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मृदा क्षरण के मानव और पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य पर अपूरणीय परिणाम

मृदा क्षरण के मानव और पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य पर अपूरणीय परिणाम

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय
मृदा क्षरण का मानव और पारिस्थितिक तंत्र स्वास्थ्य दोनों पर अपूरणीय प्रभाव पड़ सकता है। भारत ने इस दिशा में कई पहलें की हैं जिन्हें स्वस्थ मृदा और अंततः एक स्वस्थ ग्रह सुनिश्चित करने के लिए स्थायी तौर पर जारी रखा जाना चाहिए और उनमें निरंतर सुधार करते रहने आवशयक हैं। क्षरित मृदा के प्रबंधन और बहाली के लिए सभी हितधारकों के बीच संचार लिंक को मजबूत किया जाना चाहिए। साक्ष्य-आधारित जानकारी का समय पर प्रसार भी आवश्यक है। सभी लक्षित लाभार्थियों को सफल संरक्षण प्रथाएं और स्वच्छ तथा टिकाऊ प्रौद्योगिकियां प्रदान की जानी चाहिए। नागरिक पेड़ लगाकर, किचन गार्डन का विकास तथा रख-रखाव करके और मौसमी तथा स्थानीय रूप से प्राप्त भोजन का सेवन करके योगदान दे सकते हैं। -प्रियंका सौरभ  भारत में 145 मिलियन हेक्टेयर में मिट्टी का क्षरण हो रहा है, यह अनुमान है कि 96.40 मिलियन हेक्टेयर (कुल भौगोलिक क्षेत्र क...
चेक बाउंस मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

चेक बाउंस मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, समाचार
रजनीश कपूरदेश की सर्वोच्च अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले की सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। इस फ़ैसले से देशभर की अदालतों में लंबित पड़े 33 लाख मामलों पर प्रभाव पड़ेगा। इसके साथ ही चेक बाउंस के नाजायज़ केसों में भीकटौती हो सकेगी।दुनिया के कई देशों की तरह हमारे देश में भी चेक बाउंस होना एक अपराध माना जाता है। नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट,1881 के मुताबिक चेक बाउंस होने की स्थिति में चेक जारी करने वाले व्यक्ति पर मुकदमा चलाया जा सकता है। क़ानून केमुताबिक़ उसे 2 साल तक की जेल या चेक में भरी राशि का दोगुना जुर्माना या दोनों लगाया जा सकता है।मुख्य न्यायाधीश का पदभार सँभालने से कुछ हफ़्ते पहले, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने अपनी सहयोगी जज जस्टिस हिमाकोहली के साथ एक खंडपीठ में अक्तूबर 2022 को दिये इस फ़ैसले में इस क़ानून की एक धारा के सही उपयोग को स्पष्टकिया है। कोर्ट ने कहा कि जिस व्यक्...
नेपाल में नई सरकार

नेपाल में नई सरकार

BREAKING NEWS, TOP STORIES, समाचार
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* नेपाल में हुए आम चुनावों में जिन सत्तारुढ़ पार्टियां ने पहले से गठबंधन सरकार बनाई हुई थीं, वे फिर से जीत गई हैं। उन्हें 165 में से 90 सीटें मिल गई हैं। अब नेपाली कांग्रेस के नेता शेर बहादुर देउबा फिर प्रधानमंत्री बन जाएंगे। हालांकि उनकी पार्टी को 57 सीटें मिली हैं और प्रंचड की कम्युनिस्ट पार्टी को सिर्फ 18 सीटें मिली हैं लेकिन जहां तक वोटों का सवाल है, प्रचंड की पार्टी को 27,91,734 वोट मिले हैं जबकि नेपाली कांग्रेस को सिर्फ 26,66,262 वोट ही मिल पाए। इसका अर्थ क्या हुआ? अब कम्युनिस्ट पार्टी का असर ज्यादा मजबूत रहेगा। अब देउबा की सरकार में कम्युनिस्ट पार्टी का सिक्का ज़रा तेज दौड़ेगा। देउबा प्रधानमंत्री तो दुबारा बन जाएंगे लेकिन उन्हें अब उन कम्युनिस्टों की बात पर ज्यादा ध्यान देना होगा, जो कभी नेपाली कांग्रेस के कट्टर विरोधी रह चुके हैं। उन्होंने अपनी बगावत के ...
समुद्री लहरों से बिजली पैदा करने की नई तकनीक

