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वैश्विक भुखमरी सूचकांक में भारत के बारे में आंकलन सही नहीं महसूस हो रहा है

वैश्विक भुखमरी सूचकांक में भारत के बारे में आंकलन सही नहीं महसूस हो रहा है

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वैश्विक भुखमरी सूचकांक में भारत के बारे में आंकलन सही नहीं महसूस हो रहा है अभी हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय संस्थान ने वैश्विक भुखमरी सूचकांक जारी किया है। इस सूचकांक में यह बताया गया है कि भारत की तुलना में श्रीलंका, म्यांमार, पाकिस्तान, एथीयोपिया, नेपाल, भूटान आदि देशों में भुखमरी की स्थिति बेहतर है। अर्थात, सर्वे में शामिल किए गए 121 देशों की सूची में श्रीलंका का स्थान 64वां, म्यांमार का 71वां, बांग्लादेश का 84वां, पाकिस्तान का 99वां, एथीयोपिया का 104वां एवं भारत का 107वां स्थान बताया गया है। जबकि पूरा विश्व जानता है कि वर्तमान में श्रीलंका, पाकिस्तान एवं म्यांमार जैसे देशों में खाद्य पदार्थों की भारी कमी है जिसके चलते इन देशों के नागरिकों के लिए दो जून की रोटी जुटाना भी बहुत मुश्किल हो रहा है। जबकि, भारत कई देशों को आज खाद्य सामग्री उपलब्ध करा रहा है। फिर किस प्रकार उक्त सूचकांक बना...
भ्रष्टाचार पर राजनीति से कमजोर होता लोकतंत्र

भ्रष्टाचार पर राजनीति से कमजोर होता लोकतंत्र

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भ्रष्टाचार पर राजनीति से कमजोर होता लोकतंत्र-ललित गर्ग-पिछले सालों में शीर्ष मंत्रियों, सांसदों, विधायकों एवं राजनैतिक दलों के शीर्ष नेताओं पर भ्रष्टाचार के मामलों में जांच एंजेन्सियों की कार्रवाई की साहसिक परम्परा का सूत्रपात हुआ है, तभी से इस तरह की कार्रवाईयां में राजनीतिक दलों को अपना जनाधार बढ़ाने की जमीन नजर आने लगी है। इन शर्मनाक, अनैतिकता, भ्रष्टाचार एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन की घटनाओं में शामिल राजनीतिक अपराधियों को भरतसिंह से उपमित करना राजनीतिक गिरावट की चरम पराकाष्ठा है। अपने नेताओं के काले कारनामों पर परदा डालने के लिये राजनीतिक दलों के तथाकथित कार्यकर्ता प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर उतर आते हैं जो आम जनता के लिये परेशानी का सबब बनते हैं। यह कैसा राजनीति चरित्र गढ़ा जा रहा है? यह कैसी शासन-व्यवस्थाएं बन रही है?नई आबकारी नीति बनाने और शराब की दुकानों के लाइसेंस देने में अन...
मदरसा

मदरसा

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अभी सिर्फ 25 % सर्वे पूरा हुआ है,जिसमे यूपी में लगभग 6500 ऐसे मदरसे पकड़े गए हैं,जो कि कहीं भी पंजीकृत नही हैं ! मुद्दा यह होना चाहिए था ,इनमें 'पढ़ने ' वाले लाखों 'छात्र ' कौन हैं... कहीं यह 'छात्र' रोहिंग्या या बांग्लादेशी तो नहीं हैं ? मदरसों के 'शिक्षकों' को वेतन कहाँ से और कौन दे रहा है ? इसमे कितने मदरसे सरकारी भूमि पर बने हैं ?....  'फंड मैनेजर' कौन है ? इन तथ्यों की जांच होनी चाहिए थी ! यह मदरसे चहुँओर हैं... लेकिन सीमांत क्षेत्रों में इनकी बाढ़ क्यों आई हुई है ? बगैर बैंकों में खाते खोले.... करोड़ों -अरबों रु की व्यवस्था कैसे हो रही हैं ? इन मदरसों में बंगाल,असम और बिहार से आये.... मोमिन बच्चों की इतनी बहुलता क्यों है  ?           इन प्रश्नों के उत्तर तलाशने के बजाए यूपी मदरसा बोर्ड के चेयरमैन जनाव जावेद इफ्तखार का कहना है कि इन मदरसों को गैर कानूनी...
आखिर इस चुनाव से कांग्रेस को क्या हासिल होगा?

आखिर इस चुनाव से कांग्रेस को क्या हासिल होगा?

