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Andhra Pradesh government once again wants to abolish Legislative Council

Andhra Pradesh government once again wants to abolish Legislative Council

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Andhra Pradesh government once again wants to abolish Legislative Council – Why not Constitutional provision for Legislative Council in states be repealed It refers to Andhra Pradesh cabinet once again deciding to abolish useless provision of Legislative Council in the state. Andhra Pradesh has a unique record of setting and abolishing Legislative Council with first time set up in the year 1958 and then again in the year 2007 after being abolishing in the year 1985 and now decided to be abolished in the year 2020. There was a post-emergency era in the year 1977 when Legislative Councils remained in just five states, but now being again constituted in other states. Presently apart from Andhra Pradesh, five other states Bihar, Karnataka, Maharashtra, Telangana, and Uttar Pradesh have L...
25000 rotis (bread) wasted daily in Tihar jail (Delhi)

25000 rotis (bread) wasted daily in Tihar jail (Delhi)

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It refers to shocking media reports about 25000 rotis (bread) daily wasted in Tihar jail of Delhi because prisoners usually do not take their full diet out of mental tension. Report reveals that situation is more prevalent in under-trial prisoners which form majority of jail-inmates, while those having been convicted and sentenced take better diet. System should be modified whereby food may be cooked for prisoners on daily average-basis rather than prescribed diet-norms to avoid such large-scale wastage of food including rotis (bread). It does not take much time to prepare more rotis (bread) in case quantity is somehow felt short after cooked food is exhausted. Further steps can be taken to utilize surplus rotis (bread) for production of biscuits in jail-workshop by installing machine t...
New-born dies in West Bengal because of eunuchs forcibly taking him for dancing-begging

New-born dies in West Bengal because of eunuchs forcibly taking him for dancing-begging

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It refers to a new-born baby dying because of eunuchs forcibly taking the child from his mother and dancing with the child in want of usual unhealthy practice of begging money. It is regretting that practice of begging and singing-dancing by transgenders still continues after legislation of The Transgender Persons (Protection of Rights) Bill, 2019. Practice of begging through singing-dancing by eunuchs should be made non-bailable offence. Dancing eunuchs make unreasonable demands in thousands of rupees on happy occasions like marriages and entrance-ceremonies of new homes, apart from begging at road-crossings. Even giving transgender-child by parents to eunuch-community, and eunuchs accepting transgender-child from their parents should also be strictly banned. It is to be noted that eve...
‘भारत तत्व’ को स्थापित करने का समय

‘भारत तत्व’ को स्थापित करने का समय

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ह दुखद व आश्चर्यजनक है कि भारत के मुसलमान स्वयं को मध्य पूर्व एशिया के अरबी, तुर्क, शिया व सुन्नी मतबों से जोड़ते हैं यद्यपि इतिहास गवाह है कि भारत में अधिसंख्य मुस्लिम भारत मूल के ही हैं व भारत में इस्लामिक आक्रमणकारियों द्वारा बलात व मजबूरी में इस्लाम मत में परिवर्तित लोग हैं। मुख्यधारा के इस्लामिक देश आज भी भारत के मुसलमानों को सच्चा मुसलमान नहीं मानते। किंतु भारत के मुसलमानों का एक वर्ग अपनी जड़ें आज भी मध्यपूर्व के देशों में ही तलाशता है जो सही नहीं। सच्चाई तो यह है कि भारत पर आक्रमण व राज करते समय इस्लामिक आक्रमणकारियों ने भारत की हिंदू संस्कृति, गुरुकुल, भाषा, वेषभूषा, मंदिर व सभ्यता को नष्ट करने व उसको इस्लामिक बनाने के लिए हर संभव वैध व अवैध तरीके अपनाए। इस्लाम के बाद जब भारत पर ईसाइयों का शासन स्थापित हुआ तब उन्होंने भी वही क्रम दोहराया जो मुस्लिम आतताइयों ने अपनाया था यानि भारत ...
पद्म पुरस्कार 2020 घोषित

