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लोकतंत्र को मजबूती देने वाले नतीजें

लोकतंत्र को मजबूती देने वाले नतीजें

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-ः ललित गर्ग:- भारत के दो राज्यों गुजरात एवं हिमाचल प्रदेश और एक नगर निगम दिल्ली के चुनावों में इन क्षेत्रों के मतदाताओं ने जो जनादेश दिया है उससे एक बार फिर सिद्ध हो गया है कि भारत में लोकतंत्र कायम है और इसकी जीवंतता के लिये मतदाता जागरूक है। मतदाता को ठगना या लुभाना अब नुकसान का सौदा है। गुजरात में भारतीय जनता पार्टी ने कीर्तिमान गढे़, तो हिमाचल में कांग्रेस ने नया जीवन पाया, दिल्ली में आम आदमी पार्टी को खुश होने का मौका मिला। इन चुनावी नतीजों ने जाहिर कर दिया कि आज के मतदाता किसी भी पार्टी के दबाव में नहीं है। ये नतीजे जहां लोकतंत्र की सुदृढ़ता को दर्शा रहे हैं, वही देश की राजनीति का नई राहों की ओर अग्रसर होने के संकेत दे रहे हैं। इन चुनाव नतीजों से यह तय हो गया कि भारत विविधता में एकता एवं विभिन्न फूलों का एक ‘खूबसूरत गुलदस्ता’ है। इन जनादेशों का चारों तरफ स्वागत हो रहा है। ऐसे जन...
 विश्व सरकार: कितना व्यावहारिक?

 विश्व सरकार: कितना व्यावहारिक?

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            7 अप्रैल, 1978 को हमारे संविधान के संस्थापक श्री एच.वी. कामथ ने संविधान के अनुच्छेद 51 में संशोधन करने के लिए लोगों के सर्वोच्च मंच में एक संविधान (संशोधन) विधेयक पेश किया, ताकि राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों में निम्नलिखित नए खंड को शामिल किया जा सके:- "विश्व संघीय सरकार के लिए संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए विश्व संविधान सभा के शीघ्र गठन के लिए राज्य अन्य देशों के साथ सहयोग करने का प्रयास करेगा।"             पार्टी लाइन से परे बहस ने प्रस्ताव को लगभग सार्वभौमिक समर्थन प्रकट किया और यहां तक कि उपाध्यक्ष, श्री गोडे मुरहारी, जो उस समय अध्यक्षता कर रहे थे, ने अध्यक्ष से सभापतित्व में रहने का अनुरोध किया, "क्योंकि यह उन दुर्लभ अवसरों में से एक है जब एक डिप्टी स्पीकर बोलना चाहेंगे"। उन्होंने जोरदार भाषण में बिल का समर्थन भी किया। कहने की आवश...
नये भारत से नये विश्व की प्रेरणा देने का अवसर

नये भारत से नये विश्व की प्रेरणा देने का अवसर

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ललित गर्ग भारत के लिये एक शुभ एवं श्रेयस्कर घटना है इसी एक दिसंबर को जी-20 देशों के समूह की अध्यक्षता संभालना। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस जिम्मेदारी को संभालने का अर्थ है भारत को सशक्त करने के साथ-साथ दुनिया को एक नया चिन्तन, नया आर्थिक धरातल, शांति एवं सह-जीवन की संभावनाओं को बल देना। गुजरात विधानसभा में शानदार प्रदर्शन के साथ मोदी सरकार इस दायित्व को सफलतापूर्वक निर्वहन करने के लिये काफी गंभीर दिखाई दे रही है। निश्चित रूप से जी-20 जैसे विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के संस्थान का नेतृत्व करना देश के लिए प्रतिष्ठा का विषय है। यह एक ऐतिहासिक दायित्व भी है, स्वयं को साबित करने एवं कुछ अनूठा एवं विलक्षण कर दिखाने का दुर्लभ अवसर भी है। समूचे राष्ट्र को इसे भारत के अभ्युदय के रूप में देखते हुए इन उजालों का स्वागत करना चाहिए।विश्व की राजनीति, आर्थिक एवं सामरिक नीतियों, पर्...
और पृथ्वी पर जल संकट के आसार

