Shadow

TOP STORIES

जेजे ईरानी के बिना भारत का स्टील सेक्टर

जेजे ईरानी के बिना भारत का स्टील सेक्टर

TOP STORIES, आर्थिक, राष्ट्रीय
जेजे ईरानी के बिना भारत का स्टील सेक्टर अथवा जेजे ईरानी में दिखाई देता था जेआरडी टाटा का अक्स आर.के. सिन्हा जेजे ईरानी एक अरसा पहले टाटा स्टील के मैनेजिंग डायरेक्टर पद से मुक्त होने के बाद खबरों की दुनिया से कमोबेश गायब से थे। पर उनके हाल ही में हुये निधन के बाद उन्हें जिस तरह से याद किया जा रहा है, उससे साफ है कि वे असाधारण कोरपोरेट हस्ती थे। 'स्टीलमैन ऑफ इंडिया' के नाम से मशहूर जेजे ईरानी को झारखंड, बिहार और स्टील की दुनिया से जुड़े हर शख्स का खास सम्मान मिलता रहा। पुणे में जन्मे जेजे ईरानी ने अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा जमशेदपुर में गुजारा। एक इंटरव्यू में अपनी इच्छा जाहिर करते हुए उन्होंने कहा था कि जिस शहर में पूरी जिंदगी काम किया, आखिरी सांस भी उसी शहर में लेना चाहते हैं। ईश्वर ने उनकी यह इच्छा पूरी की। जेजे ईरानी में नेतृत्व के भरपूर ग...
IIT-M researchers develop cost-effective agri-produce transportation system

IIT-M researchers develop cost-effective agri-produce transportation system

BREAKING NEWS, TOP STORIES
New Delhi, Nov. 3rd (India Science Wire):Researchers at the Indian Institute of Technology Madras (IIT-M), jointly with a farmers’ NGO, Pothu Vivasayeegal Sangam, have developed a unique, efficient, and cost-effective agricultural transportation system that would address labour shortage, a major issue faced by Indian farmers. The lightweight monorail type transportation system can frugally carry agricultural yields from the fields to collection points near the farmland. “Steel posts can be erected easily adjacent to the farmland, on which the monorail system would be mounted. On this rail, trolleys for carrying the produces are to be fitted and they can move back and forth. Once the operation is over it can be dismantled and moved to other farmlands,” said Prof. Shankar Krishnapill...
औरत-मर्दः बाहरी एकरूपता

औरत-मर्दः बाहरी एकरूपता

TOP STORIES, सामाजिक
*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* न्यूयाॅर्क टाइम्स ने अपने मुखपृष्ठ पर एक खबर छापी है कि अमेरिका में कई आदमी अब औरतों का वेश धारण करने लगे हैं और औरतें तो पहले से ही वहां आदमियों की वेशभूषा पहनते रही हैं। उनका कहना है कि कपड़ों में भी औरत-मर्द का भेद क्या करना? वह जमाना लद गया जब औरतों के लिए खास तरह की वेशभूषा, जेवर और जूते-चप्पल पहनना अनिवार्य हुआ करता था। उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होती थी। घूंघट और बुर्का लादना आवश्यक माना जाता था। हमारे संस्कृत नाटकों को देखें तो कालिदास और भवभूति जैसे महान लेखकों की रचनाओं में उनकी महिला पात्राएं संस्कृत में नहीं, प्राकृत में संवाद करती थीं। महिलाओं को पुरुषों के समान न हवन करने का अधिकार था और न ही जनेऊ धारण करने का! वेदपाठ करना तो उनके लिए असंभव ही था। आर्यसमाज के प्रवर्तक महर्षि दयानंद सरस्वती की कृपा से भारतीय स्त्रियों को इन बंधनों से ...
हिंसक व जिहादी इस्लाम के प्रतिशोध में ईसाई राष्ट्र की अभिलाषा