पद्म पुरस्कार 2020 घोषित

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देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक पद्म पुरस्कार तीन श्रेणियों, पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री में प्रदान किया जाता है। ये पुरस्कार विभिन्न विषयों/गतिविधियों के क्षेत्रों, अर्थात- कला, सामाजिक कार्य, सार्वजनिक मामले, विज्ञान एवं इंजीनियरिंग, व्यापार एवं उद्योग, चिकित्सा, साहित्य और शिक्षा, खेल, नागरिक सेवा आदि में प्रदान किए जाते हैं। 'पद्म विभूषण' असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए, ‘पद्म भूषण’ उच्च क्रम की विशिष्ट सेवा के लिए और ‘पद्मश्री’ किसी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए प्रदान किए जाते हैं। यह पुरस्कार हर साल गणतंत्र दिवस के अवसर पर घोषित किए जाते हैं। राष्‍ट्रपति द्वारा ये पुरस्कार राष्ट्रपति भवन में आमतौर पर हर साल मार्च/अप्रैल के आसपास आयोजित एक समारोह में प्रदान किए जाते है। इस वर्ष राष्ट्रपति ने 4 युगल मामलों (एक युगल मामलों का मतलब एक पुरस्‍कार) सहित नीचे दी गई सू...
मन की बात 2.0’ की आठवाँ कड़ी में प्रधानमंत्री के सम्बोधन का मूल पाठ (26.01.2020)

मन की बात 2.0’ की आठवाँ कड़ी में प्रधानमंत्री के सम्बोधन का मूल पाठ (26.01.2020)

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मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार | आज 26 जनवरी है | गणतंत्र पर्व की अनेक-अनेक शुभकामनायें | 2020 का ये प्रथम ‘मन की बात’का मिलन है | इस वर्ष का भी यह पहला कार्यक्रम है, इस दशक का भी यह पहला कार्यक्रम है | साथियो, इस बार ‘गणतंत्र दिवस’ समारोह की वजह से आपसे ‘मन की बात’,उसके समय में परिवर्तन करना, उचित लगा | और इसीलिए, एक अलग समय तय करके आज आपसे ‘मन की बात’ कर रहा हूँ | साथियो, दिन बदलते हैं, हफ्ते बदल जाते हैं, महीने भी बदलते हैं, साल बदल जाते हैं, लेकिन, भारत के लोगों का उत्साह और हम भी कुछ कम नहीं हैं, हम भी कुछ करके रहेंगे| ‘Can do’, ये ‘Can do’ का भाव, संकल्प बनता हुआ उभर रहा है | देश और समाज के लिए कुछ कर गुजरने की भावना, हर दिन, पहले से अधिक मजबूत होती जाती है | साथियो, ‘मन की बात’ के मंच पर, हम सब, एक बार फिर इकट्ठा हुए हैं | नये-नये विषयों पर चर्चा करने के लिए और देशवासियों की नयी-नयी...
शाहीनबाग के शातिरों को शर्म कहां..!

शाहीनबाग के शातिरों को शर्म कहां..!

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दिल्ली के शाहीनबाग और लखनऊ के घंटाघर पर पाकिस्तानियों, बांग्लादेशियों, रोहिंगियाओं और उनके सरपरस्त धर्मनिरपेक्ष-मानवतावादी मुसलमानों और प्रगतिशील-धर्मनिरपेक्ष हिन्दुओं की भीड़ जमा है... इस भीड़ के हाथ में भारत का झंडा है। यह खास रणनीति है। जब उन्हें सड़क से हटाने की कार्रवाई शुरू होगी, तब इस झंडे का डंडा पुलिस के खिलाफ हथियार बनने वाला है। धर्मनिरपेक्ष-मानवतावादी मुसलमानों की धर्मनिरपेक्षता और मानवीयता केवल बांग्लादेशी, पाकिस्तानी और रोहिंगिया घुसपैठिए मुसलमानों के लिए है... और प्रगतिशील-धर्मनिरपेक्ष हिन्दुओं की तो बात ही छोड़िए, यह भारतवर्ष की संदिग्ध नस्ल है। शाहीनबाग या घंटाघर पर जमा अवांछित तत्वों को गुस्सा इस बात पर है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में गैर-मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार पर क्यों उंगली उठाई गई, क्यों सवाल उठे..! पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में बर्बर धा...
जेएनयू, शाहीन बाग और कश्मीर के संबंधों को समझिए

