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पंजाब में उन्मादी लपटों को हवा देने के षड़यंत्र- ललित गर्ग

पंजाब में उन्मादी लपटों को हवा देने के षड़यंत्र- ललित गर्ग

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राज्य
एक बार फिर पंजाब अशांति, हिंसा एवं आतंकवाद की ओर बढ़ रहा है। राज्य में कानून-व्यवस्था ढह चुकी है और अराजकता हावी है। समूचा प्रशासन मूकदर्शक बनकर असामान्य होती स्थितियों को देख रहा है। खालिस्तान समर्थक उग्र होते जा रहे हैं। पुलिस और शासन-व्यवस्था एकदम लाचार बनी उपद्रवियों के सामने समर्पण करती हुई दिखाई दे रही है? ऐसे जटिल-से-जटिल हालातों में आम जनता अपनी सुरक्षा की उम्मीद किससे करेगी! यह छिपा तथ्य नहीं है कि पंजाब में जब से आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है, तब से कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर कई बार ऐसे हालात देखे गये है, मानो आपराधिक तत्त्वों को बेलगाम होने का मौका मिल गया हो या यह एक सोची-समझी रणनीति के तहत राज्य में अशांति, आतंक एवं अराजकता को पनपने दिया जा रहा है। जबकि चुनावों के दौरान आप पार्टी ने राज्य की जनता से कानून-व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त करने से लेकर नशामुक्ति जैसे कई बड़े वादे...
ख़तरा : जिसके बारे में सबको, सोचना है

ख़तरा : जिसके बारे में सबको, सोचना है

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
यह तथ्य चौंकाने वाला नहीं, परेशान करने वाला है कि महासागरों का औसत तल वर्ष 1993 के बाद से प्रतिवर्ष 3.2 मिलीमीटर की दर से बढ़ चुका है। वर्ष 2015 से 2019 के बीच तो यह बढ़ोत्तरी 5 मिलीमीटर प्रतिवर्ष तक रही है जबकि वर्ष 2007 से बढ़ोतरी का औसत 4 मिलीमीटर प्रतिवर्ष रहा है। इसका सीधा सा मतलब है कि साल-दर-साल महासागरों के औसत तल में पहले से अधिक बढ़ोत्तरी होती जा रही है। इसके प्रभाव से आबादी का बहुत बड़े पैमाने पर विस्थापन होगा। यह वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा होगा क्योंकि एक बड़ी आबादी का घर और व्यवसाय छूट जाएगा, ठिकाना बदल जाएगा। इसके प्रभाव से अनेक देश भी डूब जायेंगे, जिससे एक बड़ी आबादी ऐसी होगी, जिसका कोई देश नहीं होगा। दुनिया के अधिकतर महानगर महासागरों के किनारे स्थित हैं और जैसे-जैसे महासागरों का तल बढ़ रहा है, पृथ्वी का भूगोल भी बदल रहा है - पानी का क्षेत्र बढ़ता जा ...
अमृतपाल सिंह पर भेजी गई पीएम मोदी की सीक्रेट रिपोर्ट पर अमल क्यों नहीं हुआ ?

अमृतपाल सिंह पर भेजी गई पीएम मोदी की सीक्रेट रिपोर्ट पर अमल क्यों नहीं हुआ ?

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय
अमृतपाल सिंह पर भेजी गई पीएम मोदी की सीक्रेट रिपोर्ट पर अमल क्यों नहीं हुआ ?* -देश की एकता और अखंडता को एक बार फिर खतरा पैदा हो रहा है क्योंकि पंजाब में मौजूद केजरीवाल की सरकार खालिस्तानी अलगाववादी तत्वों के प्रति नरम रुख अपना रही है बल्कि उनका तुष्टीकरण भी कर रही है । मीडिया में  शीर्षक के साथ एक खबर प्रकाशित हुई थी... "खालिस्तान समर्थक अमृतपाल पर कार्रवाई ना होने से उठ रहे हैं सवाल" । अमृतपाल को लेकर खुफिया एजेंसियों ने एक रिपोर्ट मोदी सरकार और गृहमंत्री अमित शाह को दी थी जो पंजाब के पुलिस विभाग से शेयर भी की गई थी लेकिन इसके बावजूद भी भगवंत मान ने अमृतपाल और उसके साथी खालिस्तानी तत्वों के सामने सरेंडर कर रखा है -अमृतपाल के समर्थक लवप्रीत ने अमृतपाल पर सोशल मीडिया पोस्ट लिखने वाले एक शक्स को किडनैप करके पीटा था । इस पर पुलिस ने लवप्रीत समेत 30 को आरोपी बनाया था लेकिन 23 फर...
हिण्डनबर्ग का जलवा

