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सामाजिक

भेदभाव नहीं, समन्वय एवं सौहार्द ही जरूरत है

भेदभाव नहीं, समन्वय एवं सौहार्द ही जरूरत है

राज्य, सामाजिक
- ललित गर्ग- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सबका साथ सबका विकास का नारा दिया था। वे समय-समय पर इस जरूरत को रेखांकित करते हैं और इसी के मुताबिक योजनाएं तैयार करने का प्रयास भी करते रहे हैं। अभी मुंबई में दाउदी बोहरा समुदाय के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेकर जिस तरह उन्होंने इस समुदाय के साथ अपने दशकों पुराने संबंध का उल्लेख किया, उससे एक बार फिर यही जाहिर हुआ कि वे मुसलिम समुदाय से भी उतना ही जुड़ाव महसूस करते हैं, जितना दूसरे समुदायों से। वे बार-बार रेखांकित कर चुके हैं कि देश का सर्वांगीण विकास तब तक संभव नहीं है, जब तक मुसलिम समुदाय को भी साथ लेकर न चला जाए। पिछले कुछ वक्त से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत भी मुस्लिम बुद्धिजीवियों से लगातार मुलाकात कर रहे हैं। वह इमामों से मिलने मस्जिद भी गए और मदरसे जाकर बच्चों से मुलाकात की। संघ इसे सामान्य संवाद बता रहा है। मगर,...
क्यों डरें महर्षि वेलेंटाइन से?

क्यों डरें महर्षि वेलेंटाइन से?

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डॉ वेद प्रताप वैदिक (भारत सरकार के पशु-कल्याण बोर्ड ने पहले घोषणा की कि ‘वेलेंटाइन डे’ को ‘गाय को गले लगाओ दिवस’ के तौर पर मनाया जाए। जब उसकी इस घोषणा की जबर्दस्त मजाक उड़ी तो उसने इसे वापस ले लिया। ‘वेलेंटाइन डे’ पर लिखा गया, देश के प्रसिद्ध विचारक डाॅ. वैदिक का यह ऐतिहासिक लेख पाठकों की सेवा में प्रस्तुत है।) सेंट वेलेन्टाइन डे' का विरोध अगर इसलिए किया जाता है कि वह प्रेम-दिवस है तो इससे बढ़कर अभारतीयता क्या हो सकती है? प्रेम का, यौन का, काम का जो मुक़ाम भारत में है, हिन्दू धर्म में है, हमारी परम्परा में है, वह दुनिया में कहीं नहीं है। धर्म शास्त्रों में जो पुरुषार्थ-चतुष्टय बताया गया है--धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष-- उसमें काम का महत्व स्वयंसिद्ध है। काम ही सृष्टि का मूल है। अगर काम न हो तो सृष्टि कैसे होगी? काम के बिना धर्म का पालन नहीं हो सकता। इसीलिए काम पर रचे गए ग्रन्थ को कामशास्...
अतुल्य भारत

अतुल्य भारत

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यह अद्भुत देश जो प्रकाश के पुंज से घिरा हुआ है इसका नाम" भारत" है। ईश्वर की सृष्टि रचना की तरह यह देश विविधता में एकता का दुनिया में अकेला अनूठा संगम है। जहां हर पांच कोस पर पानी , भाषा और रहन सहन के तौर तरीके बदल जाते हैं। कुछ रह जाता है तो सबमें प्रेम , देश, समाज और प्राणी मात्र के प्रति। वर्तमान में काल परिवर्तन के कारण कुछ बदलाव आया ज़रूर है। ऐसे समाज को शब्दों और उनके अर्थ को लेकर तोड़ने का प्रयास करने वालों को आप क्या उपमा देंगे । सब व्यक्ति विशेष पर निर्भर करेगा। "जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन तैसी " वाले तर्ज पर...लेकिन इसी बहाने.........आज कुछ चर्चा शब्दों और उनके अर्थों पर हो जाए। ताकि जो ऐसे लोग जो राजनीतिक और निज स्वार्थ की पूर्ति लिए समाज और राष्ट्र को विखंडित करना चाहते हैं, उनकी धूर्तता समझ में आ सके ....1. राजस्थान में बेटी, बहू, महिला को बाई जी कहना सम्मान देना ...
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हैं स्वयं सहायता समूह

