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राष्ट्रीय

We Fight Against Khalistanis, Not Against Idea Of Khalistan

We Fight Against Khalistanis, Not Against Idea Of Khalistan

राज्य, राष्ट्रीय
By Balbir Punj Many of us, who saw thousands of Amritpal’s supporters, some of them brandishing swords and guns, stomping through barricades and barging into a police station in Ajnala, near Amritsar on February 23 last, and hapless policemen scurrying for cover, were shocked. The disturbing scenes were reminiscent of dark days of terror that rocked Punjab in 1980s. The script was too familiar and ominous. Many analysts, discussing the sordid episode threadbare, concluded that the Khalistan doctrine was far from dead, with inherent potential to push the border state back to an internecine war, bleeding it white in the process. Whatsoever happened in the border state on that fateful day appeared to be a page straight from the horror book that shook the country during the decade betwe...
राहुलः खुदी को कर बुलंद इतना कि

राहुलः खुदी को कर बुलंद इतना कि

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक राहुल गांधी का भाषण पहले केंब्रिज विश्वविद्यालय में हुआ, फिर ब्रिटिश संसद में हुआ और फिर लंदन के चेथम हाउस में हुआ। इन तीनों संस्थाओं में मैं पिछले 50-55 साल से जाता रहा हूं। मुझे आश्चर्य हुआ कि हमारे नेताओं में एक नेता इतना योग्य निकला कि इन विश्व-प्रसिद्ध संस्थाओं में भाषण देने के लिए उसे बुलाया गया। मेरा सीना गर्व से फूल गया। लेकिन सच यह है कि इन संस्थाओं के सभा-भवनों को कोई भी किराए पर बुक कर सकता है। राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं और सांसद हैं, इस नाते सरकार की आलोचना करने का उन्हें पूरा अधिकार है लेकिन यह काम बड़ी सावधानी से किया जाना चाहिए। ऐसी अतिवादी बातें नहीं कही जानी चाहिए जिनसे देश की छवि बिगड़ती हो, हालांकि भाजपा के प्रवक्ता जरूरत से ज्यादा परेशान मालूम पड़ते हैं। उन्हें क्या यह पता नहीं है कि विदेशी लोग राहुल की बातों को उतना महत्व भी नहीं देते, ...
प्रो कुसुमलता केडिया जी महिला दिवस पर कस्तूरी संस्था में बोलते हुए:-

प्रो कुसुमलता केडिया जी महिला दिवस पर कस्तूरी संस्था में बोलते हुए:-

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
कथित रेनेसां और enlightenment के बाद भी यूरोप में स्त्रियों पर भीषण अत्याचार जारी रहे थे क्योंकि चर्च के मनोरोगी पादरियों ने स्त्री को eve और evil प्रचारित कर दिया था।चर्च के नियंत्रण में ईसाई स्त्रियों को तरह तरह के झूठे अभियोग लगाकर भयंकर रूप से उत्पीड़ित किया जाता था:- जिंदा जला देना, खौलते कढ़ाह में उबालना, घोड़े की पूंछ में बांधकर पथरीली कटीली सड़कों में दौड़ाना ताकि वह लहूलुहान हो जाए, कांटेदार कुर्सी में बैठा कर मारना ,योनि में एक पीड़ादायक यंत्र डालकर उसे  इस प्रकार चौड़ा करते जाना कि भीषण पीड़ा हो और खून निकलने लगे,या  गले में कांटेदार यंत्र फंसा कर मुंह खोलना जिससे गला फट जाए और मरने की स्थिति आ जाए, ऐसे बर्बर पैशाचिक उपाय पादरियों  के द्वारा अपने अपने राज्यों की सहमति से किए जाते थे और जिन्हें यह दण्ड  दिया जाता था ,उनके ही परिवार से दंड देने का खर्चा वस...
कैसे मिली होली को अखिल भारतीय पहचान

