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हिज़ाब मजहबी सवाल है ही नहीं

हिज़ाब मजहबी सवाल है ही नहीं

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हिज़ाब मजहबी सवाल है ही नहीं* *डॉ. वेदप्रताप वैदिक* हिज़ाब को लेकर आजकल सर्वोच्च न्यायालय में जमकर बहस चल रही है। हिज़ाब पर जिन दो न्यायाधीशों ने अपनी राय जाहिर की है, उन्होंने एक-दूसरे के विपरीत बातें कही हैं। अब इस मामले पर कोई बड़ी जज-मंडली विचार करेगी। एक जज ने हिज़ाब के पक्ष में फैसला सुनाया है और दूसरे ने जमकर हिज़ाब के विरोध में तर्क दिए हैं। हिज़ाब को सही बतानेवाला जज कोई मुसलमान नहीं है। वह भी हिंदू ही है। हिज़ाब के मसले पर भारत के हिंदू और मुसलमान संगठनों ने लाठियां बजानी शुरु कर रखी हैं। दोनों एक-दूसरे के विरुद्ध बयानबाजी कर रहे हैं। असल में यह विवाद शुरु हुआ कर्नाटक से! इसी साल फरवरी में कर्नाटक के कुछ स्कूलों ने अपनी छात्राओं को हिज़ाब पहनकर कक्षा में बैठने पर प्रतिबंध लगा दिया था। सारा मामला वहां के उच्च न्यायालय में गया। उसने फैसला दे दिया कि स्कूलों द्वारा बनाई गई पो...
‘हाइपरटेंशन का पूर्व-संकेत हो सकती है अनुवांशिक भिन्नता’

‘हाइपरटेंशन का पूर्व-संकेत हो सकती है अनुवांशिक भिन्नता’

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'हाइपरटेंशन का पूर्व-संकेत हो सकती है अनुवांशिक भिन्नता'नई दिल्ली, 14 अक्टूबर(इंडिया साइंस वायर):भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईटी)मद्रास के शोधकर्ताओंने अपने एक ताजा अध्ययन में उच्च रक्तचाप के पीछे जिम्मेदार अनुवांशिक भिन्नता का पता लगाय है।शोधकर्ताओं की खोज में यह तथ्य निकलकर सामने आया है कि मैट्रिक्स मटालो प्रोटीनेज (एमएमपीएस)नामक एक जीन के ‘डीएनए बिल्डिंग ब्लॉक’ में बदलाव से लोगों में उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ सकताहै। इस निष्कर्ष तक पहुँचने के क्रम में अध्ययनकर्ताओं ने उच्च रक्तचाप से पीड़ित रोगिओं और सामान्यरक्तचाप वाले स्वस्थ लोगों के अनुवांशिक प्रोफाइल का गहन अध्ययन और विश्लेषण किया है।उच्च रक्तचाप के कारण रक्त नलिकाओं की दीवार और धमनियां, दीवारों पर अत्यधिक कोलेजन जमाहोने के कारण सख्त हो जाती हैं। कोलेजन शरीर में पैदा होने वाले प्रोटीन का सबसे प्रचुर मात्रा में पायाजाने वाला प्रकार ...
कौन हैं ‘अर्बन नक्सल्स’ और क्या चाहता है ये तंत्र ?

कौन हैं ‘अर्बन नक्सल्स’ और क्या चाहता है ये तंत्र ?

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कौन हैं 'अर्बन नक्सल्स' और क्या चाहता है ये तंत्र ? कम्युनिस्ट उग्रवाद - माओवाद ! दरअसल 'अर्बन नक्सल्स' (टर्म) सामान्य तौर पर उन कथित कम्युनिस्ट बुद्धिजीवियों वर्ग के लोगों के समूह के लिए प्रयोग किया जाता है जो देश भर में लोकतंत्र को हटाकर तानाशाही कम्युनिस्ट व्यवस्था स्थापित करने के षड्यंत्र में लगे हुए हैं, इस क्रम में इन अर्बन नक्सलियों द्वारा देश भर में अनेकों गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ), मानवाधिकार समुहों, सामाजिक समुहों, मजदूर संगठनों, किसान संगठनों एवं छात्र संगठनों का गठन किया गया है जिनके माध्यम से देश विरोधी गतिविधियों को संचालित करना इनका मुख्य उद्देश्य है। इस तंत्र में बाहर से साफ सुथरी छवि वाले वरिष्ठ मानव अधिकार कार्यकर्ताओं, नागरिक समूहों का नेतृत्व करने वाले लोग, छात्र नेता, किसान नेता, मजदूर संगठनों के नेता, बड़े शहरों के विश्वविद्यालयों में पढ़ाने वाले प्रोफेसरों...
हिजाब : इतना जोर क्यों देते हो?

हिजाब : इतना जोर क्यों देते हो?

