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Significant protest by Tibetans at Chennai

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Chinese President Xi Jinping was given grand reception during his visit to Chennai (India) on11th and 12th October,2019. The bilateral meeting between Indian Prime Minister Narendra Modi and Chinese President Xi Jinping  took place at Mamallapuram near Chennai. Mamallapuram is a historical place near the sea shore ,where there are many temples and monuments of great beauty and architectural splendour  that was built by Pallava dynasty several centuries back.  For the visit of the Chinese President, the entire Mamallapuram was cleaned and decorated like of which it has never seen before.  Mr. Modi left no stone unturned to make the visit pleasant and memorable for Chinese President and the Chinese delegation.  Obviously, this would have pleased Chinese President , though Chinese are know...
एक करोड़ पेड़ तो काट डाले और कितने काटेंगे?

एक करोड़ पेड़ तो काट डाले और कितने काटेंगे?

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दुर्भाग्यवश हमारे देश के नौकरशाहों को अभी तक यह समझ ही नहीं आया कि है कि नई निर्माण परियोजनाओं पर काम करते हुए उन स्थानों पर पहले से लगे हुए पेड़ों को काटने से बचा भी जा सकता है।  चूंकि हमने यह सब नहीं जाना है न जानने की कोशिश ही की है इसलिए ही हम पेड़ों को बेरहमी से काटते ही चले जा रहे हैं। इनको काटने को लेकर कुछ समय तक तो समाज खड़ा होता है, फिर सब कुछ सामान्य गति से चलने लगता है। हाल ही मे मुंबई में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए आरे चलाकर जंगल काटे जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। आरे का उपयोग कर बड़ी संख्या में पेड़ काट दिए गए। खूब हंगामा हुआ। पिछले साल दिल्ली में सरकारी बाबुओं की कुछ कॉलोनियों को तोड़ा जाना पहले से था। ताकि उनके स्थान पर नई कॉलोनियों का विकास किया जा सके। यहां तक सब ठीक है।  क्योंकि पुरानी इमारतें एक तय वक्त के बाद तोड़ी ही जाती हैं। फिर  वहां पर वर्तमान आवशकताओं...
तो इस तरह कश्मीर होगा पर्यटकों से गुलजार

तो इस तरह कश्मीर होगा पर्यटकों से गुलजार

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देश –विदेश के जो पर्यटक जम्मू-कश्मीर में घूमना चाहते हैं, अब उन्हें और इंतजार नहीं करना होगा। वे अब कश्मीर  आ सकते हैं। सरकार ने विगत 2 अगस्त कोअमरनाथ यात्रा को स्थगित करते हुए राज्य में घूमने के लिए आए हुए तमाम पर्यटकों को सलाह दी थी कि वे वापस अपने घरों को चले जाएं। उसके कुछ दिनों के बादही केन्द्र सरकार ने  जम्मू-कश्मीर को मिला हुआ विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया था। उसके पश्चात सूबे में पर्यटकों के आने पर सुरक्षा कारणों के चलते रोकलग गई थी।  अब चूंकि जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य होने लगे हैं, इसलिए सरकार ने पर्यटकों के राज्य में घूमने-फिरने के लिए आने पर रोक को हटा दिया है। अब निश्चित रूपसे कश्मीर देसी-विदेशी पर्यटकों से गुलजार रहने लगेगा। इससे वहां की तबाह हो गई अर्थव्यवस्था  बेहतर होगी और लोगों की माली हालत सुधरेगी।  बेशक कश्मीर केपर्यटन को वहां पर गुजरे दशकों से जारी आतंकवाद न...
सबसे कट्टर हैं धर्मनिरपेक्षता का शोर मचाने वाले!

सबसे कट्टर हैं धर्मनिरपेक्षता का शोर मचाने वाले!

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बहुत से लोग राजनाथ के राफेल पर ॐ लिखने और नारियल चढ़ाने को अंधविश्वास बता रहे हैं। पहियों के बीच नींबू रखने का मज़ाक बनाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि आज के आधुनिक समय में ये सब अंधविश्वास और पिछड़ापन है। ये सब देख सुनकर हैरानी होती है। हैरानी इसलिए अगर सरकार अंधविश्वासी होती और आधुनिकता नहीं समझती तो दुनिया के सबसे आधुनिक विमान राफेल को लाने में एड़ी-चोटी का ज़ोर नहीं लगाती। फिर चाहे वो यूपीए की सरकार हो या एनडीए की। राफेल का हर कीमत पर भारत आना ये बताता है कि आधुनिकता की ज़रूरत को समझा गया है। अंधविश्वासी होने की बात तो तब आती जब हम आधुनिकता की इस ज़रूरत को नकराते और पुराने मिग विमानों पर नींबू चढ़ाकर आश्वत हो जाते कि अब हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। नींबू चढ़ाना, नारियल चढ़ाना Harmless परम्पराएँ हैं। अंधविश्वास भी मान लो, तो भी उससे किसी का कुछ बिगड़ता नहीं है। ठीक वैसे ही, जैसे ...
बापू के कितने करीब मोदी

