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खतरे में भारत एवं दुनिया के आदिवासी समुदाय

खतरे में भारत एवं दुनिया के आदिवासी समुदाय

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विश्व आदिवासी दिवस- 9 अगस्त, 2022 पर विशेषखतरे में भारत एवं दुनिया के आदिवासी समुदाय-ललित गर्ग -अन्तरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस, विश्व में रहने आदिवासी लोगों के मूलभूत अधिकारों जल, जंगल, जमीन को बढ़ावा देने और उनकी सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और न्यायिक सुरक्षा के लिए प्रत्येक वर्ष 9 अगस्त को मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम “संरक्षण में स्वदेशी महिलाओं की भूमिका और पारंपरिक ज्ञान का प्रसारण” घोषित किया है। यह दिवस उन उपलब्धियों और योगदानों को भी स्वीकार करता है जो वनवासी लोग पर्यावरण संरक्षण, आजादी, महा आंदोलनों, जैसे विश्व के मुद्दों को बेहतर बनाने के लिए करते हैं। यह पहली बार संयुक्त राष्ट्र की महासभा द्वारा दिसंबर 1994 में घोषित किया गया था। आदिवासी महिलाएं आदिवासी समुदाय की रीढ़ है, वे पारंपरिक पैतृक ज्ञान के संरक्षण और प्रसारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्राकृतिक संसा...
Conclave inaugurated by Central Minister Ashwani Chobe & in Concluding session award distributed by Central minister Gen. V. K. singh, Delhi Rocked with the Dialogue India Academia Awards -2022

Conclave inaugurated by Central Minister Ashwani Chobe & in Concluding session award distributed by Central minister Gen. V. K. singh, Delhi Rocked with the Dialogue India Academia Awards -2022

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Delhi Rocked with the Dialogue India Academia Awards -2022, Dialogue India released the 2022 ranking of Private Higher Education Institutions of India. Conclave inaugurated by Central Minister Ashwani Chobe & in Concluding session award distributed by Central minister Gen. V. K. singh Amity University emerge as Best private university of India in Dialogue India ranking New Delhi: Witnessing thought provoking discussions and hosting a platform to the Indian Higher Education Institutions, business groups, various academic experts and decision makers for speaking their mind,the 6th Dialogue India Academia Conclave and the 8th Dialogue India International Academia Award Function - 2022 held in national capital New Delhi on 6 August, 2022 at the Shangri-la Hotel. Over a hundred d...
हर घर तिरंगा अभियान और देशभक्ति के मायने

हर घर तिरंगा अभियान और देशभक्ति के मायने

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हर घर तिरंगा अभियान और देशभक्ति के मायने नागरिकों के सुरक्षित और समृद्धशाली जीवन के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है; उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और समृद्धी का होना। इसलिए क्या आपको हर घर तिरंगा फहराने के साथ-साथ हर घर रोज़गार की आवश्यकता ज़्यादा नहीं लग रही है ? आज  आज़ादी के 75 साल बाद भी देश के नौजवान बेरोजागरी के चलते आत्महत्या करने को मजबूर है।  हम सभी देश वासी हर घर तिरंगा लहरायेंगे, लेकिन इस स्वतंत्रता दिवस पर हमें लाल किले से ये आवाज़ भी तो सुनाई दे कि देश के हर नागरिक को समान शिक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, रोजगार गारंटी दी जाएगी। यही तो सच्चा राष्ट्रवाद है। -प्रियंका 'सौरभ' हर घर तिरंगा आज़ादी का अमृत महोत्सव के तहत एक अभियान है। यह अभियान लोगों को भारत की आजादी के 75वें वर्ष में तिरंगा घर लाने और इसे फहराने के लिए प्रोत्साहित करता है। नागरिकों और तिरंगे के बीच संबंध हमेशा से...
मृत्यु का कारण बनती नकली और घटिया क्वालिटी की दवाएं

मृत्यु का कारण बनती नकली और घटिया क्वालिटी की दवाएं

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मृत्यु का कारण बनती नकली और घटिया क्वालिटी की दवाएं सबसे अधिक मात्रा में दवाइयां बनाने में भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा देश है। देश में सबसे तेज गति से बढ़ रहे इस कारोबार के बढ़ने के साथ ही नकली और निम्न कोटि की दवाओं का अवैध कारोबार भी बढ़ रहा है और लोगों की जान पर खतरा बढ़ता जा रहा है। पिछले वर्ष एसोचैम ने अपनी रिपोर्ट में देश में बनने वाली कुल दवाओं का 25 प्रतिशत नकली और खराब गुणवत्ता वाली दवाएं बनने और बिकने का खुलासा किया था, जो विश्व की कुल नकली दवाओं का 35 प्रतिशत है। -सत्यवान 'सौरभ' डब्ल्यूएचओ के नए शोध के अनुसार, निम्न और मध्यम आय वाले देशों में अनुमानित 10 में से 1 चिकित्सा उत्पाद या तो घटिया है या गलत है। इसका मतलब है कि लोग ऐसी दवाएं ले रहे हैं जो बीमारी का इलाज या रोकथाम करने में विफल हैं। यह न केवल इन उत्पादों को खरीदने वाले व्यक्तियों और स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए ...
आजीविका मिशन से बढ़ा महिलाओं का स्वावलंबन

