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जब हर एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति को जीवन रक्षक दवाएं मिलेंगी तभी एड्स उन्मूलन सम्भव है

जब हर एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति को जीवन रक्षक दवाएं मिलेंगी तभी एड्स उन्मूलन सम्भव है

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जब हर एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति को जीवन रक्षक दवाएं मिलेंगी तभी एड्स उन्मूलन सम्भव है शोभा शुक्ला - हर एचआईवी पॉजिटिव इंसान को सही जांच से यह पता होना चाहिए कि वह एचआईवी पॉजिटिव है, सबको जीवन रक्षक एंटीरेट्रोवायरल दवाएं मिलें, और सभी का वायरल लोड नगण्य रहे, तब ही एड्स उन्मूलन सम्भव है। न सिर्फ़ सभी एचआईवी के साथ जीवित लोग पूर्ण ज़िंदगी जी सकेंगे बल्कि एचआईवी के फैलाव पर भी रोकथाम लगेगा। एक ओर जहां नए एचआईवी सम्बंधित शोध को तेज करने की ज़रूरत है जिससे कि अधिक प्रभावकारी जांच, इलाज और बचाव साधन हम सब को मिलें, वहीं यह भी सच है कि हर एक को जाँच, एंटीरेट्रोवायरल दवा और वायरल लोड नियंत्रित करने की सेवा देना आज मुमकिन है - जिससे कि एड्स उन्मूलन की दिशा में तेजी से कदम बढ़ें। यह कहना है डॉ ईश्वर गिलाडा का जो एड्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के १३ वें राष्ट्रीय अधिवेशन के अध्यक्ष हैं, और इंटर्नैशनल ए...
डॉ अर्चना शर्मा की शहादत से सबक

डॉ अर्चना शर्मा की शहादत से सबक

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डॉ अर्चना शर्मा की शहादत से सबक ॰विनीत नारायण दौसा ;राजस्थानद्ध की युवा डाक्टर अर्चना शर्मा की ख़ुदकुशी के लिए कौन ज़िम्मेदार हैघ् महिला रोग विशेषज्ञए स्वर्ण पदक विजेताए मेधावी और अपने कार्य में कुशल डॉ अर्चना शर्मा इतना क्यों डर गई कि उन्होंने मासूम बच्चों और डाक्टर पति के भविष्य का भी विचार नहीं किया और एक अख़बार की खबर पढ़ कर आत्महत्या कर ली। पत्रकार होने के नाते डॉ शर्मा की इस दुखद मृत्यु के लिए मैं उस संवाददाता को सबसे ज़्यादा ज़िम्मेदार मानता हूँ जिसने पुलिस की एफ़आईआर को ही आधार बनाकर अपनी खबर इस तरह छापी कि उसके कुछ घण्टों के भीतर ही डॉ अर्चना शर्मा फाँसी के फंदे पर लटक गई। लगता है कि इस संवाददाता ने खबर लिखने से पहले डॉ अर्चना से उनका पक्ष जानने की कोई कोशिश नहीं की। आज मीडिया में ये प्रवृत्ति लगातार बढ़ती जा रही है जब संवाददाता एकतरफ़ा खबर छाप कर सनसनी पैदा करते हैंए किसी प्रति...
नारी के अखंड सौभाग्य का पर्व है गणगौर

नारी के अखंड सौभाग्य का पर्व है गणगौर

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नारी के अखंड सौभाग्य का पर्व है गणगौर  - ललित गर्ग-राजस्थान की उत्सव संस्कृति जहां समृद्ध है वहीं उसमें जीवन के रंग, कला, शौर्य, पराक्रम एवं बलिदान की भावना देखने को मिलती है। यहां का सिरमौर पर्व है गणगौर। इस पर्व में राजस्थान की बहुरंगी संस्कृति, शौर्य और भावों का एक साथ मिलन देखने को मिलता है। एक से बढ़कर एक अद्भुत और अविस्मरणीय संस्कृति के रंग इस पर्व से जुड़े हैं, जो कला और संस्कृति की समृद्धि को सुशोभित करते हैं, जिससे राजस्थानी महिलाओं का जीवन रंग संस्कृति और उत्सव से भरा हुआ दिखाई पड़ता है। गणगौर मेले का आयोजन भी महिलाओं एवं कन्याओं की मस्ती के साथ और मस्ती के लिए किया जाता है। गणगौर का त्यौहार सदियों पुराना हैं। हर युग में कुंआरी कन्याओं एवं नवविवाहिताओं का अपितु संपूर्ण मानवीय संवेदनाओं का गहरा संबंध इस पर्व से जुड़ा रहा है। यद्यपि इसे सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मान्यता प्राप्त है कि...
Indian Antarctic Bill’ introduced in Lok Sabha

