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17 सितंबर को होगा 75 दिवसीय सागर स्वच्छता अभियान का समापन

17 सितंबर को होगा 75 दिवसीय सागर स्वच्छता अभियान का समापन

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आजादी के अमृत वर्ष के अवसर पर 05 जुलाई को शुरू हुए 75 दिवसीय सागर स्वच्छता अभियान का समापन 17 सितंबर को ‘अंतरराष्ट्रीय तटीय स्वच्छता दिवस’ के अवसर पर हो रहा है। महासागरों की स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करने और उसके बारे में जागरूकता के प्रचार-प्रसार के लिए शुरू किये गए ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ नामक इस अभियान के समापन से जुड़े कार्यक्रम एक साथ देश के 75 समुद्र तटों पर आयोजित किए जाएंगे। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह मुंबई में स्वयं समापन कार्यक्रम का नेतृत्व करेंगे। देश की 7500 किलोमीटर लंबी तटरेखा से कचरा हटाने के लिए शुरू किए गए इस अभियान को विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों का समर्थन मिला है...
तो शहरों के कूड़े के ढेर बनेंगे अब ग्रीन जोन

तो शहरों के कूड़े के ढेर बनेंगे अब ग्रीन जोन

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 तो शहरों के कूड़े के ढेर बनेंगे अब ग्रीन जोन या कूड़े के पहाड़ों से शहरों को मिलेगा छुटकारा आर.के. सिन्हा आप जब राजधानी दिल्ली से गाजीपुर के रास्ते उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करते हैं तब कचरे का काला स्याह डरावना पहाड़ दिखाई देता है। इसे जो शख्स पहली बार देखता है उसे तो यकीन ही नहीं होता कि दरअसल ये कचरे का पहाड़ है। आज के दिन आपको देश के प्रायः सभी शहरों में कचरे के ढेर दिखाई दे जाएंगे।  ये उस भारत की कतई बेहतर तस्वीर पेश नहीं करते जो दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और जिसके आईटी सेक्टर की ताकत का सारा संसार लोहा मान चुका है। उस भारत के शहरों में कूड़े के ढेर लगे हों, यह तो शर्म की बात कही जाएगी। देखिए, छोटे-बड़े सभी शहरों और महानगरों को कचरे से मुक्ति तो दिलावानी ही होगी। कुछ साल पहले तक तो सिर्फ पर्यटन स्थल नहीं, सभी सार्वजनिक स्...
दादा-दादी की भव्यता को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है।

दादा-दादी की भव्यता को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है।

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दादा-दादी की भव्यता को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। दादा-दादी बच्चों के सबसे अच्छे दोस्त होते हैं, जिनके साथ वे अपने रहस्यों को खुलकर साझा कर सकते हैं। दादा-दादी भगवान का एक उपहार है जिसे हमें संजोना चाहिए। हम आज की दुनिया में अपने दादा-दादी के मूल्य को भूल गए हैं क्योंकि हम सभी को एकल परिवारों की जरूरत है। हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि वे ईश्वर के अमूल्य उपहार हैं जो हमें दूसरों का सम्मान करना और भविष्य में एक सभ्य जीवन जीना सिखाते हैं। दादा-दादी जिम्मेदार व्यक्ति होते हैं जो हमें भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बनना सिखाते हैं। हमारे जीवन में उनकी उपस्थिति के बिना, जीवन उतना शांत नहीं होता।-डॉ सत्यवान सौरभ दादा-दादी अपने पोते-पोतियों के लिए वरदान हैं। वे अपने साथ वर्षों का अनुभव लेकर आते हैं जो उन्हें महत्वपूर्ण निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में ...
आत्महत्या की घटनाओं का बढ़ना बदनुमा दाग

आत्महत्या की घटनाओं का बढ़ना बदनुमा दाग

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विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस- 10 सितंबर, 2022आत्महत्या की घटनाओं का बढ़ना बदनुमा दाग  ललित गर्ग बढ़ती आत्महत्या की घटनाएं एक ऐसा बदनुमा दाग है जो हमारे तमाम विकास एवं शिक्षित होने के दावों को खोखला करता है। आत्महत्या शब्द जीवन से पलायन का डरावना सत्य है जो दिल को दहलाता है, डराता है, खौफ पैदा करता है, दर्द देता है। इसका दंश वे झेलते हैं जिनका कोई अपना आत्महत्या कर चला जाता है, उनके प्रियजन, रिश्तेदार एवं मित्र तो दुःखी होते ही हैं, सम्पूर्ण मानवता भी आहत एवं शर्मसार होती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में भारत में 1.39 लाख लोगों ने आत्महत्या की, जिनमें से लगभग 45 फीसदी लोग तनाव, अवसाद, बायपोलर डिसऑर्डर, सिजोफ्रेनिया जैसी समस्याओं का सामना कर रहे थे। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि आत्महत्या के प्रमुख कारणों में तनाव, हिंसा, अवसाद, निराशा, नकारात्मकता सहित अन्य मानसिक समस्याएं, गंभीर रोगों के च...
समुद्र में भारत का डंका*

