प्रश्नपत्र लीक होने के बढ़ते मामले चिंताजनक
किसी भी देश का भविष्य उसकी शिक्षा-व्यवस्था पर निर्भर करता है। शिक्षा के माध्यम से ही कोई भी समाज एवं देश तरक्क़ी की नई-नई इबारतें लिखता है। दुर्भाग्य से अपने देश की अधिकांश सरकारों द्वारा शिक्षा को प्राथमिकता-सूची में अंतिम पायदान पर रखने का चलन-सा बन गया है। यही कारण है कि तमाम सरकारी दावों और घोषणाओं के बावजूद हमारी शिक्षा-व्यवस्था वैश्विक कसौटियों पर पिछड़ी एवं कमज़ोर नज़र आती हैं। विकसित देशों और वर्तमान विश्व के साथ कदम-से-क़दम मिलाकर चलने के लिए हमें अपनी शिक्षा-व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करना होगा। नीतियों से लेकर क्रियान्वयन तक की खामियों को दूर करना होगा, व्यवस्था में व्याप्त छिद्रों को भरना होगा, शुचिता एवं पारदर्शिता लानी होगी। हमारे शिक्षा-तंत्र की हालत यह है कि शायद ही कोई ऐसा राज्य हो, जहाँ किसी-न-किसी प्रतियोगी या नियमित परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सुर्खियों ...









