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रूस-यूक्रेन युद्ध की समाप्ति का माध्यम बने अहिंसा यात्रा

रूस-यूक्रेन युद्ध की समाप्ति का माध्यम बने अहिंसा यात्रा

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रूस-यूक्रेन युद्ध की समाप्ति का माध्यम बने अहिंसा यात्रा -ललित गर्ग- रूस-यूक्रेन युद्ध को चलते हुए लगभग एक माह होने जा रहा है। रूस वांछित नतीजा हासिल नहीं कर पाया है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, अधिक विनाश एवं विध्वंस की संभावनाएं बढ़ती जा रही है। यूक्रेन और रूस में शांति का उजाला करने, अभय का वातावरण, शुभ की कामना और मंगल का फैलाव करने के लिये भारत को शांति प्रयास करने चाहिए। एकमात्र भारत ही ऐसा देश है जो अपने आध्यात्मिक तेज एवं अहिंसा की शक्ति से मनुष्य के भयभीत मन को युद्ध की विभीषिका से मुक्ति दे सकता। इन दोनों देशों को युद्ध विराम के लिये राजी करके विश्व को निर्भय बना सकता है। इन युद्ध एवं हिंसा के वातावरण में अहिंसा यात्रा एवं उसके प्रणेता आचार्य श्री महाश्रमण का सन्देश कारगर हो सकता है। क्योंकि राष्ट्रसंत आचार्य श्री महाश्रमण कीर्तिधर यायावर संतपुरुष हैं, जिन्होंने अपनी अहिंसा या...
संसदीय लोकतंत्र और वैश्वीकरण

संसदीय लोकतंत्र और वैश्वीकरण

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संसदीय लोकतंत्र और वैश्वीकरण संसद सरकार के कामकाज के लिए एक केंद्रीय आधारभूत संस्था है। दुनिया भर के देशों ने संसदीय संस्थाओं को इस तरह विकसित किया है जो स्थानीय जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त है। सामाजिक, सांस्कृतिक और भाषाई विविधताओं के बावजूद, एक सामान्य बात यह है कि विभिन्न देशों की संसदें लोगों का प्रतिनिधित्व करती हैं और उनकी जरूरतों, आशाओं और आकांक्षाओं की पूर्ति करती हैं; संसद लोगों के प्रतिनिधियों को स्वतंत्र रूप से अपने विचार व्यक्त करने और सरकारी गतिविधियों की जांच करने के लिए एक मंच प्रदान करती है। इस मंच पर ही राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व के मामलों पर विस्तार से चर्चा की जाती है और शासन के विभिन्न कानूनों, नीतियों और कार्यक्रमों को आकार दिया जाता है। संसद की संस्था एक जीवित इकाई है। इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरती जरूरतों और लगातार बदलते परिदृश्य के साथ खु...
Suicide by Sanctions and other means

Suicide by Sanctions and other means

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After the disintegration of the Soviet Union and its divorce from its East European allies, Russia believing itself European, tried its hardest to integrate itself with Europe and America. The West purchased many, key Russian technologies, assets and industries in the distressed Russian economy at a huge discount, and positioned themselves to at will exert a vice-like grip on Russia's financial, technological, communications, media etc. sectors. An arrogant America and Europe, the winners of the Cold War, had no place on the high table for Russia. American leader Senator John McCain disparagingly voiced the common thinking of America, that "Russia is a gas station, disguised as a nation". Americans and Europeans viewed Russia as an old, beleaguered empire to be merely exploited and mil...
जा सकती है इमरान खान की सरकार, पर हौसले बुलंद हैं*

