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नागरिक विमानन महानिदेशालय के दोहरे मापदंड

नागरिक विमानन महानिदेशालय के दोहरे मापदंड

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नागरिक विमानन महानिदेशालय के दोहरे मापदंड *रजनीश कपूर पिछले दिनों रांची के एयरपोर्ट पर जब एक दिव्यांग किशोर के साथ इंडिगो एयरलाइन द्वारा भेदभाव की खबर सामने आई तो मामले ने तूल पकड़ा। इसके बाद भारत के नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने तुरंत जाँच के आदेश देते हुए कहा कि दोषियों बख्शा नहीं जाएगा। जाँच के बाद भारत सरकार के नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) एक आदेश के ज़रिए यह साफ़ कर दिया कि “इंडिगो के कर्मचारी यात्रियों के साथ सही तरीके से पेश नहीं आए और इस तरह उन्होंने लागू नियमों के अनुरूप काम नहीं किया।” इसी के चलते एयरलाइन को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया, जिसमें उसे बताना होगा कि नियमों के अनुरूप काम नहीं करने पर उसके खिलाफ उचित कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए। एयरलाइन द्वारा दिव्यांग के साथ ऐसा बरताव दुखद है। परंतु डीजीसीए द्वारा इस मामले में फुर्ती दिखाना केवल इसलिए ...
लाउडस्पीकर एक धार्मिक इस्तेमाल और अदालती आदेश

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लाउडस्पीकर एक धार्मिक इस्तेमाल और अदालती आदेश यूपी हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद कि लाउडस्पीकर पर अजान देना मौलिक अधिकार न हीं है , इस मसले पर मचा कोहराम शान्ति हो जाना चाहिए | आशा की जाती है कि आगे स भी फैसले का पालन करते हुए विवाद को आगे नहीं ले जायेंगे लेकिन वर्तमान माहौल में लगता नहीं कि बात यहीं थम जाएगी क्यूंकि यदि प्रतिवादियों की बात थामने की ही मंशा हो ती तो आज कानून व्यवस्था के लिए विकट खतरा नहीं पैदा हो गया होता | लाउडस्पीकर पर अजान को ले कर बुद्धिजीवियों के बीच जहाँ बहस छिड़ी है वहीँ साम्प्रदायिक अलगाव और धारदार करने के लिए दोनों समुदायों के संगठनों ने कमर कस ली है | अभी कर्नाटक में दोनों समुदायों के बीच बढ़ती कलह के रोकथाम का कोई उपाय भी नहीं हो पाया था कि लाउडस्पीकर से अजान का विवाद महाराष्ट्र की सीमायें पार कर सारे देश में फैलने लगा है | लाउडस्पीकर पर अजान को ले कर व...
फग्गन सिंह कुलस्ते प्रभावी राजनेता एवं आदिवासी उन्नायक

फग्गन सिंह कुलस्ते प्रभावी राजनेता एवं आदिवासी उन्नायक

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फग्गन सिंह कुलस्ते प्रभावी राजनेता एवं आदिवासी उन्नायक -ललित गर्ग - भारतीय राजनीति में सादगी, कर्मठता, ईमानदारी एवं राजनीतिक कौशल से अपनी जगह बनाने वाले एवं आदिवासी जनजीवन के लिये उजाला बनने वाले फग्गन सिंह कुलस्ते वर्तमान राजनीति के एक प्रभावी एवं सक्षम राजनेता है। वे अपनी प्रभावी एवं शालीन भूमिका से देश के आदिवासी जन-जीवन के उत्थान एवं उन्नयन की एक बड़ी उम्मीद बने हैं। कुलस्ते एक ऐसे प्रभावी, कठोर, जुझारु, चमत्कारी एवं राजनीति व्यक्तित्व हैं जिन्होंने एक बार नहीं, बल्कि अनेक बार सांसद बनकर अपने राजनीतिक वजूद, कौशल एवं आमजनता पर अपनी पकड़ का परिचय दिया है। वे धैर्य, लगन, आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प, राजनीतिक कौशल के साथ खुद को बुलन्द रखते हैं, जिससेे उनके राजनीतिक रास्ते से बाधाएं हटती ही है और संभावनाओं का उजाला होता ही है। चुनौतीभरे रास्तों में समूचे राष्ट्र में आदिवासियों के लिये उजाले ...
नर्सिंग मानव समाज को देखभाल और स्नेह के बंधन से बांधती है।

