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डायलॉग इंडिया अकेडमिया कॉन्क्लेव : 2018 पुणे का निष्कर्ष

डायलॉग इंडिया अकेडमिया कॉन्क्लेव : 2018 पुणे का निष्कर्ष

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युवाओं में स्वरोजगार का भाव और मूल्य आधारित शिक्षा से ही होगा 'न्यू इंडिया’ का निर्माण डायलॉग इंडिया अकेडमिया अवॉर्ड -2018 में सम्मानित हुए दो दर्जन से अधिक उच्च शिक्षा संस्थान देश मे जमीनी बदलाव में लगे लब्ध प्रतिष्ठित विद्वतजनों का संबोधन देश के सर्वश्रेष्ठ शिक्षा संस्थानों के संचालकों की भागीदारी, उच्च स्तरीय संवाद, मंथन और क्रांतिकारी सुझाव व निष्कर्ष, यह लब्बोलुआब है डायलॉग इंडिया अकेडमिया कॉन्क्लेव एवं अवार्ड फंक्शन- 2018 के पुणे में आयोजित दूसरे सत्र का। डायलॉग इंडिया प्रकाशन समूह द्वारा अपने सहयोगी एफएमए डिजिटल के साथ मिलकर पुणे के होटल नोवेटल में प्रधानमंत्री मोदी के विजन 'यूथ फ़ॉर न्यू इंडिया’ के व्यावहारिक क्रियान्वयन के मार्ग खोजने व देश के शिक्षा संस्थानों को इससे जोडऩे के लिए मई में आईआईटी दिल्ली में (जिसमें उत्तर, पूर्व व उत्तरपूर्व के निजी क्षेत्र के श्रेष्ठ उच्च श...
The mental health report card

The mental health report card

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TAKE THIS TEST At the workplace Low-scoring behaviour■  You have many projects ‘halfway done’. You say yes when asked to take on new jobs, but struggle to finish them. ■  You have an important project to complete but keep getting distracted by emails, colleagues, meetings … all of which you feel must be responded to immediately.■  You are often irritable with colleagues or complain of headaches, neck or back pain. High-scoring behaviour■  You have a discipline of arriving and leaving work generally at determined times.■  When colleagues ask for ‘favours’, you think about your current tasks before either accepting or refusing politely.■  When something urgent or unexpected occurs, you do not panic; you feel you can handle it by shifting some other things off today’s list. H...
उत्तराखंड: महिला टीचर उत्तरा पंत पर क्यों क्रूर हुआ सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का जनता दरबार?

उत्तराखंड: महिला टीचर उत्तरा पंत पर क्यों क्रूर हुआ सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का जनता दरबार?

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उत्तरा पंत बहुगुणा और त्रिवेंद्र सिंह रावत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का जनता दरबार, जहां आम लोग अपनी परेशानियां बता सकते हैं. 28 जून को हुए जनता दरबार में माइक उत्तरकाशी में 20 से ज़्यादा सालों से टीचर उत्तरा पंत बहुगुणा के हाथ में आता है. वो कहना शुरू करती हैं, ''मेरी समस्या ये है कि मेरी पति की मौत हो चुकी है. मेरे बच्चों को कोई देखने वाला नहीं है. घर पर मैं अकेली हूं, अपने बच्चों का सहारा. मैं अपने बच्चों को अनाथ नहीं छोड़ सकती और नौकरी भी नहीं छोड़ सकती. आपको मेरे साथ न्याय करना होगा.'' न्याय की इस फरियाद को सुनकर रावत उत्तरा से सवाल पूछते हैं, ''जब नौकरी की थी तो क्या लिखकर दिया था?'' उत्तरा जवाब देती हैं, ''लिखकर दिया था सर. ये नहीं बोला था कि मैं वनवास भोगूंगी ज़िंदगीभर. ये आपका है 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ.' और ये नहीं कि वनवास के लिए भेज रहे हैं हम...
Modified delimitation needed in Delhi before any next elections

