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ये मौतें रोकी जा सकती हैं

ये मौतें रोकी जा सकती हैं

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ये मौतें रोकी जा सकती हैं यूँ तो हर दिन सडक दुर्घटना की खबर मीडिया में आती हैं | कई नामचीन हस्ती सडक दुर्घटना के शिकार हुई , परन्तु कुछ दुर्घटना ह्रदय विदारक होती हैं |सरकार, उसके कारकून और समाज इसे गंभीरता से क्यों नहीं लेता एक बड़ा प्रश्न है |२ ०२१ के आंकड़े कोई ५ लाख लोगों की सडक दुर्घटना की बात कहते हैं | जैसे टाटा सन्स के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री उनके दोस्त जहांगीर पंडोले की सडक दुर्घटना में मृत्यु हो गई|इस साल फरवरी में पंजाबी एक्टर दीप सिद्धू ,राज्यसभा सांसद और तेलुगु अभिनेता नंदमुरी हरिकृष्णा, तेलंगाना के नलगोंडा जिले के पास कार हादसे में मृत्यु हो गई। अन्य प्रमुख सड़क दुर्घटना में भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे, साहेब सिंह वर्मा और व्यंग्यकार जसपाल भट्टी शामिल हैं। ये सारी खबरे विचलित करती है, पर हाल ही में गुरुग्राम द्वारका एक्सप्रेस-वे के किनारे ब...
महर्षि वाल्मीकि जयंती पर लिखा एक लेख सहृदय पाठकों के अवलोकनार्थ :–  इंदुशेखर

महर्षि वाल्मीकि जयंती पर लिखा एक लेख सहृदय पाठकों के अवलोकनार्थ :– इंदुशेखर

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महर्षि वाल्मीकि जयंती पर लिखा एक लेख सहृदय पाठकों के अवलोकनार्थ :–  इंदुशेखर –––––––––––––––विश्व के प्रथम कवि वाल्मीकि का लोकधर्म *********************** महर्षि वाल्मीकि इस संसार के प्रथम कवि हैं, जिन्होंने पहला श्लोक रचकर लोक में कविता का सूत्रपात किया। तमसा नदी के तट पर जब ये संध्या–वन्दन कर रहे थे तो एक बहेलिए ने परस्पर क्रीड़ारत क्रौंच पक्षी के जोड़े में से नर क्रौंच का वध कर दिया। क्रौंची के चीत्कार से पूरा जंगल गूँज उठा। धरती पर पड़े रक्त से लथपथ क्रौंच और विलाप करती हुई क्रौंची को देखकर ऋषि का मन करुणा से भीग गया। वे विचलित हो गए और उस दुष्ट बहेलिए को शाप दे डाला। भावावेश में ऋषि के मुख से अनायास श्लोक फूट पड़ा– "मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः । यत्क्रौंचमिथुनादेकमवधी काममोहितम् ।।" (रामायण, बालकाण्ड २/१५) अर्थात् ओ, निषाद! तुमको अनंत...
मुलायम नहीं थे समाजवादी – रामेश्वर मिश्र पंकज

मुलायम नहीं थे समाजवादी – रामेश्वर मिश्र पंकज

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मुलायम नहीं थे समाजवादी - रामेश्वर मिश्र पंकज मुलायम सिंह यादव नहीं रहे ।वह मुझ से 6 वर्ष बड़े थे।परन्तु वे समाजवाद से जुड़े नहीं थे।यह मैं बल देकर कह रहा हूँ।क्योंकि युवावस्था में मैं समाजवादी था और डॉ लोहिया जी का स्नेहभाजन था ।जॉर्ज फ़र्नान्डिस, राजनारायण जी मधु लिमए जी सभी से मेरा घनिष्ठ संबंध था । समाजवादी लोगों में रामसेवक यादव एक बहुत ही तेजस्वी और अत्यंत प्रतिभाशाली नेता थे ।उनकी स्मरण शक्ति और उनका वक्तृत्वकौशल भी अनूठा था । वैसा कोई वक्ता समाजवादी आंदोलन में दूसरा नहीं हुआ। 1967 में जब डॉ लोहिया और रामसेवक यादव आदि के प्रयास से गैर कांग्रेस वाद की हवा चली ,तब रामसेवक जी ने मुलायम सिंह को खड़ा किया और वह पहली बार विधायक बने ।तब तक वे समाजवाद के विचार से पूर्ण तरह अपरिचित थे और रामसेवक जी के विनम्र सेवक के रूप में ही थे। गैर कांग्रेस वाद की हवा का लाभ उन्हें मिला ।परंतु अ...
नेहरू ने अँग्रेजों से गुप्त संधि की और कहा था कि “मैं भी मुसलमान हूं”

नेहरू ने अँग्रेजों से गुप्त संधि की और कहा था कि “मैं भी मुसलमान हूं”