Indian Antarctic Bill’ introduced in Lok Sabha

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Indian Antarctic Bill’ introduced in Lok Sabha Union Minister of State (Independent Charge) Science & Technology; Minister of State (Independent Charge) Earth Sciences; Minister of State PMO, Personnel, Public Grievances, Pensions, Atomic Energy and Space, Dr Jitendra Singh on Friday introduced a Bill in Parliament to provide for national measures for protecting the environment of Antarctic and dependent and associated ecosystem and to give effect to the Antarctic Treaty, the Convention on the Conservation of Antarctic Marine Living Resources and Protocol on the Environmental Protection to the Antarctic Treaty. Antarctica, the southernmost continent with a geographical area of 14 million square km, has no indigenous population. However, around 1000 – 5000 people reside there in ...
स्वस्थ दुनिया के लिए मोटे अनाजों को महत्व देना जरूरी

स्वस्थ दुनिया के लिए मोटे अनाजों को महत्व देना जरूरी

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स्वस्थ दुनिया के लिए मोटे अनाजों को महत्व देना जरूरी ( मोटे अनाज) के महत्त्व को पहचान कर भारत सरकार ने 2018 में यह प्रस्ताव दिया था कि 2023 को मिलेट ईयर के रूप में मनाया जाए. ताकि मोटे अनाज के उत्पादन को प्रोत्साहन दिया जा सके. अभी हाल ही में हरियाणा सरकार के कृषि एवं पशुपालन मंत्री जयप्रकाश दलाल ने मोटे अपने राज्य में मोटे अनाज की पैदावार को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा कृषि विश्विद्यालय के तहत भिवानी के गाँव गोकुलपुरा में एक रिसर्च सेंटर खोलने की शुरुवात की है जो इस अनाज को एक अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाकर बाजरा उत्पादक किसानों की माल हालात को सुधार करने की दिशा में काम करेगा.) ---सत्यवान 'सौरभ' बाजरा को अक्सर सुपरफूड के रूप में जाना जाता है और इसके उत्पादन को स्थायी कृषि और स्वस्थ दुनिया के लिए मोटे अनाजों के महत्व को समझा है, इसलिए किसानों के लिए इसे उगा...
पश्चिम बंगाल विधानसभा में हिंसा के दाग

पश्चिम बंगाल विधानसभा में हिंसा के दाग

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पश्चिम बंगाल विधानसभा में हिंसा के दाग- ललित गर्ग:-पश्चिम बंगाल विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच हाथापाई और नेता प्रतिपक्ष समेत पांच भाजपा विधायकों के निलंबन की घटना एक बार फिर भारतीय लोकतंत्र को शर्मसार कर गई। भारत का लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, इसको सशक्त बनाने की बात सभी राजनैतिक दल करते हैं, सभी ऊंचे मूल्यों को स्थापित करने की, आदर्श की बातों के साथ आते हैं पर सत्ता-संचालन एवं विधायी कार्रवाही में सारी मर्यादाओं एवं लोकतांत्रिक मूल्यों पर ताक पर रखकर एक ही संस्कृति-हिंसा एवं अराजकता की संस्कृति को अपना लेते हैं। पश्चिम बंगाल के विधानसभा में हिंसा का जो तांडव हुआ उससे न केवल भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को गहरा आघात लगा है, बल्कि आमजनता को भी भारी हैरानी हुई है। पश्चिम बंगाल में न केवल सार्वजनिक जीवन में बल्कि सदन में हो रही हिंसा की घटनाएं गहन चिन्ता का ...
क्या भारत में दो टाइम ज़ोन होने चाहिये?

क्या भारत में दो टाइम ज़ोन होने चाहिये?

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क्या भारत में दो टाइम ज़ोन होने चाहिये? - प्रियंका 'सौरभ' साल 2002 से संसद के हर सत्र में बार-बार दोहराया गय सवाल है; क्या भारत में दो समय क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव है और इसे लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? सबसे पहले  ये सवाल मार्च 2002 में उठाया गया था, उस वर्ष के अगस्त में प्रश्न को प्रभावी ढंग से सुलझा लिया गया था। उस वर्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा गठित एक 'उच्च स्तरीय समिति' ने इस मुद्दे का अध्ययन किया था और निष्कर्ष निकाला था कि कई ज़ोन 'कठिनाइयों' का कारण बन सकते हैं जो "एयरलाइंस, रेलवे, रेडियो, टेलीविज़न" और टेलीफोन सेवाएं” के सुचारू कामकाज को बाधित करेंगे।  इसलिए एकीकृत समय के साथ जारी रखना सबसे अच्छा था। भारत पूर्व से पश्चिम तक लगभग 3000 किमी तक फैला हुआ है। देश के पूर्वी और पश्चिमी छोरों के बीच लगभग 28 डिग्री देशांतर है जिसके परिणामस्वरूप पश्चिमी और पूर्...
कौन कर रहा है डाक्टरों को खुदखुशी के लिए बाध्य

