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सामान्य जीवन का अंतिम दशक -अनुज अग्रवाल

सामान्य जीवन का अंतिम दशक -अनुज अग्रवाल

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बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि अपना काम करके जा चुकी है और किसान व फल- सब्ज़ी उत्पादक बस चुपचाप बर्बादी की दास्ताँ देख रहा है। हर तीन महीने में बदलने वाले मौसम ने पिछले तीन वर्षों में इतनी करवटे ली हैं जिसका कोई पैटर्न ही नहीं नज़र आ रहा। मौसम के बदलाव अब हर सप्ताह हो जाते हैं। लोग जाड़ा, गर्मी और बरसात सब एक साथ झेल रहे हैं। जीवाश्म ईंधनों के बढ़ते अतिशय प्रयोग व पेट्रोलियम व रासायनिक पदार्थों से बने उत्पाद (प्लास्टिक, कपड़े, रासायनिक खाद, कीटनाशक आदि) से निकली मीथेन व कार्बन डाईऑक्साइड आदि गैसों ने धरती के हजारो साल से बने बनाए संतुलन को बिगड़ दिया है और पृथ्वी का तापमान 1.5 डिग्री बढ़ने के क़रीब है। तीस हज़ार बर्षों से मानव एक स्थिर वायुमंडल में जी रहा था जिसको पिछले तीन दशकों के विकास ने पूरी तरह बिखेर दिया है। शायद यह आख़िरी दशक हो जिसको हम जैसे तैसे ठीक से जी भी पाएँ। हालाँकि इसक...
खिलाड़ी ही हों खेल महासंघों के अध्यक्ष

खिलाड़ी ही हों खेल महासंघों के अध्यक्ष

TOP STORIES, विश्लेषण
विनीत नारायणजब भी कभी किसी खेल महासंघ में कोई विवाद उठता है तो उसके पीछे ज़्यादातर मामलों में दोषी ग़ैर खिलाड़ीवर्ग से आए हुए व्यक्ति ही होते हैं। खेल और खिलाड़ियों के प्रति असंवेदनशील व्यक्ति अक्सर ऐसी गलती कर बैठतेहैं जिसका ख़ामियाज़ा उस खेल और उस खेल से जुड़े खिलाड़ियों को उठाना पड़ता है। यदि ऐसे खेल महासंघों केमहत्वपूर्ण पदों पर राजनेताओं या ग़ैर खिलाड़ी वर्ग के व्यक्तियों को बिठाया जाएगा तो उनकी संवेदनाएँ खेल औरखिलाड़ियों के प्रति नहीं बल्कि उस पद से होने वाली कमाई व शोहरत के प्रति ही होगी। ऐसा दोहरा चरित्र निभानेवाले व्यक्ति जब बेनक़ाब होते हैं तो न सिर्फ़ खेल की बदनामी होती है बल्कि देश का नाम भी ख़राब होता है।पिछले कई दिनों से देश का नाम रोशन करने वाली देश कि बेटियाँ दिल्ली के जंतर-मन्तर पर धरना दे रही हैं। इन्हेंआंशिक सफलता तब मिली जब देश की सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली पुलिस को ...
1 मई, मजदूर दिवस विशेष

1 मई, मजदूर दिवस विशेष

TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
दिहाड़ीदार मजदूरों की दुर्दशा के लिए जिम्मेवार कौन ?* (सामाजिक सुरक्षा कोष में तेजी लाने की आवश्यकता है ताकि देश के सबसे गरीब और कमजोर तबके को यह वित्तीय सुरक्षा की भावना प्रदान कर सके। एक मजदूर देश के निर्माण में बहुमूल्य भूमिका निभाता है। किसी भी समाज, देश संस्था और उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों की अहमियत किसी से भी कम नहीं आंकी जा सकती। इनके श्रम के बिना औद्योगिक ढांचे के खड़े होने की कल्पना भी नहीं की जा सकती।) --- डॉo प्रियंका सौरभ, बदलते दौर में विभिन्न आपदाओ के कारण सबसे बड़ा संकट दिहाड़ीदार मजदूरों के लिए हुआ है। जिनके बारे देश के अंदर बहुत ही कम चर्चा हुई और इनकी आर्थिक सहायता के लिए देश की सरकार ने कुछ नहीं सोचा। कोई संदेह नहीं कि देश का मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा शोषण का शिकार है। दिहाड़ीदार मजदूर के लिए भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। शहरों में रोजी-रोटी की तलाश...
जहरीले भाषणों की दिन-प्रतिदिन गंभीर होती समस्या

