Shadow

TOP STORIES

आइये हम सभी अपने कचरे को सोने में बदले 

आइये हम सभी अपने कचरे को सोने में बदले 

Current Affaires, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, मल्टीमीडिया, सामाजिक
 गांधीजी ने कहा है- "इस दुनिया में हर व्यक्ति की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है लेकिन हर किसी के लालच को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। आइए हम एक ऐसी दुनिया बनाने की आशा करें जहां नफरत, युद्ध, क्रोध और हिंसा के मामले में कचरा न हो।" लेकिन अपनों के लिए प्यार, करुणा, सहनशीलता और हाथ में हाथ डालकर चलने का वादा ही खजाना है। इस तरह, हम सभी अपने कचरे को सोने में बदल पाएंगे। -डॉ सत्यवान सौरभ  महान पुरुष वे हैं जो कचरे को सोने में बदलने में सक्षम होते हैं। उनके पास जीवन में उस व्यापक दृष्टि की क्षमता होती है जिससे वे प्रतिकूल परिस्थितियों में संभावित लाभों का पूर्वाभास कर सकते हैं। गांधी जी एक ऐसे नेता थे जो विपरीत परिस्थितियों में उठे, भारत के लिए एक आदर्श दृष्टि रखते थे और बिना किसी हथियार के अपनी स्वतंत्रता के लिए लड़े, तब भी जब लोग सोचते थे कि एक अहिंसक आंदोलन...
भाजपा की विजय : एक दृष्टि

भाजपा की विजय : एक दृष्टि

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राज्य
अथक परिश्रम के पश्चात प्राप्त की गई विजय का सुख स्वयं में अत्यधिक लुभावना होता है और उस सुख को चाटुकार लोग अपनी चाटुकारिता से अत्यधिक मिठास से भर देते हैं। वास्तव में गुजरात विधानसभा चुनावों में भाजपा को एक श्रेष्ठ जनाधार के साथ विजयश्री प्राप्त हुई। अब इस विजयश्री प्राप्ति के पश्चात भाजपा के नीतिकारों को स्व-आंकलन करना भी आवश्यक है। यदि भाजपा की विजय का आंकलन निष्पक्षता के साथ किया जाए तो केजरीवाल जी का दिवास्वप्न इस चुनाव परिणाम के माध्यम से हकीकत में तो नहीं बदल सका परन्तु उसने प्रदेश से कांग्रेस को समाप्त कर भाजपा को प्रचण्ड जीत की ओर उन्मुख अवश्य किया।   गुजरात विधानसभा चुनाव के परिणाम के विषय में भाजपा को और अधिक मंथन करने की आवश्यकता है। इस विजयश्री को प्राप्त करने के लिए भाजपा ने क्या-क्या दांव पर लगाया यह जानना अतिआवश्यक है। इन चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी जी एवं गृ...
बांग्लादेश में हसीना का विरोध ?

बांग्लादेश में हसीना का विरोध ?

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* बांग्लादेश में भी शेख हसीना सरकार के खिलाफ उसी तरह प्रदर्शन होने शुरु हो गए हैं, जैसे कि श्रीलंका और म्यांमार की सरकारों के विरूद्ध हुए थे। म्यांमार की फौज ने वहां तो डंडे के जोर पर जनता को ठंडा कर दिया है लेकिन श्रीलंका की सरकार को चुनावों में मात खानी पड़ी है। ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ ने दावा किया है कि उसके प्रदर्शनों में दस लाख लोग जमा हुए हैं और उन्होंने हसीना से इस्तीफा मांगा है। उनका कहना है कि 2024 में चुनाव होने तक ढाका में कोई कार्यवाहक सरकार नियुक्त की जाए। बीएनपी के सातों सांसदों ने अपने इस्तीफों की घोषणा कर दी। उन्होंने मांग की है कि चुनाव तुरंत करवाएं जाएं। शेख हसीना ने हर बार धांधली करके चुनाव जीता है। बीएनपी को बांग्लादेश के कट्टरपंथी मुस्लिम मौलानाओं और जमाते-इस्लामी का भी भरपूर समर्थन है। बांग्लादेश की बीएनपी की नेता बेगम खालिदा जिया ने ...
भारत में इलाज मंहगा क्यों है?*

