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मोर्चे पर महिलाओं के बढ़ते कदम

मोर्चे पर महिलाओं के बढ़ते कदम

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भारत में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश ने महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन और कमांडिंग ऑफिसर के स्तर तक उठने के समान अवसर के लिए रास्ता साफ कर दिया तो उधर पाकिस्तान में पहली महिला जनरल की खबर सुर्ख़ियों में है. दुनिया में आज हर क्षेत्र में महिलायें आगे बढ़ रही है और ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कर रही हैं. भारतीय इतिहास नारी की त्याग-तपस्या की गाथाओं से भरा पड़ा है। किसी युग में महिलाएं पुरुषों से कमतर नहीं रहीं। वैदिक युग में महिलाएं युद्ध में भी भाग लेती थीं। हालांकि, मध्यकाल के पुरुषवादी समाज ने नारी को कुंठित मर्यादाओं के नाम पर चार-दीवारी में कैद कर रखने में कोई कसर नहीं छोडी, परन्तु तब भी महिलाओं ने माता जीजाबाई और रानी दुर्गावती की तरह न केवल शास्त्रों से, अपितु शस्त्रों का वरण कर राष्ट्र की एकता और संप्रभुता की रक्षा की। वर्तमान में केवल भारतीय वायुसेना ही लड़ाकू पायलट ...
अनलाॅक भी लाॅकडाउन जैसा बंदिशों भरा

अनलाॅक भी लाॅकडाउन जैसा बंदिशों भरा

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कोरोना महामारी ने हमारे जीवन के मायने ही बदल दिये है, संकट अभी भी चहूं ओर पसरा हुआ है, भले सरकार की जागरूकता, प्रयत्नों एवं योजनाओं ने जनजीवन में आशा का संचार किया हो, लेकिन इस महाव्याधि मुक्ति के लिये अभी लम्बा संघर्ष करना होगा, मानव निर्मित कारणों से जो कोरोना महासंकट हमारे सामने खड़ा है उसका समाधान भी हमंे ही खोजना होगा, उसके लिये धैर्य, संयम एवं विवेक का प्रदर्शन करना होगा। देश लॉकडाउन के नए फेज में प्रवेश कर गया है जिसे अनलॉक 2.0 कहा गया है। लॉकडाउन के चलते घरों में बंद लोग ऊब चुके हैं, उनके आर्थिक संसाधन चरचरा रहे हैं, बंदिशों को लेकर उनमें छटपटाहट है। उन्हें यह उम्मीद थी कि अनलॉक 1.0 में जितनी छूटें उन्हें मिली थीं, उसके अधिक छूटें इस दूसरे अनलॉक में भी मिलेंगी और कुल मिलाकर बंदिशें इतनी कम हो जाएंगी कि कुछ सावधानियों के साथ वे सामान्य जीवन का आनंद ले पाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं ह...
स्वामी विवेकानन्द थे भारतीयता की संजीवनी बूंटी

स्वामी विवेकानन्द थे भारतीयता की संजीवनी बूंटी

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महापुरुषों की कीर्ति किसी एक युग तक सीमित नहीं रहती। उनका मानवहितकारी चिन्तन एवं कर्म कालजयी होता है और युगों-युगों तक समाज का मार्गदर्शन करता है। स्वामी विवेकानंद हमारे ऐसे ही एक प्रकाश-स्तंभ हैं, वे भारतीय संस्कृति एवं भारतीयता के प्रखर प्रवक्ता, युगीन समस्याओं के समाधायक, अध्यात्म और विज्ञान के समन्वयक एवं आध्यात्मिक सोच के साथ पूरी दुनिया को वेदों और शास्त्रों का ज्ञान देने वाले एक महामनीषी युगपुरुष थे। जिन्होंने 4 जुलाई 1902 को महासमाधि धारण कर प्राण त्याग दिए थे। स्वामी विवेकानन्द का संन्यास एवं संतता संसार की चिन्ताओं से मुक्ति या पलायन नहीं था। वे अच्छे दार्शनिक, अध्येता, विचारक, समाज-सुधारक एवं प्राचीन परम्परा के भाष्यकार थे। काल के भाल पर कुंकुम उकेरने वाले वे सिद्धपुरुष हंै। वे नैतिक मूल्यों के विकास एवं युवा चेतना के जागरण हेतु कटिबद्ध, मानवीय मूल्यों के पुनरुत्थान के सजग ...
Regulation of NGOs necessary

