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गणगौर है दाम्पत्य की खुशहाली का पर्व

गणगौर है दाम्पत्य की खुशहाली का पर्व

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गणगौर राजस्थानी आन-बान-शान का प्राचीन पर्व हैं। हर युग में कुंआरी कन्याओं एवं नवविवाहिताओं का अपितु संपूर्ण मानवीय संवेदनाओं का गहरा संबंध इस पर्व से जुड़ा रहा है। यद्यपि इसे सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मान्यता प्राप्त है किन्तु जीवन मूल्यों की सुरक्षा एवं वैवाहिक जीवन की सुदृढ़ता में यह एक सार्थक प्रेरणा भी बना है। यह पर्व सांस्कृतिक, पारिवारिक एवं धार्मिक चेतना की ज्योति किरण है। इससे हमारी पारिवारिक चेतना जाग्रत होती है, जीवन एवं जगत में प्रसन्नता, गति, संगति, सौहार्द, ऊर्जा, आत्मशुद्धि एवं नवप्रेरणा का प्रकाश परिव्याप्त होता है। यह पर्व जीवन के श्रेष्ठ एवं मंगलकारी व्रतों, संकल्पों तथा विचारों को अपनाने की प्रेरणा देता है। गणगौर शब्द का गौरव अंतहीन पवित्र दाम्पत्य जीवन की खुशहाली से जुड़ा है। कुंआरी कन्याएं अच्छा पति पाने के लिए और नवविवाहिताएं अखंड सौभाग्य की कामना के लिए यह त्यौहार ह...
Evidence of pre-modern iron technology found in Nagaland

Evidence of pre-modern iron technology found in Nagaland

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The development of technology for extracting metals from ores has been critical in the growth of various civilizations. Smelting is one process that has evolved over time. Some regions and communities have contributed greatly in shaping and evolution of such technologies through their skills, knowledge and craft. Scientists, archeologists and historians are exploring the history and evolution of such technologies to know more about art and culture of communities. In one such initiative, scientists from Nagaland University and the Indian Institute of Technology, Guwahati have studied the history and evolution of smelting in Wui village of Tuensang district of Nagaland. The village is well known for its traditional art of iron-smelting and iron tool production since pre-colonial times. ...
स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन रही हैं धूल भरी आंधियां

स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन रही हैं धूल भरी आंधियां

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  पिछले साल मई के महीने में एक के बाद एक लगातार तीन धूल भरी आंधियों ने दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में कहर बरपाया था। अब एक अध्ययन में पता चला है कि इन आंधियों से जन-धन का नुकसान होने के साथ-साथ वायु गुणवत्ता और वायुमंडलीय रासायनिक गुणों में भी ऐसे परिवर्तन हुए हैं जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इस अध्ययन में पाया गया है धूल भरी आंधियों से वायु की गति, तापमान और वायुमंडलीय मापदंडों के ऊर्ध्वाधर परिवहन के स्वरूप में परिवर्तन होने के कारण ग्रीनहाउस और सूक्ष्ममात्रिक गैसों की मात्रा में भी बदलाव हो रहा है। ये बदलाव वायु गुणवत्ता के लिए हानिकारक हो सकते हैं। पिछले साल मई में इन तीन धूल भरी आंधियों में से दो बेहद खतरनाक थीं, जिनके कारण सौ से अधिक लोग मारे गए थे। दर्जनों हवाई उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं या फिर उनके रास्ते बदलने पड़े थे। सिंधु-गंगा मैदानों म...
सांसद बनने की फिराक मेंसेना को बलात्कारी कहने वाला कन्हैया

