कमजोर पड़ते विपक्ष से भारतीय लोकतंत्र खतरे में
(15 सितंबर: अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस)
कमजोर पड़ते विपक्ष से भारतीय लोकतंत्र खतरे में
सरकार को आलोचना को सिरे से खारिज करने के बजाय सुनना चाहिए। लोकतांत्रिक मूल्यों को खत्म करने के सुझावों पर एक विचारशील और सम्मानजनक प्रतिक्रिया की आवश्यकता है। प्रेस और न्यायपालिका जिन्हें लोकतंत्र के स्तंभ के रूप में माना जाता है, को किसी भी कार्यकारी हस्तक्षेप से स्वतंत्र होने की आवश्यकता है। मजबूत लोकतंत्र के लिए मजबूत विपक्ष की जरूरत होती है। वैकल्पिक विकल्प के बिना, मनमानी शक्ति पर रोक लगाने के चुनाव का उद्देश्य ही विफल हो जाता है। लोकतांत्रिक मूल्य और सिद्धांत भारत की पहचान के मूल हैं। हमें अपने लोकतंत्र के स्तंभों - विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया को मजबूत करके उसकी रक्षा करने की आवश्यकता है।
-डॉ सत्यवान सौरभ
प्रेस पर बढ़ते हमले और न्यायिक स्वायत्तता के क्षरण से लोकतंत्र...