Regulation of NGOs necessary

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Intelligence Bureau report indicated about misuse of Indian NGOs for anti-national agenda by foreign-contributors where it was revealed that India GDP has been adversely affected to big extent of 2-3 percent through such foreign-funded NGOs. Many NGOs are said to have been funded for cultural evasion in India. Foreign-funded NGOs spend in rupees and receive funds in dollars by sending these foreign-contributors exaggerated photos and videos of events to get huge foreign-funding. Many NGOs are tools to divert foreign-funds of individuals. It may be that some foreign powers may be funding Indian NGOs solely with aim of disruption in governance to destabilise the country. Siphoning of government-funds for NGOs run by influential ones in political and bureaucratic circles in name of their f...
झूठ इमरान का और सच बलूचिस्तान में विद्रोह का

झूठ इमरान का और सच बलूचिस्तान में विद्रोह का

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इमरान खान को अपने मुल्क में लग रही आग दिखाई नहीं दे रही है। वे समझ ही नहीं पा रहे हैं, या जानना ही नहीं चाहते कि पाकिस्तान के कब्जे की विवादित बलूचिस्तान सूबे में विद्रोह की चिंगारी भड़क चुकी है। पाकिस्तान के क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़े प्रान्त बलूचिस्तान  में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी नाम का संगठन किसी भी सूरत में पाकिस्तान से अपने बलूचिस्तान को अलग करना चाहता है। इसके लिए यह संगठन अब हिंसक रास्ते पर चल पड़ा है। पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची के स्टॉक एक्सचेंज बिल्डिंग में बीते दिनों हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी भी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने ही ली। पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अपने देश की संसद में बेशर्मी से दावा कर रहे हैं कि कराची में आतंकी घटना के पीछे भारत का हाथ है। आतंकी हमले के अगले ही दिन उन्होंने इस तरह का बिना किसी तथ्य का यह खोखला दावा कर दिया। हालांकि, उससे पह...
परमाणु परीक्षण की जगह गूंजेगी कुम्हारों के चाक की ध्वनि

परमाणु परीक्षण की जगह गूंजेगी कुम्हारों के चाक की ध्वनि

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बदलते दौर में भारत के गांवों में चल रहे परंपरागत व्यवसायों को भी नया रूप देने की जरूरत है। गांवों के परंपरागत व्यवसाय के खत्म होने की बात करना सरासर गलत है। अभी भी हम ग्रामीण व्यवसाय को थोड़ी-सी तब्दीली कर जिंदा रख सकते हैं। ग्रामीण भारत अब नई तकनीक और नई सुविधाओं से लैस हो रहा हैं। भारत के गांव बदल रहे हैं, तो इनको अपने कारोबार में थोड़ा-सा बदलाव करने की जरूरत है। नई सोच और नए प्रयोग के जरिए ग्रामीण कारोबार को जिन्दा रखकर विशेष हासिल किया जा सकता है और उसे अपनी जीविका का साधन बनाया जा सकता है। इसी दिशा में खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग ने पोखरण की एक समय सबसे प्रसिद्ध रही बर्तनों की कला की पुनःप्राप्ति तथा कुम्हारों को समाज की मुख्य धारा से फिर से जोड़ने के लिये प्रयास प्रारंभ किये हैं। कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन ने मिट्‌टी बर्तन बनाने वाले कारीगरों के सपनों को भी चकनाचूर कर दिया है। इन्होन...
सुशान्त का जाना मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा है

