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रोबोटिक्स और एटोमिक हथियारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग घातक !

रोबोटिक्स और एटोमिक हथियारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग घातक !

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
विज्ञान और प्रौद्योगिकी ने मानव को अब तक बहुत सी सुविधाएं प्रदान की हैं। विज्ञान मानव के लिए वरदान भी साबित हुआ है तो वहीं दूसरी ओर विज्ञान मानव जाति के लिए अभिशाप भी साबित हुआ है। आज हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(कृत्रिम बुद्धि)के युग में सांस ले रहे हैं। जी हां ,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कि कृत्रिम बुद्धि। दूसरे शब्दों में यदि हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(कृत्रिम बुद्धि)को समझना चाहें तो हम यह बात कह सकते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) यानी कि कृत्रिम बुद्धि मशीनों द्वारा मानव संज्ञानात्मक(कॉग्निटिव) प्रक्रियाओं का अनुकरण है। यह प्रक्रियाओं को स्वचालित(ऑटोमेटिक )करता है और आईटी सिस्टम में संज्ञानात्मक कंप्यूटिंग (मानव विचार प्रक्रियाओं का अनुकरण) को लागू करके मानव बुद्धि को अनुकरण करना इसका लक्ष्य है। सरल शब्दों में यह बात कही जा सकती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कि कृत्रिम बुद्धि ...
क्या सीमा हैदर पाकिस्तानी जासूस है?

क्या सीमा हैदर पाकिस्तानी जासूस है?

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-बलबीर पुंज गत 17-18 जुलाई को पाकिस्तान से नेपाल के रास्ते भारत आई सीमा हैदर, उसके प्रेमी सचिन मीणा और सचिन के पिता नेत्रपाल से उत्तरप्रदेश एटीएस ने गहन पूछताछ की। आलेख लिखे जाने तक, तीनों पुलिस की गिरफ्त में है। संदेह है कि 27 वर्षीय सीमा पाकिस्तानी जासूस है, जिसे 22 वर्षीय प्रेमी सचिन और उसके पिता ने अवैध शरण दी। क्या सीमा, पाकिस्तान से भेजी गई प्रशिक्षित जासूस है या फिर जैसा कि दावा किया जा रहा है कि वो कई खतरे उठाकर हुए हजारों मील का सफर करते हुए तीन देशों को पार करके अपनी मोहब्बत को पाने के लिए भारत आई है? सचिन-सीमा की प्रेम कहानी पर संदेह होना— स्वाभाविक है। यह सर्वविदित है कि पाकिस्तान अपनी कुटिल नीति— 'भारत को हजारों घाव देकर मौत के घाट उतारना' के अंतर्गत कई प्रपंचों पर काम कर रहा है। इसमें वह मजहब के नाम पर भारत में कुछ स्थानीय लोगों का सहयोग पाकर जिहादी 'स्लीपर सेल्स' को स...
आतंकवाद के लिए हथियार बनते ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म

आतंकवाद के लिए हथियार बनते ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म

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डिजिटल युग में आतंकवादी युवाओं की कमजोरियों का फायदा उठाकर उन्हें अपने गुट में शामिल होने के लिए आकर्षित करने के लिए साइबरस्पेस का उपयोग कर रहे हैं। मुद्दे की गहरी समझ और बेहतर समाधान विकसित करने के लिए भारत के विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित कट्टरपंथ के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देना। इन कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त धनराशि सुनिश्चित करना, खुफिया बलों की क्षमता का विकास करना और कट्टरपंथ, विशेषकर आभासी कट्टरपंथ से निपटने के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण करना। राज्य पुलिस की क्षमता का विकास, क्योंकि वे रक्षा की पहली पंक्ति हैं। बढ़ते कट्टरपंथ का बेहतर ढंग से मुकाबला करने के लिए राज्य पुलिस बलों को केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ अच्छे सहयोग से काम करने की जरूरत है। डॉ सत्यवान सौरभ कट्टरवाद द्वारा कोई व्यक्ति या समूह राजनीतिक, सामाजिक या धार्मिक यथास्थिति के विरोध में त...
<strong>राजनीतिक चंदे की पारदर्शी व्यवस्था बनाना जरूरी</strong>