भारत में इलाज मंहगा क्यों है?*

TOP STORIES, विश्लेषण
डॉ. वेदप्रताप वैदिक इस बार राज्यसभा में ऐसे दो निजी विधेयक पेश किए गए हैं, जो पता नहीं कानून बन पाएंगे या नहीं लेकिन उन पर यदि खुलकर बहस हो गई तो वह भी देश के लिए बहुत लाभदायक सिद्ध होगी। पहला विधेयक, सबके लिए समान निजी कानून बनाने के बारे में है और दूसरा है, इलाज में लूट-पाट रोकने के लिए। निजी कानून याने शादी-ब्याह, तलाक, दहेज, उत्तराधिकार संबंधी कानून। इस बारे में मेरी विनम्र राय है कि सारे भारतीय लोगों को एक ही तरह का निजी कानून मानने में ज्यादा फायदा है। हजारों वर्ष पुराने हिंदू कानून, ईसाई और यहूदी कानून और इस्लामी कानूनों से चिपके रहने की बजाय नई परिस्थितियों के मुताबिक आधुनिक कानून मानने के कारण बहुत-सी परेशानियों से भारत के लोगों को मुक्त होने का मौका सहज ही मिल जाएगा। इसी तरह से अपने देश में लोगों को समुचित इलाज और इंसाफ पाने में बहुत दिक्कत होती है। अस्पताल और अदालत लोगों को ...
Why did Congress Perish in Gujarat?*

Why did Congress Perish in Gujarat?*

TOP STORIES
By Balbir Punj Newspapers have explained in depth Bhartiya Janta Party’s smashing victory in Gujarat assembly polls. Commentators have rightly attributed the unprecedented win to Narendra Modi’s charisma, his special connect with the state, Party’s poll strategy and the state Government’s performance in the preceding years. Surprisingly there’s hardly any explanation for Congress’s pathetic performance in the state where it’s in opposition for the last 27 years. Masses may have had reasons to favour or reject BJP- depending on their assessment of its performance while in office. But why did the voters punish Congress so harshly in Gujarat? Out of office for decades, Congress was in no position to annoy any section of voters. Still, it managed to alienate the electorate to the extent...
मोदीमय गुजरात

मोदीमय गुजरात

TOP STORIES, राज्य, राष्ट्रीय
-डॉ. सौरभ मालवीय  गुजरात में भाजपा की प्रचंड विजय गुजरात की जनता की भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति अटूट विश्वास की जीत है। यह उनके प्रति जनता के असीम स्नेह की विजय है। गुजरात विधानसभ चुनाव में भाजपा की विजय ने यह सिद्ध कर दिया है कि जनता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गुजरात मॉडल पसंद आ रहा है। इसलिए नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा का विजय रथ निरंतर आगे बढ़ रहा है। गुजरात विधानसभा के चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात की जनता से कहा था कि इस बार उनका रिकॉर्ड टूटना चाहिए। गुजरात की जनता ने उनकी बात का पूर्ण रूप से मान रखते हुए भाजपा को गुजरात के इतिहास का सबसे प्रचंड जनादेश देकर नया इतिहास रच दिया। गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 182 में से 156 सीटों पर विजय प्राप्त की है। पिछले विधानसभा चुनाव में गुजरात में भाजपा ने 99 सीटें प्राप्त की थीं, जबकि कां...
चुनावी भाषणों में हिंसा बन्द हो

चुनावी भाषणों में हिंसा बन्द हो

TOP STORIES, विश्लेषण
-विनीत नारायणपिछले कुछ वर्षों से देश के एक प्रमुख राजनैतिक दल के बड़े नेताओं द्वारा चुनावी सभाओं में बहुत हिंसक व अपमान जनक भाषा का प्रयोग किया जा रहा है। इससे न सिर्फ राजनीति में कड़वाहट पैदा हो रही है बल्कि समाज में भी वैमन्स्य पैदा हो रहा है। जब से आजादी मिली है सैकड़ों चुनाव हो चुके है पर ऐसी भाषा का प्रयोग अपने विरोधी दलों के प्रति किसी बड़े नेता ने कभी नहीं किया। एक प्रथा थी कि चुनावी जन सभाओं में सभी नेता सत्तारूढ़ दल की नीतियों की आलोचना करते थे और जनता के सामने अपनी श्रेष्ठ छवि प्रस्तुत करते थे। सत्तारूढ़ दल के नेता अपनी उपलब्धियां गिनाते थे और भविष्य के लिये चुनावी वायदे करते थे। पर इस पूरे आदान प्रदान में भाषा की गरिमा बनी रहती थी। प्रायः अपने विपक्षी नेता के ऊपर व्यक्तिगत टीका-टिप्पणी करने से बचा जाता था। इतना ही नही बल्कि एक दूसरे का इतना ख्याल रखा जाता था कि अपने विपक्षी दल के राष...
उत्तर प्रदेश उपचुनाव परिणाम के निहितार्थ

