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भाजपा ने पसमांदा मुस्लिम समाज को साथ लाने के लिए शुरू किया महाअभियान

भाजपा ने पसमांदा मुस्लिम समाज को साथ लाने के लिए शुरू किया महाअभियान

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भाजपा ने पसमांदा मुस्लिम समाज को साथ लाने के लिए शुरू किया महाअभियानमृत्युंजय दीक्षित2024 -लोकसभा चुनावों तथा उससे पूर्व जम्मू कश्मीर सहित कई राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने का काम शुरू का दिया है। इसी कड़ी में जब हैदराबाद में आयोजित भाजपा अधिवेशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पसमांदा मुस्लिम समाज की चर्चा की और स्नेह यात्रा निकालने की बात कही तब से भाजपा और पसमांदा मुस्लिम समाज के संबधों की चर्चा जोर पकड़ रही है। पसमांदा समाज को अपनी ओर मोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश भाजपा ने भी अपना अभियान तेज कर दिया है।भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि 2022 के विधानसभा चुनावों और उसके बाद आजमगढ़ और रामपुर जहां 50 प्रतिशत मुस्लिम आबादी रहती है वहां पर पसमांदा मुस्लिम समाज के 8 प्रतिशत लोगों ने भाजपा को अपना मत दिया ज...
हिन्दी में चिकित्सा पढ़ाई एक क्रांतिकारी कदम

हिन्दी में चिकित्सा पढ़ाई एक क्रांतिकारी कदम

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हिन्दी में चिकित्सा पढ़ाई एक क्रांतिकारी कदम- ललित गर्ग- हिन्दी को उसका गौरवपूर्ण स्थान दिलाने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार को साधुवाद दिया जाना चाहिए कि उनके प्रयासों से देश में पहली बार मध्य प्रदेश में चिकित्सा की पढ़ाई हिंदी में शुरू होने जा रही है। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने हिन्दी में मेडिकल की पढ़ाई का शुभारम्भ कर एक नए युग की शुरुआत की है, इससे न केवल हिन्दी का गौरव बढ़ेगा बल्कि हिन्दी को राष्ट्रभाषा एवं राज-काज की भाषा बनाने में आ रही बाधाएं दूर होंगी। अंग्रेजी भाषा पर निर्भरता की मानसिकता को जड़ से खत्म करने की दिशा में यह एक क्रांतिकारी एवं युगांतकारी कदम होने के साथ अनुकरणीय भी है, जिसके लिये अन्य प्रांतों की सरकारों को बिना राजनीतिक आग्रहों एवं पूर्वाग्रहों के पहल करनी चाहिए।आजादी का अमृत महोत्सव मना चुके देश के लिय...
संविधान से खिलवाड़ है यह अधिनियम

संविधान से खिलवाड़ है यह अधिनियम

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संविधान से खिलवाड़ है यह अधिनियम" डा.अभिषेक आत्रेय, एडवोकट आन रिकार्ड, सुप्रीम कोर्ट देश में सेना और रेलवे के बाद सबसे ज्यादा संपत्ति वक्फ बोर्ड के पास है। वक्फ अधिनियम से मिली ताकत के दम पर वक्फ बोर्ड कैसे संपत्तियों पर कब्जा करते हैं, इसकी बानगी हाल ही में तमिलनाडु में देखने को मिली। निश्चित तौर पर देश के कई हिस्सों में वक्फ बोर्ड ने इसी तरह से संपत्तियां बनाई हैं। इस काम में इन्हें एक ऐसे कानून से संरक्षण मिला हुआ है, जो संवैधानिक प्रविधानों का उल्लंघन करता है।  देश में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के लिए सबसे पहले 1913 में मुसलमान वक्फ वैलिडेटिंग अधिनियम आया। उसके बाद 1923 में मुसलमान वक्फ अधिनियम आया। स्वतंत्रता के बाद वक्फ अधिनियम 1954 अस्तित्व में आया। 1984 में भी वक्फ अधिनियम आया, लेकिन उसे अधिसूचित नहीं किया गया। 1995 में बहुत सारे परिवर्तनों के साथ वक्फ अधिनियम 19...
रक्त तांडव पुस्तक समीक्षा द्वारा भूपेंद्रसिंह रैना