समुद्र में भारत का डंका*

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समुद्र में भारत का डंका* *डाॅ. वेदप्रताप वैदिक* भारत की नौसेना ने आइएनएस विक्रांत नामक विमानवाहक पोत को समुद्र में उतारकर सारी दुनिया में भारत की शक्ति का डंका बजा दिया है। भारत के पास पहले भी एक विमानवाहक पोत था लेकिन वह ब्रिटेन से लिया हुआ था लेकिन यह विमानवाहक पोत खुद भारत का अपना बनाया हुआ है। इस समय ऐसे पोतों का निर्माण गिनती के आधा दर्जन देश ही कर पाते हैं। उन्हें सारी दुनिया महाशक्ति राष्ट्र ही कहती है। भारत के इस विक्रांत ने उसे अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी की तरह महाशक्ति राष्ट्रों की श्रेणी में ला खड़ा किया है। यह उपलब्धि उतनी ही बड़ी है, जितनी अटलबिहारी वाजपेयी के जमाने में हुई परमाणु विस्फोट की थी लेकिन इसमें और उसमें इतना फर्क है कि पोखरन के उस विस्फोट के समय लगभग सभी परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बुरी तरह से बौखला गए थे और पाकिस्तान भी भारत की नकल पर उतारु ह...
अंधेरी जिन्दगियों में रोशनी के लिये नेत्रदान करें

अंधेरी जिन्दगियों में रोशनी के लिये नेत्रदान करें

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अंधेरी जिन्दगियों में रोशनी के लिये नेत्रदान करें -ललित गर्ग- देश भर में हर साल 25 अगस्त से 8 सितम्बर तक मनाए जाने वाले नेत्रदान पखवाड़े का मकसद यही है कि लोगों में नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियां दूर हो एवं नेत्रदान के लिये लोगों को प्रोत्साहित किया जाये। किसी व्यक्ति के जीवन में नेत्रदान के महत्व को समझने के साथ ही नेत्रदान करने के लिये आम इंसान को प्रोत्साहित करने के लिये सरकारी संगठनों, सार्वजनिक संस्थानों और दूसरे व्यवसायों से संबंधित लोगों द्वारा हर वर्ष यह पखवाड़ा मनाया जाता है। इंसान की सम्पत्ति का कोई मतलब नहीं अगर उसे बांटा और उपयोग में नहीं लाया जाए, चाहे वे शरीर के अंग ही क्यों न हो। इस दृष्टि से नेत्रदान एक महान् दान है, जो हमें स्वर्ग-पथ की ओर अग्रसर करता है। ऐसा दानदाता समाज, सृष्टि एवं परमेश्वर के प्रति अपना कर्त्तव्य पालन करता है। किसी के द्वारा दिये गये नेत्र से किसी को जीव...
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने शिक्षक दिवस के अवसर पर एक नई पहल ‘पीएम श्री स्कूल’ की घोषणा की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने शिक्षक दिवस के अवसर पर एक नई पहल ‘पीएम श्री स्कूल’ की घोषणा की

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने शिक्षक दिवस के अवसर पर एक नई पहल ‘पीएम श्री स्कूल’ की घोषणा की राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक नई पहल  ‘पीएम श्री स्कूल्‍स (पीएम स्कूल्‍स फॉर राइजिंग इंडिया)’ की घोषणा की। यह देश भर में 14500 से भी अधिक स्कूलों को उन्नत और विकसित करने के लिए एक नई केंद्र प्रायोजित योजना होगी जिसके तहत केंद्र सरकार/राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकार/स्थानीय निकायों द्वारा प्रबंधित स्कूलों में से चयनित मौजूदा स्कूलों को मजबूत बनाया जाएगा। पीएम श्री स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सभी घटकों या विशेषताओं का समावेश होगा और ये अनुकरणीय स्कूलों के रूप में कार्य करेंगे और इसके साथ ही अपने आसपास के अन्य स्कूलों का भी मार्गदर्शन करेंगे। इन स्कूलों का उद्देश्य न केवल गुणात्मक शिक्षण, शिक्षा और संज्ञानात्मक या बौद्धिक विकास करना होगा...
जब रिश्ते हैं टूटते, होते विफल विधान। गुरुवर तब सम्बल बने, होते बड़े महान।