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हैं स्वयं सहायता समूह

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स्वयं सहायता समूह दृष्टिकोण ग्रामीण विकास के लिए एक सक्षम, सशक्त और नीचे से ऊपर का दृष्टिकोण है जिसने विकासशील देशों में कम आय वाले परिवारों को काफी आर्थिक और गैर-आर्थिक बाह्यता प्रदान की हैं। स्वयं सहायता समूह दृष्टिकोण को गरीबी का मुकाबला करने के लिए एक स्थायी उपकरण के रूप में सराहा जा रहा है, जो लाभ के लिए दृष्टिकोण का संयोजन है जो आत्मनिर्भर है, और गरीबी उन्मूलन पर ध्यान केंद्रित करता है जो कम आय वाले परिवारों को सशक्त बनाता है। यह तेजी से विकासशील देशों में सरकार के लिए विकासात्मक प्राथमिकताओं का प्रयोग करने का साधन बनता जा रहा है। -डॉ सत्यवान सौरभ एक स्वयं सहायता समूह एक गाँव-आधारित वित्तीय मध्यस्थता समिति है, जिसमें आम तौर पर 10-20 स्थानीय महिला या पुरुष शामिल होते हैं। जब औपचारिक वित्तीय प्रणाली जरूरतमंदों की मदद करने में विफल हो जाती है, तो छोटे समूह सूक्ष्म पैमाने पर पैसे ...
मदनी : इस्लाम जन्मा भारत में ?

मदनी : इस्लाम जन्मा भारत में ?

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मुखिया महमूद मदनी के बयान पर इधर हंगामा मचा हुआ है। हमारे टीवी चैनलों पर आजकल यही सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। मदनी के इस कथन का कोई एतिहासिक प्रमाण नहीं है कि ‘‘इस्लाम का जन्म-स्थान अरब देश नहीं, भारत है। पहले नवी का जन्म भारत में ही हुआ है। यह मुसलमानों की मातृभूमि है। इस्लाम को विदेशी मजहब मानना एतिहासिक दृष्टि से गलत है और बिल्कुल निराधार है।’’ ये वाक्य मदनी ने पढ़कर सुनाए थे, जमीयत के 34 वें अधिवेशन में। यों तो मदनी अपने आप में उत्तम वक्ता हैं लेकिन यह समझ में नहीं आया कि ये विवादास्पद वाक्य उन्होंने पढ़कर क्यों सुनाए? हो सकता है कि जैसे हमारे बड़े नेताओं के भाषण उनके अफसर लिखकर दे देते हैं और वे उन्हें श्रोताओं के सामने पढ़ डालते हैं, वैसे ही यह गलती मदनी से भी हो गई है। लेकिन इस गलती के पीछे छिपी भावना को समझने की कोशिश की जाए तो लगेगा क...
मौलाना मदनी ने तुर्की की मदद करने के लिए भारत की खूब तारीफ की और इजराइल से संबंध ना रखने की बात कही

मौलाना मदनी ने तुर्की की मदद करने के लिए भारत की खूब तारीफ की और इजराइल से संबंध ना रखने की बात कही

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उन्होंने कहा कि मैं भारत सरकार से यही अपील करूंगा कि वह इजराइल के साथ अपने संबंधों की समीक्षा करें और इजरायल के साथ संबंध तोड़ कर मुस्लिम देशों के साथ बेहतर संबंध रखें सोचिए इस कौम की सोच कितनी घटिया है तुर्की ने आज तक किसी भी मंच पर भारत का साथ नहीं है तुर्की के मन में आज भी वही टीस है कि जब अंग्रेजों ने अविभाजित भारत में भारतीय सेना की बहादुरी से ऑटोमन साम्राज्य का तख्तापलट कर दिया था और लाल टोपी लगाए तुर्कों को जोकर बना दिया था यह तुर्क यानी ऑटोमन साम्राज्य शान से कहता था कि वह पैगंबर के बनाए गए नक्शे के मुताबिक पूरी दुनिया में इस्लाम का राज लाएगा और फिर ऑटोमन की वहशी दरिंदा सेना कई दिशाओं में निकल पड़ी और उनका काम फसलों को जलाना लोगों का कत्ल करना था ब्रिटेन आयरलैंड छोड़कर लगभग पूरा यूरोप इनके कब्जे में आ गया अफ्रीका में यह हॉर्न ऑफ अफ्रीका तक बढ़ गए थे यानी इजिप्ट लीबिया मोर...
भारतीयों को मॉरीशस क्यों प्रिय है?

भारतीयों को मॉरीशस क्यों प्रिय है?

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*विनीत नारायणअफ्रीकी महाद्वीप के दक्षिण-पूर्व तट से से लगभग 900 किलोमीटर दूर हिंद महासागर के तट पर और मेडागास्करके पूर्व में स्थित द्वीपीय देश मॉरीशस भारतीयों के लिए काफ़ी आकर्षक स्थान है। अपने झील, झरनों, हरे भरेजंगलों व प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर मॉरीशस हर नवविवाहित जोड़े के लिए बरसों से हनीमून मनाने का स्थानबन हुआ है। परंतु क्या आप जानते हैं कि इसके अलावा भी एक कारण है जिसके लिये मॉरीशस भारतीयों को बहुतप्रिय है।सुंदर पर्यटक स्थल होने के कारण मॉरीशस में केवल हनीमून मनाने वाले पर्यटक ही नहीं आते। बल्कि ‘टैक्स हैवन’के नाम से मशहूर इस छोटे से द्वीप पर हर उस व्यक्ति की नज़र बनी रहती है जो किसी न किसी तरह से भारत मेंआयकर की चोरी करना चाहता है। चूँकि भारत और मॉरीशस के बीच हुए ‘दोहरे करारोपण संधि’ के तहतभारतीय कंपनियां मॉरीशस की किसी कंपनी से समझौता कर भारत में एफडीआई के द्वारा निवेश करवा लेती...
शराब की नहीं दूध की नीति बनाइए, सरकार !

