Shadow

TOP STORIES

संगीन आर्थिक अपराध के आरोपियों को गिरफ़्तार करने से क्यों बच रही है नॉएडा की पुलिस ?

संगीन आर्थिक अपराध के आरोपियों को गिरफ़्तार करने से क्यों बच रही है नॉएडा की पुलिस ?

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, घोटाला, विश्लेषण, समाचार
संगीन आर्थिक अपराध के आरोपियों को गिरफ़्तार करने से क्यों बच रही है नॉएडा की पुलिस ? *रजनीश कपूर भाजपा नेता तज़िंदेर बग्गा का मामला हो या नॉएडा की एक आईएएस अधिकारी का मामला हो। यदि किसी पर भी कोई आरोप लगता है और उसकी जाँच के लिए पुलिस उससे सहयोग की अपेक्षा करती है, तो एक ज़िम्मेदार नागरिक होने के नाते उसका फ़र्ज़ है कि वह व्यक्ति पुलिस का सहयोग करें। पुलिस के दृष्टिकोण से, एफ़आइआर का अर्थ उस कथित अपराध के बारे में पूरी जानकारी एकत्र करना होता है। यदि किसी के ख़िलाफ़ कोई एफ़आइआर दर्ज हो जाती है तो पुलिस उसे पूछताछ के लिए थाने में बुलाती है और यदि एफ़आइआर में मामला संगीन हो तो उसको गिरफ़्तार भी किया जा सकता है। अपराध की धारा पर निर्भर करेगा कि उसे ज़मानत थाने में ही मिल जाएगी या उसे अदालत का रुख़ करना पड़ेगा। यदि किसी को पता है कि उससे कोई जुर्म हुआ है तो उसके क़ानूनी सलाहकार उसको ज...
सूना-सूना लग रहा, बिन पेड़ों के गाँव

सूना-सूना लग रहा, बिन पेड़ों के गाँव

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, सामाजिक
सूना-सूना लग रहा, बिन पेड़ों के गाँव । पंछी उड़े प्रदेश को, बांधे अपने पाँव ।। -सत्यवान 'सौरभ' पक्षियों को पर्यावरण की स्थिति के सबसे महत्वपूर्ण संकेतकों में से एक माना जाता है। क्योंकि वे आवास परिवर्तन के प्रति संवेदनशील हैं और पक्षी पारिस्थितिकीविद् के पसंदीदा उपकरण हैं। पक्षियों की आबादी में परिवर्तन अक्सर पर्यावरणीय समस्याओं का पहला संकेत होता है। चाहे कृषि उत्पादन, वन्य जीवन, पानी या पर्यटन के लिए पारिस्थितिक तंत्र का प्रबंधन किया जाए, सफलता को पक्षियों के स्वास्थ्य से मापा जा सकता है। पक्षियों की संख्या में गिरावट हमें बताती है कि हम आवास विखंडन और विनाश, प्रदूषण और कीटनाशकों, प्रचलित प्रजातियों और कई अन्य प्रभावों के माध्यम से पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बदल रहे हर रोज ही, हैं मौसम के रूप । सर्दी के मौसम हुई, गर्मी जैसी धूप ।। सूनी बगिया देखकर, ‘तितली है खामोश’ । ज...
परिवारों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस

परिवारों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस

addtop, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, सामाजिक
(15 मई - परिवारों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस) टूट रहे परिवार हैं, बदल रहे मनभाव । प्रेम जताते ग़ैर से, अपनों से अलगाव ।। ---------------------------------------- (भौतिकवादी युग में एक-दूसरे की सुख-सुविधाओं की प्रतिस्पर्धा ने मन के रिश्तों को झुलसा दिया है. कच्चे से पक्के होते घरों की ऊँची दीवारों ने आपसी वार्तालाप को लुप्त कर दिया है. पत्थर होते हर आंगन में फ़ूट-कलह का नंगा नाच हो रहा है. आपसी मतभेदों ने गहरे मन भेद कर दिए है. बड़े-बुजुर्गों की अच्छी शिक्षाओं के अभाव में घरों में छोटे रिश्तों को ताक पर रखकर निर्णय लेने लगे है.  फलस्वरूप आज परिजन ही अपनों को काटने पर तुले है. एक तरफ सुख में पडोसी हलवा चाट रहें है तो दुःख अकेले भोगने पड़ रहें है. हमें ये सोचना -समझना होगा कि अगर हम सार्थक जीवन जीना चाहते है तो हमें परिवार की महत्ता समझनी होगी और आपसी तकरारों को छोड़कर परिवार के साथ खड़ा होना होग...
क्रिकेट में ऑनलाइन सट्टेबाजी से पाकिस्तान को मदद

