महिला प्रतिनिधित्व की स्थिति दयनीय क्यों?
- ललित गर्ग -
आज़ादी का अमृत महोत्सव मना चुके राष्ट्र में विधायी संस्थानों लोकसभा एवं विधानसभाओं में महिला प्रतिनिधियों की संख्या दयनीय है, नगण्य है। 75 वर्षों में लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 10 प्रतिशत तक भी नहीं बढ़ा है जबकि विधानसभाओं में यह स्थिति और भी चिन्तनीय है, वहां 9 प्रतिशत ही महिला प्रतिनिधि है। इस बार हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद यह मुद्दा फिर सुर्खियों में है कि वहां अड़सठ सदस्यीय विधानसभा में सिर्फ एक महिला विधायक होगी। हालांकि इस बार के चुनाव में वहां अलग-अलग दलों की ओर से कुल चौबीस महिला प्रत्याशी थीं। मुख्यधारा की राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व क्यों नहीं बढ़ रहा है, क्यों राजनीतिक दल महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के नाम पर उदासीन है? आखिर क्या वजह है कि जब संसद में बिना बहस के भी कई विधेयक पारित हो जाते हैं, तब भी संसद और विधानसभाओं में महिला...









