Shadow

सामाजिक

मोटा अनाज और खाद्य-प्रसंस्करण उद्योग

मोटा अनाज और खाद्य-प्रसंस्करण उद्योग

EXCLUSIVE NEWS, विश्लेषण, सामाजिक
राकेश दुबे 1960 के दशक तक ज्वार, बाजरा और रागी का अंश भारतीयों के भोजन में लगभग एक-चौथाई हुआ करता था, लेकिन हरित क्रांति में धान और गेहूं  की फसल को मिली तरजीह के बाद इनका अंश कम होता चला गया। जब से मोटे अनाज का उत्पादन और खपत कम होनी शुरू हुई तब से अब तक हमारी भोजन और खुराक संबंधी आदतें पूरी तरह बदल चुकी हैं। पिछले कुछ दशकों से हम निर्णायक रूप से महीन, प्रसंस्करित, पैकेट बंद और रेडी-टू-कुक भोजन की ओर मुड़ गए हैं।अब केंद्र सरकार वापिस मोटे अनाज पर लौटने की बात कह रही है। तथ्य है कि सदियों से मोटा अनाज भारतीय भोजन का हिस्सा और खुराक रहे हैं।  अब संयुक्त राष्ट्र और भारत की केंद्रीय सरकार द्वारा साल 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष घोषित किए जाने के बाद सरकारी एजेंसियों की पुरज़ोर कोशिश रशुरू हो गई है  कि भारत को मोटा अनाज उत्पादन और निर्यात की मुख्य धुरी  बनाय...
संघ का मूल विचार स्पष्ट है, वह है हिन्दू राष्ट्र को समृद्ध करना

संघ का मूल विचार स्पष्ट है, वह है हिन्दू राष्ट्र को समृद्ध करना

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
प्रो. कुसुमलता केडिया  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हिन्दुत्व को सशक्त और समृद्ध बनाये रखने के लिये परमपूजनीय डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने की थी। समस्त हिन्दू ज्ञान परंपरा, शौर्य परंपरा, समृद्धि परंपरा और शिल्प परंपरा की स्मृति को जीवंत रखते हुये उसकी धारावाहिकता सतत प्रशस्त रखना उसका लक्ष्य है और हिन्दू राष्ट्र ही उसका उपास्य और साध्य है।   आद्य सरसंघचालक और द्वितीय सरसंघचालक के ही चित्र संघ के सभी महत्वपूर्ण आयोजनों में सम्मुख रखे जाते हैं। इन दो के ही विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मूल विचार हैं। पूज्य आद्य सरसंघचालक ने कभी कोई पुस्तक नहीं लिखी और उनके जीवनकाल में उनके वक्तव्यों का भी प्रकाशन संकलित होकर सामने नहीं आया। अतः उनके विषय में श्री ना.ह.पालकर जी द्वारा लिखित जीवनी ही मूल प्रमाण है। परमपूजनीय गुरूजी के विचारों का संकलन ‘बंच ऑफ थॉट’ (विचार नवनीत)...
भारतीय विकसित देशों की नागरिकता क्यों ले रहे हैं

भारतीय विकसित देशों की नागरिकता क्यों ले रहे हैं

BREAKING NEWS, Current Affaires, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
केंद्र सरकार ने दिनांक 9 दिसम्बर 2022 को भारतीय संसद को सूचित किया कि वर्ष 2011 से 31 अक्टोबर 2022 तक 16 लाख भारतीयों ने अन्य देशों, विशेष रूप से विकसित देशों, की नागरिकता प्राप्त कर ली है। वर्ष 2022 में 225,000 भारतीयों द्वारा अन्य देशों की नागरिकता ली गई है। इसी प्रकार, मोर्गन स्टैन्ली द्वारा वर्ष 2018 में इकोनोमिक टाइम्ज में प्रकाशित एक प्रतिवेदन में बताया है कि वर्ष 2014 से वर्ष 2018 के बीच भारत से डॉलर मिलिनायर की श्रेणी के 23,000 भारतीयों ने अन्य देशों में नागरिकता प्राप्त की।  डॉलर मिलिनायर उस व्यक्ति को कहा जाता है जिसकी सम्पत्ति 10 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक रहती है। साथ ही, ग्लोबल वेल्थ मायग्रेशन रिव्यू आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में डॉलर मिलिनायर की श्रेणी के 7,000 भारतीयों ने अन्य देशों की नागरिकता प्राप्त की है।  उक्त संख्या भारत में डॉलर मिलिनायर की कुल संख्या का 2.1 प्रतिशत ...
डॉ. वेदप्रताप वैदिकः हिन्दी का लहराया था परचम

