Shadow

सामाजिक

यौन रोग विशेषज्ञ नहीं हैं डा. पी. के. जैन क्लीनिक्स के डॉक्टर पी. के. जैन,पियूष जैन और संचय जैन : आयुष विभाग ने किया खुलासा.

यौन रोग विशेषज्ञ नहीं हैं डा. पी. के. जैन क्लीनिक्स के डॉक्टर पी. के. जैन,पियूष जैन और संचय जैन : आयुष विभाग ने किया खुलासा.

राज्य, सामाजिक
यौन रोग विशेषज्ञ नहीं हैं डा. पी. के. जैन क्लीनिक्स के डॉक्टर पी. के. जैन,पियूष जैन और संचय जैन : आयुष विभाग ने किया खुलासा.  ( मीडिया रिलीज़ ) लखनऊ / सोमवार , 31 अक्टूबर 2022 …………………..  यूपी की राजधानी लखनऊ में गैरकानूनी रूप से स्वयंभू रूप से यौन रोग विशेषज्ञ बन बैठे आयुर्वेदिक डॉक्टर पी. के. जैन,पियूष जैन और संचय जैन द्वारा लखनऊ की लाटूश रोड पर बांसमंडी चौराहे के आगे होटल आशा के पास डा. पी. के. जैन’s क्लीनिक प्राइवेट लिमिटेड तथा हुसैनगंज मेट्रो स्टेशन गेट संख्या 2 के सामने होटल मेरा मन के पास डा. पी. के. जैन’s महराणा क्लीनिक प्राइवेट लिमिटेड नाम के आयुर्वेदिक क्लीनिक्स को यौन रोग ( सेक्स ) क्लीनिक्स के रूप में अवैधानिक रूप से प्रचारित-प्रसारित करने के खिलाफ सूबे के आयुष विभाग और लखनऊ के पुलिस महकमे ने कड़ा रुख अख्तियार किया है. स्थानीय राजाजीपुरम निवासी कंसलटेंट इंजीनियर संजय...
कश्मीरी हिंदुओ पर विभत्स हिंसा, बर्बरता की ये कहानी*

कश्मीरी हिंदुओ पर विभत्स हिंसा, बर्बरता की ये कहानी*

TOP STORIES, राज्य, सामाजिक
कश्मीरी हिंदुओ पर विभत्स हिंसा, बर्बरता की ये कहानी*====================आज फारुख अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती दहाड़े मार मार कर रो रहे हैं कि मोदी ने कश्मीर को बर्बाद कर दिया । कश्मीरी नोंजवानों पर सेना गोली बरसा रही है। हमारे लोगो को हिन्दू- मुस्लिम में बांटा जा रहा है । भाई चारा खत्म कर दिया इस सरकार ने । फारुख अब्दुल्ला जी दिलीप कुमार कौल वह शख्स हैं जिन्होंने बांदीपोरा,कश्मीर के एक चौराहे पर 25.6.1990 को गिरिजा टिक्कू की आरे से काटी गई सिर से लेकर 'नीचे' तक दो हिस्सों में बटी देह देखी थी । पोस्टमार्टम के बाद गिरिजा टिक्कू की देह को फिर से चमड़े के धागे से सिला गया था उम्र थी सिर्फ 23 वर्ष ज़िंदा शरीर को दो हिस्सों में काटने से पहले गिरिजा को हिन्दू होने की सज़ा दी गई थी, दर्जनों जेहादियों ने उनके साथ बर्बर बलात्कार भी किया था ।कश्मीरी पंडितों को ''काफिर हिन्दू' जा रहा है'' कहकर राह च...

क्या गर्भपात नैतिक रूप से उचित है?

BREAKING NEWS, TOP STORIES, सामाजिक
क्या गर्भपात नैतिक रूप से उचित है? लैंगिक समानता के लिए गर्भपात का अधिकार महत्वपूर्ण है। अलग-अलग महिलाओं के लिए अपनी पूरी क्षमता हासिल करने के लिए गर्भपात का अधिकार महत्वपूर्ण है। गर्भपात पर प्रतिबंध लगाने से महिलाओं को उन अवैध तरीकों का उपयोग करने के लिए मजबूर किया जाता है जो अधिक हानिकारक हो सकते हैं। लेकिन दूसरी ओर जीवन के अधिकार को हमेशा किसी व्यक्ति के समानता के अधिकार या खुद को नियंत्रित करने के अधिकार से अधिक महत्वपूर्ण होना चाहिए। इसका दुरुपयोग किया जा सकता है।> -डॉ सत्यवान सौरभ>>> गर्भावस्था की समाप्ति या भ्रूण हत्या नैतिक और नैतिक रूप से चुनौतीपूर्ण है और शायद प्रतिबंधात्मक गर्भपात कानूनों वाले देशों में इसे अवैध माना जाता है। नैतिक दुविधाएं जैसे कि महिलाओं की स्वायत्तता के अधिकार, भ्रूण के व्यक्तित्व के अधिकार और समाज के लिए डॉक्टर के नैतिक दायित्वों के साथ संघर्ष कर सकते हैं। ...