आजीविका मिशन से बढ़ा महिलाओं का स्वावलंबन

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आजीविका मिशन से बढ़ा महिलाओं का स्वावलंबन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का काम किया है।  स्वयं सहायता समूहों की महिलाएँ न केवल अपने अधिकार के लिए जागरूक हो रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को उनका हक़ दिलाने और उनकी समस्याएँ सुलझाने के लिए भी प्रयास कर रहीं हैं। गाँवों में महिला सशक्तिकरण का यह अद्भुत उदाहरण है। हरियाणा के भिवानी जिले के सिवानी ब्लॉक के आजीविका मिशन प्रोग्राम मैनेजर जगबीर रमेश सिंहमार का कहना है कि गरीबों में गरीबी से बाहर आने की तीव्र इच्छा होती है, और उनमें जन्मजात क्षमताएं होती हैं इसलिए गरीबों की जन्मजात क्षमताओं को उजागर करने के लिए सामाजिक लामबंदी और गरीबों की मजबूत संस्थाओं का निर्माण महत्वपूर्ण है। सामाजिक लामबंदी, संस्था निर्माण और सशक्तिकरण प्रक्रिया को प्रेरित करने के लिए आजीविका मिशन समर्पित और संवेदनशील संरचना है। -प्रियंका 'सौरभ...
वृद्ध वयस्कों के बीच सामाजिक डिस्कनेक्ट

वृद्ध वयस्कों के बीच सामाजिक डिस्कनेक्ट

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वृद्ध वयस्कों के बीच सामाजिक डिस्कनेक्ट मनुष्य सामाजिक प्राणी हैं। एक विकासवादी दृष्टिकोण से, हमारे प्रारंभिक अस्तित्व के लिए सामाजिक संबंध आवश्यक थे, और अभी भी बहुत कुछ हैं। वास्तव में, सामाजिक जुड़ाव मानव जीवन के सबसे बुनियादी पहलुओं में से एक है और हमारी भलाई के लिए महत्वपूर्ण है। दूसरों के लिए डिस्कनेक्ट या अनदेखा महसूस करना न केवल दर्दनाक भावनात्मक अवस्थाओं को उजागर करेगा, बल्कि एक बुनियादी मानवीय आवश्यकता-संबंधितता की आवश्यकता को भी विफल कर देगा। हालाँकि, जिस तरह प्यास हमें पानी पीने के लिए एक संकेत के रूप में कार्य करती है, उसी तरह दर्दनाक भावनात्मक अवस्थाएँ हमें दूसरों के साथ अधिक संबंध बनाने के लिए एक संकेत के रूप में काम कर सकती हैं।मौजूदा साक्ष्य इंगित करते हैं कि सामाजिक जुड़ाव का स्वास्थ्य और दीर्घायु पर एक शक्तिशाली प्रभाव है। उदाहरण के लिए, जो लोग दूसरों से अधिक जुड़ाव ...
*कांवड़ यात्रा – श्रृद्धा को नमन*

*कांवड़ यात्रा – श्रृद्धा को नमन*

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*कांवड़ यात्रा - श्रृद्धा को नमन* कांवड़ यात्रा का चलन 1990 के दशक के उत्तरार्ध से प्रारम्भ होता है, जब 15-20 युवा, महादेव की भक्ति में लीन होकर हरिद्वार से नंगे पैर पैदल चलकर कांवड़ लेकर चले थे। उस समय उन सभी का एकमात्र उद्देश्य श्रवण कुमार की भांति अपने माता-पिता को पुण्य दिलाने का था। श्रवण कुमार अपने माता-पिता को एक कांवड़ में बिठाकर, मिट्टी के पात्र में गंगा जल भर कर अपने कंधे पर उठाकर तीर्थ यात्रा कराने के लिए निकले थे और मार्ग में जितने भी शिवालय पड़ते थे, वहाँ पर वो यदि उनके हाथ से सम्भव हुआ तो ठीक नहीं तो उनके निमित्त थोड़ा सा जल चढ़ाते हुए आगे बढ़ते थे। अर्थात् उनका कांवड़ यात्रा करने का उद्देश्य विशुद्ध रूप से माता-पिता का कल्याण एवं उनके स्वर्ग में स्थान प्राप्त करने का प्रयास था। समय के साथ-साथ कांवड यात्रा का स्वरूप भी शनै-शनै बदलता चला गया। जहाँ पूर्व में इस यात्रा में मात्र पुरु...
जो लोग जलवायु आपदा का सबसे तीव्रतम प्रभाव झेलते हैं वहीं जलवायु नीति-निर्माण से क्यों ग़ायब हैं?

