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एडमिशन में लूट के खेल इंजीनियरिंग कालेजों के

एडमिशन में लूट के खेल इंजीनियरिंग कालेजों के

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एडमिशन में लूट के खेल इंजीनियरिंग कालेजों के यह दुःखद है कि देश के अनेक प्रतिष्ठित प्राइवेट इंजीनियरिंग कालेज व यूनिवर्सिटी स्नातक कोर्सेज़ में प्रवेश के नाम पर मोटी केपिटेशन फ़ीस ले रहीं हैं। डायलॉग इंडिया को मिली जानकारी के अनुसार आइ पी यूनिवर्सिटी से जुड़े अनेक संस्थान दस लाख से लेकर पच्चीस लाख रुपए तक माँग रहे हैं तो एकेटीयू से जुड़े कुछ कोलेज दो से दस लाख रुपए तक माँग रहे हैं। पूरे देश में अनेक निजी यूनिवर्सिटी व कालेजों के भी यही हाल हैं। अनेक जगह मेरिट व मानक़ो को ताक पर रखकर केपिटेशन फ़ीस देने वालों को प्रवेश दे रहे है और प्रतिभाशाली मध्यम व गरीब वर्ग के विद्यार्थी प्रवेश के लिए टक्कर मार रहे हैं। सम्बंधित राज्य सरकारों, एआईसीटीई व शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार को इस लूट की व्यापक जाँचकर दोषियों के विरुद्ध सख़्त क़ानूनी कार्यवाही करनी चाहिए। ...
कम से कम ‘गलत’ और ‘अपराध’ का साथ तो न दें

कम से कम ‘गलत’ और ‘अपराध’ का साथ तो न दें

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कम से कम ‘गलत’ और ‘अपराध’ का साथ तो न दें - ललित गर्ग -कुछ ऐसे व्यक्ति सभी जगह होते हैं जिनसे हम असहमत हो सकते हैं, पर जिन्हें नजरअन्दाज करना मुश्किल होता है। ऐसे ही सिद्धान्त एवं मूल्यहीन व्यक्तियों की विडम्बनाओं से समाज एवं राष्ट्र परेशान है, लेकिन विडम्बना इससे बड़ी यह है कि हम ऐसे व्यक्तियों की गलतियों पर उनका बहिष्कार करने की बजाय उन्हें महानायक बनाने की कुचेष्ठा करते हैं। उनके समर्थन में उतरते हैं, उन्हें सम्मानित किया जाता है। ऐसा ही श्रीकांत त्यागी नामक एक कथित राजनीतिक कार्यकर्त्ता के साथ त्यागी समाज ने किया, उनकी गलती पर, एक महिला के साथ बदसलूकी पर उनको चेताने, उनका सामाजिक बहिष्कार करने की बजाय उनको हीरो बनाकर प्रस्तुत किया गया है। यह एक सभ्य, संस्कारी एवं आदर्श समाज की संरचना की एक विसंगति के रूप में सामने आया है। श्रीकांत त्यागी का मामला राजनीतिक संरक्षण में पनप रहे दादा एवं ...
सोनाली फोगाट का मर्डर या हार्ट अटैक देश में राजनीतिक हत्याओं का दौर नया नहीं है?

सोनाली फोगाट का मर्डर या हार्ट अटैक देश में राजनीतिक हत्याओं का दौर नया नहीं है?

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सोनाली फोगाट का मर्डर या हार्ट अटैक देश में राजनीतिक हत्याओं का दौर नया नहीं है? (अब्राहम लिंकन, जॉन एफ कैनेडी, इंदिरा गांधी और बेनजीर भुट्टो की जीवन ज्योति उनके राजनीतिक जीवन के चरम पर बुझा दी गई। आजादी के बाद से राजनीतिक हत्याओं का दौर भारत के राजनीतिक जीवन को भी लहूलुहान करता आया है। भारत को आजादी मिले छह महीने भी नहीं हुए थे कि महात्मा गांधी की हत्या ने दुनिया को हिला दिया। वर्ष 1953 में कश्मीर की शेष भारत के साथ एकता का आंदोलन करने वाले डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की श्रीनगर की जेल में रहस्यमय मृत्यु हो गई थी। वंशवादिता में राजनीति का कमान मिलना वंशपरंपरा के अधीन रहता है तो दूसरी ओर संपर्कवादिता के जरिए किसी बडे राजनेता के संपर्क में आने से राजनीतिक कमान प्राप्त करने की अभिलाषा पूर्ण हो जाती है। कहावत है कि "राजनीति एक गंदा खेल है"। )   - सत्यवान 'सौरभ' हरियाणा की बीजेपी न...
आख़िर क्यों एचआईवी के साथ जीवित लोग एक महीने से निरंतर आंदोलनरत हैं?

आख़िर क्यों एचआईवी के साथ जीवित लोग एक महीने से निरंतर आंदोलनरत हैं?