हिण्डनबर्ग का जलवा

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अमेरिका में पाँच व्यक्तियों के समूह से निर्मित, एक ऐसी संस्था जिसका मुखिया कभी एक एम्बुलेंस का ड्राइवर हुआ करता था, उन्होंने अपनी सृजनात्मकता और कार्य के प्रति समर्पण की भावना से आज सम्पूर्ण विश्व में अपनी लोकप्रियता का परचम लहराया है। भारतीय दृष्टिकोण के आधार पर यदि इस संस्था का आंकलन किया जाए तो वह विश्व की कम्पनियों का लेखापरीक्षा करने में स्वयं को पूर्णतया ईमानदार और निष्पक्ष सिद्ध कर रही है। यह संस्था सोशल मीडिया से प्राप्त आंकड़ो के आधार पर ही किसी भी कम्पनी का ऑडिट करती है, जिसके अन्तर्गत इस संस्था के सदस्य निरन्तर कम्प्यूटर पर कार्य करते हुए अपनी रिपोर्ट तैयार करते हैं। आज विश्व के निवेशकों का इस संस्था की कार्यप्रणाली पर एक अटूट विश्वास बन चुका है।कोरोनाकाल में भारत की कम्पनियों का प्रदर्शन सम्पूर्ण विश्व की तुलना में सर्वाधिक रहा है। सम्पूर्ण विश्व की दृष्टि, भारत की अचम्भित...
अपने पापों का फल भुगत रहा, कर्ज से कराहता पाकिस्तान

अपने पापों का फल भुगत रहा, कर्ज से कराहता पाकिस्तान

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भारत तथा विश्व में शांति के लिए पाकिस्तान का विश्व के मानचित्र से मिट जाना ही उचितमृत्युंजय दीक्षितपड़ोसी देश पाकिस्तान आज भारी कर्ज व अभूतपूर्व मंहगाई के बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है। यद्यपि पाकिस्तान सरकार इससे मुक्ति पाने के लिए कुछ कदम उठा रही है लेकिन यह कदम पाकिस्तान को इस भंवरजाल से उबारने के लिए नाकाफी हैं। कहा जाता है कि बुरे समय में एक के बाद एक सभी अपका साथ छोड़ कर चले जाते हैं और यही हाल इस पाकितान का हो रहा है धीरे धीरे विश्व के सभी देश उससे किनारा कर रहे हैं ।इन परिस्थितियों में भी पाकिस्तान के राजनेता, सेना, आई.एस.आई सुधरने का नाम नहीं ले रहे, कश्मीर-कश्मीर का गाना और आतंक को पनाह देना आज भी इससे अलग हट कर वो कुछ सोच नहीं सकते। वहीं आंतरिक स्तर पर अल्पसंख्यकों का जीवन दूभर है । हिन्दू बच्चियों का अपहरण, धर्मान्तरण, मार पीट, मंदिरों को नष्ट करना यह पाकिस्तान के दैनिक समाचार ...
योगी सरकार का समावेशी बजट

योगी सरकार का समावेशी बजट

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गांव, किसान और पर्यटन पर विशेष बलमृत्युंजय दीक्षितउत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने प्रदेश का अब तक का सबसे बड़ा 6.90 लाख करोड़ रुपए का बजट प्रस्तुत किया है जिसमें केंद्रीय बजट की तरह ही प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने पर बल दिया गया है और आगामी लोकसभा व नगर निकाय चुनावों को ध्यान में रखते हुए सामाजिक सरोकारों तथा शहरी क्षेत्रों व नगर निकायों के विकास पर भी बल दिया गया है।बजट में पहली बार किसी वर्ग विशेष या फिर धर्म विशेष का तुष्टिकरण भी नहीं किया गया है। वैसे भी जब से योगी सरकार बनी है तब से जितने भी बजट प्रस्तुत किए गये हैं सभी सबका साथ सबका विकास के नारे को ही ध्यान में रखकर प्रस्तुत किये गये हैं। योगी सरकार के वर्तमान बजट में जल तथा पर्यावरण संरक्षण सहित समाज के उच्च वर्ग से लेकर समाज के वंचित तबकों का भी पूरा ध्यान रखा गया है। यह बजट प्रदेश को आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश बनाने की ओर अ...
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की पुण्य तिथि

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की पुण्य तिथि

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26 फरवरी 1966 : पूरा जीवन तिहरे संघर्ष में बीता : दोहरा आजीवन कारावास --रमेश शर्मा स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर अकेले ऐसे बलिदानी क्राँतिकारी हैं जिन्हें दो बार आजीवन कारावास हुआ, उनका पूरा जीवन तिहरे संघर्ष से भरा है । एक संघर्ष राष्ट्र की संस्कृति और परंपरा की पुनर्स्थापना के लिये किया । दूसरा संघर्ष अंग्रेजों से मुक्ति केलिये । और तीसरा संघर्ष भारत के अपने ही बंधुओं के लांछन के झाँछन झेलने का।भारत यदि आक्रांताओं से पराजित हुआ और दासों का दास बना तो यह विदेशियों की शक्ति सामर्थ्य से नहीं अपितु अपने ही लोगों के असहयोग और ईष्या से बना । ये दोनों बातें सावरकर जी ने जीवन भर झेली । उनका संघर्ष सत्ता के लिये नहीं था, राजनीति के लिये नहीं था अपितु भारत राष्ट्र की अस्मिता और हिन्दु समाज के जागरण के लिये था । उनका और उनके परिवार का पूरा जीवन भारत के स्वत्व की प्रतिष्ठापना के लिय...
कर्मचारी लगते टेंशन, नेताओं को कई पेंशन।