रहने लायक नहीं रहेगी यह धरा यदि प्रकृति का शोषण इसी रफ्तार से चलता रहा

TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
रहने लायक नहीं रहेगी यह धरा यदि प्रकृति का शोषण इसी रफ्तार से चलता रहा भारतीय हिंदू सनातन संस्कृति हमें यह सिखाती है कि आर्थिक विकास के लिए प्रकृति का दोहन करना चाहिए न कि शोषण। परंतु, आर्थिक विकास की अंधी दौड़ में पूरे विश्व में आज प्रकृति का शोषण किया जा रहा है। प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग कर प्रकृति से अपनी आवश्यक आवश्यकताओं की पूर्ति बहुत ही आसानी से की जा सकती है परंतु दुर्भाग्य से आवश्यकता से अधिक वस्तुओं के उपयोग एवं इन वस्तुओं के संग्रहण के चलते प्राकृतिक संसाधनों के शोषण करने के लिए जैसे मजबूर हो गए हैं। ऐसा कहा जाता है कि जिस गति से विकसित देशों द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का शोषण किया जा रहा है, उसी गति से यदि विकासशील एवं अविकसित देश भी प्राकृतिक संसाधनों का शोषण करने लगे तो इसके लिए केवल एक धरा से काम चलने वाला नहीं है बल्कि शीघ्र ही हमें इस प्रकार की चार धराओं ...
खुशियों और सौगातों का त्योहार है दीपावली

खुशियों और सौगातों का त्योहार है दीपावली

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, संस्कृति और अध्यात्म, सामाजिक
खुशियों और सौगातों का त्योहार है दीपावली बाकी सारे त्योहारों का धार्मिक महत्व है पर दीपावली का एक व्यावसायिक महत्व है। सोना और चांदी की बिक्री भी इसी सीजन में सबसे ज्यादा होती है और कपड़ों की भी। इस मौके पर उपहार और भेंटें देने के कारण भी तमाम सारे गिफ्ट आइटमों की बिक्री भी बढ़ जाती है। यानी अकेले दीपावली का बाजार अपने देश में करीब अरबों का है। भारतीय उपभोक्ता का असली बाजार दरअसल दीपावली है। ऐसा त्योहार क्यों न हर एक के लिए खुशियां और सौगात लेकर आए। दीपावली की यह रौनक और यह उत्साह बना रहना चाहिए। -प्रियंका सौरभ देश में "रोशनी का त्योहार" दिवाली के रूप में जाना जाता है। दीवाली, जिसे कभी-कभी दिवाली के रूप में लिखा जाता है, एक हिंदू, सिख और जैन धार्मिक उत्सव है जो अंधेरे के 13 वें दिन शुरू होता है। चन्द्रमा का आधा चक्र अश्विना और चन्द्र मास कार्तिक की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को ...
सुरक्षा के साथ मानवता का धर्म निभा रही कांस्टेबल सोनिया  

सुरक्षा के साथ मानवता का धर्म निभा रही कांस्टेबल सोनिया  

विश्लेषण, सामाजिक
सुरक्षा के साथ मानवता का धर्म निभा रही कांस्टेबल सोनिया   फर्ज आखिर फर्ज ही होता है पुलिस की ड्यूटी हो या समाज में फैले तमाम बुराइयों को दूर करने का फर्ज एक पुलिसकर्मी बेहतर ढंग से निभा सकता है। वो भी महिला पुलिसकर्मी। इसका काबिले गौर उदाहरण बनी है सोनिया जोशी जो अभी उत्तराखंड पुलिस में कार्यरत हैं। अपनी ड्यूटी के साथ आम जनता की सेवा के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी होकर अपना कर्तव्य निभा रही है सोनिया जोशी। महिला सिपाही वर्दी के साथ-साथ समाज में फैली बुराइयों को मिटाने के लिए प्रयास कर रही है। उन्होंने पुलिस में कठिन और प्रतिकूल स्थितियों में न  सिर्फ अपने जीवन को संभाला। बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का विषय बनी। आज वह समाज में अलग-अलग कार्य में सक्रिय हैं। बता दें कि इस मुहिम का झंडा हाथ में लेकर काम आसान नहीं था। ऐसे काम आसान भी नहीं होते सोनिया ने मेहनत और काबिलियत के दम पर स...
हिंदू पर्व दिवाली से कैसे जुड़ी पूरी दुनिया