शराब की नहीं दूध की नीति बनाइए, सरकार !

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मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती दूध और ख़ास कर गाय के दूध की पैरवी करते हुए शराब के विरोध में आंदोलन चला रही है। उमा भारती की पार्टी राज्य और केंद्र दोनों जगह सरकार में है। दोनों ही सरकार दूध कर दाम बढ़ा चुकी है और भी बढ़ने के आसार हैं। भाजपा गौवंश सेवा की वकालत करने वाला राजनीतिक दल है, अजीब बात है उसकी सरकारें शराब की नीति बनाती है और ज़ोर-शोर से लागू करती है। देश में दूध उत्पादन [आपरेशन फ़्ल्ड छोड़कर] की आज तक कोई नीति नहीं बनी, सारी सरकारों को शराब से मतलब है दूध और उसकी क़ीमतों को थामने में किसी की रुचि नहीं है।दूध के दामों में लगातार वृद्धि आम लोगों की परेशानी बढ़ाने वाली है। मूल रूप से शाकाहारी भारतीयों के खाने-पीने में दूध की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। छोटे बच्चे से लेकर वृद्धों तक के लिये दूध अपरिहार्य आहार ही है। स्वस्थ से लेकर बीमार तक , लोगों का जीवन बिना दूध के अधूरा...
पंचायतों पर पहरा, ग्रामीण विकास ठहरा

पंचायतों पर पहरा, ग्रामीण विकास ठहरा

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राज्य सरकार स्थानीय नौकरशाही के माध्यम से स्थानीय सरकारों को बाध्य करती हैं। उदाहरण के लिए, सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं के अनुमोदन के लिए अक्सर ग्रामीण विकास विभाग के स्थानीय अधिकारियों से तकनीकी स्वीकृति और प्रशासनिक अनुमोदन की आवश्यकता होती है, सरपंचों के लिए एक थकाऊ प्रक्रिया जिसके लिए सरकारी कार्यालयों में बार-बार जाने की आवश्यकता होती है। स्थानीय कर्मचारियों पर प्रशासनिक नियंत्रण रखने की सरपंचों की क्षमता सीमित है। कई राज्यों में, पंचायत को रिपोर्ट करने वाले स्थानीय पदाधिकारियों, जैसे ग्राम चौकीदार या सफाई कर्मचारी, की भर्ती जिला या ब्लॉक स्तर पर की जाती है। अक्सर सरपंच के पास इन स्थानीय स्तर के कर्मचारियों को बर्खास्त करने की शक्ति भी नहीं होती है। -डॉ सत्यवान सौरभ आजकल हमें ऐसी ख़बरें सुनंने और पढ़ने को मिल रही है कि देश के अमुक गांव के सरपंच ने कर्ज के चलते आत्महत्या कर...
वैलेंटाइन डे एक गम्भीर चुनौती

वैलेंटाइन डे एक गम्भीर चुनौती

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प्रेम वह है जो जीव में आसक्ति न स्थापित होने दे, प्रेम वह है जो प्राणी मात्र के कल्याण की कामना करें। प्रेम वह है जहां शांति की स्थापना हो, प्रेम वह है जहां मन, बुद्धि, हृदय में सात्विकता हो, प्रेम वह है जहां कोई पर्दा न हो, प्रेम वह है जहां सत्यता को स्वीकारने में कोई संकोच न हो, प्रेम वह है जहाँ कोई ऊंच-नीच, भेद-भाव, छुआछूत आदि का कलंक न हो, प्रेम वह है जहाँ आनन्द हो, और अन्ततः प्रेम वह है जहां मोक्ष की कामना हो। फरवरी माह की सात से चौदह तारीख के बीच मनाये जाने वाले वेलेंटाइन डे से आज कोई भी अनभिज्ञ नहीं है। खासकर इस दिवस के लिए युवा पीढ़ी पूरे साल लालायित और बेसब्र दिखती है। मानों हमने वेलेंटाइन डे को एक परंपरा का रूप देकर इसका निर्वहन करना अपना परम कर्त्तव्य समझ लिया है। आज की युवा पीढ़ी जिस वेलेंटाइन डे को प्रेम दिवस की संज्ञा देकर मना रही है उन्हें वेलेंटाइन डे की हकीकत से रू-ब-रू क...