रक्त तांडव पुस्तक समीक्षा द्वारा भूपेंद्रसिंह रैना

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रक्त तांडव पुस्तक समीक्षा द्वारा भूपेंद्रसिंह रैना कश्मीर में आतंकवाद के दंश ने कश्मीरी जनमानस में जिस पीड़ा और विषाक्तता का संचारकिया है,उससे उपजी ह्रदय-विदारक वेदना तथा उसकी व्यथा-कथा को साहित्य में ढालने के सफलप्रयास पिछले लगभग तीन दशकों के बीच हुए हैं। कई कविता-संग्रह, कहानी-संकलन,औपन्यासिककृतियां आदि सामने आए हैं, जो कश्मीर में हुई आतंकी बर्बरता और उससे जनित कश्मीरीपंडितों/हिन्दुओं के विस्थापन की विवशताओं को बड़े ही मर्मस्पर्शी अंदाज में व्याख्यायित करतेहैं।कश्मीर के इन निर्वासित किन्तु जुझारू रचनाकारों में सर्वश्री शशिशेखरतोषखानी,चन्द्रकान्ता,क्षमा कौल, रतनलाल शांत,अग्निशेखर,महाराजकृष्ण संतोषी,प्यारेहताश,अवतार कृष्ण राज़दान, ब्रजनाथ ‘बेताब’ , महाराज शाह, अशोक हांडू आदि उल्लेखनीय हैं।इसी श्रृंखला में पिछले दिनों एक नाम और जुड़ गया और वह नाम है कश्मीर के चर्चित कविश्री भूपेन्द्रसिंह ...
छप्पन भोग का रहस्य

छप्पन भोग का रहस्य

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छप्पन भोग का रहस्यभारतीय संस्कृति में प्रत्येक परिवार में लगभग षड़रस युक्त भोजन बनाया जाता है। ये परिवार के सदस्यों के लिए सुपाच्य, शक्तिवर्धक तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाला होता है। इन षड़रसों के नाम हैं- १. मधुर, २. अम्ल, ३. लवण, ४. कटु, ५. तिक्त और ६. कषाय। भोजन के आवश्यक तत्व कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन तथा खनिज लवण ये सभी इस भोजन में निहित हैं। इस भोजन को बनाने में पवित्रता तथा स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। खाद्य सामग्री की शुद्धता भी अति आवश्यक होती है।मंदिरों में छप्पन भोग परम्परा का निर्वहन बड़ी श्रद्धा-भक्ति के साथ किया जाता है। महिलाएँ अपने-अपने घरों से भोग सामग्री बना कर लाती हैं। भोग लगाया जाता है। समाज के सदस्य सपरिवार इस कार्यक्रम में सम्मिलित होते हैं। पूजा आरती करते हैं। छप्पन भोग प्रसाद का वितरण किया जाता है। द्वारकाधीश मंदिर, श्रीनाथ जी मंदिर तथ...
जानलेवा बनती अजनबियों से अश्लील वीडियो कॉल्स

जानलेवा बनती अजनबियों से अश्लील वीडियो कॉल्स

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जानलेवा बनती अजनबियों से अश्लील वीडियो कॉल्स इस अपराध के पीछे संगठित अपराध समूह ज्यादातर विदेशों में स्थित हैं। उनके लिए यह पैसा कमाने का एक कम जोखिम वाला तरीका है और वे कई पीड़ितों तक आसानी से ऑनलाइन पहुंच सकते हैं। पीड़ित अक्सर पुलिस को इन अपराधों की रिपोर्ट करने से चिंतित होते हैं क्योंकि वे शर्मिंदा होते हैं। जबकि सेक्सटॉर्शनिस्ट पीड़ितों को परेशान करने, शर्मिंदा करने, आघात करने और उन्हें नियंत्रित करने के लिए सभी उपलब्ध साधनों का उपयोग कर सकते हैं, यह उच्च समय है कि दानव को सिर के बल ले जाया जाए और जागरूकता बढ़ाने और सेक्सटॉर्शन की बुराई के सामाजिक कलंक को दूर किया जाए। यह ध्यान देने योग्य है कि इंटरनेट कभी भी 'भूलता और माफ नहीं करता' और इसकी पहुंच और प्रसार बिजली से तेज और विशाल है। प्रभावशाली दिमाग वाली हमारी युवा पीढ़ी को यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया जाना चाहिए कि वे कभी...
सउदी अरब में नया इस्लाम

सउदी अरब में नया इस्लाम

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सउदी अरब में नया इस्लाम* *डॉ. वेदप्रताप वैदिक* सउदी अरब आजकल जितने प्रगतिशील कदम उठा रहा है, वह दुनिया के सारे मुसलमानों के लिए एक सबक सिद्ध होना चाहिए। लगभग डेढ़ हजार साल पहले अरब देशों में जब इस्लाम शुरु हुआ था तब की परिस्थितियों में और आज की स्थितियों में जमीन-आसमान का अंतर आ गया है। लेकिन इसके बावजूद दुनिया के ज्यादातर मुसलमान पुराने ढर्रे पर ही अपनी गाड़ी धकाते चले आ रहे हैं। सउदी अरब उनका तीर्थ है। मक्का-मदीना उनका साक्षात स्वर्ग है। उसके द्वार अब औरतें के लिए भी खुल गए हैं। यह इतिहास में पहली बार हुआ है। वरना, पहले कोई अकेली मुस्लिम औरत हज या उमरा करने जा ही नहीं सकती थी। उसके साथ एक ‘महरम’ (रक्षक) का रहना अनिवार्य था। इसमें कोई बुराई उस समय नहीं थी, जब इस्लाम शुरु हुआ था। उस समय अरब लोग जहालत में रहते थे। औरतों के साथ पशुओं से भी बदतर व्यवहार किया जाता था लेकिन दुनिया इतनी ब...
भारत में अभी भी गरीबी भारी, कारण जनसंख्या और बेरोजगारी

