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J&K – The ‘Secular’ Fault Lines

J&K – The ‘Secular’ Fault Lines

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J&K - The ‘Secular’ Fault LinesBy Balbir Punj Recently the Union territory of Jammu and Kashmir figured prominently in national discourse. While defence Minister Rajnath Singh declared India’s intent to reclaim areas such as Gilgit and Baltistan in Pakistan occupied Kashmir (POK) in accordance with the 1994 Parliament resolution, Law Minister Kiran Rijju sought to set the record straight on who was responsible for the delay in the accession of the princely state into the Indian Union. October 27 last, marked the 75th anniversary of Shaurya Diwas which commemorates the landing of Indian troops (1 Sikh regiment) at Srinagar airport in 1947. The army was air-dashed post-haste to the beleaguered Valley to evict Pakistan – backed tribesmen, a day after Maharaja Hari Singh signed the ...
न्यायपालिका के लिए छुट्टियों की संस्कृति को बंद किया जाना चाहिए?

न्यायपालिका के लिए छुट्टियों की संस्कृति को बंद किया जाना चाहिए?

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(धीमी गति से चलता न्याय का पहिया ) न्यायपालिका के लिए छुट्टियों की संस्कृति को बंद किया जाना चाहिए? अवकाश की अवधारणा औपनिवेशिक नियमों से उत्पन्न हुई है। उस समय न्यायाधीश इंग्लैंड से आए थे, भारत की तुलना में ठंडी जगह और भारत की गर्मी उनके लिए असहनीय थी। अदालतों और स्कूलों को छोड़कर देश में कोई भी सरकारी संगठन नहीं है जहाँ छुट्टी होती है। भारतीय अदालतों में 3.1 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं। भारत में अपर्याप्त न्यायिक शक्ति है (भारत में प्रति मिलियन जनसंख्या पर केवल 13 न्यायाधीश हैं, ब्रिटेन की 100 की तुलना में)। दुनिया में कई देश ऐसे हैं जहां कोर्ट में छुट्टियां नहीं होती हैं। उदाहरण के लिए, फ्रांस और यू.एस. न्यायाधीशों के पास अवकाश नहीं होता है, लेकिन वे न्यायालय के कार्य को प्रभावित किए बिना अवकाश ले सकते हैं। भारत में भी अधीनस्थ आपराधिक न्यायालयों में कोई अवकाश नहीं होता है। लेकिन...
मोरबी पुल टूटने की सजा किसे?

मोरबी पुल टूटने की सजा किसे?

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मोरबी पुल टूटने की सजा किसे?* *डॉ. वेदप्रताप वैदिक* गुजरात के मोरबी में जो पुल टूटा है, उसमें लगभग डेढ़ सौ लोगों की जान चली गई और सैकड़ों लोग घायल हो गए। मृतकों के परिजनों को केंद्र और गुजरात की सरकारें 6-6 लाख रु. का मुआवजा दे रही हैं और घायलों को 50-50 हजार का लेकिन यहां मूल प्रश्न यह है कि क्या सरकार की जिम्मेदारी सिर्फ इतनी ही है? जो लोग मरे हैं, उनके परिजन 6 लाख रु. के ब्याज से अपना घर कैसे चलाएंगे? कई परिवार बिल्कुल अनाथ हो गए हैं। सबसे ज्यादा महिलाएं और बच्चों की मौत हुई है। कोई आश्चर्य नहीं कि उस पुल के हादसे में मृतकों की संख्या अभी और बढ़ जाए। लगभग 200 साल पुराने इस पुल की हालत काफी खस्ता थी। कई बार उस पर टूट-फूट हो चुकी है। गुजरात सरकार ने इस पुल के संचालन का ठेका एक गुजराती कंपनी को दिया था। पुल पर आने वाले हर यात्री को वह 17 रुपए का टिकट बेचती थी। लगभग 100 लोगों के ...
भारतीय जीवन दर्शन और चिंतन

