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1962 की जंग- भारत वापस लेगा चीन से अपनी जमीन

1962 की जंग- भारत वापस लेगा चीन से अपनी जमीन

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1962 की जंग- भारत वापस लेगा चीन से अपनी जमीन आर.के. सिन्हा अब भी देश की 70 की उम्र पार कर गई पीढ़ी को याद है जब भारत-चीन युद्ध 20 अक्तूबर 1962 को शुरू हुआ था। चीन ने 20 अक्तूबर को अचानक से भारत की सीमा पर हमला बोला था। हालांकि तब दोनों देशों के बीच सीमा विवाद चल तो रहा था, पर चीन की एकतरफा कार्रवाई की किसी ने उम्मीद नहीं की थी। देश 1962 से अब तक उस जंग के खलनायकों पर बार-बार चर्चा करता रहा है। पर जरा देखिए कि उस जंग के एक बड़े खलनायक की राजधानी में लगी आदमकद मूर्ति को देखकर हरेक सच्चे भारतवासी का मन उदास हो जाता है। हम बात कर रहे हैं  कृष्ण मेनन मार्ग पर लगी वी.के. कृष्ण मेनन की मूर्ति की। वे भारत के पूर्व रक्षा मंत्री थे। क्या इस सड़क का नाम आज के दिन कृष्ण मेनन मार्ग होना चाहिए, जो कि भारत के रक्षा मंत...
स्वच्छता अभियान कहाँ अटक गया ?

स्वच्छता अभियान कहाँ अटक गया ?

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स्वच्छता अभियान कहाँ अटक गया ?*विनीत नारायण2014 में जब देश में मोदी जी ने सत्ता में आते ही स्वच्छता के प्रति ज़ोर-शोर से एक अभियान छेड़ा था तो सभीको लगा कि जल्द ही इसका असर ज़मीन पर भी दिखेगा। इस अभियान के विज्ञापन पर बहुत मोटी रक़म खर्च कीगयी। कुछ ही महीनों में मोदी सरकार की प्राथमिकताएं दिखनी भी शुरू हो गईं। जितनी तीव्रता से इस विचार कोसामने लाया गया उससे नई सरकार के योजनाकार भी भौचक्के रह गए। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने सफाई के कामको छोटा सा काम बताया था। पर अब तक का अनुभव बताता है की सफाई का काम उन बड़े-बड़े कामों से कमखर्चीला नहीं है जिनके लिए सरकारें हमेशा पैसा कि कमी का रोना रोते रहे हैं। आज आठ साल बाद भी देश कीराजधानी दिल्ली के ही पॉश इलाक़ों तक में पर्याप्त सफ़ाई नहीं दिखती। जगह जगह कूड़े के ढेर दिखाई दिखते हैं।प्रश्न है कि क्या इसके लिए केवल सरकार ज़िम्मेदार है? क्या स्वच्छता...
केदारनाथ मंदिर आज भी एक अनसुलझी पहेली है I

केदारनाथ मंदिर आज भी एक अनसुलझी पहेली है I

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केदारनाथ मंदिर आज भी एक अनसुलझी पहेली है I केदारनाथ मंदिर का निर्माण किसने करवाया था इसके बारे में बहुत कुछ कहा जाता है। पांडवों से लेकर आदि शंकराचार्य तक। आज का विज्ञान बताता है कि केदारनाथ मंदिर शायद 8वीं शताब्दी में बना था।यदि आप ना भी कहते हैं, तो भी अनेक तत्कालीन विवरणों के आधार पर यह मंदिर कम से कम 1200 वर्षों से अस्तित्व में है। केदारनाथ की भूमि 21वीं सदी में भी बहुत प्रतिकूल है।एक तरफ 22,000 फीट ऊंची केदारनाथ पहाड़ी, दूसरी तरफ 21,600 फीट ऊंची कराचकुंड और तीसरी तरफ 22,700 फीट ऊंचा भरतकुंड है।इन तीन पर्वतों से होकर बहने वाली पांच नदियां हैं मंदाकिनी, मधुगंगा, चिरगंगा, सरस्वती और स्वरंदरी। इनमें से कुछ इस पुराण में लिखे गए हैं। यह क्षेत्र "मंदाकिनी नदी" का एकमात्र जलसंग्रहण क्षेत्र है। यह मंदिर एक कलाकृति है I कितना बड़ा असम्भव कार्य रहा होगा ऐसी जगह पर कलाकृति जैसा मन्दि...
खुशियों और सौगातों का त्योहार है दीपावली

