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मुख्य मंत्री योगी जी की भ्रष्टाचार के विरुद्ध क्रांतिकारी पहल

मुख्य मंत्री योगी जी की भ्रष्टाचार के विरुद्ध क्रांतिकारी पहल

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मुख्य मंत्री योगी जी की भ्रष्टाचार के विरुद्ध क्रांतिकारी पहल विनीत नारायण उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी जी ने एक क्रांतिकारी घोषणा की है कि सभी अफ़सरए मंत्री व विधायक तीन महीने के अंदर अपनी चल.अचल सभी सम्पत्तियों की घोषणा सार्वजनिक करें। ज़ाहिर है कि इस घोषणा से अफ़सरशाही और मंत्रियों में हड़कम्प मचेगा। भ्रष्टाचार से जनता हमेशा त्रस्त रहती है। इसलिए जब भी कोई नेता इस मुद्दे को उठाता है तो उसकी लोकप्रियता सातवें आसमान पर चढ़ जाती है। योगी जी को भी इस घोषणा से ये लाभ मिल सकता है। बशर्ते वे इसे अपने बुलडोज़र वाले तेवर से लागू करें। बोफ़ोर्स का मुद्दा उठाकर ही विश्वनाथ प्रताप सिंह प्रधानमंत्री बन गए थे। इसी मुद्दे को उठाकर अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बन गए। ये बात दूसरी है कि दोनों के मुद्दे फुस्स रहे और जिनके ख़िलाफ़ इन्होंने अपना अभियान चलाया था और ढेरों सबूत सामने लाने का जन सभाओं...
ग्रामीण और छोटे बिजली उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति क्यों नहीं हैं।

ग्रामीण और छोटे बिजली उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति क्यों नहीं हैं।

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ग्रामीण और छोटे बिजली उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति क्यों नहीं हैं। प्रियंका 'सौरभ' केंद्रीय विद्युत मंत्रालय  देश में बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों को निर्धारित करने वाले नियम जारी करता हैं। इन नियमों में उपभोक्ताओं को विश्वसनीय सेवाएं और गुणवत्तापूर्ण बिजली सुनिश्चित करने के लिए प्रावधान है। बिजली एक समवर्ती सूची (सातवीं अनुसूची) का विषय है और केंद्र सरकार के पास इस पर कानून बनाने का अधिकार और शक्ति है। ये नियम उपभोक्ताओं को उन अधिकारों के साथ "सशक्त" बनाने का काम करते हैं जो उन्हें गुणवत्ता, विश्वसनीय बिजली की निरंतर आपूर्ति तक पहुंचने की अनुमति देते हैं। सशक्त उपभोक्ता के लिए चुनौती और मुद्दे देखे तो कई राज्य विशेष रूप से ग्रामीण और छोटे बिजली उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति प्रदान करने में सक्षम नहीं हैं। चौबीसों घंटे आपूर्ति की गारंटी और प्रावधान केवल दांवों में है। सरक...
मोतियाबिंद : बीमारी के साथ जीने से बेहतर है कि आंखों की सर्जरी कराएं : डा. महिपाल सिंह सचदेव

मोतियाबिंद : बीमारी के साथ जीने से बेहतर है कि आंखों की सर्जरी कराएं : डा. महिपाल सिंह सचदेव

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मोतियाबिंद : बीमारी के साथ जीने से बेहतर है कि आंखों की सर्जरी कराएं : डा. महिपाल सिंह सचदेव आंखों का स्पष्ट व पारदर्शी लेंस जो नजर को फोकस करने की विधि का एक मुख्य हिस्सा है, उम्र के साथ धुंधला और अपारदर्शी होने लगता है। इसके कारण दृष्टि के बाधित होने को मोतियाबिंद या सफेद मोतिया कहते हैं। लेंसों के धुंधले पडने के कारण लाइट लेंसों से स्पष्ट रूप से गुजर नहीं पाती, जिससे दृष्टि कमजोर पड़ जाती है। नजर धुंधली होने के कारण मोतियाबिंद से पीडित लोगों को पढऩे, नजर का काम करने, कार चलाने (विशेषकर रात के समय) में समस्या आती है। हालांकि कुछ लक्षण हैं जिनकी जितनी जल्दी हो सके पहचान करके मोतियाबिंद को गंभीर होने से रोका जा सकता है। अगर आपको दूर या पास का कम दिखाई दे, गाड़ी ड्राइव करने में समस्या हो या आप दूसरे व्यक्ति के चेहरे के भावों को न पढ़ पाएं तो समझिए की आप की आंख...
बुलडोज़र और बेबसी