राजनीतिक चंदे की पारदर्शी व्यवस्था बनाना जरूरी

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- ललित गर्ग- वर्ष 2024 के आम चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं,राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे का मुद्दा एक बार फिर गरमा रहा है। लोकतंत्र की एक बड़ी विसंगति या कहे समस्या उस धन को लेकर है, जो चुपचाप, बिना किसी लिखा-पढ़ी के दलों, नेताओं और उम्मीदवारों को पहुंचाया जाता है, यानी वह काला धन, जिससे देश के बड़े राजनीतिक आयोजन चलते हैं राजनैतिक रैलियां, सभाएं, चुनाव प्रचार होता है। उम्मीदवारों के साथ-साथ मतदाताओं को लुभाने एवं उन्हें प्रलोभन देने में इस धन का उपयोग होता है। जब से चुनावी बॉन्ड से राजनीतिक दलों को चंदा देने का प्रचलन शुरु हुआ है, राजनीतिक दलों को इससे मिलने वाली राशि में काफी इजाफा हुआ है। देश के सात राष्ट्रीय और चौबीस क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की ओर से सार्वजनिक किए गए आमदनी के ब्योरे से यह खुलासा हुआ है। एडीआर द्वारा किए गए इस ब्योरे के विश्लेषण से पता चला है कि वर्ष 2017-1...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस यात्रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस यात्रा

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फ्रांस भारत साझेदारी ऐतिहासिक दौर मेंअवधेश कुमारफ्रांस की राजधानी पेरिस में राष्ट्रीय दिवस समारोह बस्ताइल दिवस परेड में फ्रांसीसी सैनिकों के साथ भारतीय सेना के तीनों अंगों के 241 सदस्यीय मार्चिंग दस्ते को परेड करते, सैनिक बैंड द्वारा सारे जहां से अच्छा धुन बजाते सुन तथा राफेल विमानों का परेड के दौरान फ्लाईपास्ट का हिस्सा बनता देख समूचे भारत ने गर्व का अनुभव किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने सम्मानित अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था। मैक्रो ने ट्वीट में लिखा विश्व इतिहास में व भविष्य में निर्णायक भूमिका निभाने वाला एक रणनीतिक साझेदार एक मित्र। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट किया कि अपने सदियों पुराने लोकाचार से प्रेरित भारत विश्व को शांतिपूर्ण समृद्धि और टिकाऊ बनाने के लिए हरसंभव प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध है। एक मजबूत और भरोसेमंद भागीद...
ईडी: कार्यपालिका पर न्यायपालिका की नज़र

ईडी: कार्यपालिका पर न्यायपालिका की नज़र

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-विनीत नारायणप्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मौजूदा निदेशक संजय कुमार मिश्रा के कार्यकाल विस्तार को सर्वोच्च न्यायालयने अवैध ठहराया है। क्योंकि उनको तीन बार जो सेवा विस्तार दिया गया वो सर्वोच्च न्यायालय के 1997 केआदेश, ‘विनीत नारायण बनाम भारत सरकार, सीवीसी एक्ट, दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट एक्ट वकॉमन कॉज़’ के फ़ैसले के विरुद्ध था। इन सब फ़ैसलों के अनुसार ईडी निदेशक का कार्यकाल केवल दो वर्षका ही होना चाहिए। इस तरह लगातार सेवा विस्तार देने का उद्देश्य क्या था? इस सवाल के जवाब मेंभारत सरकार का पक्ष यह था कि श्री मिश्रा ‘वित्तीय कार्रवाई कार्य बल’ (एफ़एटीएफ़) में भारत काप्रतिनिधित्व कर रहे हैं इसलिए इनको सेवा विस्तार दिया जा रहा है। जबकि एफ़एटीएफ़ की वेबसाइट परईडी निदेशक का कोई कोई उल्लेख नहीं है। इस पर न्यायाधीशों की टिप्पणी थी कि क्या भारत में कोईदूसरा व्यक्ति इतना योग्य नहीं है जो ये काम...
बिखरने की विवशता भोगती विपक्षी एकता

बिखरने की विवशता भोगती विपक्षी एकता

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 ललित गर्ग  जब-जब विपक्षी दलों की एकता की बात जितनी तीव्रता से हुई, तब-तब वह अधिक बिखरी। विपक्षी दलों की पटना की बैठक से लेकर बैंगलोर बैठक के बीच काफी कुछ बदल चुका है। विपक्षी एकता से पहले ही बिखराव एवं टूटन के स्वर ज्यादा उभरे हैं। भले ही पटना की बैठक में शामिल 16-17 दलों की संख्या बेंगलुरु में 26 हो रही हैं। लेकिन अभी हाल तक जो नेता विपक्षी एकता की पैरवी कर रहे थे या फिर भाजपा से दूरी बनाए थे, उनमें से कुछ पाला बदल चुके हैं। इनमें प्रमुख हैं जीतनराम मांझी और ओमप्रकाश राजभर। महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी राकांपा में विभाजन हो चुका है और विपक्षी एकता के सबसे बड़े पैरोकार नीतीश कुमार अपने दल में टूट की आशंका से ग्रस्त दिखने लगे हैं। आने वाले दिनों में ऐसे नेताओं की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि भाजपा भी अपने नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को विस्तार देने के ल...
अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में लोहा मनवा रहा इसरो !

अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में लोहा मनवा रहा इसरो !

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हाल ही में 14 जुलाई का दिन इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने चंद्रयान- 3 को सफलतापूर्वक लांच कर दिया। इसरो के सभी वैज्ञानिकों को इसके लिए सर्वप्रथम हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। जानकारी देना चाहूंगा कि शुक्रवार की दोपहर यानी कि 14 जुलाई 2023 को 2 बजकर 35 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन सेंटर से इस मिशन के तहत चंद्रयान -3 को लांच कर दिया गया। भारत ऐसा देश है जिसने बहुत कम लागत और बहुत कम समय में यह कर दिखाया है कि उसके अंतरिक्ष कार्यक्रम किसी भी विकसित देश से कतई कमतर नहीं हैं। वास्तव में, दुनिया के जिन भी देशों ने अब तक चंद्रमा पर जो भी अन्वेषण कार्य किया है, वे अब तक उस तरह की उपलब्धि हासिल नहीं कर पाए हैं जो चंद्रयान अभियानों के दौरान भारत ने अर्जित की है। यह हमें गौरवान्वित करता है। यहां पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि इस ...
सरकारी भ्रष्ट्राचार का प्रमाण मिटाती और जेबें भी गर्म करती है बाढ

सरकारी भ्रष्ट्राचार का प्रमाण मिटाती और जेबें भी गर्म करती है बाढ

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बाढ को सरकारी आमंत्रण भी मिलता है ==================== आचार्य विष्णु हरि सरस्वती मानसून की पहली बर्षा में ही त्राहिमाम मच गया। लाखों नहीं, करोड़ों नहीं, अरबो नहीं बल्कि खरबों रूपयों का नुकसान हो गया। इतना ही नहीं बल्कि इस बाढ में हमारी अर्थव्यवस्था भी डूब गयी है। भविष्य में हमारी अर्थव्यवस्था के लिए बाढ विनाश का कारण भी बनेगी। पर समस्या तो यह भी है कि सरकार बाढ को आमंत्रण भी देती है। क्या सरकार की योजनाएं ग्लेशियरों से छेड़छाड़ नहीं करती हैं, क्या सरकार की योजनाएं नदियों के प्रवाह से छेड़छाड़ नहीं करती हैं, क्या सरकार अपनी रिश्वतखोरी के प्रतीक पुल और सड़कों आदि का भौतिक अस्तित्व मिटाने और अपनी रिश्वतखोरी की सबूत मिटाने के लिए बाढ का इंतजार नहीं करती हैं? सरकारी अधिकारियों के समर्थन के बिना क्या नदियों के प्रवाह क्षेत्र और नालों पर अतिक्रमण संभव है? बाढ़ पीड़ितों के लिए आयी धन राशि सर...
भारत की बाढ़ प्रबंधन योजना का क्या हुआ?

भारत की बाढ़ प्रबंधन योजना का क्या हुआ?

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राष्ट्रीय बाढ़ आयोग की प्रमुख सिफ़ारिशें जैसे बाढ़ संभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक मूल्यांकन और फ्लड प्लेन ज़ोनिंग एक्ट का अधिनियमन अभी तक अमल में नहीं आया है। सीडब्ल्यूसी का बाढ़ पूर्वानुमान नेटवर्क देश को पर्याप्त रूप से कवर करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा, अधिकांश मौजूदा बाढ़ पूर्वानुमान स्टेशन चालू नहीं हैं। 2006 में केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) द्वारा गठित एक टास्क फोर्स ने बाढ़ जोखिम मानचित्रण का कार्य पूरा नहीं किया। बाढ़ क्षति का आकलन पर्याप्त रूप से नहीं किया गया। बाढ़ प्रबंधन कार्यक्रमों के तहत परियोजनाओं के पूरा होने में देरी मुख्य रूप से केंद्र की सहायता की कमी के कारण होती है। बाढ़ प्रबंधन के कार्य एकीकृत तरीके से नहीं किये जाते हैं। भारत के अधिकांश बड़े बांधों में आपदा प्रबंधन योजना नहीं है- देश के कुल बड़े बांधों में से केवल 7% के पास आपातकालीन कार्य योजना/आपद...