जब रिश्ते हैं टूटते, होते विफल विधान। गुरुवर तब सम्बल बने, होते बड़े महान।

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जब रिश्ते हैं टूटते, होते विफल विधान। गुरुवर तब सम्बल बने, होते बड़े महान।।बच्चों के विकास में, शिक्षकों की आदर्श भूमिका सही मूल्यों और गुणों के प्रवर्तक और प्रेरक की होनी चाहिए। इस प्रकार, छात्रों को ज्ञान सीधे चम्मच खिलाने के बजाय, उन्हें बच्चों में पूछताछ, तर्कसंगतता की भावना विकसित करने का प्रयास करना चाहिए, ताकि वे अपने दम पर, जुनून के साथ सीखने के लिए सशक्त महसूस करें। साथ ही, शिक्षकों को अच्छे नैतिक मूल्यों जैसे सत्य, ईमानदारी, अनुशासन, नम्रता, धार्मिक सहिष्णुता, लिंग समानता आदि को बच्चों में विकसित करने का प्रयास करना चाहिए ताकि अच्छे इंसानों की नींव रखी जा सके।  यह हमारे समाज का कड़वा सच है कि कुछ शिक्षकों में वास्तव में पढ़ाने के लिए जुनून और ज्ञान नहीं है, ऐसे कई उदाहरण हैं जैसे बिहार के स्कूलों में क्या हो रहा है, अगर शिक्षक में शिक्षण की गुणवत्ता की कमी है तो हम छात्रों से क्य...
पंच से पक्षकार

पंच से पक्षकार

सामाजिक, साहित्य संवाद
पंच से पक्षकार           हरिप्रसाद और रामप्रसाद दोनों सगे भाई थे। उम्र के आखिरी पड़ाव तक दोनों के रिश्ते ठीक-ठाक थे। दोनों ने आपसी सहमति से रामनगर चौराहे वाली अपनी पैतृक जमीन पर दुकान बनाने का सोचा, ताकि उससे जो आय हो उससे उनका जीवन सुचारू रूप से चल सके।       दुकान का काम चल ही रहा था तभी हरिप्रसाद और रामप्रसाद के बीच कुछ बातों को लेकर विवाद हो गया और उनमें बातचीत होना बंद हो गया। जिससे उनकी दुकान का काम भी रुक गया। दोनों एक दूसरे पर खूब आरोप-प्रत्यारोप भी लगाने लगे। बढ़ते विवाद को देख उसे सुलझाने के लिए उनके पड़ोसियों ने मोहल्ले के कुछ लोगों को जुटाकर एक पंचायत बुलाई, परन्तु पंचायत के सामने भी दोनों आपसी विवाद को खत्म करने के लिए तैयार नहीं हो रहे थे। बल्कि एक दूसरे पर एक से बढ़कर एक आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे थे। पंचायत ने भी मामले को बढ़ते देख उन्हें कुछ दिनों के लिए एक-दू...
चीनी मुसलमानों की दुर्दशा

चीनी मुसलमानों की दुर्दशा

सामाजिक
*चीनी मुसलमानों की दुर्दशा* *डाॅ. वेदप्रताप वैदिक* संयुक्तराष्ट्र संघ की मानव अधिकार परिषद ने चीन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। उसकी ताजा रपट में उसने बताया है कि चीन के शिन च्यांग (सिंक्यांग) प्रांत के लगभग दस लाख उइगरों को यातना शिविरों में बंद करके रखा हुआ है। ये उइगर मुसलमान हैं। ये दिखने में भी चीनियों से अलग दिखते हैं। उनका सिंक्यांग प्रांत हमारे लद्दाख से लगा हुआ है। सैकड़ों सालों से पैदल रास्ते चीन जानेवाले और वहां से आनेवाले व्यापारी, विद्वान, यात्रीगण इसी रास्ते से आया जाया करते थे। उइगरों का यह क्षेत्र सदियों से चीनी वर्चस्व के बाहर रहा है। कम्युनिस्ट शासन की स्थापना होने के पहले इस उइगर-क्षेत्र में आजादी का आंदोलन चलता रहा है लेकिन जब से चीन में कम्युनिस्ट शासन स्थापित हुआ है, उइगर मुसलमानों को बड़ी बेरहमी से दबाया गया है। कुछ उइगर नेताओं और व्यापारियों को अपना हथियार बनाकर ...