नर्सिंग मानव समाज को देखभाल और स्नेह के बंधन से बांधती है।

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नर्सिंग मानव समाज को देखभाल और स्नेह के बंधन से बांधती है। -प्रियंका 'सौरभ' अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस प्रतिवर्ष 12 मई को मनाया जाता है। 12 मई को इस दिन को मनाने के लिए चुना गया था क्योंकि यह आधुनिक नर्सिंग के संस्थापक दार्शनिक फ्लोरेंस नाइटिंगेल की जयंती है। नर्सिंग मानव समाज को देखभाल और स्नेह के बंधन से बांधती है। नर्सिंग देखभाल का आह्वान है, जो मार्मिक कहानियों और चुनौतियों का एक पूल प्रदान करता है। नर्सिंग का दायरा केवल अस्पताल के अलावा अब हर जगह विस्तारित हुआ है। नर्सें इस व्यापक दुनिया में सबसे कीमती चीज- 'मानव जीवन' से निपटती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 2022 लीड टू लीड - नर्सिंग में निवेश करें और वैश्विक स्वास्थ्य को सुरक्षित करने के अधिकारों का सम्मान करने के वर्ष के रूप में नामित किया है। दुनिया के सभी स्वास्थ्य कर्मियों में आधे से अधिक नर्सें हैं। यह पूरे न...
सूना-सूना लग रहा, बिन पेड़ों के गाँव

सूना-सूना लग रहा, बिन पेड़ों के गाँव

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सूना-सूना लग रहा, बिन पेड़ों के गाँव । पंछी उड़े प्रदेश को, बांधे अपने पाँव ।। -सत्यवान 'सौरभ' पक्षियों को पर्यावरण की स्थिति के सबसे महत्वपूर्ण संकेतकों में से एक माना जाता है। क्योंकि वे आवास परिवर्तन के प्रति संवेदनशील हैं और पक्षी पारिस्थितिकीविद् के पसंदीदा उपकरण हैं। पक्षियों की आबादी में परिवर्तन अक्सर पर्यावरणीय समस्याओं का पहला संकेत होता है। चाहे कृषि उत्पादन, वन्य जीवन, पानी या पर्यटन के लिए पारिस्थितिक तंत्र का प्रबंधन किया जाए, सफलता को पक्षियों के स्वास्थ्य से मापा जा सकता है। पक्षियों की संख्या में गिरावट हमें बताती है कि हम आवास विखंडन और विनाश, प्रदूषण और कीटनाशकों, प्रचलित प्रजातियों और कई अन्य प्रभावों के माध्यम से पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बदल रहे हर रोज ही, हैं मौसम के रूप । सर्दी के मौसम हुई, गर्मी जैसी धूप ।। सूनी बगिया देखकर, ‘तितली है खामोश’ । ज...
परिवारों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस

परिवारों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस

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(15 मई - परिवारों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस) टूट रहे परिवार हैं, बदल रहे मनभाव । प्रेम जताते ग़ैर से, अपनों से अलगाव ।। ---------------------------------------- (भौतिकवादी युग में एक-दूसरे की सुख-सुविधाओं की प्रतिस्पर्धा ने मन के रिश्तों को झुलसा दिया है. कच्चे से पक्के होते घरों की ऊँची दीवारों ने आपसी वार्तालाप को लुप्त कर दिया है. पत्थर होते हर आंगन में फ़ूट-कलह का नंगा नाच हो रहा है. आपसी मतभेदों ने गहरे मन भेद कर दिए है. बड़े-बुजुर्गों की अच्छी शिक्षाओं के अभाव में घरों में छोटे रिश्तों को ताक पर रखकर निर्णय लेने लगे है.  फलस्वरूप आज परिजन ही अपनों को काटने पर तुले है. एक तरफ सुख में पडोसी हलवा चाट रहें है तो दुःख अकेले भोगने पड़ रहें है. हमें ये सोचना -समझना होगा कि अगर हम सार्थक जीवन जीना चाहते है तो हमें परिवार की महत्ता समझनी होगी और आपसी तकरारों को छोड़कर परिवार के साथ खड़ा होना होग...
हिंसा नहीं आध्यात्म के बल पर बने हिंदू राष्ट्र

हिंसा नहीं आध्यात्म के बल पर बने हिंदू राष्ट्र

संस्कृति और अध्यात्म, सामाजिक, साहित्य संवाद
हिंसा नहीं आध्यात्म के बल पर बने हिंदू राष्ट्र विनीत नारायण पिछले दिनों हरिद्वार में जो विवादास्पद और बहुचर्चित हिंदू धर्म संसद हुई थी उसके आयोजक स्वामी प्रबोधानंद गिरी जी से पिछले हफ़्ते वृंदावन में लम्बी चर्चा हुई। चर्चा का विषय था भारत हिंदू राष्ट्र कैसे बने? इस चर्चा में अन्य कई संत भी उपस्थित थे। चर्चा के बिंदु वही थे जो पिछले हफ़्ते इसी कॉलम में मैंने लिखे थे और जो प्रातः स्मरणीय विरक्त संत श्री वामदेव जी महाराज के लेख पर आधारित थे। लगभग ऐसे ही विचार गत 35 वर्षों में मैं अपने लेखों में भी प्रकाशित करता रहा हूँ। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि भारत की सनातन वैदिक संस्कृति कम से कम दस हज़ार वर्ष पुरानी है। जिसमें मानव समाज को शेष प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करके जीवन जीने की कला बताई गई है। बाक़ी हर सम्प्रदाय गत ढाई हज़ार वर्षों में पनपा है। इसलिए उसके ज्ञान और चेतना का स्रोत वैदिक ...
अल्कोहल से होने वाले लिवर रोग भारत में हमेशा एडवांस्ड लिवर रोग का सबसे बड़ा कारण