डॉ. वेदप्रताप वैदिकः हिन्दी का लहराया था परचम

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
-ललित गर्ग- पत्रकारिता के एक महान् पुरोधा पुरुष, मजबूत कलम एवं निर्भीक वैचारिक क्रांति के सूत्रधार, उत्कृष्ट राष्ट्रवादी, हिन्दीसेवी, ‘भाषा’ के मुख्य सम्पादक, नवभारत टाइम्स के सम्पादक, डॉ. वेदप्रताप वैदिक अब हमारे बीच नहीं रहे। मंगलवार सुबह उनका निधन 78 वर्ष की उम्र में बाथरूम में गिरने की वजह से हो गया। एक संभावनाओं भरा हिन्दी पत्रकारिता का सफर ठहर गया, उनका निधन न केवल पत्रकारिता एवं हिन्दी के लिये बल्कि भारत की राष्ट्रवादी सोच के लिये एक गहरा आघात है, अपूरणीय क्षति है। वैदिक का जीवन सफर आदर्शों एवं मूल्यों की पत्रकारिता की ऊंची मीनार है। उनका निधन एक युग की समाप्ति है। वे चित्रता में मित्रता के प्रतीक थे तो गहन मानवीय चेतना के चितेरे जुझारु, निडर, साहसिक एवं प्रखर व्यक्तित्व थे। वे एक ऐसे बहुआयामी व्यक्तित्व थे, जिन्हें पत्रकारिता एवं हिन्दी का यशस्वी योद्धा माना जाता है। उनके परिवा...
बुढ़ापे में स्मृतिलोप का अंधेरा परिव्याप्त होने की आशंका

बुढ़ापे में स्मृतिलोप का अंधेरा परिव्याप्त होने की आशंका

विश्लेषण, सामाजिक, साहित्य संवाद
-ललित गर्ग- अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान सहित दुनिया भर के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों की ओर से किए गए शोध में यह बताया गया है कि आने वाले वक्त में भारत में साठ साल या उससे ज्यादा उम्र के एक करोड़ से भी अधिक लोगों के डिमेंशिया यानी स्मृतिलोप की चपेट में आने की आशंका है। घोर उपेक्षा एवं व्यवस्थित देखभाल के अभाव में बुजुर्गों में यह बीमारी तेजी से पनप रही है। भारत का बुढ़ापा एवं उम्रदराज लोगों का जीवन किस कदर परेशानियों एवं बीमारियों से घिरता जा रहा है, उससे ऐसा प्रतीत होने लगा है कि उम्र का यह पड़ाव अभिशाप से कम नहीं है। एक आदर्श एवं संतुलित समाज व्यवस्था के लिये अपेक्षित है कि वृद्धों के प्रति स्वस्थ व सकारात्मक भाव व दृष्टिकोण रखे और उन्हें वेदना, कष्ट व संताप से सुरक्षित रखने हेतु सार्थक पहल करे ताकि वे स्मृतिलोप या मतिभ्रम का भी शिकार न हो जाएं। वास्तव में भारतीय संस्कृति तो ब...
कश्मीर पर भुट्टो की निराशा

कश्मीर पर भुट्टो की निराशा

EXCLUSIVE NEWS, राष्ट्रीय, सामाजिक
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने अनजाने ही कश्मीर के सवाल पर पाकिस्तान की नाकामी को उजागर कर दिया है। वे न्यूयार्क में एक प्रेस-काॅफ्रेस को संबोधित कर रहे थे। कश्मीर का स्थायी राग अलापते-अलापते उनके मुंह से निकल गया कि कश्मीर के सवाल को अंजाम देना बहुत ‘‘ऊँची चढ़ाई’’ है। इस बात को बिलावल के नाना जुल्फिकार अली भुट्टो अब से 51 साल पहले ही समझ गए थे, जब 1972 के शिमला समझौते में उन्होंने दो-टूक शब्दों में स्वीकार किया था कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय विवाद है। द्विपक्षीय याने इस विवाद का ताल्लुक सिर्फ भारत और पाकिस्तान से है। इसमें किसी तीसरे राष्ट्र या संयुक्तराष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों को टांग अड़ाने की जरूरत नहीं है। यह वही जुल्फिकारअली भुट्टो हैं, जो कहा करते थे कि यदि हमें हजार साल भी लड़ना पड़े तो हम लड़ेंगे और कश्मीर को भारत से ...
साभार….भारत का मुसलमान किस की ओर देखकर उछल रहा है ?

साभार….भारत का मुसलमान किस की ओर देखकर उछल रहा है ?

BREAKING NEWS, TOP STORIES, सामाजिक
मुसलमान कहीं भी युद्ध की स्थिति में है ही नहीं। क्योंकि टर्की, ईरान और पाकिस्तान मात्र तीन इस्लामिक देशों के पास ही पाँच लाख से अधिक स्ट्रेंथ की सेना है। बाकी किसी के पास कोई खास ताकत नहीं है। सऊदी अरब में १९७० में विद्रोहियों ने मक्का पर कब्जा कर लिया था । तब सऊदी अरब चाहकर भी कुछ नहीं कर पाया। मक्का को मुक्त कराने के लिए सऊदी अरब को अमेरिका की सहायता लेनी पड़ी। युद्ध के खर्चे के बदले में अमेरिका ने सऊदी अरब का तेल तो ले ही लिया। साथ ही सुरक्षा का भार भी हाथ में ले लिया। सऊदी अरब समेत किसी भी इस्लामिक देश के पास कोई खास एयरफोर्स नहीं है। किसी भी इस्लामिक देश के पास बहुत ताकतवर नेवी नहीं है। सऊदी अरब का एयरपोर्ट भी अमेरिका ने बनाया है। और सुरक्षा का सारा मामला अमेरिका ने अपने पास रखा हुआ है। ऐसे में इस्लाम का केंद्र बिंदु सऊदी अरब ही जब पूरी तरह आजाद नहीं है तो फिर मुसलमान कहाँ से आजा...
महिलाओं और बच्चीयों के खिलाफ बढ़ती हिंसा, चुनौतियां और इन्हें खत्म करने के रास्ते” विषय पर सेमिनार का आयोजन