जो लोग जलवायु आपदा का सबसे तीव्रतम प्रभाव झेलते हैं वहीं जलवायु नीति-निर्माण से क्यों ग़ायब हैं?

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जो लोग जलवायु आपदा का सबसे तीव्रतम प्रभाव झेलते हैं वहीं जलवायु नीति-निर्माण से क्यों ग़ायब हैं? बॉबी रमाकांत - सीएनएस पैसिफ़िक क्षेत्र के द्वीप देश, फ़िजी, की मेनका गौंदन ने कहा कि पैसिफ़िक महासागर (प्रशांत महासागर) दुनिया का सबसे विशाल सागर है परंतु भीषण जलवायु आपदाएँ भी यहीं पर व्याप्त हैं। पैसिफ़िक क्षेत्र के द्वीप देशों ने जलवायु को सबसे कम क्षति पहुँचायी है परंतु जलवायु आपदा का सबसे भीषण कुप्रभाव इन्हीं को झेलना पड़ रहा है। प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ रहा है जिसके कारणवश जल-स्तर में बढ़ोतरी हो रही है और छोटे पैसिफ़िक द्वीप देश जैसे कि नाउरु और तुवालू पर यह ख़तरा मंडरा रहा है कि कहीं वह समुद्री जल में विलुप्त न हो जाएँ। मेनका गौंदन, फ़िजी महिला कोश की अध्यक्ष हैं और २४वें इंटरनेशनल एड्स कॉन्फ़्रेन्स में हिंदी-भाषी प्रकाशन के विमोचन सत्र को सम्बोधित कर रही थीं। यह हिंदी-भाषी प...
डिजिटल शासन के नए युग में परास्त होते गरीब

डिजिटल शासन के नए युग में परास्त होते गरीब

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डिजिटल शासन के नए युग में परास्त होते गरीब डिजिटल डिवाइड आबादी के अमीर-गरीब, पुरुष-महिला, शहरी-ग्रामीण आदि क्षेत्रों में बनता है। इस अंतर को कम करने की जरूरत है, तभी ई-गवर्नेंस के लाभों का समान रूप से उपयोग किया जा सकेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में ई-गवर्नेंस की पहल जमीनी हकीकत की पहचान और विश्लेषण करके की जानी चाहिए। प्लेटफॉर्म और ऐप-आधारित समाधान गरीबों को पूरी तरह से सेवाओं से वंचित कर सकते हैं या आगे स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुँच को कम कर सकते हैं। जैसे स्लॉट बुक करना फोन, कंप्यूटर और इंटरनेट के बिना उन लोगों के लिये बहुत कठिन हों सकता है।-प्रियंका 'सौरभ' सम्मान के साथ जीने का अधिकार एक संवैधानिक अनिवार्यता है। हालाँकि, यह आज शासन में डिजिटल पहल की चर्चाओं में शायद ही कभी प्रकट होता है। केंद्रीकृत डेटा डैशबोर्ड नीतियों का आकलन करने, मानवीय गरिमा और अधिकारों तक पहुँचने में जितनी...
मिट्टी से लोहपुरुष गढ़ने वाले गंगाधर तिलक

मिट्टी से लोहपुरुष गढ़ने वाले गंगाधर तिलक

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मिट्टी से लोहपुरुष गढ़ने वाले गंगाधर तिलक-ः ललित गर्ग :-भारत की आजादी के लिये मिट्टी से लोहपुरुषों यानी सशक्त, शक्तिशाली एवं राष्ट्रभक्त इंसानों का निर्माण करने का श्रेय जिस महापुरुष को दिया जाता है, वह लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, जो स्वतंत्रता आंदोलन के समय देश की आशाओं के प्रतीक बने। उनके विचारों और कार्यों ने स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा देने में अग्रिम भूमिका निभाई। उन्होंने ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा’ का नारा देकर लाखों भारतीयों को प्रेरित, संगठित और आन्दोलित किया। तिलक व्यक्ति-प्रबंधन कैसे करते, किस तरह आजादी के लिये हर भारतीय के मन में आन्दोलन की भावना भरते, मनुष्यों को कैसे पहचानते थे और सशक्त-आजाद भारत के लिये बृहत्तर आन्दोलनों के लिये कैसे उनके योगदान को प्राप्त करते थे, वह अपने आपमों विस्मय और अनुकरण का विषय है, उसी का अनुकरण करते हुए प्रधानमंत्री न...