बापू के कितने करीब मोदी

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दिल्ली की 29 जनवरी 1948 की उस कड़कती सर्दी की रात में महात्मा गांधी ने लगभग रातभर जगकर अपनी इच्छा जाहिर की थी कि अब आज़ादी का आन्दोलन तो समाप्त हो चुका है अत: अब कांग्रेस को भंग कर दिया जाये। गांधी जी की यह “अंतिम इच्छा' गॉधी जी के द्वारा ही प्रकाशित “हरिजन ' पत्रिका में उनकी हत्या के  बाद प्रकाशित  भी हुई थी। हिन्दी में उनकी “अंतिम इच्छा और वसीयतनामा” शीर्षक से यह ऐतिहासिक दस्तावेज 'हरिजन' के 15 फरवरी, 1948 के अंक में छपा था। दुर्भाग्यवश , गॉंधी जी द्वारा उपर्युक्त राय जाहिर करने के अगले ही दिन यानी 30  जनवरी 1948 को उनकी हत्या भी कर दी जाती है।पता नहीं दोनों घटनाओं में कोई सम्बन्ध था अथवा नहीं? बहरहाल,  गांधी जी के उस सपने के 71 साल के बाद और जब सारा देश उनकी 150 वीं जयंती मना रहा है, तब कांग्रेस अपने आप ही समाप्ति की तरफ तेज़ी से बढ़  रही है। विगत लोकसभा चुनाव में कॉंग्रेस को 17 राज्यों...
सुपरबग : कहीं हार न जाए एलोपैथिक चिकित्सा

सुपरबग : कहीं हार न जाए एलोपैथिक चिकित्सा

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आपने कभी सोचा है कि जब आपकी दवाई काम करना बंद कर देगी तब क्या होगा? नहीं न। तो जरूर सोचिए। आज पूरी दुनिया सोच रही है। आज के समय में एंटीबायोटिक का काम न करना आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है। पूरी दुनिया इससे बचने के उपाय में जुटी है। इसी कड़ी में भारत में भी एंटीबायोटिक्स के दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकारी एवं गैर-सरकारी स्तर पर तमाम उपाय किए जा रहे हैं। एंटीबायोटिक्स पर बैक्टीरिया की जीत की स्थिति को वैज्ञानिकों ने 'सुपरबग’ का नाम दिया है। यानी एक ऐसा जीवाणु जिस पर अबतक उपलब्ध कोई भी एंटीबायोटिक्स काम नहीं करता है सामान्यत:  'सुपरबग’ कहलाता है। एंटीबायोटिक्स के बनने से लेकर जीवाणुओं के 'सुपरबग’ बनने की कहानी को इस आलेख में बता रहे हैं वरिष्ठ स्वास्थ्य पत्रकार आशुतोष कुमार सिंह   आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था आज खतरे में है। उसकी पहचान संकट म...
राम मंदिर पर नियमित सुनवाई निर्णय की ओर उच्चतम न्यायालय

राम मंदिर पर नियमित सुनवाई निर्णय की ओर उच्चतम न्यायालय

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राम मंदिर विषय पर चल रही नियमित सुनवाई के बीच मामला तेज़ी से निर्णय की तरफ बढ़ रहा है। बीच बीच में आने वाली बाधाओं को दूर करने में उच्चतम न्यायालय लगातार कामयाब भी हो रहा है। सुनवाई के दौरान कुछ लोगों ने फिर से प्रक्रिया को विलंबित करने के उद्देश्य से मध्यस्थता का विषय उठा दिया जिसे स्वयं न्यायालय ने खारिज कर दिया। नियमित सुनवाई के पहले न्यायालय स्वयं मध्यस्थता का प्रयास कर चुका था जिस पर बात कहीं नहीं पहुंच पायी। अब जब न्यायालय ने मामले की सुनवाई की अंतिम तिथि 18 अक्तूबर तय कर दी है तब फैसले की किरण दिखाई देने लगी है। शायद 17 नवंबर 2019 को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की सेवा निवृत्ति के पहले इस विषय पर फैसला भी आ जाये। अमित त्यागी राम मंदिर के विषय पर उच्चतम न्यायालय में चल रही नियमित सुनवाई के बीच उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का आचरण इस बात का संकेत दे रहा है कि शायद वह अपनी स...
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का विजयादशमी के अवसर पर नागपुर में दिया उद्बोधन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का विजयादशमी के अवसर पर नागपुर में दिया उद्बोधन