भारतीय जीवन दर्शन और चिंतन

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ह्रदय नारायण दीक्षित जीवन इसी जगत में है और सुख दुख भी। आनंद भी इसी संसार में है। योग ध्यान भक्ति उपासना इसी संसार में है। भारतीय धर्म चिंतन में चार पुरुषार्थ धमर्, अर्थ, काम और मोक्ष प्राप्ति का क्षेत्र यही संसार है। संसार त्याग क्षेत्र नहीं है। यह कर्म क्षेत्र, धर्म क्षेत्र व भोग क्षेत्र है। कर्तापन भ¨क्तापन ही संसार है। लेकिन जीवन रहस्य जटिल हैं। भारतीय दर्शन और चिंतन में जिज्ञासा का महत्व है। ऋग्वेद प्राचीनतम ज्ञानकोष है। यह जिज्ञासा से भरापूरा है। इसके रचनाकाल से लेकर संपूर्ण वैदिक साहित्य में भरी पूरी प्रश्न जिज्ञासा है। मानने पर जोर नहीं है, जानने की इच्छा महत्वपूर्ण है। केन उपनिषद् बड़ी प्यारी पुस्तक है। इसमें अंतःकरण से जुड़े 5 प्रश्न हैं। पहली जिज्ञासा है, ‘‘यह मन किसके द्वारा प्रेरित होकर सक्रिय है?‘‘ सीधा सरल प्रश्न है। मन चंचल है। गीता में अर्जुन ने श्रीकृष्ण से कहा, ‘‘हे ...
आर्यों का निवास और वैदिक संस्कृतियों-संस्कारों का घर हरियाणा।

आर्यों का निवास और वैदिक संस्कृतियों-संस्कारों का घर हरियाणा।

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पंजाब पुनर्गठन अधिनियम (और राज्य पुनर्गठन आयोग की पूर्व सिफारिशों के अनुसार) के पारित होने के साथ, सरदार हुकम सिंह संसदीय समिति की सिफारिश पर हरियाणा 1966 में पंजाब से अलग होकर भारत का 17 वां राज्य बन गया। इस समिति के गठन की घोषणा 23 सितंबर 1965 को संसद में की गई थी। 23 अप्रैल, 1966 को हुकुम सिंह समिति की सिफारिश पर कार्य करते हुए, भारत सरकार ने विभाजन और विभाजन के लिए न्यायमूर्ति जे.सी. शाह की अध्यक्षता में शाह आयोग की स्थापना की। लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा को ध्यान में रखते हुए पंजाब और हरियाणा की सीमाओं की स्थापना की। आयोग ने 31 मई, 1966 को अपनी रिपोर्ट दी। हरियाणा उत्तर पश्चिम भारत में 27 डिग्री 39' एन से 30 डिग्री 35' एन अक्षांश और 74 डिग्री 28' ई से 77 डिग्री 36' ई देशांतर के बीच और समुद्र तल से 700-3600 फीट की ऊंचाई के साथ स्थित है। हरियाणा की राजधानी, चंडीगढ़, इसके पड़ोसी रा...
आज विश्व में कई देश भारतीय मूल के नागरिकों को कर रहे हैं उच्च पदों पर आसीन

आज विश्व में कई देश भारतीय मूल के नागरिकों को कर रहे हैं उच्च पदों पर आसीन

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आज विश्व में कई देश भारतीय मूल के नागरिकों को कर रहे हैं उच्च पदों पर आसीन अभी हाल ही में भारतीय मूल के राजनेता श्री ऋषि सुनक ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है। इस समाचार से स्वाभाविक रूप से भारतीय समाज में भी खुशी की लहर दौड़ गई। परंतु, ब्रिटेन के अलावा विश्व के अन्य 7 देशों में भी भारतीय मूल के राजनेताओं ने प्रधानमंत्री अथवा राष्ट्रपति का पद सम्भाला हुआ है। अमेरिका की उपराष्ट्रपति श्रीमती कमला हैरिस भारतीय मूल की हैं। इसी प्रकार भारतीय मूल के श्री प्रविंद जगन्नाथ वर्तमान में मॉरिशस के प्रधानमंत्री हैं। भारतीय मूल के ही श्री भरत जगदेव 2020 से गुयाना के उपराष्ट्रपति हैं। भारतीय मूल के एंटोनियो कास्टा वर्तमान में पुर्तगाल के प्रधानमंत्री है। श्री चंद्रिका प्रसाद उर्फ श्री चान संतोखी वर्तमान में सूरीनाम के राष्ट्रपति है। सिंगापुर की वर्तमान राष्ट्रपति हलीमा भी भारतीय मूल की हैं।...
महाराष्ट्र-गुजरात से सीखों, मत बांटों इन्हें

महाराष्ट्र-गुजरात से सीखों, मत बांटों इन्हें

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महाराष्ट्र-गुजरात से सीखों, मत बांटों इन्हें आर.के. सिन्हा महाराष्ट्र और गुजरात में आजकल निजी क्षेत्र का निवेश आकर्षित करने को लेकर स्वस्थ स्पर्धा चल रही है। यह अपने आप में सुखद है। ये दोनों राज्य 1 मई, 1960 को अलग-अलग प्रदेश के रूप में देश के मानचित्र में आने से पहले “बॉम्बे स्टेट” के ही अंग थे। यानी वे एक ही प्रदेश का हिस्सा थे। यह सब जानते हैं। ये भाषाई आधार पर अलग-अलग होने के बावजूद एक दूसरे के बेहद निकट हैं।  हाल के दिनों में ही “टाटा एयरबस परियोजना” गुजरात के पाले में गई। यह परियोजना पहले महाराष्ट्र के लिए तय थी, जिसे बाद में गुजरात में स्थापित करने का फैसला किया गया। परियोजना की जगह में बदलाव को लेकर मचे विवाद के बीच महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने सफाई दी। शिंदे ने कहा कि महाराष्ट्र के औद्योगिक क्षेत्र के लिए बड़े निवेश की तैयारी है। टाटा...
कश्मीरी हिंदुओ पर विभत्स हिंसा, बर्बरता की ये कहानी*

