संविधान की रक्षा में न्यायपालिका कहां कर रहा है चूक ?
संविधान की रक्षा में न्यायपालिका कहां कर रहा है चूक ?
संजय सक्सेना, वरिष्ठ पत्रकार
विविधताओं से भरे भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में न्यायपालिका को संविधान का सबसे बड़ा रक्षक माना जाता है। यह न केवल कानून की व्याख्या करती है, बल्कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा भी करती है,लेकिन क्या ऐसा करते समय न्यायपालिका से कहीं न कहीं चूक हो जाती है ? या फिर जानबूझ कर अथवा अंजाने में कुछ न्यायविद किसी मुकदमे में फैसला सुनाते समय व्यक्तिगत हो जाते हैं,जिसको लेकर विरोधाभास भी हो जाता है। जबकि राष्ट्रहित और आतंकवादी घटनाओं से जुड़े मामलों में न्यायपालिका का हस्तक्षेप कई बार विवादों को जन्म देता है। नया कृषि कानून, वक्फ बोर्ड संशोधन कानून में सुप्रीम कोर्ट की अति सक्रियता इसकी बड़ी मिसाल हैं। यह हस्तक्षेप कब रक्षक की भूमिका निभाता है और कब खतरनाक साबित हो सकता है, इसको लेकर अक्सर विवाद बना रहता ह...