उत्तर प्रदेश उपचुनाव परिणाम के निहितार्थ

TOP STORIES
सभी दलों को मिला सन्देश  मृत्युंजय दीक्षित  उप्र में मैनपुरी लोकसभा व खतौली तथा रामपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव परिणाम आ चुके हैं । राजनीति के पंडित इनका विश्लेषण कर रहे हैं  जबकि राजनैतिक दल इनके आधार पर अपनी भविष्य की रणनीति का संकेत दे रहे हैं।मैनपुरी लोकसभा उचुपनाव में समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार और सपा मुखिया अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव ने मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद उपजी सहानुभूति के चलते  क्षेत्र के मतदाताओं का स्नेह प्राप्त करने में सफलता प्राप्त की है। मुजफ्फरनगर के खतौली सीट में  सपा -रालोद गठबंधन प्रत्याशी मदन भैया ने अपनी नई सोशल इंजीनियरिंग और  रालोद नेता जयंत चौधरी के  क्षेत्र में लगातार कैंप करने के कारण ये सीट भाजपा से  छीन ली है। रामपुर से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार आकाश सक्सेना चुनाव जीतने में कामयाब रहे हैं। भाजपा ने...
कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज में फायदेमंद हो सकती है लौंग

कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज में फायदेमंद हो सकती है लौंग

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय
नई दिल्ली, 09 दिसंबर (इंडिया साइंस वायर):हृदय और रक्तवाहिकाओं संबंधी बीमारियों और टाइप-2 डायबिटीज जैसे चयापचय विकारों के उपचार के लिए शरीर में स्वाभाविक रूप से पाये जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट ग्लूटाथियोन को बढ़ाना प्रभावी रणनीति माना जाता है। लेकिन, सिंथेटिक ग्लूटाथियोन अस्थिर है और जैविक उपलब्धता भी सीमित है। भारतीय मसालों के एक महत्वपूर्ण घटक लौंग को स्वाभाविक रूप से चयापचय संबंधी विकारों को कम करने के लिए जाना जाता है। एक नये अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने लौंग के गुणों को बारीकी से समझने का प्रयास किया है। उनका यह प्रयास यह पता लगाने पर केंद्रित है कि शरीर में प्राकृतिक ग्लूटाथियोन का स्तर बढ़ाने में लौंग कितनी प्रभावी हो सकती है। सेंट थॉमस कॉलेज, कोट्टयम, केरल के शोधकर्ताओं द्वारा किये गए इस अध्ययन के दौरान लौंग के जलीय अर्क के संभावित सक्रिय घटक क्लोविनॉल के गुणों की पड़ताल की गई ...
कौन नहीं देता अपना वोट अथवा क्यों नहीं दॅंडित किये जायें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग न लेने वाले?

कौन नहीं देता अपना वोट अथवा क्यों नहीं दॅंडित किये जायें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग न लेने वाले?

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
आर.के. सिन्हा अब चुनाव आयोग को यह गॅंभीरता से विचार करना होगा कि कैसे सभी मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने को लेकर गंभीर या बाध्य हों। वे मतदान करना अपना दायित्व समझें। हाल ही में दिल्ली नगर निगम चुनाव संपन्न हो गए। चुनाव प्रचार से लेकर चुनाव नतीजे सही से आ गये। कहीं कोई गड़बड़ नहीं हुई। पर निराशा इस कारण से अवश्य हुई कि इस बार दिल्ली में मतदान 47 फीसद के आसपास ही रहा। मतलब आधे से अधिक मतदाताओं ने अपना वोट डालने की आवश्यकता ही नहीं समझी। मतदान भी रविवार के दिन ही हुआ था। इसलिए उम्मीद तो यह थी कि दिल्ली वाले मतदान के लिए भारी सॅंख्या में निकलेंगे। उस दिन मौसम भी  खुशगवार था। फिर भी मतदान बेहद खराब रहा। बड़ी तादाद में मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवार के हक में वोट देने नहीं आए। वे जिन नेताओं और सियासी दलों को नापसंद करते हैं, उन्हें चाहे तो खारिज कर सकते थे। उन्हों...