सामाजिक
आख़िर क्यों एचआईवी के साथ जीवित लोग एक महीने से निरंतर आंदोलनरत हैं? बॉबी रमाकांत – सीएनएस एक महीने से अधिक हो गया है और एचआईवी के साथ जीवित लोग, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के कार्यालय के बाहर अनिश्चितक़ालीन धरने पर हैं। 21 जुलाई 2022 से यह लोग दिन-रात यहाँ निरंतर शांतिपूर्वक ढंग से बैठे हुए हैं। इनकी माँग स्पष्ट है कि एचआईवी दवाओं की कमी दूर हो, और नियमित एक-महीने की खुराक हर एचआईवी के साथ जीवित व्यक्ति को मिले जब वह अस्पताल दवा लेने जाए। भारत सरकार की 2018 मार्गनिर्देशिका भी यही कहती है कि जो लोग एचआईवी दवाओं का स्थायी रूप से सेवन कर रहे हैं उनको 3 महीने की खुराक दे दी जाए। पर अनेक प्रदेशों में सिर्फ़ 7-10 दिनों तक की खुराक मिल रही है। कहीं-कहीं तो वयस्क को बच्चे की और बच्चों को वयस्क की दवा देनी पड़ रही है क्योंकि दवाओं की कमी है। भारत सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन क...
कमी कानून में है या गलतियां कपड़ों में ?

कमी कानून में है या गलतियां कपड़ों में ?

विश्लेषण, सामाजिक
कमी कानून में है या गलतियां कपड़ों में ? आपने पहले भी स्त्रियों के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न तथा अन्य ज्यादतियों के मामले में उल्टे उसी को कुलटा या चरित्रहीन बता देने का प्रसंग तो सुना ही होगा, किन्तु आज के  दौर में  मूल्यों की जमीन कितनी कमजोर है इसका अंदाजा इस वाकिये से सहज ही लगा सकते हैं कि अदालत में जज की कुर्सी पर बैठा हुआ शख़्स पुरुष वर्चस्ववादी मानसिकता पर मुहर लगा रहा है। हम ये मान भी लें कि पहली बार कोर्ट ने सच बोलने का साहस किया है, लेकिन छोटी बच्चियों के साथ जब कोई ग़लत करता है तब कौन से कपड़ों को जिम्मेदार ठहराया जायेगा? अदालत के फैसले कुछ हद तक ठीक है मगर ऐसे फैसले यौन शोषण को बढ़ावा देते है।  उत्पीड़न सरासर ग़लत है यह अधिकार किसी भी पुरुष को नहीं, पर एक प्रश्न है, क्या आजकल लड़कियां जो कपड़े पहन रही है वो सही है? लड़कियों की ऐसे नंगे कपड़े पर पाबंदी लगनी चाहिए।...
बेरोजगारी में नंबर वन हरियाणा: युवाओं के साथ खेलती सरकार, क्यों नहीं हो रही भर्तियां?

बेरोजगारी में नंबर वन हरियाणा: युवाओं के साथ खेलती सरकार, क्यों नहीं हो रही भर्तियां?

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बेरोजगारी में नंबर वन हरियाणा: युवाओं के साथ खेलती सरकार, क्यों नहीं हो रही भर्तियां? अगर सरकार की मंशा ही है तो आखिर क्यों राज्य में लाखों पदों के खाली होने के बावजूद यहां के औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग में आईटीआई  इंस्ट्रक्टर के पदों पर भर्ती नहीं होती? शिक्षकों के खाली पदों को क्यों नहीं भरा जाता? एचएसआईआईडीसी एवं पुलिस  के चयनित उम्मीदवारों को जॉइनिंग क्यों नहीं दी जाती? सरकार को इन बातों का युवाओं को जवाब देना चाहिए। इन सबके अलावा हजारों पद ग्रुप डी के और ग्रुप सी श्रेणी के खाली पड़े हैं और हरियाणा के करोड़ों युवा दिन रात मेहनत कर इन की तैयारियां कर रहे हैं।  सरकार क्यों उनका एग्जाम लेकर तुरंत इन भर्तियों को पूरा करती? क्यों कोर्ट और कर्मचारी चयन आयोग के बीच बार-बार इन भर्तियों को उलझा कर रखा जाता है? और युवाओं को पेंडुलम बनाकर रख दिया...
इंटरनेट ऑफ थिंग्स प्रणाली की परफॉर्मेंस बढ़ाने के लिए नया तंत्र

इंटरनेट ऑफ थिंग्स प्रणाली की परफॉर्मेंस बढ़ाने के लिए नया तंत्र

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इंटरनेट ऑफ थिंग्स प्रणाली की परफॉर्मेंस बढ़ाने के लिए नया तंत्र   नई दिल्ली, 18 अगस्त (इंडिया साइंस वायर): इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) प्रणालियों में इंटरनेट के माध्यम से वस्तुओं और प्रणालियों के बीच डेटा प्रसारित किया जाता है। इस प्रकार डेटा ट्रांसमिशन और प्रबंधन को वर्तमान में अलग पारिस्थितिक तंत्र में पैक किया जाता है। उदाहरण के लिए, एक उपकरण से संचालित किसी ऑपरेटिंग सिस्टम के भीतर काम करने वाली आईओटी प्रणालियां अन्य ऑपरेटिंग सिस्टम द्वारा प्रबंधित उपकरणों के साथ क्रॉस-टॉक नहीं कर सकते हैं। भारतीय शोधकर्ताओं ने IoT उपकरणों और अनुप्रयोगों से जुड़े डेटा संग्रह और ट्रांसमिशन की क्षमता बढ़ाने के लिए नया आर्किटेक्चर और एल्गोरिद्म विकसित किया है, जो इस तरह की चुनौतियों से निपटने में मददगार हो सकता है। यह अध्ययन, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहा...
रुश्दी पर हमला, किताब का जवाब किताब से दिया जाये