समुद्री लहरों से बिजली पैदा करने की नई तकनीक

TOP STORIES, विश्लेषण
नई दिल्ली, 06 दिसंबर (इंडिया साइंस वायर): दुनियाभर में ऊर्जा संकट एक नई चुनौती बनकर उभरा है। इससे लड़ने के लिए वैज्ञानिक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पादन के तरीके खोजने का प्रयास कर रहे हैं। इसी दिशा में कार्य करते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे समुद्री तरंगों से बिजली उत्पन्न हो सकती है। समुद्री तरंगों से बिजली उत्पादन की यह तकनीक आईआईटी मद्रास द्वारा विकसित ‘ओशन वेव एनर्जी कन्वर्टर’ नामक उपकरण के कारण संभव हो सका है। इस उपकरण का परीक्षण पिछले महीने सफलतापूर्वक किया गया है। इस उपकरण को तमिलनाडु के तूतीकोरिन तट से लगभग छह किलोमीटर दूर 20 मीटर गहरे स्थान पर तैनात किया गया है। इस उपकरण से अगले तीन वर्षों में समुद्र की लहरों से एक मेगावाट बिजली पैदा करने का लक्ष्य है। ‘सिंधुजा-1’ नामक इस परियोजना के तहत स्थाप...
Church – Façade & Reality

Church – Façade & Reality

TOP STORIES, सामाजिक
By Balbir Punj Is Church in India a religious organisation wedded to spiritual upliftment of the laity, or an outfit with its own socio-political agenda? This issue has been brought to fore once again following a violent turn in the Church led agitation, going on for nearly 140 days in Kerala against the construction of Vizhinjam International Sea Port, in Thiruvananthapuram. It was fire and brimstone at Vizhinjam on November 27.  The agitators, led by the Latin Catholic Church against the Rs 7,525 crore international sea port project in Thiruvananthapuram, allegedly vandalised the local police station and thrashed 27 police personnel, three of them seriously. Police allege the violence was planned. “They (protesters) had done detailed planning. Two youths, wearing masks, ha...
Researchers find novel way to target Triple-Negative Breast Cancer

Researchers find novel way to target Triple-Negative Breast Cancer

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES
If we think of cancer cells as a house, the receptors are the locks of the house’s front door. Triple-Negative Breast Cancer (TNBC) is more challenging to handle as it does not express commonly found breast cancer receptors, e.g., Estrogen (ER) and Progesterone (PR). This leaves doctors with less options to destroy the cancer cells. A team of researchers led by Dr Dipak Dutta, Principal Scientist at the Cancer Biology division of CSIR-Central Drug Research Institute (CDRI), Lucknow, has come up with a new and striking mechanism for EZH2-histone trimethylation-mediated gene upregulation instead of its classical suppressive function. Apart from Dr Dutta, the CDRI researchers team comprised Ayushi Verma, Akhilesh Singh, Manish Pratap Singh, Mushtaq Ahmad Nengroo, Krishan Kumar Saini, ...
क्या न्याय पंचायतें कम कर सकती हैं राष्ट्रपति महोदया की वेदना ?

क्या न्याय पंचायतें कम कर सकती हैं राष्ट्रपति महोदया की वेदना ?

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
अरुण तिवारी हज़ारों भारतीय ग़रीब सिर्फ इसलिए जेलों में जीवन गुजारने को विवश हैं, क्योंकि वे न संविधान की मूल भावना से परिचित हैं और न ही अपने संवैधानिक अधिकार व कर्तव्यों से। वे इतने ग़रीब हैं कि जमानत कराने में उनके परिजनों के घर के बर्तन बिक जायेंगे। जुर्म मामूली..किसी से तू तू-मैं मैं या किसी से हाथापाई; किन्तु मात्र ग़रीबी और अज्ञानता के कारण जाने कितने बिना जमानत जेल में ज़िदगी गंवा रहे हैं। कोई पांच साल, कोई दस तो कोई 20 साल से जेलों में पडे़ हैं। बीते संविधान दिवस पर हमारी महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यह वेदना प्रकट की। उन्होने सभा में उपस्थित न्यायधीशों और क़ानून मंत्री से यह अपेक्षा की कि वे ऐसे दरिद्रनारायणों को समय से और सस्ते में न्याय दिलाने के लिए कुछ करेंगे।  राष्ट्रपति जी के संविधान दिवस सम्बोधन का लिंक - https://youtu.be/wemmEEpsb1s ) क्...
पोषण का पावरहाउस” बाजरा 

