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राष्ट्र का विकास बाधित होगा संसदीय गतिरोध से

राष्ट्र का विकास बाधित होगा संसदीय गतिरोध से

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- ललित गर्ग -संसद की कार्रवाई को बाधित करना एवं संसदीय गतिरोध आमबात हो गयी है। यही स्थिति  संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में देखने को मिल रही है, इस सत्र को शुरू हुए पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन दोनों सदनों में हंगामे और नारेबाजी के अतिरिक्त और कुछ नहीं हुआ है। जहां सत्तापक्ष संसद में अपनी इस मांग पर जोर दे रहा है कि राहुल गांधी ने अपनी लंदन यात्रा के दौरान भारतीय लोकतंत्र के बारे में जो कुछ कहा, उसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए, वहीं कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दल अदाणी मामले की जांच संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी से कराने पर अड़े हुए हैं और संसद नहीं चलने दे रहे हैं। विरोध प्रकट करने का असंसदीय एवं आक्रामक तरीका, सत्तापक्ष एवं विपक्ष के बीच तकरार और इन स्थितियों से उत्पन्न संसदीय गतिरोध लोकतंत्र की गरिमा को धुंधलाने वाले हैं। अपने विरोध को विराट बनाने के लिये सार्थक बहस की बजाय शोर-शरा...
तो योगी यूपी के रास्ते ही भाजपा को 2024 में सत्ता सौंपेंगे

तो योगी यूपी के रास्ते ही भाजपा को 2024 में सत्ता सौंपेंगे

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आर.के. सिन्हा अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो अगले साल के शुरुआत के तीन महीनों के दौरान देश में लोकसभा चुनावों की हलचल को महसूस किया जाने लगेगा। सभी दल अपने घोषणा पत्र को अंतिम रूप दे रहे होंगे और प्रत्याशियों के नामों पर भी अंतिम विचार चल रहा होगा। फिजाओं में लोकसभा चुनाव का पूरा माहौल बन गया होगा। दरअसल, यह चुनाव आजाद भारत का एक ऐसा चुनाव होगा जब कांग्रेस छोड़ किसी दूसरी विचारधारा की सत्ता की पारी दशकीय सीमा लांघकर एक नई तारीख लकीर खींच सकती है। इस चुनाव के लिहाज से राज्यों की राजनीति भी गरमा रही है। पर बात करें भाजपा की तो देश के सबसे बड़े सूबे में उसकी निश्चिंतता का आलम कुछ और ही है। वैसे भी दिल्ली के सियासी गलियारों में यह बात शुरू से कही और मानी जाती रही है कि देश की सत्ता का रास्ता राम और कृष्ण के जन्म स्थान उत्तर प्रदेश से होकर ही गुजरता है। इस सूबे की सियासी धाक यह है कि उसने देश को...
2024: मोदी सब पर भारी

2024: मोदी सब पर भारी

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26 फरवरी 2023 को कांग्रेस का 85वां अधिवेशन रायपुर में आयोजित हुआ। इस अधिवेशन के अन्तर्गत एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि कांग्रेस के सदृश विचारधारा रखने वाली राजनीतिक पार्टियों का एक संयुक्त मोर्चा बनाया जाए, जो मोदी जी का विकल्प बन सके। वर्ष 2003 में भी कांग्रेस पार्टी ने सोनिया गाँधी के नेतृत्व में आयोजित अपने शिमला अधिवेशन में इसी प्रकार का प्रयास किया था, तत्पश्चात वर्ष 2004 के चुनाव उसी संगठन के द्वारा से लड़े गए थे, जिसमें कांग्रेस को सत्तासुख प्राप्त हुआ था।वर्ष 2004 की राजनीतिक परिस्थिति और वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति में अत्यधिक अंतर आ चुका है। वर्ष 2004 के चुनाव में कांग्रेस के प्रतिद्वन्द्वी के रूप में मोदी जी नहीं थे, परन्तु आगामी वर्ष 2024 के चुनावी युद्ध में भाजपा के सिरमोर मोदी जी हैं। विपक्षी एकता किस स्तर तक सफल होगी, यह अभी नहीं कहा जा सकता, क्योंकि उनमें अधिकांश नेता, य...
नवसंवत्सर को भारत में उत्साहपूर्वक मनाने का समय आ गया है

