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योग सशक्त माध्यम है महिला सशक्तीकरण एवं शांति का

योग सशक्त माध्यम है महिला सशक्तीकरण एवं शांति का

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अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस, 21 जून, 2024 पर विशेष- ललित गर्ग -मनुष्य के सम्मुख युद्ध, महामारी, महंगाई, बेरोजगारी, प्रतिस्पर्धा के कारण जीवन का संकट खड़ा है। मानसिक संतुलन अस्त-व्यस्त हो रहा है। मानसिक संतुलन का अर्थ है विभिन्न परिस्थितियों में तालमेल स्थापित करना, जिसका सशक्त एवं प्रभावी माध्यम योग ही है। योग एक ऐसी तकनीक है, एक विज्ञान है जो हमारे शरीर, मन, विचार एवं आत्मा को स्वस्थ करती है। यह हमारे तनाव एवं कुंठा को दूर करती है। जब हम योग करते हैं, श्वासों पर ध्यान केन्द्रित करते हैं, प्राणायाम और कसरत करते हैं तो यह सब हमारे शरीर और मन को भीतर से खुश और प्रफुल्लित रहने के लिये प्रेरित करती है। योग ने सिर्फ शरीर को बल्कि मंन को भी शांति और एकाग्रचित करता है। योग के अभ्यास से शांतिपूर्ण मन से व्यक्ति को समाज कल्याण के लिए एक बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलती है। इस बार 10वीं बार अंतरराष्ट्र...
अग्निपथ॰॰अग्निपथ ॰॰अग्निपथ?

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अग्निपथ॰॰अग्निपथ ॰॰अग्निपथ?* ‘अग्निपथ’ योजना को भाजपा और मोदी सरकार सशस्त्र बलों की गेम-चेंजर और युवा शक्ति के जरिये सेना की ताकत बढ़ाने वाली बताती रही है, लेकिन इस योजना के दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर सवाल गाहे-बगाहे उठते रहे हैं। यद्यपि जून 2022 में शुरू की गई अग्निपथ योजना फिलहाल गहन विभागीय जांच के अधीन है, लेकिन विशेषकर, विपक्ष को यह मुद्दा आम चुनाव के दौरान सर्वाधिक रास आया है। जिन इलाकों से ज्यादा युवा सेना में आते रहे हैं उन इलाकों में कांग्रेस ने सरकार पर तीखे हमले इस योजना को लेकर किये हैं। इस योजना के अंतर्गत सिर्फ पच्चीस फीसदी अग्निवीरों की सेवाओं को बरकरार रखने का प्रावधान है। यही वजह है कि चार साल का कार्यकाल पूरा होने पर सेवा से बाहर होने वाले अग्निवीरों का मुद्दा राजनीतिक हलकों में विवादास्पद रहा है। यही वजह है कि कांग्रेस ने अपने आम चुनाव 2024 के घोषणापत्र में वायदा...
video viral

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वायरल वीडियो: केवल एक पक्ष न देखें रजनीश कपूरजब-जब सोशल मीडिया में किसी मुद्दे पर कोई वीडियो वायरल हो जाता है तो ज़्यादातर लोग उसके एक ही पहलू पर ध्यानदेते हैं। जबकि समझदारी इसी में है कि तस्वीर का दूसरा पहलू भी देखा जाए। आजकल के ‘फेक मीडिया’ वाले माहौल में हमेंअपना निर्णय लेने से पहले उस वीडियो को गहराई से समझने की आवश्यकता है। हाल ही में दिल्ली व देश के अन्य भागों मेंकुछ ऐसे वीडियो वायरल हुए जिन्हें देख कर लोगों ने काफ़ी सहानुभूति जताई और कुछ समय बाद जब उसी वीडियो कादूसरा पक्ष सामने आया तो वीडियो को वायरल करने वालों की असलियत पता चली। परंतु हर व्लॉगर (सोशल मीडिया परवीडियो पोस्ट करने वाले प्रोफेशनल) एक जैसे नहीं होते। इनमें कुछ अपवाद भी होते हैं जो मुद्दे की तह तक जाते हैं।पिछले दिनों दिल्ली के तिलक नगर में एक दस साल के बच्चे का वीडियो इतना वायरल हुआ कि उसके समर्थन में कई जाने-माने लो...
पंच परिवर्तन बनेगा समाज परिवर्तन का सशक्त माध्यम

