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युवा पीढ़ी क्या सीखे, इन बोलवचनों से ?

युवा पीढ़ी क्या सीखे, इन बोलवचनों से ?

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और मध्यप्रदेश में पूर्व मंत्री राजा पटेरिया को दूसरे प्रयास में हाईकोर्ट से ज़मानत मिल गई, दिल्ली में भी एक कांग्रेस प्रवक्ता को हवाई जहाज से उतारकर आनन-फानन में गिरफ्तार करना और सुप्रीम कोर्ट द्वारा राहत देने के इन प्रकरणों ने कई सवालों को जन्म दिया है। कहना कठिन है कि प्रधानमंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणी जुबान फिसलने की घटना थी या इरादतन तंज किया गया था, लेकिन असम में दर्ज मुकदमे में दिल्ली पहुंचकर कार्रवाई करने की घटना में पुलिस की मुस्तैदी ने सबको चौंकाया है। सवाल उठा कि क्या अन्य गंभीर मामलों में भी पुलिस इतनी ही तत्परता दिखाती है? ये घटनाक्रम फिर वही मुद्दा उठाते है कि देश में पुलिस सुधारों की आवश्यकता है। बहरहाल, हाल के दिनों में सरकार द्वारा अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर जो तल्ख रवैया अपनाया जा रहा है उसकी गूंज अभी राजनीतिक हलकों में शिद्दत से महसूस की जा रही है। कांग्रेस के नेता ...
पाक की मदद से पहले सोचे भारत

पाक की मदद से पहले सोचे भारत

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आर.के. सिन्हा पाकिस्तान में आजकल भयंकर हाहाकार मचा हुआ है। महंगाई के कारण आम पाकिस्तानी दाने-दाने को मोहताज हो गया है। बेरोजगारी, अराजकता और  कठमुल्लों की करतूतों ने पाकिस्तान को तबाह कर दिया है। यह स्थिति  दुखद और दुभार्ग्यपूर्ण है। अब हमारे यहां के कुछ उदारवादी यह कह रहे हैं, कि भारत को चाहिए कि वह पाकिस्तान की मदद करे। भारतीय गुप्तचर एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के पूर्व प्रमुख अमरजीत सिंह दुलत कह रहे हैं कि मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल के अंत में किसी समय पाकिस्तान की ओर शांति का हाथ बढ़ाएंगे और पिछले कुछ महीनों से राजनीतिक एवं आर्थिक संकट से जूझ रहे पड़ोसी देश की मदद करेंगे। अब इन महानुभावों से पूछा जाना चाहिए कि जो मुल्क भारत पर 1948, 1965, 1971 और फिर कारगिल पर हमला कर चुका हो उसको लेकर इतना उदारता का रवैया अपनाने का क...
डगमगाती भविष्य-निधि अर्थात् बचत की बुनियाद

डगमगाती भविष्य-निधि अर्थात् बचत की बुनियाद

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एक समय था, जब भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार मध्य-वर्ग था तो उसके लिए सबसे पवित्र-पूंजी थी कर्मचारी भविष्य-निधि कोष। भविष्य-निधि अर्थात् बचत की बुनियाद। कोई नागरिक निजी तौर पर बचत करना चाहे, या न चाहे पिछली सरकारों ने उसके लिए बचत के प्रावधान को अनिवार्य बनाने की कोशिश की थी। कर्मचारी के इस खाते में बचत सरकार की भी जिम्मेदारी थी। लेकिन,अब सरकार का नागरिकों के प्रति यह अभिभावकीय अस्तित्व अस्त हो रहा है। इस बार के केंद्रीय बजट का मूल स्वर यही है कि “कर दिए जाओ और बचत की चिंता न करो।“हमारे सामने भारतीय अर्थव्यवस्था में छोटी बचतों का इतिहास उस वक्त दर्ज हुआ जब 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के समय दुनिया के बाजार धड़ाम से गिर रहे थे। बाजार के जानकारों ने उस दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था को बचाने का श्रेय घर-घर मौजूद बचतवादियों को ही दिया था। इस बचतवादी प्रवृत्ति का रखवाला था भविष्य-निधि कोष। आप आज जितन...
बिगड़ता मौसम, सबको सोचना होगा!

बिगड़ता मौसम, सबको सोचना होगा!