Modified delimitation needed in Delhi before any next elections

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  Delimitation in Delhi should be streamlined by having two exclusive constituencies for trans-Yamuna areas with simplified names as ‘East Delhi’ and ‘Yamuna Vihaar’ with river Yamuna as boundary to separate rest of the five seats on other side of the river which could have easy names as ‘New Delhi’, ‘Old Delhi’, ‘South Delhi’, ‘North Delhi’ and ‘West Delhi’ eliminating confused nomenclature like North-East Delhi or North-West Delhi. All the seven Lok Sabha constituencies may comprise of ten assembly-seats even though twenty trans-Yamuna assembly-seats may have slightly less representation of voters. Major roads or rail-lines should be dividing boundaries between different constituencies. Such slight modifications can be done through an ordinance before forthcoming Lok Sabha polls....
आपातकाल में संघ ने समझौता नहीं किया था, जेल जाने वाले ज्यादातर आरएसएस, समाजवादी पृष्ठभूमि के लोग थेः गोविंदाचार्य

आपातकाल में संघ ने समझौता नहीं किया था, जेल जाने वाले ज्यादातर आरएसएस, समाजवादी पृष्ठभूमि के लोग थेः गोविंदाचार्य

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क्या यह कहना सही है कि आपातकाल के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने सरकार से मांफी मांगी थी? प्रख्यात चिंतक एवं सामाजिक कार्यकर्ता के.एन. गोविंदाचार्य इस तरह की बातों को ‘असत्य से भी घातक अर्धसत्य’ कह कर निरस्त करते हैं। देश में ‘आज क्या आपातकाल के लक्षण हैं? वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय इसे ‘नादान लोगों का प्रलाप’ कह कर सवाल करते हैं कि ‘’क्या वर्तमान सरकार ने लोगों के जीने के अधिकार को समाप्त कर दिया है? क्या लोकतांत्रिक अधिकारों को समाप्त कर दिया है? क्या बोलने की आजादी समाप्त कर दी गयी है?’’ सत्तर के दशक के छात्र आंदोलन में गहराई से जुड़े और जून 1975 में लागू आपातकाल में घोषित 19 माह के आपातकाल की मार झेलने वाले गोविंदाचार्य और और रामबहादुर राय ने “आपातकाल और पत्रकारिता विषय” पर राजधानी में कल आयोजित चर्चा में लोकतांत्रिक भारत के उस दौर के अपने कुछ अनुभव और जानकारी रखी। दि...
कितने पोषण की जरूरत, बताएगा यह नया ऐप

कितने पोषण की जरूरत, बताएगा यह नया ऐप

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 हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय पोषण संस्थान (एनआईएन) ने न्यूट्रिफाई इंडिया नाउ नामक एक नया ऐप लॉन्च किया है, जो पोषण संबंधी जरूरतों के बारे में लोगों को जागरूक करने में मददगार हो सकता है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ बलराम भार्गव ने शुक्रवार को यह ऐप नई दिल्ली में लॉन्च किया है। न्यूट्रिफाई इंडिया ऐप एक गाइड के रूप में कार्य करता है, जो उपभोग किए जाने वाले खाद्य पदार्थों से शरीर को मिलने वाले पोषक तत्वों का आकलन करने में मददगार हो सकता है। यह ऐप यूजर्स को ऊर्जा संतुलन (खपत बनाम व्यय) का लेखा-जोखा रखने में भी मदद करता है। यह ऐप भारतीय खाद्य पदार्थों एवं उनमें मौजूद कैलोरी, प्रोटीन, विटामिन, खनिजों और सामान्य भारतीय व्यंजनों की रेसिपी समेत पोषण संबंधी व्यापक जानकारी प्रदान करता है। इसे भारतीय उपयोगकर्ताओं को ध्यान में रखकर व्यापक पोषण मार्गदर्शिका प्रदान करने ...
Secret election needed for post of Rajya Sabha Deputy Chairperson