पंच परिवर्तन बनेगा समाज परिवर्तन का सशक्त माध्यम

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए पिछले लगभग 99 वर्षों से निरंतर कार्य कर रहा है। भारतीय समाज में सकारात्मक परिवर्तन को गति देने एवं समाज में अनुशासन व देशभक्ति के भाव को बढ़ाने के उद्देश्य से माननीय सर संघचालक श्री मोहन भागवत ने समाज में पंच परिवर्तन का आह्वान किया है ताकि अनुशासन एवं देशभक्ति से ओतप्रोत युवा वर्ग अनुशासित होकर अपने देश को आगे बढ़ाने की दिशा में कार्य करे। इस पंच परिवर्तन में पांच आयाम शामिल किए गए हैं - (1) स्व का बोध अर्थात स्वदेशी, (2) नागरिक कर्तव्य, (3) पर्यावरण, (4) सामाजिक समरसता एवं (5) कुटुम्ब प्रबोधन। इस पंच परिवर्तन कार्यक्रम को सुचारू रूप से लागू कर समाज में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है। स्व के बोध से नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति सजग होंगे। नागरिक कर्तव्य बोध अर्थात कानून की पालना से राष्ट्र समृद्ध व उन्नत होगा। सामाजिक समरसता ...
आधे चुनावों के बाद

आधे चुनावों के बाद

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लोकसभा में तीन चरणों का मतदान पूरा हो गया है.आधे से अधिक लोकसभा सीटों का जनादेश EVM में कैद हो चुका है. तीसरे चरण के मतदान में पहले के दोनों चरणों की तुलना में मतदान बढ़ना खुशी की बात है. यह मतदान और अधिक बढ़ता तो लोकतंत्र ज्यादा मजबूत होता..!! बाकी चरणों में मतदान प्रतिशत बढ़ने की पूरी संभावना है. अब तक 282 सीटों पर मतदान हो चुका है. मतदान प्रतिशत के आधार पर चुनावी नतीजे का विश्लेषण, परिणाम के दिन तक चाय की चर्चा का विषय बने रहेंगे. देश में यह चुनाव एनडीए 400 पार के लिए लड़ रहा है, तो विपक्षी गठबंधन सरकार बनाने के लिए नहीं बल्कि एनडीए को अपना लक्ष्य पार नहीं होने देने के लिए लड़ता दिखाई पड़ रहा है.देश के हर कोने में चुनाव परिणामों को लेकर परसेप्शन क्लियर और कॉन्फिडेंट है. पहले राजनेता अति-आत्मविश्वास में होते थे, इस बार देश की जनता अति-आत्मविश्वास में दिखाई पड़ रही है. यह चुनाव कई राज...
मौसम गड़बड़ा सकता है- सारे आर्थिक अनुमान

मौसम गड़बड़ा सकता है- सारे आर्थिक अनुमान

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मौसम गड़बड़ा सकता है- सारे आर्थिक अनुमान* बड़ी अजीब कश्मकश है, प्रतिकूल मौसमी हालात तथा बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों ने चिंता को और गहरा दिया है। निर्धारित चार प्रतिशत तक मुद्रास्फीति नियंत्रण के लक्ष्य को लेकर अनिश्चितता का माहौल है। बीते माह में खुदरा मुद्रास्फीति की दर 4.9 प्रतिशत थी इस पर केंद्रीय बैंक समेत आर्थिक विशेषज्ञ उत्साहित थे कि अब चार फीसदी के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। इसी मकसद से केंद्रीय बैंक ने अप्रैल 2023 के बाद से रेपो दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया। केंद्रीय बैंक को आशंका थी कि रेपो दरों में बदलाव से महंगाई बढ़ सकती है। ऐसे में आरबीआई मुद्रा स्फीति की मौजूदा स्थिति को लेकर आशावान है। लेकिन साथ ही चिंतित है कि मौसम के मिजाज में लगातार आ रहे बदलाव तथा दो साल से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध व हालिया गाजा संकट से वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ सकती है। जिसका असर भार...
आर्थिक स्थिरता पर नकारात्मक प्रभाव*

आर्थिक स्थिरता पर नकारात्मक प्रभाव*

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आर्थिक स्थिरता पर नकारात्मक प्रभाव* यह देश के नीति निर्धारकों की योग्यता पर प्रश्न चिन्ह है किदेश में घरेलू क़र्ज़ की बढ़ोतरी रुक नहीं है। आँकड़े ज़्यादा पुराने नहीं हैं,दिसंबर 2023 में घरेलू कर्ज अपने सर्वाधिक स्तर पर पहुंच चुका है और .सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) में पारिवारिक ऋण का अनुपात 40 प्रतिशत हो गया है. । यह सब हाल के वर्षों में हुआ है। पारिवारिक कर्ज में बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है. वित्तीय सेवाएं मुहैया कराने वाली कंपनी मोतीलाल ओसवाल की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि दिसंबर 2023 में घरेलू कर्ज अपने सर्वाधिक स्तर पर पहुंच गया. सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) में पारिवारिक ऋण का अनुपात 40 प्रतिशत हो गया है. साथ ही, जीडीपी में पारिवारिक बचत का अनुपात लगभग पांच प्रतिशत रह गया है, जो ऐतिहासिक रूप से सबसे कम है। भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले वर्ष सितंबर में बताया ...
भारत बने विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था