नवसंवत्सर को भारत में उत्साहपूर्वक मनाने का समय आ गया है

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भारतीय सनातन हिंदू संस्कृति के अनुसार फागुन और चैत्र माह वसंत ऋतु में उत्सव के महीने माने जाते हैं। चैत्र माह के मध्य में प्रकृति अपने श्रृंगार एवं सृजन की प्रक्रिया में लीन रहती है और पेड़ों पर नए नए पत्ते आने के साथ ही सफेद, लाल, गुलाबी, पीले, नारंगी, नीले रंग के फूल भी खिलने लगते हैं। ऐसा लगता है कि जैसे पूरी की पूरी सृष्टि ही नई हो गई है, ठीक इसी वक्त भारत में हमारी भौतिक दुनिया में भी एक नए वर्ष का आगमन होता है। पश्चिमी देशों में तो सामान्यतः अंग्रेजी तिथि के अनुसार नव वर्ष प्रत्येक वर्ष की 1 जनवरी को बहुत ही बड़े स्तर पर उत्साहपूर्वक मनाया जाता है। वैसे तो पूरे विश्व में ही नव वर्ष भरपूर उत्साह के साथ मनाया जाता है। परंतु कई देशों में नव वर्ष की तिथि भिन्न भिन्न रहती है तथा नव वर्ष को मनाने की विभिन्न देशों की अपनी अलग अलग परम्पराएं भी हैं। नव वर्ष प्रत्येक देश में एक उत्सव के रूप...
टूटी-फूटी है -ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था

टूटी-फूटी है -ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था

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मेरे हाथ में ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी 2021-22 रिपोर्ट है, जो कह रही है कि “देश के ग्रामीण क्षेत्रों में सर्जन डाक्टरों की लगभग 83 प्रतिशत कमी है। बालरोग चिकित्सकों की 81.6 प्रतिशत और फिजिशियन की 79.1 प्रतिशत कमी है। यही हाल प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञों का है। ग्रामीण क्षेत्रों में इनकी अमूमन 72.2 प्रतिशत की कमी है। इतना ही नहीं, वहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) की हालत भी ठीक नहीं है ।कहावत हैं कि असली भारत गांवों में बसता है, मगर गांव के लोगों की सेहत का खयाल रखने वाले चिकित्सा केंद्र इक्कीसवीं सदी के भारत में भी क्यों इतने बदतर हैं? ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सा विशेषज्ञों की काफी कमी देखी जा रही है। इससे शहर और गांव के बीच एक ऐसी खाई बन रही है, जिसके परिणाम भविष्य में काफी भयावह हो सकते हैं। भले...
भोपाल में लगेगा तीन दिवसीय स्वास्थ्य संसद

भोपाल में लगेगा तीन दिवसीय स्वास्थ्य संसद

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• अमृतकाल में भारत के स्वास्थ्य एवं मीडिया की भूमिका विषय पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ करेंगे अमृत-मंथन नयी दिल्ली। स्वस्थ भारत (न्यास) अपने आठवें स्थापना दिवस के अवसर पर माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के साथ मिलकर ‘स्वास्थ्य संसद-2023’ का महाआयोजन करने जा रहा है। यह आयोजन 28, 29 और 30 अप्रैल को विश्वविद्यालय के भोपाल स्थित नए परिसर में होगा। देश भर के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, चिकित्सकों व मीडियाकर्मियों का जुटान होगा।‘अमृतकाल में भारत का स्वास्थ्य और मीडिया की भूमिका’ विषय पर तीन दिनों तक अमृत मंथन चलेगा। अमृत-मंथन से निकले सार को देश के स्वास्थ्य संबंधित नीति-निर्धारकों के साथ साझा किया जाएगा। उक्त जानकारी स्वास्थ्य संसद के संयोजक व स्वस्थ भारत (न्यास) के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने दी। उन्होंने कहा कि यह आयोजन एमसीयू के कुलपति प्रो. के.जी सुरेश जी के कुशल मार्ग...
“भगोड़े अपराधियों को वापस लाने में CBI ने किया ‘त्रिशूल’ का इस्तेमाल”

“भगोड़े अपराधियों को वापस लाने में CBI ने किया ‘त्रिशूल’ का इस्तेमाल”

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विदेश में छिपे अपराधियों के लिए ऑपरेशन 'त्रिशूल' काल बन गया है। दरअसल, ऑपरेशन त्रिशूल की मदद से ही आज सीबीआई तरह-तरह के अपराधों को अंजाम देकर भारत से भागने वालों पर जबरदस्त शिकंजा कस रही है। बता दें, केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा चलाया जा रहा यह ऑपरेशन अभी तक देश से फरार 33 भगोड़ों को वापस पकड़कर लाने में सफल साबित हुआ है। वहीं अब CBI के रडार पर 276 भगोड़ों को वापस पकड़कर लाने के लिए आगे काम किया जा रहा है। ऐसे में ऑपरेशन 'त्रिशूल' के बारे में विस्तार से जानना बेहद आवश्यक है। क्या है ऑपरेशन 'त्रिशूल' ? दरअसल, सीबीआई ने यह कार्य एक विशेष ऑपरेशन के हिस्से के रूप में किया है, जिसका कोडनेम 'त्रिशूल' रखा गया है। इस ऑपरेशन का उद्देश्य वित्तीय अपराधों की आय का पता लगाने के अलावा अन्य देशों में छिपे हुए अपराधियों का पता लगाना और उन्हें वापस लाना है। इंटरपोल के सहयोग से 33 भगोड...
डिजिटल रूपी या कहें डिजिटल रुपया देश का भविष्य 