हिंसक व जिहादी इस्लाम के प्रतिशोध में ईसाई राष्ट्र की अभिलाषा

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
*आचार्य श्री विष्णुगुप्त*=================== कुछ खबरें ऐसी होती हैं जो निराशा की ओर ले जाती हैं, हताशा की ओर ले जाती हैं और भविष्य अंधकार में होने का संकेत देती हैं। ऐसी ही निराशाजनक चिंताजनक और भविष्य को अंधकार में ढकेलने वाली एक खबर अमेरिका से आ रही है। अमेरिका को ईसाई राष्ट्र घोषित करने की मांग तेजी से बढ़ रही है । दुनिया के सबसे विकसित देश में मजहब आधारित देश घोषित करने की मांग एक आश्चर्य से कम नहीं है और निराशाजनक बात भी है। मजहर पर आधारित राष्ट्र की मांग के खतरे भी खतरनाक है , भीषण हैं और लोकतंत्र के भविष्य के प्रति नकारात्मक परिस्थितियां ही उत्पन्न करती हैं। मजहब आधारित व्यवस्था में लोकतंत्र की सभी प्रकार की संहिताएँ और प्रवृत्तियों का विलोप हो जाता है, एक तरह से लोकतंत्र का अस्तित्व ही समाप्त हो जाता है, जीवन की गतिशीलता टूट जाती है , भविष्य की उम्मीदें टूट जाती हैं , नए विचारो...
भारत में दवा उद्योग को भी दवा की ज़रूरत

भारत में दवा उद्योग को भी दवा की ज़रूरत

TOP STORIES, राष्ट्रीय
भारत में दवा उद्योग को भी दवा की ज़रूरत*रजनीश कपूरमशहूर दवा कम्पनी रैनबैक्सी के व्हिसिल ब्लोअर और हेल्थ एक्टिविस्ट के नाम से जाने जाने वाले दिनेश ठाकुर कीनई किताब ‘द ट्रूथ पिल’ इन दिनों काफ़ी चर्चा में है। इसके लेखक ने जब इस नामी दवा कम्पनी में हो रहीगड़बड़ियों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई तो इससे न सिर्फ़ भारत को बल्कि दुनिया भर के लोगों उनकी इस मुहिम सेफ़ायदा हुआ। उनके हाल ही के अभियान से हमें यह पता चलता है कि देश में ‘ड्रग रेगुलेटर’ या दवा नियामक काकितना ख़स्ता हाल है। दवा उद्योग में ज़रूरी मानकों की कमी के कारण आम जनता को मिलावटी दवाओं काशिकार होना पड़ता है और अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है।दिनेश ठाकुर पेशे से डाक्टर नहीं हैं बल्कि एक केमिकल इंजीनियर हैं। भारत से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई केबाद उन्होंने अमरीका से स्नातकोत्तर की उपाधि भी हासिल की। 2003 में देश की सेवा की मंशा से उन्होंने मश...
भयावह व अनिश्चित भविष्य के बीच – अनुज अग्रवाल

भयावह व अनिश्चित भविष्य के बीच – अनुज अग्रवाल

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
सभ्यताएँ जब अपने शिखर पर पहुँचती हैं तो उसके उपरांत बस पराभव की ओर ही जा सकती हैं। मानव सभ्यता क्या ऐसे ही दौर में है। विज्ञान व प्रौद्योगिकी व बाजार की उपलब्धियों के इस स्वर्णिमकाल में हम सबसे ज़्यादा डरे हुए हैं और हताश व निराश हैं। यूँ तो मानव अपने उद्भव काल से ही निरंतर संघर्ष कर आगे बढ़ता आया है। हमारा उद्विकास इसका गवाह है। प्रकृति से हमारा संघर्ष और सामंजस्य हमारी जीत की कहानी है। यह उपलब्धि हमारे लिए गर्व की बात रही है किंतु इस गर्व के “अभिमान” व “अति”में बदलने के कारण हम नियंत्रण खो बैठे हैं। उपलब्धियों के अभिमान में अपनी जनसंख्या पर नियंत्रण नहीं कर पाए और उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए हम प्रकृति का अनियंत्रित दोहन करने लगे। नतीजा ग्लोबल वार्मिंग व जलवायु परिवर्तन। भारत की ही बात करें तो वर्ष 2021 में हमारी जीडीपी वृद्धि 9% के आस पास थी ( इस बर्ष यह 6% के आसपास ही होगी)...
Vehicles the top polluters this Diwali

Vehicles the top polluters this Diwali

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
Vehicles top polluters in Delhi during Diwali week, High peak traffic for long hours due to surge in vehicle numbers Despite vehicles becoming the top polluter, action ontransport remains the weakest Among local pollution sources in Delhi, vehicles caused half of Delhi’s own contribution to PM2.5 during Diwali week (21-26 October)When pollution concentration from all sources (local, NCR and beyond) are added, Delhi’s vehicles account for nearly 17 per cent of total PM2.5 concentrationHigh traffic load during Diwali week increased congestion for long hours -- from 12 noon to 8 pm -- flattening the congestion peaksWith high traffic on pre-Diwali days, average speed plummeted to 27 km per hour against the design standard of 60 km/hr or regulated speed of 40 km/hr. On some stretches ...
प्रजा फाउंडेशन ने ‘स्टेट ऑफ पुलिसिंग एंड लॉ एंड ऑर्डर इन दिल्ली, 2022’ पर एक रिपोर्ट जारी की