भारत बने विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था

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भारत, विश्व में उपभोक्ताओं का सबसे बड़ा केन्द्र बिन्दु है, इसी कारण आज सम्पूर्ण विश्व के उद्योगपतियों की निगाहें भारत पर केन्द्रित हैं। ये उद्योगपति, भारत में निवेश हेतु कोई न कोई अवसर सदैव ही तलाशते रहते हैं। इसी कारण आज भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की वृद्धि हो रही है और यह वृद्धि ही हमारी अर्थव्यवस्था को विश्व में 5वें से तीसरें पायदान पर लाने की सबसे बड़ी कुंजी है। मोदी जी के द्वारा की गई घोषणा का क्रियान्वन आगामी 5 वर्षो में सम्भव हो सकता है, क्योंकि हमारी अर्थव्यवस्था से ऊपर के पायदान पर मात्र 2 राष्ट्र - जापान व जर्मनी ही विराजमान हैं। उपरोक्त दोनों दोनों देशों की अर्थव्यवस्था की वार्षिक वृद्धि दर मात्र 1-2 प्रतिशत ही है, अतः तृतीय पायदान पर भारत के स्थापित होने की पूर्ण सम्भावना बनी हुई है।पिछले 7 दशक में भारत की जीडीपी जो वर्ष 1947 में 2.70 लाख करोड़ थी, वो वर्ष 2023-24 तक 30...
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लोकतंत्र को कमजोर करती है अवसरवादी राजनीति-ललित गर्ग- कांग्रेस में लगातार वफादार नेताओं का पलायन जारी है, नये नामों में कांग्रेस के प्रवक्ता गौरव वल्लभ, महाराष्ट्र के जिम्मेदार एवं पूर्व मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम, बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अनिल शर्मा,  निशाना साधने वाले मुक्केबाज विजेंदर, आचार्य प्रमोद कृष्णम हैं, जिन्होंने कांग्रेस को बाय-बाय कर दी है। इन सभी ने कांग्रेस के मुद्दाविहीन होने, मोदी के विकसित भारत के एजेंडे, राहुल गांधी की अपरिपक्व राजनीति एवं कांग्रेस की सनातन-विरोधी होने को पार्टी से पलायन का कारण बताया है। कुछ भी कहे, यह राजनीति में अवसरवाद का उदाहरण है, इस तरह का बढ़ता दौर चिंताजनक है। भारत की राजनीति में दलबदल की विसंगति एवं विडम्बना आजादी के बाद से लगातार देखने को मिलती रही है। पिछले साढ़े सात दशक के भारतीय लोकतंत्र में राजनीतिक पराभव के अक्स गा...
संयुक्तराष्ट्र महासभा का खतरनाक दोहरा रवैया

संयुक्तराष्ट्र महासभा का खतरनाक दोहरा रवैया

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मृत्युंजय दीक्षितविश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में जब लोकतंत्र के महापर्व की रणभेरी बजने वाली थी तब सयुंक्तराष्ट्र महासभा में पाकिस्तान और चीन ने अपनी विकृत भारत विरोधी विचारधारा से प्रेरित, इस्लामोफोबिया के नाम पर अयोध्या व सीएए का गलत उल्लेख करते हुए एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया जो इन देशों की मानसिकता को तो दर्शाता ही है साथ ही संयुक्तराष्ट्र महासभा के दोहरे मापदंड को भी बेनकाब करता है। भारत विगत कई वर्षो से संयुक्तराष्ट्र महासभा में स्थायी सदस्यता प्राप्त करने के लिए, “वसुधैव कुटुम्बकम” की नीति के बल पर अथक प्रयास कर रहा है किंतु चीन हर बार भारत के नेतृत्व में चल रहे सयुंक्तराष्ट्र महासभा के सुधार अभियान और भारत की स्थायी सदस्यत के खिलाफ वीटो कर देता है। संयुक्तराष्ट्र महासभा में अकातंकवाद के खिलाफ लड़ाई को भी अगर कोई देश कमजोर कर रहा है तो वह चीन और पाकिस्तान की जुगलबंदी है जि...