कश्मीरी हिंदुओ पर विभत्स हिंसा, बर्बरता की ये कहानी*

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कश्मीरी हिंदुओ पर विभत्स हिंसा, बर्बरता की ये कहानी*====================आज फारुख अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती दहाड़े मार मार कर रो रहे हैं कि मोदी ने कश्मीर को बर्बाद कर दिया । कश्मीरी नोंजवानों पर सेना गोली बरसा रही है। हमारे लोगो को हिन्दू- मुस्लिम में बांटा जा रहा है । भाई चारा खत्म कर दिया इस सरकार ने । फारुख अब्दुल्ला जी दिलीप कुमार कौल वह शख्स हैं जिन्होंने बांदीपोरा,कश्मीर के एक चौराहे पर 25.6.1990 को गिरिजा टिक्कू की आरे से काटी गई सिर से लेकर 'नीचे' तक दो हिस्सों में बटी देह देखी थी । पोस्टमार्टम के बाद गिरिजा टिक्कू की देह को फिर से चमड़े के धागे से सिला गया था उम्र थी सिर्फ 23 वर्ष ज़िंदा शरीर को दो हिस्सों में काटने से पहले गिरिजा को हिन्दू होने की सज़ा दी गई थी, दर्जनों जेहादियों ने उनके साथ बर्बर बलात्कार भी किया था ।कश्मीरी पंडितों को ''काफिर हिन्दू' जा रहा है'' कहकर राह च...
खड़गे – कांग्रेस का लोकतंत्र*

खड़गे – कांग्रेस का लोकतंत्र*

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खड़गे - कांग्रेस का लोकतंत्र* कांग्रेस पार्टी में 24 वर्षो के पश्चात अब पुनः लोकतंत्र की स्थापना हुई है। अब परिवारवाद का मजबूत किला ध्वस्त हो गया है। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव सम्पन्न हुआ और मल्लिकार्जुन खरगे का राज्याभिषेक हुआ। खरगे जो कर्नाटक के निवासी हैं और गांधी परिवार के निकटस्थ माने जाते हैं। यदि हम उनके अतीत पर दृष्टिपात करें तो उनका बाल्यकाल अत्यधिक संघर्षपूर्ण रहा। उन्होंने 7 वर्ष की अल्प आयु में एक दुर्घटना में अपनी माता को खो दिया था। तत्पश्चात खरगे ने अपने राजनीतिक जीवन का शुभारम्भ छात्रसंघ नेता के रूप में किया। वर्ष 1969 में वे एमएसके मिल्स कर्मचारी संघ के कानूनी सलाहकार बने, वे संयुक्त मजदूर संघ के प्रभावशाली श्रमिक नेता भी थे एवं उन्होंने मजदूरों के हितार्थ अनेको आन्दोलनों का नेतृत्व भी किया। वर्ष 1969 में ही वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी में स...

एक भारत श्रेष्ठ भारत के प्रणेता – लौहपुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल

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31 अक्टूबर पर विशेष :-एक भारत श्रेष्ठ भारत के प्रणेता - लौहपुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेलमृत्युंजय दीक्षितस्वतंत्रता के पश्चात भारतीय एकता के प्रतीक, प्रखर देषभक्त जो ब्रिटिष राज के अंत के बाद 562 रियासतों को जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध थे, आजादी के बाद एक महान प्रशासक जिन्होनें स्वतंत्र देश की अस्थिर स्थिति को स्थिर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी ऐसे महान लौहपुरूष सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को ग्राम करमसद में हुआ था। इनके पिता झबेरभाई पटेल थे जिन्होंने 1857 में रानी झांसी के समर्थन में युद्ध किया था। इनकी मां का नाम लाडोबाई था। इनके माता पिता बहुत ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे।बालक वल्लभ की प्रारम्भिक पढ़ाई गांव के ही एक स्कूल में हुई यहां पर कक्षा चार तक की पढ़ाई होती थी। आगे की पढ़ाई के लिए वे पेटलाद गांव के स्कूल में भर्ती हुए जो उनके मूल गांव से छह से सात किमी की दूरी पर था । वल्ल...