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नेहरू ने अँग्रेजों से गुप्त संधि की और कहा था कि “मैं भी मुसलमान हूं”_  (विभाजनकालीन भारत के साक्षी )  इस शीर्षक को पढ़ कर आप अवश्य चौकेंगे, लेकिन सत्ता पिपासा के लिए जवाहरलाल नेहरू के ये कुछ व्यक्तिगत रहस्य भी जानने से यह स्पष्ट होता है कि स्वतंत्रता के उपरान्त भी भारत क्यों अपने गौरव को पुन: स्थापित न कर सका __ विनोद कुमार सर्वोदय   श्री नरेन्द्र सिंह जी जो ‘सरीला’ रियासत (टीकमगढ़ के पास,बुंदेलखंड) के प्रिंस थे तथा बाद में गवर्नर जनरल लार्ड वेवल व लार्ड माउण्टबैटन के वे ए.डी.सी. रहे थे। इस कारण 1942 से 1948 तक की वाइसराय भवन में घटित घटनाओं के वे स्वयं साक्षी थे। उनसे इस लेख के लेखक (प्रो सुरेश्वर शर्मा) की  प्रथम भेंट दिसम्बर 1966 में इण्डिया इण्टरनेशनल सेंटर दिल्ली में हुई थी l प्रिंस आफ़ सरीला श्री नरेंद्र सिंह उस समय काफी वृद्ध थे और इण्डिया इंटरनेशनल सेंटर में ही रहते थे। श्र...
जन-जन तक विज्ञान प्रसार

जन-जन तक विज्ञान प्रसार

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‘जन-जन तक विज्ञान प्रसार’ नई दिल्ली, 10 अक्टूबर (इंडिया साइंस वायर): 15 अगस्त 1947 को स्वाधीन भारत का उदय समूचे विश्व से औपनिवेशिक साम्राज्यवाद की विदाई की प्रस्तावना सिद्ध हुआ। सदियों की पराधीनता से मुक्त हुए भारत ने द्रुत आर्थिक विकास एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की राह चुनी। सन् 1958 में 'वैज्ञानिक नीति संकल्प पत्र' (साइंटिफिक पॉलिसी रेज़ोलुशन) पर भारतीय संसद ने अपनी स्वीकृति की मुहर लगाई। लक्ष्य था; सभी समुचित संसाधनों द्वारा विज्ञान एवं वैज्ञानिक शोध का पोषण, विस्तार एवं उसकी निरंतरता सुनिश्चित करना। देशभर में प्रौद्योगिकी और विज्ञान शिक्षण, प्रशिक्षण, शोध एवं विकास संस्थानों की स्थापना की मुहिम शुरू हुई। स्वतंत्रता के 75 वर्ष बाद आज भारत विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में एक वैश्विक शक्ति बनने की ओर अग्रसर है। एक आधुनिक स...
आजीवन हिन्दू रहे गौतम बुद्ध..!

आजीवन हिन्दू रहे गौतम बुद्ध..!

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आजीवन हिन्दू रहे गौतम बुद्ध..! ~ डॉ० शंकर शरण हमारे अनेक बुद्धिजीवी एक भ्रांति के शिकार हैं, जो समझते हैं कि गौतम बुद्ध के साथ भारत में कोई नया ‘धर्म’ आरंभ हुआ। तथा यह पूर्ववर्ती हिन्दू धर्म के विरुद्ध ‘विद्रोह’ था। यह पूरी तरह कपोल-कल्पना है कि बुद्ध ने जाति-भेदों को तोड़ डाला, और किसी समता-मूलक दर्शन या समाज की स्थापना की। कुछ वामपंथी लेखकों ने तो बुद्ध को मानो कार्ल मार्क्स का पूर्व-रूप जैसा दिखाने का यत्न किया है। मानो वर्ग-विहीन समाज बनाने का विचार बुद्ध से ही शुरू हुआ देखा जा सकता है, आदि। लेकिन यदि गौतम बुद्ध के जीवन, विचार और कार्यों पर संपूर्ण दृष्टि डालें, तो उन के जीवन में एक भी प्रसंग नहीं कि उन्होंने वंश और जाति-व्यवहार की अवहेलना करने को कहा हो। उलटे, जब उन के मित्रों या अनुयायों के बीच दुविधा के प्रसंग आए, तो बुद्ध ने स्पष्ट रूप से पहले से चली आ रही रीतियों का सम्मान ...
कौन होगा अमिताभ बच्चन से बड़ा हिन्दी सेवी