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बीते कल भोपाल का तापमान 36 डिग्री था । अगले 4 दिनो में इसके 39 डिग्री तक पहुँचने की भविष्यवाणी मौसम विभाग कर रहा है। यह सब ऋतु-चक्र में आये बदलाव के कारण हैं । अब तो बारह महीने लोगों से हम यह सुनते आ रहे हैं- इस बार तो गर्मी ने हद कर दी... ऐसी गर्मी तो मैंने कभी नहीं झेली। बरसात में इस बार की बरसात ने तो हाहाकार मचवा दिया... जिधर देखो पानी ही पानी। इसी तरह जाड़ा - ऐसा जाड़ा कि हड्डियां हिलाकर रख दीं। बारह महीने ऋतुओं के बदलाव ने सभी को परेशान कर दिया है। पिछले साल जून में उत्तर भारत सहित देश के तकरीबन सभी हिस्सों में बेहाल कर देने वाली गर्मी पड़ी। दिल्ली में पारा जब 48 डिग्री सेंटीग्रेड से ऊपर पहुंचा तो लोगों पर ही इसका असर नहीं दिखा बल्कि पशु-पक्षी भी हलकान दिखे। इस साल राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली सहित तमाम प्रदेशों में कड़ाके की ठंड ने सबको बेहाल कर दिया। इस फर...
सभ्यतागत चुनौती

सभ्यतागत चुनौती

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The Civilisational Challengeजापान को सिर्फ एक देश नहीं, एक विशिष्ट सभ्यता मानना गलत नहीं होगा. अपने इतिहास के प्रारंभिक कालखंड में जापानी संस्कृति लगभग पूरी तरह से चीनी संस्कृति की एक शाखा मात्र थी. चीन एक तरह से जापान का कल्चरल बिग ब्रदर था. पर दूसरी सहस्त्राब्दी के आते आते जापान ने अपनी विशिष्ट संस्कृति विकसित कर ली जो दुनिया की अन्य किसी भी संस्कृति से बिल्कुल ही अलग थी...लगभग विचित्र. यह एक बहुत ही पारंपरिक, सैन्य संस्कृति बन गयी. शिंतो बौद्ध धर्म और विलक्षण समुराई सैनिक इसकी खास पहचान थे. 16वीं सदी का जापान टुकड़ों में बँटा था. इसमें अनेक डेमियन सरदार (वारलॉर्ड) आपस में लड़ते रहते थे. उसी समय यूरोपियन व्यापारी और ईसाई मिशनरियाँ भी जापान पहुंचीं. उस दौर में जापान में पश्चिम से दो चीजें पहुंची...क्रिश्चियनिटी और बंदूकें. उनमें एक जापानी वारलॉर्ड हुआ ओडा नोबुनागा. उसे जापान का पहल...
भाग्य के भरोसे झूलता विपक्ष

भाग्य के भरोसे झूलता विपक्ष

TOP STORIES, राष्ट्रीय
डॉ. वेदप्रताप वैदिक अपने रायपुर अधिवेशन में सोनिया गांधी ने अपने राजनीतिक संन्यास की घोषणा बहुत ही मर्यादित ढंग से कर दी है और उन्होंने अपने काल की उपलब्धियों और हानियों का जिक्र भी काफी खुलकर किया है लेकिन कांग्रेसियों का भक्तिभाव भी अद्भुत है। वे बार-बार कह रहे हैं कि इसे आप सोनियाजी का संन्यास क्यों मान ले रहे हैं? वे अब भी कांग्रेस की सर्वोच्च नेता हैं। यह कथन बताता है कि सोनिया गांधी के प्रति कांग्रेसियों में कितनी अंधभक्ति है? क्या आपने कभी अटलजी या आडवाणीजी के प्रति ऐसा भक्तिभाव भाजपा में देखा है? सभी लोकतांत्रिक देशों की पार्टियां समय-समय पर अपने नेताओं को बदलती रहती हैं लेकिन हमारी कांग्रेस पार्टी को आजादी के बाद जड़ता ने ऐसा घेरा है कि वह पार्टी नहीं, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बन गई है, जैसे कि हमारी प्रांतीय पार्टियां हैं। अब कांग्रेस कह रही है कि उसी के नेतृत्व में मोदी-विरोधी...
शुद्ध पानी का हक दिलाने की सरकारी मुहिम

शुद्ध पानी का हक दिलाने की सरकारी मुहिम

राष्ट्रीय, सामाजिक
ललित गर्गजल मनुष्य के जीवन को वह अहम हिस्सा है जिसके बिना इंसान अपने जीवन के सफर को पूर्ण नहीं कर सकता है। यानी जल के बिना जीवन संभव नहीं है। प्रकृति एवं पर्यावरण के प्रति उपेक्षा एवं उदासीनता का परिणाम है कि इंसान को पीने का स्वच्छ जल मिलना दुर्लभ होता जा रहा है। व्यक्ति के जीवन जीने के लिए पानी की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है वह अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति को तभी पूरा कर सकता है जब उनके जीवन में पानी की सुविधा उपलब्ध है। निरन्तर जटिल होती स्वच्छ जल की समस्या को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने जल जीवन मिशन स्कीम शुरू की है। इस स्कीम को शुरू करने का मुख्य लक्ष्य यह है की ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाले 50 प्रतिशत से अधिक ऐसे परिवार है जिन्हें पानी की समस्याओं से जूझना पड़ता है। पानी प्राप्त करने के लिए उन्हें दूर क्षेत्रों में कई मीलों पैदल जाना पड़ता है ज...
राहुल गांधी की नई भूमिका क्या हो?