जहरीले भाषणों की दिन-प्रतिदिन गंभीर होती समस्या

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
  ललित गर्ग  कर्नाटक में चुनावों को लेकर नफरती सोच एवं हेट स्पीच का बाजार बहुत गर्म है। राजनीति की सोच ही दूषित एवं घृणित हो गयी है। नियंत्रण और अनुशासन के बिना राजनीतिक शुचिता एवं आदर्श राजनीतिक मूल्यों की कल्पना नहीं की जा सकती। नीतिगत नियंत्रण या अनुशासन लाने के लिए आवश्यक है सर्वोपरि राजनीतिक स्तर पर आदर्श स्थिति हो, तो नियंत्रण सभी स्तर पर स्वयं रहेगा और इसी से देश एक आदर्श लोकतंत्र को स्थापित करने में सक्षम हो सकेगा। अक्सर चुनावों के दौर में राजनीति में बिगड़े बोल एवं नफरत की राजनीति कोई नई बात नहीं है। चर्चा में बने रहने के लिए ही सही, राजनेताओं के विवादित बयान गाहे-बगाहे सामने आ ही जाते हैं, लेकिन ऐसे बयान एक ऐसा परिवेश निर्मित करते हैं जिससे राजनेताओं एवं राजनीति के लिये घृणा पनपती है। यह सही है कि शब्द आवाज नहीं करते, पर इनके घाव बहुत गहरे होते हैं और इनका असर भी दूर तक पहु...
नक्सल समस्या : निगरानी में चूक

नक्सल समस्या : निगरानी में चूक

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राज्य, विश्लेषण, सामाजिक
कभी मध्यप्रदेश का हिस्सा रहे छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में पिछले दिनो एक बार फिर हुए नक्सली हमले के निष्कर्ष साफ हैं कि सरकारों के दावों के बावजूद नक्सलियों की ताकत पूरी तरह कम नहीं हुई है, इस लिहाज़ से मध्यप्रदेश में मुस्तैदी की ज़रूरत है । बार-बार बड़ी संख्या में जवानों को खोने के बावजूद अतीत की घटनाओं से कोई सबक नहीं सीखे गए हैं। दुर्भगाय, संचार क्रांति के दौर में मुकाबले के लिये उपलब्ध संसाधनों व हथियारों के बावजूद सरकार यदि उनके हमलों का आकलन नहीं कर पा रही हैं तो यह राज्यों के खुफिया तंत्र की विफलता का ही परिचायक है। सफल ऑपरेशन करके लौट रहे रिजर्व बल के जवानों का बारूदी सुरंग की चपेट में आना बताता है कि यह नक्सलियों की हताशा से उपजा हमला तो था ही, आगे की चुनौती और बड़ी है । इसमें कोई संदेह नहीं है कि हाल के दिनों में देश के कई इलाकों में सुरक्षाबलों के साझे अभियानों में नक्सलियों...
सम्राट चार्ल्स का राज्याभिषेक

सम्राट चार्ल्स का राज्याभिषेक

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
आर.के. सिन्हा भारत के मित्र और ब्रिटेन के नए बनने जा रहे  सम्राट चार्ल्स-तृतीय के आगामी 6 मई को होने वाले राज्याभिषेक में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी उपस्थित रहेंगे। सम्राट चार्ल्स का राज्याभिषेक उस वक्त हो रहा है जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री भारत मूल के श्रषि सुनक हैं। सुनक की पत्नी भारत के प्रख्यात उद्योगपति एन. नारायणमूर्ति की सुपुत्री अक्षता हैं। यह भी मानना होगा कि दोनों देशों के आपसी संबंधों को मज़बूत रखने में ब्रिटेन में बसे हुए 15-16 लाख प्रवासी भारतीयों की अहम भूमिका तो रही ही है। इनमें अफ्रीकी और कैरिबियाई  देशों से आकर बसे भारतीय मूल के लोग भी हैं। ये सब ब्रिटेन और भारत के बीच एक पुल का काम कर रहे हैं। प्रवासी भारतीय ब्रिटेन में हर क्षेत्र में मौजूद हैं। अब चाहे वो व्यापार, राजनीति, खेल का क्षेत्र हो या कोई और, इन्होंने सबम...
पहलवानों और WFI का विवाद (व्याख्या)

पहलवानों और WFI का विवाद (व्याख्या)

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
पहलवानों और WFI का विवाद (व्याख्या) इस पूरे विवाद में, 4 पक्ष हैं: बृज भूषण सिंह - भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष कुछ प्रमुख विरोध करने वाले पहलवान - बजरंग पुनिया, विनेश फोगट, साक्षी मलिक दीपेंद्र हुडा4 गिद्ध 2011 में, रेसलिंग फेड ऑफ इंडिया (WFI) के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुए - जम्मू-कश्मीर के पहलवान दुष्यंत शर्मा जीत गए और अध्यक्ष बने - हरियाणा कुश्ती फेड ने इस चुनाव को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी और केस जीता कोर्ट ने फिर से चुनाव कराने को कहा कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा WFI का अध्यक्ष बनना चाहते थे -BBS सिंह ने भी चुनाव लड़ने का फैसला किया, उस समय वह समाजवादी पार्टी में थे -उन्होंने मुलायम सिंह से मदद मांगी, मुलायम ने अहमद पटेल से बात की।उस समय कांग्रेस सपा के समर्थन से सत्ता में थी-अहमद पटेल ने दीपेंद्र हुदा को पीछे हटने के लिए कहा उन्होंने भारी मन से नामांकन ...
विश्व पशु चिकित्सा दिवस (29 अप्रैल, 2023)