खुशियों और सौगातों का त्योहार है दीपावली

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खुशियों और सौगातों का त्योहार है दीपावली बाकी सारे त्योहारों का धार्मिक महत्व है पर दीपावली का एक व्यावसायिक महत्व है। सोना और चांदी की बिक्री भी इसी सीजन में सबसे ज्यादा होती है और कपड़ों की भी। इस मौके पर उपहार और भेंटें देने के कारण भी तमाम सारे गिफ्ट आइटमों की बिक्री भी बढ़ जाती है। यानी अकेले दीपावली का बाजार अपने देश में करीब अरबों का है। भारतीय उपभोक्ता का असली बाजार दरअसल दीपावली है। ऐसा त्योहार क्यों न हर एक के लिए खुशियां और सौगात लेकर आए। दीपावली की यह रौनक और यह उत्साह बना रहना चाहिए। -प्रियंका सौरभ देश में "रोशनी का त्योहार" दिवाली के रूप में जाना जाता है। दीवाली, जिसे कभी-कभी दिवाली के रूप में लिखा जाता है, एक हिंदू, सिख और जैन धार्मिक उत्सव है जो अंधेरे के 13 वें दिन शुरू होता है। चन्द्रमा का आधा चक्र अश्विना और चन्द्र मास कार्तिक की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को ...
Even Christian-Muslims too celebrate Diwali

Even Christian-Muslims too celebrate Diwali

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The Secular side of Diwali -Even Christian-Muslims too celebrate Diwali  Vivek Shukla As Diwali is here and now, one must acknowledge the fact that the festival of lights has become very secular in nature over the years. Even non-Hindus too celebrate it in their own way.  For instance, the members of the   Brotherhood of the Ascended Christ society, which is also known as Delhi Brotherhood Society (DBS) would also illuminate their Brothers House in national capital. It was started in 1877 based upon the vision of Bishop Westcott, initially under the title of the Cambridge Mission. Westcott's vision was for an Anglican community of celibate brothers from Cambridge University to set down roots  in India. The venerable St. Stephen's College th...
फबेल एक्सक्विज़िट चॉकलेट्स ने विश्व की सबसे बारीक कणों वाली चॉकलेट ‘फबेल फिनेस’ लॉन्च की

फबेल एक्सक्विज़िट चॉकलेट्स ने विश्व की सबसे बारीक कणों वाली चॉकलेट ‘फबेल फिनेस’ लॉन्च की

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फबेल एक्सक्विज़िट चॉकलेट्स ने विश्व की सबसे बारीक कणों वाली चॉकलेट ‘फबेल फिनेस’ लॉन्च की -अनिल बेदाग- मुंबई : स्वदेशी लग्ज़री चॉकलेट ब्रांड फबेल एक्सक्विज़िट चॉकलेट्स को बेमिसाल चॉकलेट अनुभव तैयार करने के लिए जाना जाता है। अब इस ब्रांड ने भारत में तैयार की गई विश्व की सबसे बारीक कणों वाली चॉकलेट फबेल फिनेस लॉन्च की है। फबेल ने इस चॉकलेट को पेश करने के लिए प्रतिष्ठित ऑस्ट्रेलियाई पेस्ट्री शेफ एवं टीवी प्रेजेंटर शेफ एद्रियानो ज़ुम्बो से हाथ मिलाया है। यह चॉकलेट बेहद स्मूद है और मुंह में जाते ही तुरंत घुल जाने का खुशनुमा अनुभव प्रदान करती है।       एक चॉकलेट की स्मूदनेस ही उसके स्वाद से जुड़ी सबसे मूलभूत खूबी होती है, जो उपभोक्ता का अनुभव बेहतर बनाती है। आईटीसी  ने एक आधुनिक टेक्नोलॉजी विकसित की है, जिसकी मदद से फबेल को सात माइक्रोन के बारीक कणों वाली चॉकलेट...
गुजरात के शिक्षा उपक्रमों को ‘आप’ की नकल कहना गलत

गुजरात के शिक्षा उपक्रमों को ‘आप’ की नकल कहना गलत

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-ललित गर्ग- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गुजरात में मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के उद्घाटन पर आम आदमी पार्टी के संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल एवं उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने जो प्रतिक्रिया व्यक्त की है वह हास्यास्पद होने के साथ अतिश्योक्तिपूर्ण है। मोदी छात्रों के बीच गए और उनके साथ एक स्मार्ट क्लास में बैठे। उन्होंने कुछ देर स्मार्ट क्लास का जायजा लिया और एक छात्र द्वारा बताई गई बातों को ध्यान से सुना। इन सब घटनाओं को केजरीवाल की नकल करार देना निश्चित ही विरोधाभासी है। भले ही आप पार्टी ने शिक्षा की दृष्टि से दिल्ली में उल्लेखनीय काम किया है, लेकिन गुजरात में मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस एवं गुजरात में चल रहे शिक्षा उपक्रमों को ‘आप’ की नकल कहना एक तरह से आम आदमी पार्टी द्वारा गुजरात में अपनी राजनीति चमकाने का घटिया एवं अलोकतांत्रिक तरीका है। यह मूल्यहीन राजनीति की पराका...
रोशनी की लहर बनाते हैं दीपावली के दीये