कैसे मिली होली को अखिल भारतीय पहचान

TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
 आर.के. सिन्हा कोरोना के कारण दो-तीन सालों तक जन धड़कन के पर्व होली का रंग फीका सा पड़ने लगा था। होली मिलन समारोहों पर भी विराम सा लग गया था। पर इस बार लगता है कि देश रंगोत्सव को पुराने अंदाज में मनाने जा रहा है। होली के रंग फिजाओं में बिखरे हैं। कहीं गुलाल और गुजिया की खुशबू को तो कहीं दही बड़ा और मालपुआ के अनोखे स्वाद को हर तरफ महसूस किया जा रहा है। होली मिलन समारोहों की भी वापसी हो चुकी है। इनके आयोजन लखनऊ से रायपुर, मुम्बई तथा पटना से दिल्ली वगैरह में सभी जगह हो रहे हैं। सब एक-दूसरे से गले मिल रहे हैं। गिले-शिकवे भुलाए जा रहे हैं। यही मौका है कि जब विभिन्न दलों के तमाम राजनीतिक नेता भी अपने मतभेद भुलाकर एक साथ होली खेलें और राष्ट्र निर्माण में लग जाएं। आखिर यह देश तो सबका है। राष्ट्र के प्रति जिम्मेवारी भी सबकी ही है I एक दौर था जब होली पर अटल बिहारी वाजपेयी के आवास पर भव्य...
ध्यान देने लायक चार घटनाएं

ध्यान देने लायक चार घटनाएं

EXCLUSIVE NEWS, राष्ट्रीय
डॉ. वेदप्रताप वैदिक कल भारत में घटी चार घटनाओं ने विशेष ध्यान खींचा। पूर्वोत्तर के तीन राज्यों के चुनाव परिणाम, चुनाव आयोग की नियुक्ति, अडानी-हिंडनबर्ग विवाद की जांच और जी-20 का विदेश मंत्री सम्मेलन। यह सम्मेलन पिछली तीनों घटनाओं के मुकाबले कम ध्यान आकर्षित कर सका लेकिन इसमें भारत के द्विपक्षीय हितों का उत्तम संपादन हो सका। यूक्रेन का मामला छाया रहा, कोई संयुक्त वक्तव्य जारी नहीं हुआ लेकिन पहली बार रूस और अमेरिका के विदेश मंत्री मिले। भारत के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री से कई विदेशी नेताओं की आपसी भेंट में कई नए समीकरण बने। जहां तक त्रिपुरा, नगालैंड और मणिपुर के चुनावों का सवाल है, तीनों राज्यों में भाजपा का बोलबाला हो गया है। मणिपुर में भी भाजपा सत्ता में शामिल हो जाएगी। दूसरे शब्दों में पूर्वोत्तर में भाजपा का बढ़ता हुआ वर्चस्व राष्ट्रीय एकता के लिए शुभ-संकेत है। एक तो पूर्वोत्तर के...
विदेश नीतिः दोनों से दोस्ती

विदेश नीतिः दोनों से दोस्ती

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय
डॉ. वेदप्रताप वैदिक जी-20 और क्वाड के सम्मेलन भारत में संपन्न हुए। इनसे हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की छवि तो खूब चमकी और भारत के कई राष्ट्रों के साथ आपसी संबंध भी बेहतर हुए लेकिन जी-20 ने कोई खास फैसले किए हों, ऐसा नहीं लगता। वह रूस-यूक्रेन युद्ध रूकवाने में सफल नहीं हो सका। आतंकवाद और सरकारी भ्रष्टाचार को रोकने पर दो अलग-अलग बैठकों में विस्तार से चर्चा हुई लेकिन उसका नतीजा क्या निकला? शायद कुछ नहीं। सभी देशों के वित्तमंत्रियों और विदेश मंत्रियों ने दोनों मुद्दों पर जमकर भाषण झाड़े लेकिन उन्होंने क्या कोई ऐसी ठोस पहल की, जिससे आतंकवाद और भ्रष्टाचार खत्म हो सके या उन पर कुछ काबू पाया जा सके? इन दोनों मुद्दों पर रटी-रटाई इबारत फिर से पढ़ दी गई। क्या दुनिया के किसी देश में ऐसी सरकार हैं, जिसके नेता ये दावा कर सकें कि वे सत्ता में आने और बने रहने के लिए साम, दाम, दंड, भेद का स...
जुनैद नासिर हत्याकांड गोतस्करों के कारण ही गोरक्षक सक्रिय हैं