बुलडोज़र और बेबसी

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बुलडोज़र और बेबसी ’रजनीश कपूर दिल्ली की जहांगीर पुरी हो या देश का कोई भी शहरए आज बुलडोज़र के आतंक से सहमा हुआ है। हनुमान जयंती को हुई घटना के बाद जहांगीर पुरी में भी बुलडोज़र चले। वहाँ के लोग उसे प्रशासन द्वारा की गई साम्प्रदायिक कार्यवाही कह रहे हैं। प्रशासन इसे अतिक्रमण हटाने के क़ानून की सामान्य कार्यवाही बता रही है। प्रशासन की मानें तो बुलडोज़र केवल ग़ैर क़ानूनी दुकानों और लोगों द्वारा किए गए अतिक्रमण पर ही चला है। कई टीवी चैनल इस पूरे घटनाक्रम को काफ़ी मुस्तैदी से दिखा रहे है। वहाँ एक ओर तो जिनका मकान या दुकान गिराया गया उनका पक्ष सामने रखा जा रहा है। वही दूसरी ओर सरकारी तंत्र का भी पक्ष सामने रखा जा रहा है। जहांगीर पुरी के निवासियों की मानें तो उन्हें इस कार्यवाही के लिए एक भी नोटिस नहीं दिया गया। प्रशासन के अनुसारए हर एक दुकान या मकान को पर्याप्त नोटिस भेजा गया और उसके बाद ही...
नये बायो-इन्क्यूबेशन केंद्र से जम्मू-कश्मीर में स्टार्टअप कल्चर बढ़ने की उम्मीद

नये बायो-इन्क्यूबेशन केंद्र से जम्मू-कश्मीर में स्टार्टअप कल्चर बढ़ने की उम्मीद

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नये बायो-इन्क्यूबेशन केंद्र से जम्मू-कश्मीर में स्टार्टअप कल्चर बढ़ने की उम्मीद  वैज्ञानिक तथा औद्योगिकी अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की जम्मू स्थित प्रयोगशाला - इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन (सीएसआईआर-आईआईआईएम) में बायोनेस्ट (BioNEST) इन्क्यूबेशन सेंटर शुरू हो गया है। केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पृथ्वी विज्ञान; राज्य मंत्री पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष, डॉ जितेंद्र सिंह द्वारा बायोनेस्ट की शुरुआत की गई है। बायोनेस्ट के आरंभ से जम्मू-कश्मीर में सुगंधित एवं औषधीय पौधों पर आधारित स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) द्वारा जम्मू-कश्मीर में जैव प्रौद्योगिकी आधारित स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहन देने और स्थानीय युवाओं में उद्यमीय द...
Bio-incubation centre to promote entrepreneurship in J&K

Bio-incubation centre to promote entrepreneurship in J&K

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Bio-incubation centre to promote entrepreneurship in J&K Efforts to promote entrepreneurship in the Jammu and Kashmir region have got a major boost with the establishment of a bio-incubation centre called BioNESTat the Council of Scientific and Industrial Research (CSIR)’s Jammu-based, Indian Institute of Integrative Medicines (IIIM). Nestled within the Himalayan biodiversity hotspot, the region is particularly rich in terms of medicinal and aromatic plants. It has immense potential for biotech startups, especially in areas such as essential oil products, medicinal mushrooms, nutraceutical products, herbal drugs, and the wellness industry. Enterprising ideas in the biotech sector need incubation support vastly different from the IT sector. They need a landing space to test the...
त्योहारों पर हिंसा का साया

त्योहारों पर हिंसा का साया

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त्योहारों पर हिंसा का साया इस समय देश बड़ी विकट स्थिति से गुज़र रहा है। एक आम आदमी जो कि इस देश की नींव है उस के लिए जीवन के संघर्ष ही इतने होते हैं कि वो अपनी नौकरी, अपना व्यापार, अपना परिवार, अपने और अपने बच्चों के भविष्य के सपनों से आगे कुछ सोच ही नहीं पाता। वो रोज सुबह उम्मीदों की नाव पर सवार अपने काम पर जाता है और शाम को इस दौड़ती भागती जिंदगी में थोड़े सुकून की तलाश में घर वापस आता है। तीज त्यौहार उसके इस नीरस जीवन में कुछ रंग भर देते हैं। एक आम आदमी का परिवार साल भर इन तीज त्योहारों का इंतजार करता हैं। घर के बड़े बुजुर्गों की अपनी पीढ़ियों पुरानी परंपराओं के प्रति आस्था तो बच्चों के मन की उमंग इन त्योहारों के जरिये उसके जीवन में कुछ रस और रंग भर देते हैं। लेकिन जब यही त्योहार जिंदगी को मौत में बदलने का कारण बन जाए?जब इन त्योहारों पर जीवन रंगहीन हो जाए? उनका घर उनका उनकी दुकाने...
मलेरिया दुनिया की सबसे घातक बीमारियों में से एक