कौन कर रहा है डाक्टरों को खुदखुशी के लिए बाध्य

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कौन कर रहा है डाक्टरों को खुदखुशी के लिए बाध्य आर.के. सिन्हा राजस्थान के दौसा जिले में एक महिला डॉक्टर का आत्महत्या करना चीख-चीख कर इस चिंता की पुष्टि कर रहा है कि अब वक्त आ गया है कि देश के डाक्टरों को भी तो बचाया जाए। अगर यह नहीं किया गया तो डाक्टर बनने से पहले नौजवान सौ-सौ बार सोचेंगे। जान लें कि दौसा में डॉ.अर्चना शर्मा और उनके पति डॉ सुनीत उपाध्याय का उस इलाके का एक प्रतिष्ठित आनंद अस्पताल है। कुछ दिन पहले उनके पास लालूराम बैरवा नाम का एक शख्स अपनी पत्नी आशा देवी (22) को डिलीवरी के लिए सुबह अस्पताल आया। डिलीवरी के दौरान प्रसुता (आशा देवी) की मौत हो गई, वहीं नवजात सकुशल है। यह एक सामान्य सी प्रसव पीड़ा के दौरान मृत्यु की घटना है I अब शुरू हुआ हंगामा। आशा देवी की मौत के बाद उसके घरवालों ने मुआवजे की मांग को लेकर अस्पताल के बाहर जमकर बवाल काटा। गुस्साए घरवालों ने स्थानीय छुटभैये नेत...
सार्वजनिक धन के कुशल उपयोग के लिए कई सुधारों की आवश्यकता

सार्वजनिक धन के कुशल उपयोग के लिए कई सुधारों की आवश्यकता

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सार्वजनिक धन के कुशल उपयोग के लिए कई सुधारों की आवश्यकता -सत्यवान 'सौरभ' उचित रूप से प्रबंधित लेखा प्रणाली धन पर उचित नियंत्रण सुनिश्चित करने में मदद करती है। लेखांकन नीतियों और प्रक्रियाओं को वित्तीय नियंत्रण को नियंत्रित करने वाली कानूनी/प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने वाले खातों को संकलित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। खाते गतिविधियों के वित्तीय प्रबंधन का एक अनिवार्य हिस्सा हैं। खातों के आधार पर, सरकार अपनी वित्तीय और राजकोषीय नीतियों के आकार को नियंत्रित करती है। वर्तमान समाज की जरूरतों को पूरा करने के लिए वित्तीय संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए सार्वजनिक धन का कुशल उपयोग इस तरह से आवश्यक है कि यह भविष्य की पीढ़ियों के समाजों की अपनी जरूरतों को पूरा करने की क्षमता से समझौता न करे। भारत में सार्वजनिक धन के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए कानूनी और ...
किसके दबाव में केस दबाए बैठी है सीबीआई?

किसके दबाव में केस दबाए बैठी है सीबीआई?

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किसके दबाव में केस दबाए बैठी है सीबीआई? *रजनीश कपूर 2014 में जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्य मंत्री से देश के प्रधान मंत्री बनने की तैयारी में थे तो भ्रष्टाचार के विरुद्ध उनका आह्वान था, “न खाऊँगा न खाने दूँगा”। इसका असर भी फ़ौरन दिखाई दिया। मोदी जी के प्रधान मंत्री बनने के बाद जिस तरह केंद्र सरकार की नौकरशाही में यह संदेश गया तो हर महकमे में बरसों से चली कोताही ख़त्म होती नज़र आई। तब ऐसा लगा कि सरकारी फ़ाइलों में बरसों से लम्बित मामले भी तेज़ी पकड़ेंगे। पर यहाँ जिस मामले को उठाया जा रहा है वो है सीबीआई कि कोताही का। वैसे तो सीबीआई की छवि बड़े-बड़े मामलों को लम्बा खींचने या दबाए रखने की है। पर मोदी राज में भी यह हो रहा है यह आश्चर्यजनक है। जून 2014 में सीबीआई में तैनात डीआईजी अरुण बोथरा ने पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्य सचिवों को उनके राज्यों में होने वाले एक घोटाले के ...