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आखिर इस चुनाव से कांग्रेस को क्या हासिल होगा? =============== 19 अक्टूबर को मल्लिकार्जुन खडग़े का कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना तय है, क्योंकि 17 अक्टूबर को शशि थरूर के मुकाबले में खडग़े के पक्ष में एक तरफा वोटिंग हुई है। परिणाम आने से पहले ही खडग़े ने कह दिया है कि गांधी परिवार के बगैर कांग्रेस चल नहीं सकती है। खडग़े के इस कथन के बाद सवाल उठता है कि कांग्रेस अध्यक्ष के इस चुनाव से आखिर कांग्रेस को क्या हासिल होगा? जानकारों की माने तो ये चुनाव सिर्फ राहुल गांधी की जिद के कारण हो रहे हैं। राहुल गांधी यह नहीं चाहते थे कि कांग्रेस पर परिवार वादी पार्टी होने का आरोप लगे। इसलिए राहुल न तो स्वयं अध्यक्ष बने और न ही अपने परिवार के किसी सदस्य को अध्यक्ष बनने दिया। खडग़े को अध्यक्ष बना कर राहुल ने कांग्रेस को बचा लिया, लेकिन कांग्रेस की मजबूती का क्या होगा? लोकतंत्र में जो राजनीतिक दल च...
भाजपा ने पसमांदा मुस्लिम समाज को साथ लाने के लिए शुरू किया महाअभियान

भाजपा ने पसमांदा मुस्लिम समाज को साथ लाने के लिए शुरू किया महाअभियान

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भाजपा ने पसमांदा मुस्लिम समाज को साथ लाने के लिए शुरू किया महाअभियानमृत्युंजय दीक्षित2024 -लोकसभा चुनावों तथा उससे पूर्व जम्मू कश्मीर सहित कई राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने का काम शुरू का दिया है। इसी कड़ी में जब हैदराबाद में आयोजित भाजपा अधिवेशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पसमांदा मुस्लिम समाज की चर्चा की और स्नेह यात्रा निकालने की बात कही तब से भाजपा और पसमांदा मुस्लिम समाज के संबधों की चर्चा जोर पकड़ रही है। पसमांदा समाज को अपनी ओर मोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश भाजपा ने भी अपना अभियान तेज कर दिया है।भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि 2022 के विधानसभा चुनावों और उसके बाद आजमगढ़ और रामपुर जहां 50 प्रतिशत मुस्लिम आबादी रहती है वहां पर पसमांदा मुस्लिम समाज के 8 प्रतिशत लोगों ने भाजपा को अपना मत दिया ज...
युवा कभी ना भूले स्वामी विवेकानंद के वंशज है हम – निखिल यादव

युवा कभी ना भूले स्वामी विवेकानंद के वंशज है हम – निखिल यादव

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वा कभी ना भूले स्वामी विवेकानंद के वंशज है हम - निखिल यादव कोरोना काल के आगमन से ही युवाओं में अपने भविष्य के प्रति एक असमंजस की स्तिथि बनी हुई थी। दो वर्षो के बाद कॉलेज तो खुले है लेकिन इस बीच के काल में सिर्फ पढ़ाई के स्तर पर ही नहीं बल्कि मानसिक और भावनात्मक तौर पर भी युवाओं को जूझना पड़ा है। विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी , दिल्ली शाखा युवाओं के लिए पीछे छ: वर्षो से एक कार्यक्रम चला रही है युवा भारत : खुद को जानो। रविवार को इस कार्यक्रम की द्वितीय कार्यशाला का आयोजन हुआ जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के अनेकों कॉलेज जैसे मिरांडा हाउस , भगिनी निवेदिता , जानकी देवी मेमोरियल , शहीद राजगुरु , पीजीडीएवी कॉलेज , श्याम लाल , शहीद भगत सिंह , दीनदयाल उपाध्याय और अन्य कॉलेज के 120 युवा उपस्तिथ थे। कार्यशाला में विभिन प्रकार के खेल, स्किट प्रेजेंटेशन , चर्चा और प्रस्तुति हुई। समापन सत्र में युव...
हिन्दी में चिकित्सा पढ़ाई एक क्रांतिकारी कदम

हिन्दी में चिकित्सा पढ़ाई एक क्रांतिकारी कदम

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हिन्दी में चिकित्सा पढ़ाई एक क्रांतिकारी कदम- ललित गर्ग- हिन्दी को उसका गौरवपूर्ण स्थान दिलाने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार को साधुवाद दिया जाना चाहिए कि उनके प्रयासों से देश में पहली बार मध्य प्रदेश में चिकित्सा की पढ़ाई हिंदी में शुरू होने जा रही है। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने हिन्दी में मेडिकल की पढ़ाई का शुभारम्भ कर एक नए युग की शुरुआत की है, इससे न केवल हिन्दी का गौरव बढ़ेगा बल्कि हिन्दी को राष्ट्रभाषा एवं राज-काज की भाषा बनाने में आ रही बाधाएं दूर होंगी। अंग्रेजी भाषा पर निर्भरता की मानसिकता को जड़ से खत्म करने की दिशा में यह एक क्रांतिकारी एवं युगांतकारी कदम होने के साथ अनुकरणीय भी है, जिसके लिये अन्य प्रांतों की सरकारों को बिना राजनीतिक आग्रहों एवं पूर्वाग्रहों के पहल करनी चाहिए।आजादी का अमृत महोत्सव मना चुके देश के लिय...
लुभावने चुनावी वादे, महज वोट बटोरने के इरादे