मलेरिया दुनिया की सबसे घातक बीमारियों में से एक

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मलेरिया दुनिया की सबसे घातक बीमारियों में से एक -सत्यवान 'सौरभ' 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस 2022 का विषय 'मलेरिया रोग के बोझ को कम करने और जीवन बचाने के लिए नवाचार का उपयोग' थीम के साथ विश्व मलेरिया दिवस 2022 मनाया जा रहा है। विश्व मलेरिया दिवस की स्थापना 25 अप्रैल 2007 को विश्व स्वास्थ्य सभा के 60वें सत्र में विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा की गई थी। मलेरिया एक परजीवी के कारण होता है जो आमतौर पर एक निश्चित प्रकार के मच्छर मादा एनोफिलीज द्वारा मानव की त्वचा में परजीवी स्पोरोजोइट्स जमा करने से होता है। मलेरिया मानव  मृत्यु दर का एक प्रमुख कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, इस बीमारी से निपटने में भारी प्रगति के बावजूद, हर साल दुनिया भर में मलेरिया के 212 मिलियन नए मामले और 430,000 मलेरिया से संबंधित मौतें होती हैं। मलेरिया एक तीव्र ज्वर की बीमारी है। एक गैर-प्रति...
मैथिली रामायण में कालरूपी तापस का श्रीराम के पास आना तथा लक्ष्मण का स्वर्ग जाना

मैथिली रामायण में कालरूपी तापस का श्रीराम के पास आना तथा लक्ष्मण का स्वर्ग जाना

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मैथिली रामायण में कालरूपी तापस का श्रीराम के पास आना तथा लक्ष्मण का स्वर्ग जाना श्रीरामकथा के अल्पज्ञात दुर्लभ प्रसंग मैथिली रामायण में कालरूपी तापस का श्रीराम के पास आना तथा लक्ष्मण का स्वर्ग जाना भारत के अतीत में सम्पूर्ण उत्तर भारत में लगभग एक ही भाषा थी। आज भी वैसा ही है। समय के चक्र के साथ धीरे-धीरे वैभाषिक अन्तर में वृद्धि हो गई और आज से लगभग एक हजार वर्ष पहले आधुनिक स्थानीय भाषाओं का उद्भव एवं विकास हुआ। बिहार राज्य के पूर्वोत्तर कोने से गंगा, गण्डक और कोसी नदियों से घिरे विशाल क्षेत्र की भाषा मैथिली है। इस भाषा का साहित्य लगभग बारहवीं सदी से उपलब्ध है। विद्यापति प्रभूति अनेक विद्वानों के साहित्य से समृद्ध यह भाषा हिन्दी से प्राय: मिलती जुलती है। इस भाषा में कवि चन्द्रा झा ने मैथिली रामायण की रचना की है। उनका रचनाकाल १८८० के आसपास और प्रकाशनकाल १८९०-९१ है। इनकी रामायण अध्यात्मर...
सांबा में नरेन्द्र मोदी के उद्बोधन की दिशाएं

सांबा में नरेन्द्र मोदी के उद्बोधन की दिशाएं

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सांबा में नरेन्द्र मोदी के उद्बोधन की दिशाएं-ललित गर्ग -प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हाल ही में की गयी जम्मू-कश्मीर यात्रा पर इसलिए देश की निगाहें थीं, क्योंकि अनुच्छेद 370 हटने के बाद वह पहली बार जम्मू-कश्मीर की धरती पर पहुंचे। उनकी इस यात्रा ने अनेक सकारात्मक संदेश दिये, शांति एवं विकास का माध्यम बना है। निश्चित ही उनकी यह यात्रा इस प्रांत में एक नई फिजां का सबब बनी है। जम्मू-कश्मीर हमारे देश का वो गहना है जिसे जब तक सम्पूर्ण भारत के साथ जोड़ा नहीं जाता, वहां शांति, आतंकमुक्ति एवं विकास की गंगा प्रवहमान नहीं होती, अधूरापन-सा नजर आता रहा है। इसलिए इसे शेष भारत के साथ हर दृष्टि से जोड़ा जाना महत्वपूर्ण है और यह कार्य मोदी एवं उनकी सरकार ने किया है। निश्चित रूप से वहां एक नया दौर शुरू किया है। इसके लिये जम्मू में मोदी ने पंचायत दिवस के अवसर पर केवल देश भर के पंचायत ...