किया लीडर बनेगी तभी उनकी दुनिया बदलेगी

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लड़कियों में नेतृत्व के गुणों का निर्माण करने के सबसे शक्तिशाली तरीकों में से एक है लड़कियों को नेतृत्व की भूमिकाओं में रखना। जब लड़कियों से दूसरों का नेतृत्व करने की उम्मीद की जाती है, तो उन्हें अपने भीतर वह शक्ति मिल जाती है, जिसके बारे में उन्हें पता भी नहीं होता। यह लड़कियों के बीच औपचारिक पदों या अनौपचारिक संबंधों के रूप में आ सकता है। रचनात्मक कार्यक्रम के नेता और प्रशिक्षक इस प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने और नेतृत्व के सभी रूपों का समर्थन करने के लिए सूक्ष्म तरीके ढूंढते हैं। -प्रियंका सौरभ आज दुनिया 900 मिलियन किशोर लड़कियों और युवा महिलाओं की परिवर्तनकारी पीढ़ी का घर है जो काम और विकास के भविष्य को आकार देने के लिए तैयार है। यदि युवा महिलाओं के इस समूह को 21वीं सदी के कौशलों को पोषित करने के लिए सही संसाधनों और अवसरों से सुसज्जित किया जा सकता है, तो वे इतिहास में महिला नेताओ...
ऑनलाइन गेमिंग की दलदल में फंसती हमारी युवा पीढ़ी ! 

ऑनलाइन गेमिंग की दलदल में फंसती हमारी युवा पीढ़ी ! 

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कम्प्यूटर, एंड्रॉयड, लैपटॉप आदि पर गेमिंग (खेल खिलाना) आज अरबों-खरबों का कारोबार हो चुका है। एंड्रॉयड मोबाइल फोन तो आज कमोबेश हर व्यक्ति के हाथ में नजर आता है। एंड्रॉयड की व सस्ते इंटरनेट की उपलब्धता से आज हमारे बच्चों में विडियो गेमिंग की लत पड़ चुकी है। बच्चे ही नहीं आज हमारे देश के बुजुर्ग तक भी इस लत से अछूते नहीं हैं। कम्प्यूटर तो कम्प्यूटर आज एंड्रॉयड फोन(स्मार्टफोन) पर लगातार गेमिंग का क्रेज़ बढ़ता चला जा रहा है और आज कम्प्यूटर के साथ ही एंड्रॉयड फोन पर गेम खेलना एक फैशन बन गया है। आदमी थोड़ा सा भी कहीं फ्री हुआ नहीं कि गेम खेलना शुरू। घर तो घर, आफिस हो या बस, ट्रेन हो या मेट्रो फुरसत के पलों में आज बच्चों से लेकर युवा पीढ़ी, बुजुर्ग सभी गेमिंग लत में फंस चुके हैं और इससे गेमिंग के धंधे में लगी कंपनियों की पौ बारह हो रही है और वे अरबों रुपये इस धंधे से कमा रहे हैं। आज अखबारों में इ...
प्रकृति का नियम है कि को दूसरों के लिए खाई खोदता है वो एक न एक दिन उस खाई में खुद भी गिरता है

प्रकृति का नियम है कि को दूसरों के लिए खाई खोदता है वो एक न एक दिन उस खाई में खुद भी गिरता है

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प्रकृति का नियम है कि को दूसरों के लिए खाई खोदता है वो एक न एक दिन उस खाई में खुद भी गिरता है । 2014 के आम चुनावों से पहले मौनी बाबा मनमोहन की सरकार ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह को शहाबुद्दीन केस में फसाकर झूठी साजिश रची थी और उस वक्त सरकार में बैठे हुए दोयम दर्जे के नेताओं ने शहाबुद्दीन को अपना दामाद तक घोषित कर दिया था । लेकिन उसके बाद उस केस का क्या हुआ यह सभी जानते है । इस समय केंद्र की सारी जांच एजेंसियां किसके इशारे पर और कैसे काम करती थी यह भी जगजाहिर है । लोग तो ऐसा भी कहते थे कि उस समय एक डमी प्रधानमंत्री था और देश का शासन कोई और कहीं और से चला रहा था । खैर वक्त बदला सरकार बदली और जो कांग्रेस और जो कांग्रेसी इस देश की जनता को और इस देश को अपनी पैतृक संपत्ति समझते थे वो अभी खुद अपना वजूद बचाने में लगे हुए है । इतिहास को अगर खंगाला जाए तो काफी ऐसी कहानियां सुनने मिलती है जिससे कांग्...
लांच हुआ प्रोजेक्ट ‘ग्रीन कारपेट’