रोशनी की लहर बनाते हैं दीपावली के दीये

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रोशनी की लहर बनाते हैं दीपावली के दीये-ललित गर्ग- दीपावली एक लौकिक पर्व है। फिर भी यह केवल बाहरी अंधकार को ही नहीं, बल्कि भीतरी अंधकार को मिटाने का पर्व भी बने। हम भीतर में धर्म का दीप जलाकर मोह और मूर्च्छा के अंधकार को दूर कर सकते हैं। दीपावली के मौके पर सभी आमतौर से अपने घरों की साफ-सफाई, साज-सज्जा और उसे संवारने-निखारने का प्रयास करते हैं। उसी प्रकार अगर भीतर चेतना के आँगन पर जमे कर्म के कचरे को बुहारकर साफ किया जाए, उसे संयम से सजाने-संवारने का प्रयास किया जाए और उसमें आत्मा रूपी दीपक की अखंड ज्योति को प्रज्वलित कर दिया जाए तो मनुष्य शाश्वत सुख, शांति एवं आनंद को प्राप्त हो सकता है।दीपों की कतारें दीपावली का शाब्दिक अर्थ ही नहीं, वास्तविक अर्थ है। कतारों के लिए निरंतरता जरूरी है। और निरंतरता के लिए नपा-तुला क्रम। दीप जब कतार में होते हैं, तो आनंद का सूचक बन जाते हैं। जैसे कोई मूक उ...
हिंदी में ऐतिहासिक पहल

हिंदी में ऐतिहासिक पहल

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हिंदी में ऐतिहासिक पहल-डॉ. सौरभ मालवीयमध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने हिंदी भाषा में चिकित्सा की पढ़ाई प्रारम्भ करके शिक्षा के क्षेत्र में इतिहास रच दिया है। इस पहल के लिए मुख्यमंत्री शिवराज चौहान की सरहाना की जानी चाहिए। भारत एक विशाल देश है। यहां के विभिन्न राज्यों की अपनी क्षेत्रीय भाषाएं हैं। स्वतंत्रता के पश्चात से ही मातृभाषा को प्रोत्साहित करने की बातें चर्चा में रही हैं, परंतु इनके विकास के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए गए। इसके कारण प्रत्येक क्षेत्र में विदेशी भाषा अंग्रेजी का वर्चस्व स्थापित हो गया। अब भारतीय जनता पार्टी की सरकारों ने देश के विभिन्न राज्यों की मातृभाषाओं के विकास का बीड़ा उठाया है। इसका प्रारम्भ मध्य प्रदेश से हुआ है। मध्य प्रदेश के पश्चात अब उत्तर प्रदेश में भी चिकित्सा एवं तकनीकी पढ़ाई हिंदी में होगी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने ट्वीट के माध्...
हिंदू पर्व दिवाली से कैसे जुड़ी पूरी दुनिया

हिंदू पर्व दिवाली से कैसे जुड़ी पूरी दुनिया

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हिंदू पर्व दिवाली से कैसे जुड़ी पूरी दुनिया आर.के. सिन्हा भारत से हजारों किलोमीटर दूर बसे भारतवंशी और भारत में रहने वाले करोड़ों गैर-हिन्दू भी प्रकाशोत्सव से अपने को जोड़ते हैं। दिवाली हिन्दू पर्व होते हुए अपने आप में व्यापक अर्थ लिए हैं। यह तो अंधकार से प्रकाश की तरफ लेकर जाने वाला त्योहार है। अंधकार व्यापक है, रोशनी की अपेक्षा। क्योंकि अंधेरा अधिक काल तक व्याप्त रहता है, अधिक समय तक रहता है। दिन के पीछे भी अंधेरा है, रात का। दिन के आगे भी अंधेरा है, रात का। भारत से बाहर बसे करीब ढाई करोड़ भारतीय मूल के लोग संसार के अलग-अलग देशों में प्रकाश पर्व को मनाते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन 24 अक्टूबर को व्हाइट हाउस में दीपावली मनाएंगे, जबकि उनके पूर्ववर्ती डोनाल्ड ट्रंप की अपने फ्लोरिडा स्थित मार-ए-लागो रिजॉर्ट में 21 अक्टूबर को यह त्योह...