कौन होगा अमिताभ बच्चन से बड़ा हिन्दी सेवी

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कौन होगा अमिताभ बच्चन से बड़ा हिन्दी सेवी आर.के. सिन्हा अमिताभ बच्चन आज के दिन सारे देश को जोड़ते हैं। उनकी लोकप्रियता धर्म,जाति,भाषा की दीवारों को लांघ चुकी है। सच मानें तो वे कालजयी हो चुके हैं। उनकी अदाकारी अत्यंत ही स्वाभाविक है। उनकी शख्सियत बेहद ही गरिमामयी है। उनकी निरंतर काम करने की जिजिविषा अकल्पनीय है। वे लगातार आधी सदी से फिल्म और टेलीविजन के पर्दे पर सक्रिय हैं। उन्होंने अपने करोड़ों चाहने वालों को आनंद के न जाने कितने अविस्मरणीय पल दिए हैं। वे 11 अक्तूबर को अपने सक्रिय जीवन के 80 सालों का सफर पूरा कर रहे हैं। अमिताभ बच्चन के जन्मदिन पर उनकी फिल्मों का उत्सव कुछ दिन पहले से ही शुरू हो गया था। इसमें बिग बी की सुपरहिट 11 फिल्मों को देश भर के 17 शहरों में 22 स्क्रीनों पर दिखाया गया।  उनकी बेहद खास फिल्में जैसे दीवार, जंजीर,  डॉन, कालिया वगैरह दिखाई गईं। पर यह कोई बड़ी खबर नहीं ह...
मोदी चलें, भागवत की राह पर*

मोदी चलें, भागवत की राह पर*

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मोदी चलें, भागवत की राह पर* *डॉ. वेदप्रताप वैदिक* इधर भारत सरकार ने मुसलमानों, ईसाइयों आदि को भी जातीय आधार पर आरक्षण देने के सवाल पर एक आयोग बना दिया है और उधर राष्ट्रीय स्वयंसेवक के मुखिया मोहन भागवत ने एक पुस्तक का विमोचन करते हुए भारत में ‘जात तोड़ो’ का नारा दे दिया है। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा है कि हिंदू शास्त्रों में कहीं भी जातिवाद का समर्थन नहीं किया गया है। भारत में जातिवाद तो पिछली कुछ सदियों की ही देन है। भारत जन्मना जाति को नहीं मानता था। वह कर्मणा वर्ण-व्यवस्था में विश्वास करता था। कोई भी आदमी अपने कर्म और गुण से ब्राह्मण बनता है। मोहनजी स्वयं ब्राह्मण परिवार में पैदा हुए हैं। उनकी हिम्मत की मैं दाद देता हूं कि उन्होंने जन्म के आधार को रद्द करके कर्म को आधार बताया है। भगवद्गीता में भी कहा गया है- ‘चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः।’ याने चारों वर्णों का निर्म...
अशोक गहलोत की जादूगरी में फंस गया गांधी परिवार।

अशोक गहलोत की जादूगरी में फंस गया गांधी परिवार।

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अशोक गहलोत की जादूगरी में फंस गया गांधी परिवार। अपनी सरकार की कामयाबी के लिए गहलोत अब मोदी सरकार के गृहमंत्री अमित शाह से भी सहयोग लेने को तैयार। ================ 8 अक्टूबर को कांग्रेस की भारत जोड़ों यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि राजस्थान में यदि उद्योगपति गौतम अडानी का फेवर किया गया तो वे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ भी खड़े हो जाएंगे। वहीं 8 अक्टूबर को ही जयपुर में गहलोत ने कहा कि विकास के लिए उनकी सरकार केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के पुत्र जयंत शाह की मदद भी लेने को तैयार हैं। राहुल और गहलोत के बयान से जाहिर है कि अब कांग्रेस का नेतृत्व करने वाले गांधी परिवार और अशोक गहलोत के बीच दरार बढ़ गई है। सब जानते हैं कि अडानी और अंबानी को लेकर राहुल गांधी मोदी सरकार पर हमलावर रहते हैं। लेकिन वहीं कांग्रेस शासित राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत अडानी-अंबानी को राजस्थान के विकास में सहा...
भारत के हजार टुकड़ों की तैयारी

भारत के हजार टुकड़ों की तैयारी

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भारत के हजार टुकड़ों की तैयारी* *डॉ. वेदप्रताप वैदिक* अब तक भारत में जिन अनुसूचित जातियों और जन-जातियों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण दिया जाता रहा है, अब उनकी संख्या बढ़ाने की मांग हो रही है। अदालत में कई याचिकाएं भी लगी हुई हैं। संविधान सभा में पहले सिर्फ उन्हीं अनुसूचितों को आरक्षण मिला हुआ था, जो अपने आप को हिंदू मानते थे लेकिन 1956 में सिखों और 1990 में बौद्ध अनुसूचितों को भी इस जमात में जोड़ लिया गया। हालांकि गौतम बुद्ध और गुरु नानक अपने अनुयायियों को जातिभेद से दूर रहने का उपदेश देते रहे लेकिन थोक वोटों के लालच में फंसकर नेताओं ने धर्म को भी जाति के पांव तले ठेल दिया। आश्चर्य है कि उन अ-हिंदू धर्मावलंबियों ने उनके इस धर्म विरोधी कृत्य को सहर्ष स्वीकार कर लिया। अब उन्हीं की देखादेखी हमारे मुसलमान, ईसाई और यहूदी भी मांग कर रहे हैं कि उनमें जो अनुसूचित हैं और पिछड़े हैं, उन्हें भी सर...