भारत में अभी भी गरीबी भारी, कारण जनसंख्या और बेरोजगारी

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7 अक्टूबर 2022, (गरीबी उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस) भारत में अभी भी गरीबी भारी, कारण जनसंख्या और बेरोजगारी अधिकांश ग्रामीण गरीब खेतिहर मजदूर (जो आम तौर पर भूमिहीन होते हैं) और स्वरोजगार करने वाले छोटे किसान हैं जिनके पास 2 एकड़ से कम जमीन है। उन्हें साल भर रोजगार भी नहीं मिल पाता है। परिणामस्वरूप, वे एक वर्ष में बड़ी संख्या में दिनों तक बेरोजगार और अल्प-रोजगार में रहते हैं मुद्रास्फीति, विशेष रूप से खाद्य कीमतों में वृद्धि, बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक न्यूनतम उपभोग व्यय की लागत को बढ़ा देती है। इस प्रकार, मुद्रास्फीति कई परिवारों को गरीबी रेखा से नीचे धकेल देती है। भूमि और अन्य संपत्तियों के असमान वितरण के कारण, प्रत्यक्ष गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों का लाभ गैर-गरीबों द्वारा विनियोजित किया गया है। गरीबी की भयावहता की तुलना में इन कार्यक्रमों के लिए आवंटित संसाधनो...
दिल की बीमारियों का रिर्वसल जीरो ऑयल भोजन से

दिल की बीमारियों का रिर्वसल जीरो ऑयल भोजन से

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दिल की बीमारियों का रिर्वसल जीरो ऑयल भोजन से डॉ. विमल छाजेड़ निदेशक साओल हार्ट सेंटर, नई दिल्ली जीवन को जीने के लिए क्या जरूरी है-भोजन। लेकिन क्या ऐसा होता है कि हमें भोजन के नाम पर कुछ भी दे दिया जाए, तो हम खा लेंगे जब तक वह स्वाद से परिपूर्ण न हो और हम भारतीय तो अपने खान-पान की पौष्टिकता से अधिक स्वाद पर ही ध्यान देते हैं। क्या कभी आपने सोचा है कि हमारा मनपसंद व्यंजन हमें इतना स्वादिष्ट क्यों लगता है? ऐसा इसलिए होता है क्योंकि स्वाद पहचान कराने वाली कोशिकाएं, मनपसंद भोजन लेने पर या जो व्यंजन हमें स्वादिष्ट लगता है। लेने पर तीक्ष्ण उत्तेजना उत्पन्न करती हैं जो हमें स्वाद का एहसास कराती हैं। भोजन में मीठे के प्रति हमारा आकर्षण सर्वव्यापी है और भारतीयों का मीठे के प्रति कुछ विशेष ही लगाव है। वर्ष 1986 की अपेक्षा आज हम 20 प्रतिशत अधिक चीनी का उपयोग कर रहे हैं। हमारी मानसिक ध...
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सकारात्मक पहल*

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सकारात्मक पहल*

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सकारात्मक पहल* राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख श्री मोहन भागवत जी अपने क्रान्तिकारी निर्णयों के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने ही संघ वेशभूषा में परिवर्तन करके कार्यकर्ताओं की निक्कर वाली छवि को बदलकर पेंट पहनने की सुविधा प्रदान की। अब उनका स्वप्न तथा आगामी लक्ष्य संघ के सिद्धान्तों को वर्ष 2025 तक भारत के प्रत्येक नगर तथा गांव-गांव में पहुँचाने का है। इसी उद्देश्य की प्राप्ति हेतु उन्होंने संघ को मुस्लिम जनता के हृदय में स्थान प्राप्त करने हेतु आगे बढ़ाया है वो वास्तव में देशहित में अत्यधिक प्रशंसनीय कार्य है, जिसकी देश का प्रत्येक बुद्धिजीवी मुक्तकंठ से प्रशंसा कर रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक कार्यकर्ता श्री इन्द्रेश जी विगत कई वर्षों से मुस्लिम जनसंख्या को संघ से जोड़ने के कार्य में लगे हुए हैं। इसी के अन्तर्गत उन्होंने कई मुस्लिम बेटियों की शा...