सुशान्त का जाना मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा है

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कोरोना वायरस के कारण मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा भी तेजी से देश में उभरकर आया है. लॉकडाउन ने लोगों की आदतें तो जरूर बदल दी हैं लेकिन एक बड़ा तबका तनाव के बीच जिंदगी जी रहा है. यह तनाव बीमारी और भविष्य की चिंता को लेकर है.कोरोना से बचने के लिए लोग घरों में तो हैं लेकिन उन्हें कहीं ना कहीं इस बीमारी की चिंता लगी रहती है और वह दिमाग के किसी कोने में मौजूद रहती है, जिसकी वजह से इंसान की सोच पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता हैलॉकडाउन ही नहीं उसके बाद की भी चिंता से लोग ग्रसित हैं क्योंकि कई लोगों के सामने रोजगार, नौकरी और वित्तीय संकट पहले ही पैदा हो चुके हैं. सुशान्त का जाना ज्यादा सॉकिंग इसलिए भी लग रहा है क्योंकि वह हमारी ही उम्र के थे। लेकिन हमारी उम्र के होने के बावजूद कामयाबी के शीर्ष पर थे। जहाँ हमारे जीवन में कैरियर और जीवन का संघर्ष लगातार जारी है, उनके जीवन का संघर्ष अलग तरह का रहा होगा शा...
कोरोना संकट और जिंदगी की जंग से घिरा मेरा परिवार

कोरोना संकट और जिंदगी की जंग से घिरा मेरा परिवार

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मानव जीवन व सभ्यता के लिए अब तक की सबसे बड़ी त्रासदी के रूप में कोरोना ने हर मनुष्य के जीवन को हिलाकर रख दिया है। पिछले कुछ दिनों में इसके दुष्परिणाम मैंने स्वयं भोगे हैं व बहुत करीब से बड़े दर्दनाक अनुभवों से गुजरा हूं। आज जब उस दुष्चक्र से निकला हूं तो लगा आप सभी मित्रों से भी अपने अनुभव साझा कर लूं ताकि आप भी समय रहते जरूरी सावधानी बरत लें। मेरे साथ मेरे परिवार में पत्नी, दो बच्चों के साथ मेरे माता-पिता व ससुर जी भी रहते हैं। तीनों बुजुर्ग ही 80 वर्ष से ऊपर के। मेरे पिताजी कुछ दिनों से गैस, सीने में दर्द व बेचैनी से परेशान थे। डॉक्टर की सलाह पर गैस से संबंधित दवाएं भी ले रहे थे। किंतु कोई राहत नहीं। पिछले सप्ताह दर्द कुछ अधिक ही बढ़ गया तो लगा चूंकि वे ह्रदय रोगी भी हैं, तो लगा ह्रदय चिकित्सक को भी दिखा लें। मैं अपने बड़े भाई के साथ उनको उनके पुराने विशेषज्ञ के पास नोएडा के एक बड़े...
इरफान की मौत पर कुछ सवाल मुसलमानों से

इरफान की मौत पर कुछ सवाल मुसलमानों से

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एक तो कोरोना वायरस के कारण फैली विश्वव्यापी हताशा और ऊपर से हिन्दी सिनेमा के दो बेहद सशक्त अभिनेताओं इरफान खान और फिर ऋषि कपूर  के संसार से कूच कर जाने ने मानो देश को शोक के महासागर में धकेल दिया है। दोनों असाधारण कलाकार थे। दोनों ने हिन्दी सिनेमा पर लगभग आधी सदी तक अपना प्रभाव छोड़ा। अगर बात इऱफान खान की करें तो वे बेहद शानदार कलाकार होने के साथ-साथ एक गहरी शख्यिसत के भी मालिक थे। वे बहुत सोच समझकर ही किसी विषय पर अपनी राय रखते थे। यूं तो वे सामान्यतः फिल्मों से इत्तर विषयों पर बोलते नहीं थे, पर बोलते थे तो उन्हें कायदे से सुना जाता था। इरफान खान बाकी सितारों से अलग थे। दरअसल वे स्टार नहीं कलाकार थे। वे  "सेकुलर " कहलाने की ख्वाहिश रखने वाले नहीं थे । उन्हें  भारत में डर भी नहीं लगता था। उन्होंने कभी "माई नेम इज़ खान" का हौव्वा भी खड़ा नहीं किया। उन्होंने अंडरवर्ल्ड के पैसे पर फलने-फूलने...