क्रिकेट में ऑनलाइन सट्टेबाजी से पाकिस्तान को मदद

Current Affaires, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, घोटाला, विश्लेषण
क्रिकेट में ऑनलाइन सट्टेबाजी से पाकिस्तान को मदद आर.के. सिन्हा यह कोई पुरानी बात नहीं है जब क्रिकेट को लेकर कहा जाता था कि यह भारत में धर्म के समान है। क्रिकेट देश को जोड़ता है। यह जाति, मजहब, वर्ग, लिंग की दीवारों को ध्वस्त करता है। पर नब्बे के दशक में क्रिकेट में सट्टेबाजी में अजय जड़ेजा, मनोज प्रभाकर, मोहम्मद अजहरउद्दीन जैसे भारतीय खिलाड़ियों और कई विदेशी खिलाड़ियों के फंसने के बाद करोड़ों क्रिकेट प्रेमी घोर निराश अवश्य हुए थे। उन्हें लगा था कि क्रिकेट में अब कोई पवित्रता नहीं रही। पर वक्त गुजरने के साथ ही क्रिकेट को लेकर भारत में क्रेज पहले की तरह ही हो गया। फिर से भारत की जीत पर देश खुश होने लगा और पराजय पर उदास। बेशक, क्रिकेट प्लेयर्स को लेकर करोड़ों क्रिकेट के दीवाने जान निसार करते हैं। पर जरा गौर करें कि यह सब तब हो रहा है जब क्रिकेट में शर्ते लगनी या यूँ कहें कि सट्टेबाजी खू...
सूचना के अधिकार कानून से बाहर हो सेना

सूचना के अधिकार कानून से बाहर हो सेना

Current Affaires, TOP STORIES, जीवन शैली / फिल्में / टीवी, राष्ट्रीय
सूचना के अधिकार कानून से बाहर हो सेना आर.के. सिन्हा जरा एक बात पर गौर करें कि सूचना के अधिकार की आड़ में भारतीय सेना की तैयारियों को लेकर कुछ खास तत्वों में उत्सुकता किसलिए हो सकती है? क्या सेना के कामकाज की जानकारियां सार्वजनिक करनी चाहिए? सेना से संबंधित जानकारियां सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत सेना की विभिन्न इकाइयों, एजेंसियों तथा छावनियों से मांगने वाले कौन लोग हैं? ये तमाम सवाल इसलिए अहम हो जाते हैं क्योंकि इधर देखने में आ रहा है कि कुछ तत्व सेना की अति संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण जानकारियों को हासिल करने में भी दिलचस्पी लेने लगे हैं। इन सब वजहों से सेना का तंत्र भी चौकन्ना हो गया। वह सारी स्थिति पर नजर रख रहा है। उसकी तरफ से हाल ही में यह भी मांग हुई है कि सेना को आरटीआई कानून से बाहर रखा जाए। ये मांग सच में बहुत ही सार्थक है तथा संकेत दे रही कि मामला कितना गंभीर है। पिछली 2...
Clamour for electricity-coal and its reality

Clamour for electricity-coal and its reality

addtop, Current Affaires, TOP STORIES, आर्थिक, राज्य, राष्ट्रीय
Clamour for electricity-coal and its reality RK Sinha At present, an atmosphere of shortage of coal and electricity is being created. The main intention behind all these conspiracies is to make people stand against the Modi Government of the Centre. This is incidentally instigated by the maximum coal reserve states like Jharkhand, Chattisgarh, West Bengal and Odisha. All these states have non-BJP governments. Let's make a note of it before moving forward. States giving election freebies like electricity are mostly being ruled by non BJP governments. Has the electricity consumption in summer increased this year only or is a general trend or there an electricity shortage this year only?? Definitely not. Power cuts in Delhi are nominal. But CM of Delhi, Arvind Kejriwal is politicizing the...
हाई स्क्रीन टाइम से स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है

हाई स्क्रीन टाइम से स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है

addtop, Current Affaires, TOP STORIES, सामाजिक
हाई स्क्रीन टाइम से स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है डा. विपुल गुप्ता भारत में स्ट्रोक के मौजूदा बोझ के अलावा, कोविड महामारी ने विश्व स्तर पर एक नई महामारी को जन्म दिया है-डिजिटल स्क्रीन की लत। लॉकडाउन से लेकर अभी तक आम व्यक्ति स्क्रीन पर जितना वक्त गुज़ारता है, वह उतनी देर निष्क्रीय होता है, इसलिए निष्क्रीयता और बढ़ता स्क्रीन टाइम एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। अध्ध्यनों के अनुसार, डिजिटल स्क्रीन के इस्तेमाल का समय हमारे जीवनकाल पर सीधा असर डालता है। अध्ध्यन के अनुसार, एक घंटा डिजिटल स्क्रीन का इस्तेमाल हमारी जिंदगी से 22 मिनट कम कर देता है। स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल हार्ट अटैक, स्ट्रोक और कैंसर का कारण भी बन सकता है। एक अनुमान के अनुसार हर 40 सेकंड में से कोई न कोई व्यक्ति स्ट्रोक से पीडि़त होता है और विश्व स्तर पर हर चार मिनट में एक व्यक्ति स्ट्रोक से मर जाता है। जबकि स्...
भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाने का सूत्रधार होंगे अभिनव स्टार्ट-अप’

भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाने का सूत्रधार होंगे अभिनव स्टार्ट-अप’

addtop, BREAKING NEWS, Current Affaires, EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, आर्थिक, राष्ट्रीय, समाचार
भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाने का सूत्रधार होंगे अभिनव स्टार्ट-अप’ नई दिल्ली, 12 मई (इंडिया साइंस वायर): केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, राज्य मंत्री पीएमओ और राज्य मंत्री कार्मिक और लोक शिकायत, डॉ जितेंद्र सिंह ने स्वदेशी नवाचार के साथ स्थायी स्टार्ट-अप के निर्माण पर जोर दिया है। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा, 25 वर्षों के बाद भारत जब अपनी स्वाधीनता के 100 साल पूर्ण करेगा, तब तक देश को विश्व के अग्रणी राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के लिए युवा उद्यमियों द्वारा संचालित अभिनव स्टार्ट-अप्स को जिम्मेदारी लेनी होगी। असम के जोरहाट में ‘आइकॉनिक 75 इंडस्ट्री कनेक्ट (आई-कनेक्ट)’ के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए डॉ जितेंद्र सिंह ने यह बात कही है। इस मौके पर डॉ जितेंद्र सिंह ने विश्व स्तरीय उत्पाद बनाने...
न्यूक्लिक एसिड स्टेनिंग डाई प्रौद्योगिकी उत्पादन के लिए हस्तांतरित

न्यूक्लिक एसिड स्टेनिंग डाई प्रौद्योगिकी उत्पादन के लिए हस्तांतरित

addtop, BREAKING NEWS, Current Affaires, TOP STORIES, राष्ट्रीय
न्यूक्लिक एसिड स्टेनिंग डाई प्रौद्योगिकी उत्पादन के लिए हस्तांतरित नई दिल्ली, 11 मई (इंडिया साइंस वायर): आणविक निदान (मोलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स) और जीवन विज्ञान अनुसंधान में न्यूक्लिक एसिड स्टेनिंग डाई के विविध उपयोग होते हैं। भारतीय वैज्ञानिकों ने न्यूक्लिक एसिड स्टेनिंग डाई का किफायती विकल्प विकसित किया है। डाई ग्रीनआर नामक इस न्यूक्लिक एसिड स्टेनिंग डाई वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की लखनऊ स्थित प्रयोगशाला केन्द्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआई) द्वारा विकसित की गई है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर ग्रीनआर की प्रौद्योगिकी व्यावसायिक उत्पादन के लिए उत्तर प्रदेश में पंजीकृत स्टार्ट-अप कंपनी, जीनटूप्रोटीन प्राइवेट लिमिटेड (जीपीपीएल) को हस्तांतरित की गई है। डाई ग्रीनआर को सीडीआरआई के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ अतुल गोयल ने संस्थान के एक औद्योगिक भागीदार ब...
थाने इज्जत लूटते, देख रही सरकार। रामराज की बात तब, लगती है बेकार।

थाने इज्जत लूटते, देख रही सरकार। रामराज की बात तब, लगती है बेकार।

addtop, TOP STORIES, राष्ट्रीय, विश्लेषण, सामाजिक
थाने इज्जत लूटते, देख रही सरकार। रामराज की बात तब, लगती है बेकार। (पुलिस थाने के स्तर पर कुकर्म हो तो क्या करें?  नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के हिसाब से बलात्कार के कुल दर्ज मामलों में, प्रत्येक पांच मामलें में से सिर्फ एक में ही बलात्कारी को सजा मिल पाती है; बाकी के सारे बलात्कारी ‘बाइज्जत बरी‘ हो जाते हैं।) -सत्यवान 'सौरभ' भारत में एक पुलिस अधिकारी द्वारा कथित तौर पर चार पुरुषों द्वारा कथित रूप से बलात्कार की गई एक 13 वर्षीय लड़की को फिर से यौन उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा क्योंकि वह सामूहिक बलात्कार और अपहरण की शिकायत दर्ज कराने के लिए अधिकारियों के पास गई थी। यह घटना उत्तर प्रदेश की आबादी वाले राज्य में हुई जहां ललितपुर के एक पुलिस स्टेशन में स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) ने पीड़िता के साथ कथित तौर पर बलात्कार किया। नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण की घटनाओं के सिलसिले ने ...