पोषण का पावरहाउस” बाजरा 

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 बाजरा गरीबी के खिलाफ लड़ाई में अपार क्षमता रखता है और भोजन, पोषण, चारा और आजीविका सुरक्षा प्रदान करता है। वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों में, बाजरे की खेती 50% आदिवासी और ग्रामीण आबादी को आजीविका प्रदान करती है। भारत 41% बाजार हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा वैश्विक उत्पादक है। यह अनुमान लगाया गया है कि बाजरा बाजार 2025 तक 9 बिलियन अमरीकी डालर से अधिक के अपने वर्तमान बाजार मूल्य से बढ़कर 12 बिलियन अमरीकी डालर से अधिक होने के लिए तैयार है। -प्रियंका सौरभ  बाजरा का उपयोग छोटे दाने वाले अनाज जैसे कि ज्वार (ज्वार), बाजरा (बाजरा), छोटी बाजरा (कुटकी), फिंगर बाजरा (रागी/मंडुआ), आदि के लिए किया जाता है। बाजरा भारत में मुख्य रूप से खरीफ की फसल है। उनका उच्च पोषण मूल्य है। कृषि मंत्रालय ने भी बाजरा को "पोषक अनाज" घोषित किया है। वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष के रूप में मनाया ज...
घुटने टेकता ईरान

घुटने टेकता ईरान

TOP STORIES, समाचार
घुटने टेकता ईरान* *डॉ. वेदप्रताप वैदिक* ईरान में हिजाब के विरुद्ध इतना जबर्दस्त जन-आंदोलन चल पड़ा है कि मुल्ला-मौलवियों और आयतुल्लाहों की सरकार को घुटने टेकने पड़ गए हैं। उसने घोषणा की है कि वह ‘गश्त—ए-इरशाद’ नामक अपनी मजहबी पुलिस को भंग कर रही है। इस पुलिस की स्थापना 2006 में राष्ट्रपति महमूद अहमदनिजाद ने इसलिए की थी कि ईरानी लोगों से वह इस्लामी कानूनों और परंपराओं का पालन करवाए। देखिए, ईरान की कथा भी कितनी विचित्र है। सउदी अरब और यूएई जैसे सुन्नी और अरब राष्ट्रों से ईरान की हमेशा ठनी रहती है लेकिन फिर भी वह हिजाब-जैसे सुन्नी और अरबी रीति-रिवाजों को उनसे भी ज्यादा सख्ती से लागू करने पर आमादा रहता है। ईरान तो आर्य राष्ट्र है। उसके शहंशाह को ‘आर्यमेहर’ कहा जाता था। लेकिन ईरान अपने भव्य भूतकाल को भूलकर अब अरबों की नकल करता है और दूसरी तरफ वह अपने शिया होने पर इतना गर्व करता है कि सुन्...
क्या  फूड फोर्टिफिकेशन, पोषण की कमी का नया रामबाण इलाज है ? 

क्या  फूड फोर्टिफिकेशन, पोषण की कमी का नया रामबाण इलाज है ? 

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इसका उद्देश्य आपूर्ति किए जाने वाले खाद्यान्न की पोषण गुणवत्ता में सुधार करना तथा न्यूनतम जोखिम के साथ उपभोक्ताओं को स्वास्थ्य लाभ प्रदान करना है। यह आहार में सुधार और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी का निवारण करने हेतु एक सिद्ध, सुरक्षित और लागत प्रभावी रणनीति है। क्या  फूड फोर्टिफिकेशन, पोषण की कमी का नया रामबाण इलाज है ? यह पोषण सुरक्षा के लिए कोई चमत्कारिक उपाय नहीं हैं। लेकिन कुछ लोग अनुभव के आधार पर एनीमिया और पोषण संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए फोर्टिफिकेशन को एक चमत्कार के रूप में पेश करते रहे हैं। दरअसल यह एक क्लिनिकल दृष्टिकोण है। इसे बड़े पैमाने पर लागू नहीं किया जा सकता और न ही किया जाना चाहिए। -डॉ सत्यवान सौरभ फूड फोर्टिफिकेशन से तात्पर्य खाद्य पदार्थों में एक या अधिक सूक्ष्म पोषक तत्वों की जानबूझकर की जाने वाली वृद्धि से है जिससे इन पोषक तत्वों की न्यूनता में सुधार या निव...