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  इस विजयादशमी के पहले बीता हुआ वर्षभर का कालखंड श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश वर्ष के रूप में तथा स्वर्गीय महात्मा गांधी के जन्म के डेढ़ सौ वे वर्ष के रूप में विशेष रहा। उस उपलक्ष्य में किए जाने वाले कार्यक्रम आगे और कुछ समय, उनकी अवधि समाप्त होने तक, चलने वाले हैं। इस बीच 10 नवंबर से स्वर्गीय दत्तोपंत जी ठेंगड़ी का भी शताब्दि वर्ष शुरू होना है। परंतु बीते हुए वर्ष में घटी हुई कुछ महत्त्वपूर्ण घटनाओं ने, उसको हमारे लिए और स्मरणीय बना दिया है। मई मास में लोकसभा चुनावों के परिणाम प्राप्त हुए। इन चुनावों की ओर संपूर्ण विश्व का ध्यान आकर्षित हुआ था। भारत जैसे विविधताओं से भरे विशाल देश में, चुनाव का यह कार्य समय से और व्यवस्थित कैसे संपन्न होता है, यह देखना दुनिया के लिए आकर्षण का पहला विषय था। वैसे ही 2014 में आया परिवर्तन केवल 2014 के पहले के सरकार के प्रति मोहभंग से उत्पन...
भारत के लिए यूनिवर्सल बेसिक इनकम नहीं, वोटरशिप स्कीम जरूरी है! – विशात्मा (भरत गांधी)

भारत के लिए यूनिवर्सल बेसिक इनकम नहीं, वोटरशिप स्कीम जरूरी है! – विशात्मा (भरत गांधी)

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साक्षात्कार भारत के लिए यूनिवर्सल बेसिक इनकम नहीं, वोटरशिप स्कीम जरूरी है! - विशात्मा (भरत गांधी) अभी हाल ही में चैथी दुनिया के संवाददाता श्री शफीक आलम ने प्रख्यात राजनीतिक सुधारक विशात्मा (भरत गांधी) से वोटरशिप स्कीम पर कानून बनाने की मांग पर लम्बी बातचीत की। उनसे बातचीत के प्रमुख अंश 8 प्रश्नों तथा उसके 8 उत्तरों के रूप में नीचे लिखे अनुसार प्रस्तुत हैं:- प्रश्न 1ः- पहले ये बताएं कि वोटरशिप स्कीम और यूनिवर्सल बेसिक इनकम में क्या फर्क है? उत्तर:- देखिए, प्रोफेसर जे. एस. मिल और कार्ल माक्र्स ये दोनों समकालीन थे। दोनों एक बात पर राजी थे कि राज्य गरीबों पर जुल्म ढा रहा है। माक्र्स कहते थे कि इस जुल्म को रोकने का तरीका ये है कि गरीबों को संगठित होकर राज्य पर कब्जा कर लेना चाहिए, लेकिन प्रोफेसर जे. एस. मिल ये कहते थे कि राज्य पर गरीब कब्जा कर लेंगे तो जुल्म दूसरों पर होने लगेगा...
खाक में मिलता पाक

खाक में मिलता पाक

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किसी भी परिदृश्य के निर्माण में एक बड़ा समय लगता है। वर्तमान में वैश्विक परिदृश्य कुछ इस तरह का बन गया है जहां बड़े बाज़ार के कारण भारत का स्थान महत्वपूर्ण हो गया है। एक तरफ यूरोप और अमेरिका का बाज़ार सेचूरेट हो चुका है तो दूसरी तरफ चीन का माल गुणवत्ता में पिछड़ रहा है। अमेरिका और चीन के बीच चलने वाली ट्रेड वार अब निर्णायक मोड़ पर आ चुकी है। चीन को नियंत्रित करने के लिए  अमेरिका ने पहले चीन पर 25 प्रतिशत की ड्यूटी लगाई और बाद में उसे बढ़ा कर 35 प्रतिशत कर दिया, ताकि चीन का माल महंगा हो जाये। बाज़ार से चीन की पकड़ ढीली हो जाये। चीन ने अमेरिका को कड़ा जवाब देते हुये अपनी मुद्रा का अवमूल्यन कर दिया। चीन के द्वारा ऐसे करते ही बाकी मुद्राओं पर दवाब आ गया। बाज़ार में बने रहने के लिए भारत को भी अपनी मुद्रा की कीमत कम करनी पड़ी। इस तरह रुपया डॉलर के मुक़ाबले कमजोर हो गया। वर्तमान में अमेरिका की ट्...