लुभावने चुनावी वादे, महज वोट बटोरने के इरादे

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लुभावने चुनावी वादे, महज वोट बटोरने के इरादे खाली चुनावी वादों के दूरगामी प्रभाव होंगे। जो विचार सामने आया वह यह था कि चुनाव प्रहरी मूकदर्शक नहीं रह सकता और स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के संचालन पर कुछ वादों के अवांछनीय प्रभाव को नजरअंदाज कर सकता है। चुनाव आयोग ने कहा कि एक निर्धारित प्रारूप में वादों का खुलासा सूचना की प्रकृति में मानकीकरण लाएगा और मतदाताओं को तुलना करने और एक सूचित निर्णय लेने में मदद करेगा। यह सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए समान अवसर बनाए रखने में मदद करेगा। इन कदमों को अनिवार्य बनाने के लिए, चुनाव आयोग की योजना आदर्श आचार संहिता में संबंधित धाराओं में संशोधन की जरूरत है। -डॉ सत्यवान सौरभ देश में चुनाव के दौरान हमने अक्सर अलग अलग राजनीतिक दलों की तरफ से बड़े बड़े वादों की भरमार देखते है।  जैसे फ्री लैपटॉप, स्कूटी, फ्री हवाई यात्रा, मुफ्त टीवी, मुफ...
सउदी अरब में नया इस्लाम

सउदी अरब में नया इस्लाम

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सउदी अरब में नया इस्लाम* *डॉ. वेदप्रताप वैदिक* सउदी अरब आजकल जितने प्रगतिशील कदम उठा रहा है, वह दुनिया के सारे मुसलमानों के लिए एक सबक सिद्ध होना चाहिए। लगभग डेढ़ हजार साल पहले अरब देशों में जब इस्लाम शुरु हुआ था तब की परिस्थितियों में और आज की स्थितियों में जमीन-आसमान का अंतर आ गया है। लेकिन इसके बावजूद दुनिया के ज्यादातर मुसलमान पुराने ढर्रे पर ही अपनी गाड़ी धकाते चले आ रहे हैं। सउदी अरब उनका तीर्थ है। मक्का-मदीना उनका साक्षात स्वर्ग है। उसके द्वार अब औरतें के लिए भी खुल गए हैं। यह इतिहास में पहली बार हुआ है। वरना, पहले कोई अकेली मुस्लिम औरत हज या उमरा करने जा ही नहीं सकती थी। उसके साथ एक ‘महरम’ (रक्षक) का रहना अनिवार्य था। इसमें कोई बुराई उस समय नहीं थी, जब इस्लाम शुरु हुआ था। उस समय अरब लोग जहालत में रहते थे। औरतों के साथ पशुओं से भी बदतर व्यवहार किया जाता था लेकिन दुनिया इतनी ब...
भारत में अभी भी गरीबी भारी, कारण जनसंख्या और बेरोजगारी

भारत में अभी भी गरीबी भारी, कारण जनसंख्या और बेरोजगारी

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7 अक्टूबर 2022, (गरीबी उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस) भारत में अभी भी गरीबी भारी, कारण जनसंख्या और बेरोजगारी अधिकांश ग्रामीण गरीब खेतिहर मजदूर (जो आम तौर पर भूमिहीन होते हैं) और स्वरोजगार करने वाले छोटे किसान हैं जिनके पास 2 एकड़ से कम जमीन है। उन्हें साल भर रोजगार भी नहीं मिल पाता है। परिणामस्वरूप, वे एक वर्ष में बड़ी संख्या में दिनों तक बेरोजगार और अल्प-रोजगार में रहते हैं मुद्रास्फीति, विशेष रूप से खाद्य कीमतों में वृद्धि, बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक न्यूनतम उपभोग व्यय की लागत को बढ़ा देती है। इस प्रकार, मुद्रास्फीति कई परिवारों को गरीबी रेखा से नीचे धकेल देती है। भूमि और अन्य संपत्तियों के असमान वितरण के कारण, प्रत्यक्ष गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों का लाभ गैर-गरीबों द्वारा विनियोजित किया गया है। गरीबी की भयावहता की तुलना में इन कार्यक्रमों के लिए आवंटित संसाधनो...