रुश्दी पर हमला, किताब का जवाब किताब से दिया जाये

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रुश्दी पर हमला, किताब का जवाब किताब से दिया जाये अथवा भारत को क्यों चाहते हैं रुश्दी आर.के. सिन्हा अगर आप कभी हिमाचल प्रदेश के बेहद खूबसूरत शहर सोलन में घूमने के लिये जायें तो आपको वहां कोई स्थानीय शख्स बता ही देगा कि यहां पर मशहूर लेखक सलमान रुश्दी का भी बंगला है। इसे उनके पिता अनीस अहमद ने बनवाया था। उसे लेने के लिये “सेटेनिक वर्सेज” तथा “मिडनाइट चिल्ड्रन” जैसी बहुचर्चित कृतियों के लेखक सलमान रुश्दी ने कानूनी जंग लड़ी थी और अंत में विजयी भी रहे थे। सलमान रुश्दी को हम मोटा-मोटी एक प्रख्यात लेखक के तौर पर ही जानते हैं। वैसे वे भारतीय मूल के लेखक हैं जो इंग्लैंड-अमेरिका में रहते हैं। उनके पिता दिल्ली वाले थे और रुश्दी का जन्म मुंबई में हुआ था। इसलिये उन पर हाल ही में न्यूयार्क में हुये जानलेवा हमले को किसी भी सच्चे भारतीय द्वारा नजरअंदाज करना मुश्किल है। अफसोस तो यह है कि हमारे...
कोलाहाल में भी गूंजती थी राकेश झुनझुनवाला की आवाज

कोलाहाल में भी गूंजती थी राकेश झुनझुनवाला की आवाज

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कोलाहाल में भी राकेश झुनझुनवाला की आवाज को साफतौर पर सुना जा सकता था। उनकी आवाज में विश्वास और अनुभव को महसूस किया जा सकता था। वे जब किसी से मिलते तो ये ही कहते थे- ‘क्या हाल है आपका ? ‘क्या कर सकता हूं मैं आपके लिए?  ‘मार्केट किस तरफ जायेगी…’ जाहिर है, वे जब मार्केट का जिक्र करते थे तब वे शेयर बाजार की चाल के बारे में अपने करीबियों से भी उनकी राय पूछते थे। हां, पर वे किसी भी कंपनी के स्टॉक में निवेश करते हुये अपने शेयर मार्केट के अनुभव का ही सहारा लेते थे। उनके आकस्मिक निधन से देश के उन लाखों निवेशकों का एक तरह से विश्वस्त मार्गदर्शक विदा हो गया है, जिसे देखकर वे हजारों निवेशक भी शेयर मार्केट में निवेश करके अच्छा पैसा कमाने लगाने थे। वे बेशक आज के दिन के देश की शेयर मार्केट के सबसे बड़े ब्रांड एंबेसेडर थे। भारत के शेयर बाजार का जिक्र उनकी चर्चा किये बगैर अधूरा ही रहता था। राकेश झुनझुनव...
राजमार्गों का निर्माण: लक्ष्य पूर्ति के लिए गुणवत्ता से न हो समझौता

राजमार्गों का निर्माण: लक्ष्य पूर्ति के लिए गुणवत्ता से न हो समझौता

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*रजनीश कपूर राज्य सभा में एक सवाल के जवाब में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का एक विडीओ काफ़ी चर्चा में था। प्रश्न के उत्तर में मंत्री जी ने ऐसे कई दावे कर दिए जो यदि समय पर सच हुए तो हर भारतीय का सीना फूला नहीं समाएगा। परंतु सवाल उठता है कि अपने लक्ष्य की पूर्ति के लिए नेताओं द्वारा किए गए ऐसे वादों और दावों में कहीं निर्माण की गुणवत्ता के साथ समझौता तो नहीं हो रहा? पिछले दिनों हुई वर्षा के कारण हिमाचल प्रदेश व अन्य पहाड़ी राज्यों में हुए भूस्खलन की खबरें आपने ज़रूर पढ़ी होंगी। आए दिन ऐसी दुर्घटनाओं में जान-माल का काफ़ी नुक़सान होता है। पहाड़ों पर होने वाली इन दुर्घटनाओं को कुदरत का क़हर कह कर पल्ला झाड़ लिया जाता है। लेकिन सत्य इसके विपरीत है। प्रकृति के साथ छेड़-छाड़ हमें बहुत महंगी पड़ रही है, इस बात के सैंकड़ों उदाहरण मिल जाएँगे। ऐसी दुर्घटनाओं के पीछे ...