कर्मचारी लगते टेंशन, नेताओं को कई पेंशन।

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देश के अर्थशास्त्री और राजनेता पुरानी पेंशन योजना को लेकर जो बयान दे रहे हैं, वह तर्कसंगत नहीं है। क्योंकि राज्य के विधायक और सांसद खुद कई-कई पेंशन ले रहे हैं। जबकि एक कर्मचारी जो साठ साल देश की सेवा करता है उसकी पेंशन बंद कर दी गयी है, क्यों ?  नई और पुरानी पेंशन योजना का कर्मचारियों की पेंशन पर बड़ा अंतर है। इसे ऐसे समझें कि अगर अभी 80 हजार रुपये सैलरी पाने वाला कोई शिक्षक रिटायर होता है तो पुरानी पेंशन योजना के हिसाब से उसे करीब 30 से 40 हजार रुपये की पेंशन मिलेगी। वहीं अगर नई पेंशन योजना के हिसाब से देखें तो उस शिक्षक को बमुश्किल 800 से एक हजार रुपये की ही पेंशन मिलेगी। वहीं नई योजना में रिटायरमेंट के बाद निश्चित पेंशन की गारंटी नहीं होती। पुरानी स्कीम में रिटायर्ड कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिजनों को पेंशन की राशि मिलती है। -प्रियंका सौरभ पुरानी पेंशन योजना पर विवाद ...
भारत के आर्थिक विकास में भारतीय नागरिकों का है भरपूर योगदान

भारत के आर्थिक विकास में भारतीय नागरिकों का है भरपूर योगदान

BREAKING NEWS, TOP STORIES, आर्थिक, समाचार
प्रत्येक वर्ष भारतीय संसद में बजट प्रस्तुत किए जाने के एक दिन पूर्व देश का आर्थिक सर्वेक्षण माननीय वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। देश की आर्थिक स्थिति के सम्बंध में गहराई से अध्ययन करने के उपरांत यह आर्थिक सर्वेक्षण संसद में पेश किया जाता है। दिनांक 31 जनवरी 2023 को भारत की वित्त मंत्री माननीया श्रीमती निर्मला सीतारमन द्वारा वर्ष 2022-23 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया गया। इस वर्ष के आर्थिक सर्वेक्षण में भारत की आर्थिक स्थिति के सम्बंध में कई ऐसी जानकारीयां उभरकर सामने आई हैं, जिनसे भारतीय नागरिकों को संतोष प्राप्त होगा। कोरोना महामारी एवं रूस यूक्रेन युद्ध के चलते वैश्विक स्तर पर लगभग सभी देशों ने गम्भीर आर्थिक समस्याओं का सामना किया है। परंतु, यह सुखद तथ्य उभरकर सामने आया है कि भारतीय नागरिकों के सहयोग से भारत ने इन आर्थिक समस्याओं का सामना बहुत सहज तरीके से किया है जिससे इ...
भारत : इंसाफ़ से पीड़ित बचपन

भारत : इंसाफ़ से पीड़ित बचपन

BREAKING NEWS, TOP STORIES, सामाजिक
भारत सरकार ने संसद में यह जानकारी देते हुए हाथ खड़े कर दिए हैं कि देश भर में बच्चों के खिलाफ अपराध की धाराओं के तहत दर्ज पचास हजार से ज्यादा मामलों में बच्चों को न्याय का इंतजार है। किसी भी देश और समाज में अपराधों पर काबू पाने की कड़ी व्यवस्था के बावजूद अगर आपराधिक घटनाओं पर लगाम नहीं लग पाती, तो यह सरकार और तंत्र की नाकामी का ही सबूत कहा जाएगा है। जिस देश में बच्चों के खिलाफ न सिर्फ अपराध की घटनाएं लगातार जारी हों, और उनमें न्याय मिलने की दर भी काफी धीमी हो तो यह एक बेहद अफसोसनाक स्थिति है। इसे देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ ही कहा जा सकता है। सबको पता है कि हमारे देश में बच्चों के बहुस्तरीय उत्पीड़न और उनके यौन शोषण जैसे अपराधों की रोकथाम में जब पहले के बनाए गए कानूनी प्रावधान नाकाफी साबित हुए, तब पाक्सो यानी यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम जैसी विशेष व्यवस्था की गई। इसके विपर...