और पृथ्वी पर जल संकट के आसार

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पृथ्वी पर तापमान वृद्धि और जलवायु परिवर्तन का प्रभाव हरेक जगह पड़ रहा है, परन्तु इससे सबसे अधिक प्रभावित जल संसाधन हो रहे हैं। तापमान बढ़ने के कारण वर्षा असमान हो रही है, पृथ्वी के सतह पर जल संसाधनों का वाष्पीकरण अधिक हो रहा है, पूरी दुनिया के ग्लेशियर पहले से अधिक तेजी से पिघल रहे हैं, सूखे का क्षेत्र और अवधि बढ़ती जा रही है, नदियों में पानी के बहाव में तेजी से अंतर आ रहा है और इन सबके कारण भूजल की उपलब्द्धता प्रभावित हो रही है। यह  सरे निष्कर्ष  संयुक्त राष्ट्र के वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल आर्गेनाईजेशन ने हाल में जल संसाधनों की स्थिति पर पहली वार्षिक रिपोर्ट में प्रकाशित किये हैं । इसी  रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 में दुनिया के सभी क्षेत्रों ने पानी से सम्बंधित चरम आपदाओं– बाढ़ और सूखे का सामना किया है और दुनिया की एक बड़ी आबादी मृदु पानी की कमी से जूझ रही है।यूँ तो  दुनिया के अन...
तीनों पार्टियाँ गदगद: तीनों को सबक

तीनों पार्टियाँ गदगद: तीनों को सबक

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक गुजरात, दिल्ली और हिमाचल के चुनाव परिणामों का सबक क्या है? दिल्ली और हिमाचल में भाजपा हार रही है और गुजरात में उसकी एतिहासिक विजय हुई है। हमारी इस चुनाव-चर्चा के केंद्र में तीन पार्टियाँ हैं- भाजपा, कांग्रेस और आप! इन तीनों पार्टियों के हाथ एक-एक प्रांत लग गया है। दिल्ली का चुनाव तो स्थानीय था लेकिन इसका महत्व प्रांतीय ही है। दिल्ली का यह स्थानीय चुनाव प्रांतीय आईने से कम नहीं है। दिल्ली में आप पार्टी को भाजपा के मुकाबले ज्यादा सीटें जरूर मिली हैं लेकिन उसकी विजय को चमत्कारी नहीं कहा जा सकता है। भाजपा के वोट पिछले चुनाव के मुकाबले बढ़े हैं लेकिन आप के घटे हैं। आप के मंत्रियों पर लगे आरोपों ने उसके आकाशी इरादों पर पानी फेर दिया है। भाजपा ने यदि सकारात्मक प्रचार किया होता और वैकल्पिक सपने पेश किए होते तो उसे शायद ज्यादा सीटें मिल जातीं। भाजपा ने तीनों स्थानीय निगमों क...
जरूरी बात, जिसे हर सांसद समझे*

जरूरी बात, जिसे हर सांसद समझे*

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चलती संसद का मूड बदलने के लिए, ताजा चुनावी नतीजे काफी है | गुजरात हिमाचल विधानसभा के साथ दिल्ली [एम् सी डी]  के नतीजों से  जो संकेत निकला है, वह सत्र में महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण जैसे विषय की धार को और तेज़ करेगा | यह तो सर्वविदित है कि विपक्ष कतिपय राजनीतिक घटनाओं से उत्साहित एवं आक्रामक है अभी तक तो दोनों पक्ष चुनाव और उसके नतीजों के इंतजार में व्यस्त थे । अब बुलन्द हौसलों  के साथ २९ दिसम्बर तक चलने वाले इस सत्र में  हर दिन विपक्ष, ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा करने की जहां कोशिश करेगा , वहीँ  सत्तापक्ष से इन विषयों पर उठे प्रश्नों का उत्तर देने के जनअपेक्षा  और बढ़ गई है | वस्तुत: विपक्ष को संसद में यह आभास कराना चाहिए कि उसका उद्देश्य अपने सवालों के जवाब पाना है, न कि हंगामा कर सदन की कार्यवाही ठप करना। सत्तापक्ष को इसके लिए भी तत्प...
Researchers develop Copper-based low-cost water purification device

Researchers develop Copper-based low-cost water purification device

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Demand for pure drinking water has been increasing steadily for the last few decades. With technological advancements, numerous commercial water purifiers have appeared in the market. However, in an attempt to purify water, most of these also eliminate the necessary oligo-dynamic minerals vital for our health. Widespread use of plastic containers for storing water, which do not possess antibacterial and purification properties, have added to the problem. Copper's oligo-dynamic properties, antimicrobial, antioxidant, alkalizing/pH balance, and high electrical and thermal conductivity make it the best candidate for water purification. A team of researchers from the CSIR-Central Scientific Instruments Organization (CSIR-CSIO) and the CSIR-Institute for Microbial Technology (CSIR-IMTech), ...
दिल्ली भाजपा का विधानसभा में वनवास व नगर निगम में हार! क्यों?