अल्कोहल से होने वाले लिवर रोग भारत में हमेशा एडवांस्ड लिवर रोग का सबसे बड़ा कारण

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अल्कोहल से होने वाले लिवर रोग भारत में हमेशा एडवांस्ड लिवर रोग का सबसे बड़ा कारण डॉ. मानव वधावन अल्कोहलिक लिवर डिजीज (एएलडी) भारत में सिरोसिस का सबसे बड़ा कारण है। कई वजहों से महिलाओं को इससे ज्यादा नुकसान होता है। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के शरीर में अल्कोहल की मात्रा ज्यादा रह जाती है। साथ ही पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अल्कोहल की गंदगी दूर करने वाले एंजाइम का स्तर पर कम होता है। एक अनुमान के मुताबिक, आधी मात्रा में अल्कोहल सेवन करने वाली महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले लिवर क्षतिग्रस्त होने की संभावना दोगुनी होती है। हालांकि अल्कोहल का सेवन बंद कर देने या कम कर देने से यह नुकसान रोका जा सकता है। महिलाओं में अल्कोहलिक लिवर रोग अधिक होता है और बड़े पैमाने पर उनकी डायग्नोसिस भी नहीं हो पाती है। अल्कोहल का सेवन कम करने, स्वस्थ खानपान रखने और नियमित व्यायाम करने से महिलाएं कई तरह ...
हाई स्क्रीन टाइम से स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है

हाई स्क्रीन टाइम से स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है

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हाई स्क्रीन टाइम से स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है डा. विपुल गुप्ता भारत में स्ट्रोक के मौजूदा बोझ के अलावा, कोविड महामारी ने विश्व स्तर पर एक नई महामारी को जन्म दिया है-डिजिटल स्क्रीन की लत। लॉकडाउन से लेकर अभी तक आम व्यक्ति स्क्रीन पर जितना वक्त गुज़ारता है, वह उतनी देर निष्क्रीय होता है, इसलिए निष्क्रीयता और बढ़ता स्क्रीन टाइम एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। अध्ध्यनों के अनुसार, डिजिटल स्क्रीन के इस्तेमाल का समय हमारे जीवनकाल पर सीधा असर डालता है। अध्ध्यन के अनुसार, एक घंटा डिजिटल स्क्रीन का इस्तेमाल हमारी जिंदगी से 22 मिनट कम कर देता है। स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल हार्ट अटैक, स्ट्रोक और कैंसर का कारण भी बन सकता है। एक अनुमान के अनुसार हर 40 सेकंड में से कोई न कोई व्यक्ति स्ट्रोक से पीडि़त होता है और विश्व स्तर पर हर चार मिनट में एक व्यक्ति स्ट्रोक से मर जाता है। जबकि स्...
अगली पीढ़ी के कम्प्यूटर उपकरण डिजाइन करने की नई तकनीक

अगली पीढ़ी के कम्प्यूटर उपकरण डिजाइन करने की नई तकनीक

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अगली पीढ़ी के कम्प्यूटर उपकरण डिजाइन करने की नई तकनीक नई दिल्ली, 12 मई (इंडिया साइंस वायर): भविष्य की कम्प्यूटिंग आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वर्तमान में प्रचलित मल्टीकोर प्रोसेसर की कंप्यूटिंग क्षमता में सुधार की आवश्यकता है। विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती अत्याधुनिक कम्प्यूटेशनल माँग को देखते हुए एप्लिकेशन-विशिष्ट प्रोसेसर के साथ-साथ अधिक कुशल एवं त्वरित रिस्पॉन्स क्षमता से लैस उपकरणों का विकास कम्प्यूटिंग उद्योग की एक प्रमुख जरूरत है। भारतीय शोधकर्ताओं ने तेज और सुरक्षित एकीकृत सर्किट (ICs) के डिजाइन के लिए नई प्रौद्योगिकी विकसित की है, जो अगली पीढ़ी के उन्नत कम्प्यूटिंग उपकरणों के निर्माण में उपयोगी हो सकती हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), गुवाहाटी के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया यह अध्ययन स्वचालित इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन प्रक्रिया में शामिल - संश्लेषण, सत्यापन और सुरक्षा क...