सांसद बनने की फिराक मेंसेना को बलात्कारी कहने वाला कन्हैया

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कन्हैया कुमार अब बिहार की बेगूसराय सीट से लोकसभा चुनाव लड़ रहा है। वो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) का उम्मीदवार है। यह वही कन्हैया कुमार है, भारतीय सेना को बलात्कारी कहने से भी पीछे नहीं हटता। वो बार-बार कहता रहा है कि भारतीय सेना कश्मीर में बलात्कारों में लिप्त है। जरा सोचिए कि कन्हैया कुमार को अगर राष्ट्रकवि “दिनकर” की धरती बेगूसराय लोकसभा में निर्वाचित करके भेजती है तो राष्ट्र कवि रामधारी सिंह “दिनकर” की आत्मा पर क्या गुजरेगी। बाकी किसी को जिताओ, एतराज नहीं, पर वतन के रखवालों के खिलाफ़ शर्मनाक बयानबाजी करने वाले कन्हैया को जिताना तो लोकतान्त्रिक अपराध होगा। भारतीय सेना पर कश्मीर में रेप जैसा जघन्य आरोप लगाने वाले कन्हैया कुमार के आरोप को देखने के लिए आप यू ट्यूब का सहारा भी ले सकते हैं। यानी वो यह तो कह ही नहीं कह सकता कि उसने भारतीय सेना पर कभी इतना गंभीर आरोप नहीं लगाया। उससे यह ...
Steep and continuous rise in Sensex

Steep and continuous rise in Sensex

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It refers to continuous steep rise in Sensex already touched record-high of about 39000 and not yet over, started from just 100 in the year 1979. An investment of rupees one lakh in the year 1979 if made and regulated carefully and wisely could have resulted in rupees 3.9 crores now on 40th anniversary of Sensex in India. While at one hand, such rise in Sensex is a positive index of industrial growth, but on the other hand there is always fear of bursting of such blown-up balloon of Sensex like happened in case of property. While investors in property for multiplying investments were affording rich, investment in shares is done by even ordinary middle-class people who may not be able to bear any possible steep fall in Sensex. Such regular steep rise of Sensex indicates extra-ordinary...
EC complaining for Rajasthan Governor to President: Governors should be non-political

EC complaining for Rajasthan Governor to President: Governors should be non-political

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It refers to Election Commission on 01.04.2019 complaining against Rajasthan Governor Kalyansingh for his political statement made on 23.03.2019 wherein he advocated present Prime Minister to continue even after forthcoming Lok Sabha polls. It is quite usual that political persons appointed as state Governors give such political statements like earlier done by present Madhya Pradesh Governor in April 2018. It is not proper to misuse dignified post of state Governor for political waste. Posts of state Governors must be only for politically neutral persons like retired judges and bureaucrats who might not have ever affiliated with any political party. There have been many cases earlier when politicians appointed as state Governors have misused Raaj-Bhawans(Governor Houses) like party-head...
जीवन व्यस्त हो, अस्तव्यस्त नहीं

जीवन व्यस्त हो, अस्तव्यस्त नहीं

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असन्तुलन एवं अस्तव्यस्तता ने जीवन को जटिल बना दिया है। बढ़ती प्रतियोगिता, आगे बढ़ने की होड़ और अधिक से अधिक धन कमाने की इच्छा ने इंसान के जीवन से सुख, चैन व शांति को दूर कर दिया है। सब कुछ पा लेने की इस दौड़ में इंसान सबसे ज्यादा अनदेखा खुद को कर रहा है। बेहतर कल के सपनों को पूरा करने के चक्कर में अपने आज को नजरअंदाज कर रहा है। वह भूल रहा है कि बीता हुआ समय लौटकर नहीं आता, इसलिए कुछ समय अपने लिए, अपने शरीर, अपने शौकों और उन कामों के लिए, जो आपको खुशियां देते हैं, रखना भी बहुत जरूरी है। समय ही नहीं मिलता! कितनी ही बार ये शब्द आप दूसरों को बोलते हैं तो कितनी ही बार दूसरे आपको। क्या वाकई समय नहीं मिलता? सच ये भी तो है कि जिनसे हम बात करना या मिलना चाहते हैं, उनके लिए समय निकाल ही लेते हैं। यही समय प्रबन्धन है, इसके लिये लेखिका पैट होलिंगर पिकेट कहती हैं, ‘ये आपको तय करना है कि ...
दक्षिण में है अलग तरह का  राष्ट्रवाद