जुनैद नासिर हत्याकांड गोतस्करों के कारण ही गोरक्षक सक्रिय हैं

राष्ट्रीय, समाचार, सामाजिक
मूल लेखअवधेश कुमारजुनैद नासिर हत्याकांड को लेकर निर्मित हो रही पूरी तस्वीर पहली दृष्टि में हमें हैरत में डालती है। सामान्य तौर पर ऐसा नहीं हो सकता कि मोटरवाहन में जलाकर किसी को मार दिया जाए और उसके आरोपी के पक्ष में धीरे-धीरे विशाल जनसमूह खड़ा हो। आप देख लीजिए राजस्थान पुलिस द्वारा इस हत्याकांड में नामजद आरोपियों मोनू मानेसर से लेकर श्रीकांत आदि के पक्ष में जगह-जगह सभाएं हो रही हैं, पंचायतें बैठ रही हैं, लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, अधिकारियों को ज्ञापन दिया जा रहा है…। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक केवल एक आरोपी फिरोजपुर झिरका के रिंकू की गिरफ्तारी हुई है। शेष अन्य आरोपियों मोनू मानेसर, श्रीकांत मरोड़ा , अनिल मुलथान, पलवल आदि पुलिस की पकड़ से बाहर है। जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है उसमें ऐसा लग रहा है कि इन्हें हरियाणा की किसी स्थान से गिरफ्तार किया गया तो विरोध में लोग कानून हाथ में लेने की को...
अडानी मामले में जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट गठित की जांच कमेटी,

अडानी मामले में जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट गठित की जांच कमेटी,

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय
हिंडनबर्ग की रिसर्च रिपोर्ट (Hindenburg Research Report ) आने के बाद अडानी समूह ( Adani Group) के शेयर में आई गिरावट और निवेशकों के हुए नुकसान की जांच लिए सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञ कमिटी का गठन का दिया। 6 सदस्यीय जांच समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे (Abhay Manohar Sapre ) करेंगे। कमिटी 2 महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी। 6 सदस्यीय जांच कमेटी करेगी जांच सुप्रीम कोर्ट ने अडानी मामले में शेयर की कीमतों में हुई छेड़छाड़ की जांच और निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए एक सिस्टम विकसित करने के लिए जिस कमिटी का गठन किया है। इसके सभी सदस्यों का नाम मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने तय किया है। हालांकि केंद्र सरकार ने कमिटी के लिए कुछ नामों का सुझाव दिया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने न...
नेपाल में अस्थिरता का नया दौर

नेपाल में अस्थिरता का नया दौर

TOP STORIES, राष्ट्रीय
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* नेपाल में नई सरकार को बने मुश्किल से दो माह ही हुए हैं और वहां के सत्तारुढ़ गठबंधन में जबर्दस्त उठापटक हो गई है। उठापटक भी जो हुई है, वह दो कम्युनिस्ट पार्टियों के बीच हुई है। ये दोनों कम्युनिस्ट पार्टियां नेपाल में राज कर चुकी हैं। दोनों के नेता अपने आप को तीसमार खां समझते हैं। हालांकि पिछले चुनाव में ये दोनों कम्युनिस्ट पार्टियां नेपाली कांग्रेस के मुकाबले फिसड्डी साबित हुई हैं। नेपाली कांग्रेस को पिछले चुनाव में 89 सीटें मिली थीं. जबकि पुष्पकमल दहल प्रचंड की कम्युनिस्ट पार्टी को सिर्फ 32 और के.पी. ओली की माओवादी कम्युनिस्ट पार्टी को 78 सीटें मिली थीं। दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों ने कुछ और छोटी-मोटी पार्टियों को अपने साथ जोड़कर भानमती का कुनबा खड़ा कर लिया। शेर बहादुर देउबा की नेपाली कांग्रेस धरी रह गई लेकिन पिछले दो माह में ही दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों में इतने...
चीनी कर्ज का मकड़जाल

चीनी कर्ज का मकड़जाल

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बलबीर पुंज मानव सभ्यता चाहे कितना भी विकास कर लें, उसमें व्याप्त राक्षसी प्रवृतियां आज भी जस की तस है। कमजोर राष्ट्रों को पहले भी शक्तिशाली सेना और हथियारों के बल पर रौंदा गया है और अब भी ऐसा होता है। उद्देश्य वही है, केवल उसका स्वरूप बदल गया है। अब देशों को गुलाम बनाने या उनपर अपना प्रभुत्व जमाने के लिए सैन्यबल से अधिक आर्थिक प्रपंचों का सहारा लिया जाता है। वर्तमान समय में ऐसे शोषण का मूर्त प्रतीक चीन के रूप में उभरा है। आज जहरीले सर्प रूपी चीन का काटा, पानी मांगने की स्थिति में भी नहीं रहता है। भारत के पड़ोस में श्रीलंका और पाकिस्तान, साम्राज्यवादी चीन की कुत्सित मानसिकता का नवीनतम शिकार है। यह ठीक है कि पाकिस्तान काफी हद तक अपने कुकर्मों के कारण संकटमयी स्थिति से गुजर रहा है, जहां पेट भरने के लिए रोटी की भारी किल्लत है, चायपत्ती का अकाल है, खाद्य-तेल की कमी है, तो बिजली का गहरा स...