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इतना जोर क्यों देते हो? हिंदुस्तान की लड़कियां यदि हिजाब पहनना चाहती हैं, तो उन्हें पहनने दीजिए! हिजाब पहनें या नकाब या बुर्का, कोई एतराज क्यों करे? बस इतना जरूर है कि स्कूल कालेज जाएं तो स्कूल ड्रेस पहनें, फौज में जाएं तो यूनिफॉर्म पहनें और स्पेस में जाएं तो स्पेस सूट? बाकी उनकी मर्जी, बाजार में, घर में, कोर्ट में, हिल स्टेशन पर, ब्याह शादियों में जहां भी हिजाब पहनना चाहें, शौंक से पहनें! किसी को क्या परेशानी है उनकी पोशाक से? वैसे कितनी लड़कियां हैं जो फिल्म इंडस्ट्री में हैं, टीवी में हैं, अस्पतालों और न्यायालयों में हैं, मॉडलिंग में हैं, कोई हिजाब नहीं पहनती? उर्फी जावेद का नाम सुना है कभी? रोजाना नई नई ड्रेस पहनती हैं। इतनी अजीबोगरीब पोशाकें कि बेशर्मी भी गश खा जाए। फिल्म इंडस्ट्री ने मधुबाला, नर्गिस, मीना कुमारी, वहीदा रहमान, जीनत अमान, निगार, मुमताज, सायरा बानो, नसीम बानो जैस...
क्या संविधान ‘प्रस्तावना’ की विकृति सुधरेगी?

क्या संविधान ‘प्रस्तावना’ की विकृति सुधरेगी?

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क्या संविधान ‘प्रस्तावना’ की विकृति सुधरेगी?------------------------------------------------1950 ई. में बने भारतीय संविधान की “प्रस्तावना” ने भारत को ‘लोकतांत्रिक गणराज्य’ कहा था। उस में छब्बीस वर्ष बाद दो भारी राजनीतिक शब्द जोड़ दिये गये – ‘सेक्यूलर’ और ‘सोशलिस्ट’ । तब से भारत को ‘लोकतांत्रिक समाजवादी सेक्यूलर गणराज्य’ कर डाला गया। अब सुप्रीम कोर्ट डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई करने वाली है, कि इसे पूर्ववत् किया जाए क्योंकि इस ने पूरे संविधान को ही बिगाड़ा है। स्मरणीय है कि यह परिवर्तन 1975-76 ई. की कुख्यात ‘इमरजेंसी’ के दौरान किया गया था, जब केंद्रीय मंत्रिमंडल के निर्णय केंद्रीय मंत्रियों को भी रेडियो से मालूम होते थे! जब विपक्ष जेल-बंद था, और प्रेस पर सेंसरशिप थी। अर्थात वह संशोधन बिना विचार-विमर्श, जबरन हुआ था। वह संविधान की आमूल विकृति थी। यहाँ चार तथ्यों पर विचार क...
ईसाई मिशन्स और भारत

ईसाई मिशन्स और भारत

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ईसाई मिशन्स और भारत-प्रस्तुतकर्ता- राजेश गंभावाईसाई धर्मवेत्ताओं, विद्वानों, मिशनरीयों और लेखकों के यीशु ख्रिस्त (Jesus Christ) विषयक सदीयों से बडे-बडे दावों के बावजूद, योरोप और अमरिका के बुद्धिजीवी वर्ग ने ईसाई विश्वास के यीशु ख्रिस्त का स्वीकार करने से मना कर दिया है। आज-कल वहाँ उपन्यासों के कल्पित यीशु (Jesus of Fiction) का ही बोल-बाला है। भारतविद्याविद् डॉ. कोनराड एल्स्ट का कहना है कि पश्चिम में, विशेषकर योरोप में, ईसाईयत की लोकप्रियता और वहाँ के चर्चों में ईसाई विश्वासीयों की उपस्थिति निरन्तर कम होती जा रही है। वहाँ के समाज में पादरी के व्यवसाय के प्रति दिलचस्पी का अभाव भी चिंता का विषय बन गया है। योरोप में केथोलिक पादरीयों की एवरेज वय 55 साल है; नेदरलैंड में यह 62 है, और बढती ही जा रही है। वास्तविकता यह है कि योरोप और अमरिका के आधुनिक लोगों की ईसाईयत में अब कोई रूचि नहीं रही है।आर्थ...
इतिहास के पन्नों से- भोर में अल्लाह-हू-अकबर की अज़ान और इस्लाम का हुआ कश्मीर!

इतिहास के पन्नों से- भोर में अल्लाह-हू-अकबर की अज़ान और इस्लाम का हुआ कश्मीर!