जेएनयू, शाहीन बाग और कश्मीर के संबंधों को समझिए

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जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष राजधानी के शाहीन बाग में जाकर कहती हैं कि  कश्मीर को अलग करते हुए हम आंदोलन नहीं जीतसकते। शाहीन बाग में तथाकथित स्थानीय लोग नागरिकता संशोधन कानून 2019 के खिलाफ धरना दे रहे हैं। बताया तो यह भी जाता है कि दिहाडी मजदूरों को दुगना-तिगुना पैसा देकर उन्हे बैठाया जा रहा है। फूड पैकेट अलग से।खैर, किसी को भी धरना देने का तो  अधिकार है। पर कोई  धरना देने वालों को गुमराह करे तो क्याकिया जाए। शाहीन बाग में घोष आकर कहती हैं कि जो लड़ाई चल रही है उसमें हम कश्मीर को पीछे नहीं छोड़ सकते। कश्मीर से ही संविधान में छेड़छाड़ शुरू हुई है।साफ है कि उनका इशारा जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35 हटाने की ओर था। कश्मीर के लिए बने इस अनुच्छेद के तहत जम्मू और कश्मीर को विशेषदर्जा का लाभ मिलता था, जिसे केंद्र ने 5 अगस्त 2019 को समाप्त कर दिया था। सरकार के उस...
‘जल जीवन हरियाली’ से बिहार दिखाता देश को दिशा

‘जल जीवन हरियाली’ से बिहार दिखाता देश को दिशा

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देशभर में व्याप्त चौतरफा नकारात्मक वातावरण से हटकर बिहार ने  ‘जल जीवन हरियाली’ की अहम जरूरत पर एक महत्वपूर्ण अभियान  को शुरू करके देश को अवश्य ही एक नई  दिशा दिखाने का सकारात्मक प्रयास तो किया ही है। दरअसल, बिहार जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर सार्थक पहल कर देश और विश्व के सामने एक नजीर रखना चाहता है।  देखिए, अब ऐसी स्थितियां बनती जा रही हैं कि जल, जीवन और  हरियाली के सॅंरक्षण से जुडे कार्यक्रम तो सारे देश में ही चलाने होंगे। इसमें सरकार और समाज को मिल-जुलकर भाग लेना होगा। हमें उन तालाबों को फिर से जीवित करना होगा जो विकास की दौड़ में दफन हो गए या दुष्टों के द्वारा अतिक्रमित कर लिये गये। अगर बात दिल्ली की ही करें  तो जब देश आजाद हुआ था, उस समय दिल्ली में 363 गांव थे, जिनके आसपास 1012 तालाब थे। आबादी बढ़ने और दिल्ली के विकास के साथ ही कुछ गिने- चुने  तालाबों को छोड़कर बाकी खत्म हो गए। कई ताला...
कूल्हों की अर्थराइटिस अब युवाओं में भी सामान्य

कूल्हों की अर्थराइटिस अब युवाओं में भी सामान्य

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अर्थराइटिस के कारण कूल्हे में दर्द होना सामान्य समस्या है, जो न केवल बड़ी उम्र के लोगों में देखी जाती है, बल्कि युवाओं में भी देखी जाती है, विशेषरूप से महिलाओं में जो 40-50 आयुवर्ग की होती हैं। अर्थराइटिस एक लगातार गंभीर होती स्वास्थ्य समस्या है, जो सामान्यतौर पर धीरे-धीरे शुरू होती है और समय बीतने से साथ गंभीर हो जाती है। इससे पीडि़त लोगों को अक्सर चलने में समस्या आती है, कुल्हे में अकडऩ या हल्के से लेकर तेज दर्द होता है। अगर सामान्य शब्दों में इसे समझाने का प्रयास करें तो, अर्थराइटिस तब होता है जब कुल्हे के जोड़ का स्थान संकरा हो जाता है और जो मुलायम ऊतक उसे घेरे हुए होते हैं वो सिकुडऩे लगते हैं और कड़े हो जाते हैं। यह स्थिति समय के साथ जोड़ों की टूट-फूट या कड़ी ट्रेनिंग के कारण मोटापा या अनुवांशिक कारण और कुछ अन्य कारणों से उत्पन्न होती है। अगर हम अपने कूल्हे के जोड़ की संरचना क...