जा सकती है इमरान खान की सरकार, पर हौसले बुलंद हैं*

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जा सकती है इमरान खान की सरकार, पर हौसले बुलंद हैं* *डॉ. वेदप्रताप वैदिक* इमरान खान को पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बने अभी साढ़े तीन साल ही हुए हैं, लेकिन लगता नहीं कि वह अपना कार्यकाल पूरा कर पाएंगे। हालांकि जैसे जनरल परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ का तख्ता-पलट कर दिया था, मौजूदा सेनापति कमर बाजवा को शायद वैसा न करना पड़े। बहुत संभव है, तख्ता-पलट की जगह वोट-पलट के जरिए इमरान को अपदस्थ किया जाए। नवाज शरीफ की मुस्लिम लीग, जरदारी की पीपीपी और फजलुर रहमान की जमात उलेमा-इस्लाम- तीनों ने मिलकर इमरान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव रखा है, जो कब का पास हो जाता। लेकिन पाकिस्तानी संसद की बैठक नहीं बुलाई जा सकी, क्योंकि अभी उसी भवन में ‘इस्लामिक सहयोग संगठन’ का सम्मेलन चल रहा है। बहरहाल, अविश्वास प्रस्ताव पर शीघ्र ही मतदान होना है, लेकिन यह भी संभव है कि उसके पहले ही इमरान अपने इस्तीफे की पेशकश कर दें। इमर...
A new method to fight plastic pollution

A new method to fight plastic pollution

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A new method to fight plastic pollution New Delhi, March (India Science Wire): In a significant development in environmental pollution, a team of researchers from the Indian Institute of Technology (IIT)-Mandi, has developed a method that promises to help transform plastic into hydrogen when exposed to light. The generation of hydrogen from plastics is expected to be more useful because hydrogen is considered the most practical non-polluting fuel of the future. Plastics, most of which are derived from petroleum, are not biodegradable. They cannot be easily broken down into harmless products. It is feared that most of the 4.9 billion tonnes of plastics ever produced would end up in landfills, threatening human health and the environment. In the new study, researchers have develo...
CSE’s warning on World Water Day-ongoing heatwave conditions can worsen water crisis

CSE’s warning on World Water Day-ongoing heatwave conditions can worsen water crisis

Current Affaires, प्रेस विज्ञप्ति, विश्लेषण, सामाजिक
Centre for Science and Environment (CSE), New Delhi PRESS RELEASE World Water Day Special Rising temperatures can put our water security in serious jeopardy, says CSE “What does this intense heat wave that has hit large parts of India so early this summer really mean? It means – especially today, as we mark the World Water Day – that this is the age of climate change; it also means that how we deal with our water in the coming days will determine whether we would survive such extreme climatic conditions,” says Sunita Narain, director general, Centre for Science and Environment (CSE). “I am saying this because ...
कैसे भगत सिंह जोड़ते भारत-पाक को

कैसे भगत सिंह जोड़ते भारत-पाक को

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कैसे भगत सिंह जोड़ते भारत-पाक को आर.के. सिन्हा भारत-पाकिस्तान में गुजरे सात दशकों के दौरान कभी कोई बहुत मैत्रीपूर्ण संबंध नहीं रहे। दोनों के बीच कई बार जंग भी हुई। दोनों में आपस में कुछ न कुछ विवाद बना ही रहता है। विवाद के अनेकों कारण हैं। पर भगत सिंह एक इस तरह की शख्सियत हैं जिन्हें दोनों देशों की जनता आदरभाव से देखती है। भगत सिंह भारत के तो निर्विवाद नायकों में से एक मुख्य हैं ही। वे पाकिस्तान में भी बहुत आदर के भाव से देखे जाते हैं। इस लिहाज हमें भगत सिंह के अलावा कोई दूसरी शख्सियत नहीं मिलती। पाकिस्तान के शहर लाहौर और कुछ अन्य स्थानों पर उनका जन्म दिन और शहीदी नियमित रूप से मनाया जाता है। दरअसल भगत सिंह और उनके दो अन्य साथियों क्रमश: राज गुरु और सुखदेव को लाहौर सेंट्रल जेल में 23 मार्च 1931 को फ़ांसी दी गई थी। उन पर इल्ज़ाम लगाया गया था कि उन्होंने एक ब्रितानी अधिकारी की हत्या की...
भारतीय भाषाओं में अच्छी गुणवत्ता का वैज्ञानिक साहित्य जरूरी