लांच हुआ प्रोजेक्ट ‘ग्रीन कारपेट’

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थॉमस कुक इंडिया, एसओटीसी ट्रैवल और एलटीआईमाइंडट्री की पार्टनरशिप से बिजनेस ट्रैवल इमीशन को मॉनिटर और मैनेज करने के लिए उद्यमों के लिए एक ग्लोबल प्लेटफार्म यह प्लेटफॉर्म फेयरफैक्स डिजिटल सर्विसेज की वैश्विक विशेषज्ञता का भी लाभ उठाता हैसेबी बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग (बीआरएसआर) मैनडेट के अनुरूप ग्लोबल वार्मिंग के दुष्परिणामों से पर्यावरण और मानव जाति को बचाने के लिए वैश्विक स्तर पर सभी देश इसके दुष्परिणामों को कम करने और भविष्य में खुद को इससे बचाने के प्रयास कर रहे है जिसमे भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है।भारत की इस भूमिका को और सुदृढ़ करते हुए सेबी ने वर्ष 2023 से भारत में लिस्टेड टॉप 1,000 कंपनियों को बिजनेसरिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग (BRSR) के अनुसार मार्केट कैपिटलाइजेशन लिस्टिंग करना अनिवार्य करदिया है। इस आधार पर भारत की ओम्नीचैनल ट्रैवल सर्व...
सवालों के घेरे में हैं खुशहाल देशों की रैंकिंग

सवालों के घेरे में हैं खुशहाल देशों की रैंकिंग

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 ललित गर्ग  साल 2023 के लिए ‘ग्लोबल हैप्पीनेस इंडेक्स’ जारी कर दिया गया है, जिसमें फिनलैंड ने लगातार छठीं बार सर्वोच्च स्थान पाया है। यह बात भी गौर करने की है कि तीन अंकों का सुधार करके भारत इसमें 136वें स्थान पर पहुंचा है, जो आश्चर्यकारी है। इस सूची को जारी करने में अवश्य ही कोई पूर्वाग्रह या आग्रह दिखाई देता है। क्योंकि ऋण की गुहार लगाता एवं त्राहिमाम करता पाकिस्तान 103वें स्थान पर है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि शीर्ष 20 देशों की सूची में एशिया का एक भी देश शामिल नहीं है। कुछ ऐसी ही विडंबनाएं एवं विसंगतियां भी हैं, जो इस सूचकांक के महत्व को घटा देती हैं। जो दुनिया के खुश देशों के आकलन में त्रुटि की पूरी संभावनाएं होने को दर्शाता है। अनेक सवाल खड़े करती है यह खुशहाल देशों की रैंकिंग। चीन में लोगों को धार्मिक-आर्थिक आजादी भी सही ढंग से नहीं मिली है, पर वह 82वें स्थान पर है। नेप...
बताइये क्या यह ७५ साल का “भारत” है?*

बताइये क्या यह ७५ साल का “भारत” है?*

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हमारे देश में बड़ी मुश्किल है, सत्ता से दूर या नज़दीक का नाता रखने वालों के लिए भारत जो कुछ है, वह नरेंद्र मोदी में सिमट गया है। प्रतिपक्ष राहुलगांधी, शरद पंवार,ममता बनर्जी और जाने किस किस की प्रतिच्छाया में भारत को पहचान रहे हैं। और यही वह भारत है, जिसे सत्ता लूटती है, जनता से छीनती है–और उसी को असली भारत बताकर का प्रचार करती है। भारत की राजनीति में इन दिनों का प्रिय विषय है, राहुल गांधी द्वारा विदेश में जाकर देश के लोकतंत्र पर वक्तव्य, सभी आजकल इसी में व्यस्त हैं। इस सबके बीच स्वीडन की संस्था, वी-डेम (वेरायटीज ऑफ़ डेमोक्रेसी) ने डेमोक्रेसी रिपोर्ट 2023 प्रकाशित की है, जिसमें कुल 179 देशों के लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में भारत 97वें स्थान पर चुनावी प्रजातंत्र इंडेक्स में 108वें स्थान पर है, यह 75 वर्ष की उपलब्धि है?। पिछले वर्ष के इंडेक्स में भारत का स्थान 100वां था। तंज़ानिया, बोलीविय...