दिल्ली भाजपा का विधानसभा में वनवास व नगर निगम में हार! क्यों?

TOP STORIES, विश्लेषण
भाजपा की दिल्ली में दुर्गति व 1998 से विधानसभा में अल्पमत में क्यों? 2022 निगम चुनावों में बुरी हार क्यों? विवेचन करके कारण  बताने का प्रयास कर रहा हूँ। मुख्य कारक व कारण: *1.लचर निष्प्रभावी प्रदेश अध्यक्ष व केंद्रीय प्रभारी व घोर गुटबाज़ी।* *2.रिश्वतखोर,काली कमाई करने वाले निगम पार्षद।* *3.हार्डकोर काडर का असम्मान,उनके कार्य न किया जाना।* *4.हार्डकोर काडर के आजीविका की न सोचना।* ************************************** *क्या आपने सोचा है कि जिस भाजपा का नगर निगम में पिछले 22 वर्षों से प्रचंड बहुमत के साथ कब्जा था,वो पिछले 26 वर्षों से राज्य में सरकार क्यों नहीं बना पा रही है?* अमित शाह जैसा चाणक्य,मोदी जैसा करिश्माई नेतृत्व,303 सांसद, तमाम केंद्रीय मंत्री व तकरीबन 40% से ज्यादा मत मिलने के बाद भी क्रमशः 3 और 8 विधायक क्यों? और करेला नीम पर आज  चढ़ा जब निगम चुना...
काबुलः भारत नई पहल करे

काबुलः भारत नई पहल करे

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* पिछले साल काबुल पर तालिबान का कब्जा होते ही भारत सरकार बिल्कुल हतप्रभ हो गई थी। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे? हमारे विदेश मंत्री ने कहा था कि हम बैठे हैं और देख रहे हैं। उसी समय मैंने तालिबान के कब्जे के एक-दो दिन पहले ही लिखा था कि भारत सरकार को अत्यंत सतर्क रहने की जरुरत है लेकिन मुझे खुशी है कि हमारे कुछ अनुभवी अफसरों की पहल पर भारत सरकार ने ठीक रास्ता पकड़ लिया। उसने दोहा (क़तर) में स्थित तालिबानी तत्वों से संपर्क बढ़ाया, अफगानिस्तान को हजारों टन गेहूं और दवाइयां भेजने की घोषणा की और तालिबान सरकार से भी संवाद किया। काबुल स्थित अपने दूतावास को भी सक्रिय कर दिया। उधर तालिबान नेताओं और प्रवक्ता ने भारत की मदद का आभार माना, हालांकि भारत सरकार ने उनकी सरकार को कोई मान्यता नहीं दी है। इस बीच इस साल जनवरी में प्रधानमंत्री मोदी ने मध्य एशिया के पांचों गणतं...
समाज के उत्थान और सुधार में स्कूल और धार्मिक संस्थान 

समाज के उत्थान और सुधार में स्कूल और धार्मिक संस्थान 

TOP STORIES, सामाजिक
कुछ धार्मिक संस्थान आधुनिक मन के लिए प्रवचनों और प्रकाशनों के माध्यम से "धर्मी" मूल्य प्रणाली को साझा करने के लिए एक  मंच प्रदान करने में उपयोगी होते हैं। यह समाज को सामूहिक रूप से सही मूल्य प्रणाली को विकसित करने, साझा करने और अभ्यास करने में मदद करता है। यह बदले में समाज के उत्थान और सुधार में और अनिवार्य रूप से चरित्र और राष्ट्र निर्माण के प्रयासों में मदद करता है। सभी धर्म व्यक्ति को अच्छे कर्म करने, दूसरों की देखभाल करने और सही या नैतिक कार्य करने का आदेश देते हैं। हमारी एक लंबी परंपरा रही है जहां भारत में व्यक्ति और उद्योग "समाज की देखभाल" को उतना ही प्रोत्साहित करते हैं जितना कि व्यवसाय और अर्थव्यवस्था के भविष्य के विस्तार के लिए धन का सृजन करना। -डॉ सत्यवान सौरभ  मूल्य ऐसे विश्वास हैं जो धारक के लिए उपयोगिता या महत्व में निहित हैं, "या" सिद्धांत, मानक, या गुण सार्थक या ...