प्रजा फाउंडेशन ने ‘स्टेट ऑफ पुलिसिंग एंड लॉ एंड ऑर्डर इन दिल्ली, 2022’ पर एक रिपोर्ट जारी की

BREAKING NEWS, TOP STORIES, प्रेस विज्ञप्ति
 2012 से 2021 तक, चोरी और चेन स्नैचिंग के पंजीकृत अपराधों में क्रमशः 827% और 552% की वृद्धि हुई। 2012 से 2021 तक छेड़छाड़, बलात्कार और अपहरण (किडनेपिंग)/अपहरण (अब्डक्शन) के अपराधों में क्रमशः251%, 194% और 39% की वृद्धि हुई। 2021 में बलात्कार के कुल मामलों में से 41% पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज किए गए। 2021 में कुल अपहरण (किडनेपिंग)/अपहरण (अब्डक्शन) पीड़ितों में से 91% बच्चे थे। 2021 में, महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए दोषसिद्धि दर 38% थी और बच्चों के खिलाफ अपराधों के लिएकेवल 52% थी। 2021 तक महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध' के 99% मामलों की सुनवाई लंबित हैं। इस दर पर, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों के 5 वर्षों (2017 से 2021 तक) में निर्णय/निकासी (3,373मामले) की औसत संख्या के आधार पर 2021 तक लंबित सभी मामलों को निर्णय देने में 27 साल लगेंगे।दिल्ली, 02 नवंबर 2022: प्रजा फाउंडेशन ...
महिला सशक्तिकरण की दिशा में अड़ंगे लगा रहे है राजनीतिक दल

महिला सशक्तिकरण की दिशा में अड़ंगे लगा रहे है राजनीतिक दल

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, सामाजिक
संपादकीय प्रकाशन के संदर्भ में महिला सशक्तिकरण की दिशा में अड़ंगे लगा रहे है राजनीतिक दल निखिल अरविन्दु@NikhilArvindu "खेत खलियान से लेकर, देश की सीमाओं तकगगन से लेकर, समुद्री नौकाओं तकहै अब ऐसा कोई क्षेत्र नहीजहां आज महिलाएं नही" भारत की महिलाएं अब देश ही नहीं विदेश में भी बुलंदियों के झंडे गाड़ रही हैं, जहां भी महिलाओं को मौका मिलता है वहां भी अपना बेहतर प्रदर्शन दे रही हैं। महिला सशक्तिकरण को ले करके एक बार फिर से भारत में चर्चाओं का बाजार गर्म है। वजह है विगत दिनों भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड द्वारा महिला मैच की फीस पुरुषों की मैच फीस के बराबर कर दी है। जो की एक सराहनीय कदम है। एक शब्दों में कहें तो भारत की संस्थाएं महिला सशक्तिकरण को क्रियान्वित करने का काम कर रही है, उसे धार देने का काम कर रही है, उसे मुख्यधारा में लाने का काम कर रही हैं। लेकिन बात जब राजनीतिक दलों की आ...
कई देशों की मुद्राओं की तुलना में मजबूत हो रहा भारतीय रुपया

कई देशों की मुद्राओं की तुलना में मजबूत हो रहा भारतीय रुपया

BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, आर्थिक
कई देशों की मुद्राओं की तुलना में मजबूत हो रहा भारतीय रुपया विश्व के कई देशों में मुद्रा स्फीति को नियंत्रित करने के उद्देश्य से वहां के केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में लगातार वृद्धि की जा रही है। विशेष रूप से अमेरिका में ब्याज दरों में की जा रही वृद्धि का असर अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ रहा है क्योंकि अमेरिकी डॉलर वैश्विक स्तर पर किए जाने वाले आर्थिक व्यवहारों के निपटान का एक सशक्त माध्यम है। इस कारण के चलते सामान्यतः कई देशों में विदेशी निवेश भी अमेरिकी डॉलर में ही किए जाते हैं। अभी हाल ही में अमेरिकी केंद्रीय बैंक (यूएस फेड) ने अमेरिका में ब्याज दरों में लगातार तेज वृद्धि की है क्योंकि अमेरिका में मुद्रा स्फीति की दर पिछले 40 वर्षों के एतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है। ब्याज दरों में की गई तेज वृद्धि के कारण अन्य देशों में विशेष रूप से वहां के पूंजी बाजार (शेयर मार्केट)...