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इतिहास के पन्नों से- भोर में अल्लाह-हू-अकबर की अज़ान और इस्लाम का हुआ कश्मीर!अमितनीलमत पुराण में कश्मीर का परिचय कुछ ऐसा है- “कश्मीर पार्वती है, इसका शासक भगवान शिव का ही भाग है।” उस अनंत काल से लेकर महाभारत कालीन अर्जुन के प्रपौत्र (पड़पोते) हर्षदेव ने यहाँ रियासत की (व्यवस्थित शासन) नींव डाली। तब से लेकर 13वीं सदी तक कश्मीर में सनातन धर्मी (जिन्हें हम भाषाई सुविधा के लिए हिंदू कहेंगे) शासकों का शासन रहा।इस काल में महान सम्राट अशोक ने कश्मीर को सीधे अपने नियंत्रण में लिया और तमाम ऐसे उल्लेखनीय कार्य किए जो आज भी घाटी की ठंडी शिलाओं पर दर्ज हैं। हालाँकि इसी समय कश्मीर बौद्ध धर्म प्रसार का एक प्रमुख केंद्र बनकर भी उभरा लेकिन धर्मों को राजनीतिक रूप से प्रतिस्थापित करने की होड़ नहीं थी।हिंदू शासकों की कड़ी को तोड़ने का पहला पहला प्रयास इस्लाम द्वारा अपने जन्म के लगभग 300 वर्षों बाद किया गया।...
*दलितों का आरक्षण क्यों लूटना चाहते हैं मुस्लिम और ईसाई ?*

*दलितों का आरक्षण क्यों लूटना चाहते हैं मुस्लिम और ईसाई ?*

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*राष्ट्र-चिंतन* *सर्विस और लैंड जिहाद का शिकार भी दलित और आदिवासियों को बना रहे हैं मुसलमान* *दलितों का आरक्षण क्यों लूटना चाहते हैं मुस्लिम और ईसाई ?* *आचार्य श्री विष्णुगुप्त*=================== दलितों का आरक्षण लूटना क्यों चाहते हैं मुस्लिम और ईसाई? इस प्रश्न पर अब दलित राजनीति धीरे-धीरे गर्म हो रही है। दलित संगठनों में इसको लेकर न केवल चिंता है बल्कि आक्रोश भी कम नहीं है। अब छोटे-छोटे विचार संगोष्ठियों में दलितों के आरक्षण पर डाका डालने को लेकर विचार-विमर्श शुरू भी हो चुका है। अगर इस पर आधारित विचार-विमर्श आगे बढ़ता है तो फिर यह प्रसंग विस्फोटक हो सकता है। यह प्रसंग विस्फोटक होगा तो फिर इसके चपेट में मुस्लिम-ईसाई की मजहबी राजनीति के साथ ही साथ उनकी कथित मित्रता भी आयेगी, इसके अलावा दलितों के कंधे पर रखकर बन्दूक चलाने वाले वामपंथियों, एनजीओ छाप के लोग भी आयेंगे। दलितों के न...
भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत

भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत

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संगीत, नृत्य और नाटक की भारतीय परंपरा हमारी सभ्यता के मूल में है। किसी भी सभ्यता का सार और गुणवत्ता उसके लोगों के सांस्कृतिक और कलात्मक हितों से आंकी जाती है। भारतीय सभ्यता अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत और ललित कलाओं में समृद्ध परंपरा के साथ सार्वभौमिक रूप से मान्यता प्राप्त है। हमें, इस परंपरा के उत्तराधिकारी के रूप में, न केवल इस पर गर्व करना चाहिए, बल्कि इसे संरक्षित करने और इसे युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। हमारे देश में एक समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत है, जो हमारी सभ्यता की आंतरिक शक्ति और लचीलापन का संकेत है। भारत में शायद ही कोई क्षेत्र या घाटी या पहाड़ या समुद्र-तट या मैदान हो जो हमारे विशिष्ट लोक नृत्यों और संगीत की ध्वनि से नहीं सन्निहित हो। इन नृत्यों के विषय सरल हैं और हमारे आम लोगों के जीवन में निहित हैं। दूसरी ओर, हमारे शास्त्रीय नृत्य...
14 अक्टूबर 1999 सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी दुर्गा भाभी का गुमनामी में निधन

14 अक्टूबर 1999 सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी दुर्गा भाभी का गुमनामी में निधन

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14 अक्टूबर 1999 सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी दुर्गा भाभी का गुमनामी में निधन अंग्रेजो की आँखों के सामने से भगतसिंह और राजगुरू को निकाला, गवर्नर हैली को गोली मारी थी --रमेश शर्मा सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी दुर्गा भाभी का नाम भारत में सबकी जुबान पर होगा पर उनका नाम इतिहास की पुस्तकों में शून्य के आसपास। वे स्वतंत्रता के बाद लगभग भी आधी शताब्दी जीवन जिया पर गुमनामी के अंधकार में।यह वही दुर्गा भाभी हैं, जो साण्डर्स वध के बाद सुप्रसिद्ध क्राँतिकारी भगतसिंह और राजगुरू को अंग्रेजो की आँखों के सामने से कोलकत्ता ले गयी थीं । वे सभी क्रांतिकारियों का मानों एक संपर्क सूत्र थीं। क्राँतिकारी चंद्रशेखर आजाद ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में जिस माउजर पिस्तौल से अंग्रेजों से मुकाबला किया था, वह माउजर दुर्गा भाभी ने ही उनको दिया था.दुर्गा भाभी का जन्म 7 अक्टूबर 1907 को कौशांबी जिले के ग्राम शहजादपुर में हु...