हिंदू पर्व दिवाली से कैसे जुड़ी पूरी दुनिया

BREAKING NEWS, TOP STORIES, सामाजिक
हिंदू पर्व दिवाली से कैसे जुड़ी पूरी दुनिया आर.के. सिन्हा भारत से हजारों किलोमीटर दूर बसे भारतवंशी और भारत में रहने वाले करोड़ों गैर-हिन्दू भी प्रकाशोत्सव से अपने को जोड़ते हैं। दिवाली हिन्दू पर्व होते हुए अपने आप में व्यापक अर्थ लिए हैं। यह तो अंधकार से प्रकाश की तरफ लेकर जाने वाला त्योहार है। अंधकार व्यापक है, रोशनी की अपेक्षा। क्योंकि अंधेरा अधिक काल तक व्याप्त रहता है, अधिक समय तक रहता है। दिन के पीछे भी अंधेरा है, रात का। दिन के आगे भी अंधेरा है, रात का। भारत से बाहर बसे करीब ढाई करोड़ भारतीय मूल के लोग संसार के अलग-अलग देशों में प्रकाश पर्व को मनाते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन 24 अक्टूबर को व्हाइट हाउस में दीपावली मनाएंगे, जबकि उनके पूर्ववर्ती डोनाल्ड ट्रंप की अपने फ्लोरिडा स्थित मार-ए-लागो रिजॉर्ट में 21 अक्टूबर को यह त्योह...
क्या है Hunger index का सच?

क्या है Hunger index का सच?

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, सामाजिक
क्या है Hunger index का सच? देश में सकारात्मक माहौल बन रहा होता है, देश नई नई उपलब्धि पा रहा होता है..... विपक्ष के पास कुछ बोलने के लिए नही होता..... फिर एकाएक Hunger index की रिपोर्ट आती है. यह बताया जाता है कि अपने देश में अधिकांश लोग गरीब हैं, उनके पास खाने को अन्न नही है..... और जैसे है यह रिपोर्ट आती है... विपक्ष हमलावर हो जाता है... दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर हर दूसरा इंसान सवाल करने लगता है..... देसी तो देसी विदेशी पपलू भी हल्ला मचाने लगते हैं. ऐसी स्थिति में अधिकांश लोगों को समझ नहीं आता कि इसका Counter कैसे करें... क्योंकि counter तो वो करेगा जिसे जानकारी होगी.... हमारे यहाँ लोग तो यह रिपोर्ट आते ही ग्लानि भाव में डूब जाते हैं. खैर... बात करते हैं Facts की Global Hunger Index है क्या??? यह एक जर्मन NGO"Welthungerhilfe" द्वारा बनाई गयी रिपोर्ट है..... यह NGO जर्मन...
What to make out of Muslim-Bhagwat meet?*

What to make out of Muslim-Bhagwat meet?*

सामाजिक
What to make out of Muslim-Bhagwat meet?*By Balbir Punj What to make out of the recent meeting between RSS Chief Mohan Bhagwat, and some distinguished Muslims ? While the traditional critics of the organisation are busy attributing motives and smelling something fishy in this initiative , several Hindutva sympathisers are confused - wondering whether RSS is turning ‘soft ‘ to Islamic communalism. Then of course there’s a obvious question : Can such an exercise bring an end to angst that defines Hindu- Muslim relations ? In his subsequent Vijayadashami address at Nagpur, Bhagwat again reached out to Muslims, saying “misinformation” had been spread about Sangh. There is scare-mongering, Bhagwat said . “ Because of this fear, some members of the minority community have been meeting us ...
खाद्य पदार्थों के अपव्यय एवं नुक्सान को रोकना आज की आवश्यक आवश्यकता

खाद्य पदार्थों के अपव्यय एवं नुक्सान को रोकना आज की आवश्यक आवश्यकता

राज्य, विश्लेषण, सामाजिक
खाद्य पदार्थों के अपव्यय एवं नुक्सान को रोकना आज की आवश्यक आवश्यकता इस पृथ्वी पर रहने वाले मानवों की भलाई के लिए खाद्य पदार्थों के अपव्यय एवं नुक्सान को रोका जाना आज की आवश्यक आवश्यकता बन गया है। पूरे विश्व में ही आज खाद्य पदार्थों की बर्बादी बड़े स्तर पर हो रही है। इससे नागरिकों की खाद्य सुरक्षा पर भी एक गम्भीर प्रश्न चिन्ह लग गया है। यूनाइटेड नेशन्स के पर्यावरण कार्यक्रम के एक अनुमान के अनुसार पूरे विश्व में 14 प्रतिशत खाद्य पदार्थों का नुक्सान खाद्य पदार्थों को उत्पत्ति स्थल से खुदरा बिक्री स्थल तक पहुंचाने में हो जाता है। इसके अलावा, अन्य 17 प्रतिशत खाद्य पदार्थों का नुक्सान इन्हें खुदरा बिक्री स्थल से उपभोक्ता के स्थल तक पहुंचाने में हो जाता है। खाद्य पदार्थों के इतने बड़े नुक्सान का वातावरण में उत्सर्जित हो रही कुल गैसों में 8 से 10 प्रतिशत तक का योगदान रहता है। आज खाद्य पदार्थों...