विश्व पशु चिकित्सा दिवस (29 अप्रैल, 2023)

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
पोषण का रामबाण है भारत का पशुधन पशुपालन का अभ्यास अब एक विकल्प नहीं है, बल्कि समकालीन परिदृश्य में एक आवश्यकता है। इसके सफल, टिकाऊ और कुशल कार्यान्वयन से हमारे समाज के निचले तबके की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। पशुपालन को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, कृषि, शोध और पेटेंट से जोड़ने से भारत को दुनिया का पोषण शक्ति केंद्र बनाने की हर संभव क्षमता है। पशुपालन भारत के साथ-साथ विश्व के लिए अनिवार्य आशा, निश्चित इच्छा और अत्यावश्यक रामबाण है। -डॉ प्रियंका सौरभ पशुपालन का तात्पर्य पशुधन पालने और चयनात्मक प्रजनन से है। यह जानवरों का प्रबंधन और देखभाल है जिसमें लाभ के लिए जानवरों के अनुवांशिक गुणों और व्यवहार को और विकसित किया जाता है। भारत का पशुधन क्षेत्र दुनिया में सबसे बड़ा है। लगभग 20.5 मिलियन लोग अपनी आजीविका के लिए पशुधन पर निर्भर हैं। सभी ग्रामीण परिवारों के औसत 14% की तुलना में...
ये सुनवाई का अधिकार है क्या सुप्रीम कोर्ट के जजों को ?

ये सुनवाई का अधिकार है क्या सुप्रीम कोर्ट के जजों को ?

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
कॉलेजियम के खिलाफ और NJAC बहाल करने के लिए वकील Mathews J Nedumpara की याचिका से भाग क्यों रहे हैं चंद्रचूड़ जी - यदि सुनना ही है तो 11 जजों की बेंच सुने - सुप्रीम कोर्ट के वकील Mathews J Nedumpara ने कॉलेजियम की कानूनी वैधता को चुनौती देते हुए NJAC, 2014 को बहाल करने के लिए नवंबर, 2022 में याचिका लगाई थी जिसे CJI चंद्रचूड़ ने सुनवाई के लिए स्वीकार तो कर लिया परंतु सुनवाई की तारीख तय नहीं की जबकि Mathews 4 बार उनके सामने इसे Mention कर चुके हैं - दूसरी तरफ बार बार कॉलेजियम पर सुनवाई तो टालते हुए चंद्रचूड़ ऐसा बर्ताव कर रहे हैं जैसे कोई बच्चा स्कूल न जाने के लिए जिद पकड़ कर भागता फिर रहा हो - अब 24 अप्रैल, 2023 को चंद्रचूड़ ने कहा है कि सुनवाई के लिए तारीख दी जाएगी लेकिन कब दी जाएगी, यह भगवान् ही जानता है - CJI चंद्रचूड़ ने इस याचिका पर एक बार Mention किये जाने पर एक सवाल खड़ा किय...
प्रधानमंत्री की केरल यात्रा और भाजपा का मिशन दक्षिण

प्रधानमंत्री की केरल यात्रा और भाजपा का मिशन दक्षिण

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राज्य, समाचार
मृत्युंजय दीक्षितप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व में उत्तर, पश्चिम तथा,पूर्वोत्तर भारत में अपनी जड़ें जमाने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अब दक्षिण की ओर रुख किया है। भाजपा दक्षिण के राज्यों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है लेकिन उसे अभी तक कर्नाटक को छोड़कर किसी और दक्षिणी राज्य में उल्लेखनीय सफलता अर्जित नहीं हो पाई है । इस बार दक्षिण के लिए भाजपा के तेवर तीखे और विजय की अभिलाषा वाले हैं पार्टी इस बार मोदी जी के नेतृत्व में नई रणनीति के साथ दक्षिण भारतीयों का दिल जीतने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं दक्षिण के राज्यों के सघन दौरे कर रहे हैं।केरल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कोच्चि व तिरुअनंतपुरम शहरों में आयोजित रोड शो में जिस प्रकार आम जन उमड़ पड़ा, उन पर पुष्पवर्षा की तथा मोदी- मोदी के नारे लगाए उसे देखकर यह लग रहा ...