दक्षिण में है अलग तरह का राष्ट्रवाद

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  एक तरफ जहां उत्तर भारत में सर्जिकल अटैक और पाकिस्तान के अंदर घुस कर प्रहार करना राष्ट्रवाद की भावना को बलवती कर रहा है वहीं दूसरी तरफ दक्षिण के राज्यों में यह विषय चुनावी विमर्श का विषय नहीं बन पा रहा है। उत्तर भारत की राजनीति भावनात्मक रूप से चलती है तो दक्षिण के राज्यों की राजनीति विशुद्ध व्यक्तिगत स्वार्थों पर। दक्षिण के राज्यों में यह भावना पायी जाती है कि उत्तर भारतीय लोग उनका राजनीतिक अतिक्रमण करते रहते हैं। चूंकि भारत के प्रधानमंत्री अधिकतर उत्तर भारत से ही रहे हैं इसलिए उनकी इस बात को नकारा भी नहीं जा सकता है। वर्तमान में गुजरात से आने वाले प्रधानमंत्री मोदी भी बनारस से जीत कर लोकसभा में पहुंचे हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द भी उत्तर प्रदेश से आते हैं। ऐसे में दक्षिण के राज्यों में भाजपा और कांग्रेस के मुद्दे उत्तर भारत के चुनावी मुद्दों से अलग हैं। दक्षिण में अभी भी क्षे...
राष्ट्रवाद की  अग्निपरीक्षा

राष्ट्रवाद की अग्निपरीक्षा

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  2019 का लोकसभा चुनाव मोदी के राष्ट्रवाद पर आकर टिक गया है। एक ओर मोदी की मजबूत राष्ट्रवाद की परिकल्पना है तो दूसरी तरफ कमजोर विपक्ष है। एक तरफ मोदी के द्वारा पांच साल में कराये गए कार्यों की रूपरेखा है तो दूसरी तरफ इस दौरान पूरी तरह बिखर चुका विपक्ष है। एक तरफ अबकी बार 400 पार का नारा है तो दूसरी तरफ महागठबंधन के जरिये स्वयं को जीवित रखने के लिए संघर्ष करता विपक्ष है। इन सबके बीच 'मैं भी चौकीदार’ का नारा लगाते भाजपाई सिर्फ और सिर्फ मोदी के नाम को जपते दिख रहे हैं। चाय से चौकीदार का यह खेल खेलने में मोदी की टीम सफल होती दिख रही है। 2014 में अपने शपथ ग्रहण के दौरान मोदी ने सार्क देशों के सभी प्रतिनिधियों को बुलाकर एक नयी तरह की मोदी कूटनीति की शुरुआत की थी। अभिनंदन की समय से वापसी उसी कूटनीति का एक परिणाम थी। इस समय सभी इस्लामिक देश भारत के साथ दिखाई दे रहे हैं। समय के साथ साथ मोदी...
क्या मध्यस्थता के जरिये  सुलझेगा विवाद?

क्या मध्यस्थता के जरिये सुलझेगा विवाद?

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  राम जन्म भूमि बाबरी मस्जिद केस के सर्वमान्य समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के जरिए मामला मध्यस्थता पैनल को सौंप दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2010 के फैसले के बाद से ये मामला सुप्रीमकोर्ट में लंबित था जिसमें 14 याचिकाएं दायर हैं। सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय खंडपीठ ने ये फैसला मार्च के पहले सप्ताह में दिया और तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल का गठन भी कर दिया। विश्व हिन्दू परिषद सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर बहुत खुश दिखायी नहीं देती। परिषद के महासचिव डा. सुरेन्द्र जैन कहते हैं ''निर्णय चूंकि न्यायपालिका का है इसलिए स्वागत या विरोध का प्रश्न ही नहीं है। सर्वोच्च कोर्ट का आदेश है इसलिए हम वार्ता में हिस्सा लेंगे। लेकिन परिणाम को लेकर बहुत आशावादी नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ से दोनों पक्षों को किसी ठोस निर्णय ...