डिजिटल रूपी या कहें डिजिटल रुपया देश का भविष्य 

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डिजिटल रूपी या कहें डिजिटल रुपया देश का भविष्य बनने जा रहा है. यह बात दिसंबर माह में अपनी खबर में हमने कही थी.बात कुछ लोगों को सही लगी और बहुतों को यह कोरी बकवास लगी थी. तब बात सरकार के पायलट प्रोजेक्ट के आरंभ होने पर कही गई थी. इस पायलट प्रोजेक्ट को भारत सरकार के निर्देश पर आरबीआई ने इसे प्रायोगिक तौर पर चयनित चार शहरों और चार बैंकों के जरिए आरंभ किया था. यह प्रक्रिया अभी भी जारी है. आरंभ में यह लेन-देन लोगों के बीच और मर्चेंट टू मर्चेंट, मर्चेंट टू कस्टमर भी जारी है.आज के समय में जिन भी भारतीय रुपये का डिनोमिनेशन उपलब्ध है उसी में डिजिटल रुपये लॉन्च किया गया है. यानि भारत में वर्तमान में ₹10, ₹20, ₹50, ₹100 ₹200, ₹500, तथा ₹2000 मूल्यवर्ग के बैंकनोट हैं जिन्हें आरबीआई RBI जारी करता है. इन्हीं मूल्यवर्ग के नोटों को आरबीआई द्वारा डिजिटल रूपी में भी जारी किया गया है. फिलहाल जारी पहले चरण म...
संघ ने क्यों मुलायम सिंह यादव को दी श्रद्धांजलि?

संघ ने क्यों मुलायम सिंह यादव को दी श्रद्धांजलि?

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
बलबीर पुंज विगत 14 मार्च को हरियाणा स्थित समालखा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय बैठक संपन्न हुई। यूं तो इससे संबंधित कई विषय सार्वजनिक विमर्श में रहे। किंतु बीते वर्ष जिन राजनीतिक और प्रख्यात हस्तियों का निधन हुआ, उन्हें संघ द्वारा दी गई श्रद्धांजलि पर विरोधियों के साथ आरएसएस से सहानुभूति रखने वाले आश्चर्यचकित है। संघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्व.माताजी के साथ जिन 100 दिवंगत व्यक्तियों को नमन करते हुए शोक प्रकट किया, उनमें संघ और भाजपा के चिर-परिचित विरोधी— समाजवादी पार्टी के संस्थापक, उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और रामभक्तों पर गोली चलाने का निर्देश देने वाले मुलायम सिंह यादव के साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव और शांति भूषण भी शामिल थे। वास्तव में, इस घटना पर हतप्रभ होने वाले दोनों पक्ष न तो संघ की कार्यपद्धति से परिचित है और न ही वे हिंदू जीवनदर्शन को समझ...
संघ का मूल विचार स्पष्ट है, वह है हिन्दू राष्ट्र को समृद्ध करना

संघ का मूल विचार स्पष्ट है, वह है हिन्दू राष्ट्र को समृद्ध करना

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प्रो. कुसुमलता केडिया  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हिन्दुत्व को सशक्त और समृद्ध बनाये रखने के लिये परमपूजनीय डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने की थी। समस्त हिन्दू ज्ञान परंपरा, शौर्य परंपरा, समृद्धि परंपरा और शिल्प परंपरा की स्मृति को जीवंत रखते हुये उसकी धारावाहिकता सतत प्रशस्त रखना उसका लक्ष्य है और हिन्दू राष्ट्र ही उसका उपास्य और साध्य है।   आद्य सरसंघचालक और द्वितीय सरसंघचालक के ही चित्र संघ के सभी महत्वपूर्ण आयोजनों में सम्मुख रखे जाते हैं। इन दो के ही विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मूल विचार हैं। पूज्य आद्य सरसंघचालक ने कभी कोई पुस्तक नहीं लिखी और उनके जीवनकाल में उनके वक्तव्यों का भी प्रकाशन संकलित होकर सामने नहीं आया। अतः उनके विषय में श्री ना.ह.पालकर जी द्वारा लिखित जीवनी ही मूल प्रमाण है। परमपूजनीय गुरूजी के विचारों का संकलन ‘बंच ऑफ थॉट’ (विचार नवनीत)...