राहुल गांधी की नई भूमिका क्या हो?

TOP STORIES, राष्ट्रीय
विनीत नारायणपंडित नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक हर प्रधान मंत्री वैश्विक मंच पर गर्व से घोषणा करते आए हैं कि भारत विश्वका सबसे बड़ा लोकतंत्र है। किसी भी सफल लोकतंत्र का प्रमाण यह होता है कि उसमें पक्ष और विपक्षी दल सबलभूमिका में सक्रिय रहें। कमज़ोर विपक्ष या विपक्षहीन पक्ष लोकतंत्र के पतन का रास्ता तैयार करता है। इसके साथही न्यायपालिका, मीडिया, चुनाव आयोग, महालेखाकार व जाँच एजेंसियों की स्वतंत्रता सुनिश्चित हो और वेनिडर होकर काम कर सकें। अनुभव ये बताता है कि हमारा देश में सत्ता पक्ष विपक्ष को कमज़ोर करने का हर संभवप्रयास करता है। पर स्विट्ज़रलैंड, इंग्लैंड या अमरीका जैसे देशों में सत्तापक्ष की ओर से ऐसे अलोकतांत्रिक प्रयासप्रायः नहीं किए जाते। इसलिए उनका लोकतंत्र आदर्श माना जाता है।किसी देश की अर्थव्यवस्था के स्थायित्व के लिए ज़रूरी होता है कि देश की गृह नीति ऐसी हो जिससे समाज मेंशांति व्...
कांग्रेसः ढाक के वही तीन पात!

कांग्रेसः ढाक के वही तीन पात!

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय
डॉ. वेदप्रताप वैदिक कांग्रेस पार्टी का 85 वां अधिवेशन अभी पूरा नहीं हुआ है लेकिन अभी तक रायपुर में जो कुछ हुआ है, उसके बारे में क्या कहें? ढाक के वही तीन पात! इंदिरा गांधी के ज़माने से देश की इस महान पार्टी के आकाश से आतंरिक लोकतंत्र का जो सूर्य अस्त हुआ था, वह अब भी अस्त ही है। इसमें कांग्रेेस के वर्तमान नेतृत्व का दोष उतना नहीं है, जितना उसके अनुयायिओं का है। राहुल गांधी का तो मानना है कि कांग्रेस की कार्यसमिति चुनाव के द्वारा नियुक्त होनी चाहिए लेकिन रायपुर अधिवेशन में पार्टी की संचालन समिति ने सर्वसम्मति से तय किया है कि यह नियुक्ति कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ही करेंगे। जिन दो-तीन नेताओं ने शुरू में थोड़ी हिम्मत की और बोला कि कार्यसमिति के लिए चुनाव करवाए जाएं, उन्होंने भी झुण्ड के आगे मुण्ड झुका दिया। खड़गे ने भी कह दिया कि वह सोनिया, राहुल और प्रियंका से सलाह करके कार्यस...
लचर क़ानून व्यवस्था का प्रमाण है अपराध

लचर क़ानून व्यवस्था का प्रमाण है अपराध

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, विश्लेषण
डॉ. शंकर सुवन सिंहभारत जैसे देश में आए दिन अपराध जैसे हत्या,लूट, छिनैती, बलात्कार,धार्मिक उन्माद आदिहोते रहते हैं। अपराध के मामलों में उत्तर प्रदेश भी शिखर पर है। प्रयागराज के नैनी स्थितहुक्का बार में 14 फरवरी 2023 को एक बालू कारोबारी की हत्या कर दी जाती है। अभीहाल ही में 24 फरवरी 2023 को राजू पाल हत्याकांड में मुख्य गवाह उमेश पाल कोदिनदहाड़े सरेआम गोलियाँ और बम से भून दिया जाता है। इस हत्याकांड में उमेश पाल केगनर को भी अपराधी दौड़ाकर गोलियों से भून देते हैं। इस घटना से उत्तर प्रदेश के पुलिसप्रशासन और क़ानून व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह उठना स्वाभाविक है। इस घटना का मुख्यकारण न्याय मिलने में विलम्ब होना और क़ानून व्यवस्था का लचर होना है। उधर पंजाब मेंभारत के अमृतकाल के लिए अमृतपाल कहर बनता जा रहा है। पंजाब में खालिस्तानीसंगठन (वारिस पंजाब दे) का मुखिया अमृतपाल सिंह और उसके गुंडों ने अमृतसर केअजना...