भारतीय भाषाओं में अच्छी गुणवत्ता का वैज्ञानिक साहित्य जरूरी

Current Affaires, सामाजिक
“भारतीय भाषाओं में अच्छी गुणवत्ता का वैज्ञानिक साहित्य जरूरी” केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारतीय भाषाओं में उच्च स्तर के प्रकाशन और अच्छी गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक साहित्य तैयार करने के लिए आह्वान किया है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के शोध छात्र सबरीश पी.ए. की पुस्तक "ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ साइंस इन इंडिया" का सोमवार को औपचारिक विमोचन करते हुए डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासन में विज्ञान ने न केवल मानव जीवन के हर क्षेत्र छुआ है, बल्कि यह जीवन को आसान बनाने का साधन भी बनकर उभरा है। इस अवसर पर जेएनयू की नवनियुक्त कुलपति प्रोफेसर शांतिश्री पंडित और अन्य शिक्षक उ...
हिजाब पर फैसले में बाबा साहेब की राय कितनी अहम

हिजाब पर फैसले में बाबा साहेब की राय कितनी अहम

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हिजाब पर फैसले में बाबा साहेब की राय कितनी अहम आर.के. सिन्हा बाबा साहेब डॉ बी० आर० अम्बेडकर किसी गंभीर और संवेदनशील मसले पर भी अपनी राय  बेबाकी से ही रखते थे। उनकी मुस्लिम समाज की औरतों के हिजाब और बुर्का पहनने पर प्रगट किये गए सार्वजनिक विचार 75 सालों के बाद भी समीचिन और स्पष्ट हैं। इसलिए ही  कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य के स्कूलों में हिजाब पहनने या ना पहनने को लेकर चल रही बहस पर अपना फैसला सुनाते हुए बाबा साहेब के विचारों का भी विस्तार से हवाला दिया। बाबा साहब ने अपनी मशहूर किताब “पाकिस्तान ओर द पार्टिशन ऑफ इंडिया (1945)”  में लिखा था, 'एक मुस्लिम महिला सिर्फ अपने बेटे, भाई, पिता, चाचा ताऊ और शौहर को देख सकती है या फिर अपने वैसे रिश्तेदारों को जिन पर विश्वास किया जा सकता है। वो मस्जिद में नमाज अदा करने तक भी नहीं जा सकती। मुसलमानों में भी हिंदुओं की तरह और कई जगह तो उनसे भी ज्यादा साम...
बिना युद्ध विराम और शांति के कैसे होगी स्वास्थ्य सुरक्षा?

बिना युद्ध विराम और शांति के कैसे होगी स्वास्थ्य सुरक्षा?

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बिना युद्ध विराम और शांति के कैसे होगी स्वास्थ्य सुरक्षा? बॉबी रमाकांत - सीएनएस वैश्विक स्तर पर कोविड महामारी की जन स्वास्थ्य आपदा चल रही है, पर जब अस्पताल पर बमबारी हो रही हो तो ऐसे में स्वास्थ्य सुरक्षा की बात करना कितना बेमायने है। यदि स्वास्थ्य सुरक्षा प्राथमिकता है तो यूक्रेन और रूस के मध्य तुरंत युद्ध विराम हो और शांति क़ायम हो। संवाद से समस्याओं का हल निकले क्योंकि युद्ध से समस्याएँ सुलझती नहीं बल्कि और जटिल हो जाती हैं। हालत इतने ख़राब हैं कि बच्चों के अस्पताल भी सुरक्षित न रहें। ऐम्ब्युलन्स हो या क्लिनिक, अस्पताल हो या स्वास्थ्यकर्मी या ज़ख़्मी लोग या अन्य रोगी, सब पर बमबारी हो गयी। इन स्वास्थ्यकर्मी या ज़ख़्मी लोगों या रोगियों पर हमला करने से क्या रूस और यूक्रेन की समस्या हल हो जाएगी? स्वास्थ्य व्यवस्था को ध्वस्त करने से न सिर्फ़ वर्तमान बल्कि भविष्य भी अंधकारमय हो रहा है। इसील...