महिलाओं और बच्चीयों के खिलाफ बढ़ती हिंसा, चुनौतियां और इन्हें खत्म करने के रास्ते” विषय पर सेमिनार का आयोजन

TOP STORIES, सामाजिक
समाजसेवी संस्था दीप वेलफेयर आर्गेनाईजेशन एवम एजुकेशनल फोरम फॉर वूमेन जस्टिस एंड सोशल वेलफेयर के संयुक्त तत्वाधान में 12 मार्च 2023, रविवार को न्यू महाराष्ट्रा सदन, कस्तूरबा गांधी मार्ग पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया।इस समारोह की शुरूआत विकलांग बच्चियों द्वारा सरस्वती वंदना से किया गया। जिसके बाद दीप संस्था के अध्यक्ष श्री अजय प्रकाश जी ने अपने स्वागत भाषण के साथ सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का कृतज्ञता व्यक्त करते हुए और संस्था के कार्यो का विवरण किया ।समारोह में श्रीमती सुनीता दुग्गल , पूर्व आई आर एस ऑफिसर व सांसद लोक सभा , पंडित सुनील भराला जी,अध्यक्ष श्रम कल्याण परिषद , उत्तर प्रदेश, डॉ. अजय कुमार ( चैयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर फॉक्स कैपिटल एंड इन्वेस्टमेंट, फॉक्स रूबिकन कैपिटल पार्टनर्स, फॉक्स पेट्रोलियम ग्रुप ऑफ कंपनीज) ने मंच को शुभोषित किया। इनके साथ ही विभिन्न क्षेत्र...
उदयपुर में बने देश का पहला आर्कियोलॉजिकल मास्टर प्लान

उदयपुर में बने देश का पहला आर्कियोलॉजिकल मास्टर प्लान

राज्य, समाचार, सामाजिक
विजयमनोहरतिवारी होली के दिन मध्यप्रदेश में विदिशा जिले के उदयपुर में नंदी की एक दर्शनीय प्राचीन प्रतिमा मिट्‌टी और मलबे से बाहर आई। क्रिकेट खेलते हुए कुछ बच्चों की दृष्टि में आने के बाद उसे बाहर निकाला गया। वह स्पष्ट रूप से परमार राजाओं के समय के किसी शिव मंदिर का हिस्सा होगा, जिसे खंडित किए जाने के निशान साफ देखे जा सकते हैं। वह भूकंप में तबाह नहीं हुआ। वह हमलावरों के निशान हैं, जिससे उदयपुर लगातार घायल होकर भी बचा रह गया। कुछ ही घंटों में शासन ने जानकारी मिलते ही उदयपुर के बारह खंभा स्मारक के पास नंदी की प्रतिमा को सुरक्षित निकाल लिया। प्रश्न यह है कि उदयपुर जैसे प्राचीन नगरों का अब क्या किया जाए, जो सदियों की समृद्ध विरासत को अपने भीतर संजोए हुए हैं और यदाकदा नई मूर्तियों, शिलालेखों और मंदिरों के अवशेष सामने आते रहते हैं? क्या इन्हें ऐसे ही लावारिस पड़े रहने दिया जाए या इन्हें नए...
क्या राहुल गांधी ने देश से गद्दारी की..?

क्या राहुल गांधी ने देश से गद्दारी की..?

TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल ब्रिटेन के दौरे पर गए राहुल गांधी ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में भारत विरोधी बयानों की झड़ी लगा दी। वे वहीं नहीं रुके बल्कि - उन्होंने अपनी हर प्रेस कान्फ्रेंस / कार्यक्रम में भारत की संवैधानिक संस्थाओं व भारत विरोधी हमले करते रहे।और भारत की न्यायपालिका का अपमान करते हुए उसे कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने विदेश में भारत के संवैधानिक संस्थानों पर भी हमला बोला। और चीन का गुणगान करते हुए वे चीन के प्रति प्यार ज़ाहिर करते हुए नज़र आए।‌ जबकि इसके पूर्व भी उन्होंने अपना चीनी प्रेम दिखलाते हुए — भारत व चीनी सेना के मध्य हुए गलवान संघर्ष में भी उन्होंने भारतीय सेना पर प्रश्नचिन्ह उठाए थे। तो वहीं भारत को राज्यों के संघ के रूप में बताते हुए 'राज्यों को बार्गेनिंग के अधिकार' पर बातें की। जो भारत के संवैधानिक ढाँचे की बिल्कुल विरोधी बाते हैं। वे प्रेस कांफ्रेंस में भारत के ल...