Secret election needed for post of Rajya Sabha Deputy Chairperson

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Elections are to take place for post of Deputy Chairperson of Rajya Sabha after retirement of outgoing PJ Kurien. Instead of political bargains, system may be evolved whereby next incumbent may be elected by secret and compulsory vote of all Rajya Sabha members through VVPT equipped Electronic Voting Machines (EVM) on nominations signed by at least 34-percent members to ensure direct election between two candidates. Such a Deputy Chairperson may only be removed by a no-confidence motion passed in the same manner but with condition to name next Deputy Chairperson in the same motion. Similar system should be adopted for election of Speaker and Deputy Speaker of Lok Sabha and state-assemblies. Then only perfect neutrality much required from persons seated on these responsible posts may be ...
पाकिस्तान अब कठघरे में

पाकिस्तान अब कठघरे में

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पाकिस्तान अब एक नई मुसीबत में फंस गया है। फरवरी में सउदी अरब, तुर्की और चीन ने पाकिस्तान को बचा लिया था लेकिन अब इन तीनों राष्ट्रों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। अब पेरिस स्थित अंतरराष्ट्रीय संगठन (एफएटीएफ), जिसका काम आतंकवादियों के पैसे के स्त्रोतों को सुखा देना है, ने पाकिस्तान को कठघरे में खड़ा कर दिया है। यदि पाकिस्तान अगले सवा साल में अपने सभी आतंकवादी संगठनों की आमदनी पर प्रतिबंध नहीं लगा पाया तो उसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए जाएंगे। उसकी हालत उत्तर कोरिया और ईरान से भी बदतर हो जाएगी। अब पाकिस्तान की गिनती इथियोपिया, सर्बिया, श्रीलंका, सीरिया, ट्रिनिडाड, ट्यूनीशिया और यमन जैसे संकटग्रस्त देशों में होने लगेगी। वह नाम के लिए भी पाकिस्तान याने पवित्र स्थान नहीं रह पाएगा। उसे उद्दंड राष्ट्र (रोग़ स्टेट) की अपमानजनक उपाधि मिल जाएगी। पाकिस्तान के विरुद्ध कार्रवाई करने की पहल अ...
Urban ‘forests’ can store almost as much carbon as tropical rainforests

Urban ‘forests’ can store almost as much carbon as tropical rainforests

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Most people would never think of London as a forest. Yet there are actually more trees in London than people. And now, new work by researchers at University College London shows that pockets of this urban jungle store as much carbon per hectare as tropical rainforests. More than half of the world’s population lives in cities, and urban trees are critical to human health and well-being. Trees provide shade, mitigate floods, absorb carbon dioxide (CO₂), filter air pollution and provide habitats for birds, mammals and other plants. The ecosystem services provided by London’s trees – that is, the benefits residents gain from the environment’s natural processes – were recently valued at £130m a year. This may equate to less than £20 a year per tree, but the real value may be much higher, ...
मगहर में प्रधानमंत्री मोदी का मजाक क्यों?

मगहर में प्रधानमंत्री मोदी का मजाक क्यों?

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 पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी, संत कबीर दास जी की समाधि दर्शन के लिए उ.प्र. के मगहर नामक स्थान पर गऐ थे। जहां उनके भाषण के कुछ अंशों के लेकर सोशल मीडिया में धर्मनिरपेक्ष लोग उनका मजाक उड़ा रहे हैं। इनका कहना है कि मोदी जी को इतिहास का ज्ञान नहीं है। इसीलिए उन्होंने अपने भाषण में कहा कि गुरुनानक देव  जी, बाबा गोरखनाथ जी और संत कबीरदास जी यहां साथ बैठकर धर्म पर चर्चा किया करते थे। मोदी आलोचक सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि ‘बाबा गोरखनाथ का जन्म10 वी शताब्दी में हुआ था। संत कबीर दास का जन्म 1398 में हुआ था और गुरुनानक जी का जन्म1469 में हुआ था। उनका प्रश्न है? फिर कैसे ये सब साथ बैठकर धर्म चर्चा करते थे? मजाक के तौर पर ये लोग लिख रहे हैं कि ‘माना कि अंधेरा घना है, पर बेवकूफ बनाना कहाँ मना है’। ‘बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद’? अध्यात्म जगत की बातें अध्यात्म में रूचि रखने वाले और संतो...