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28 अप्रैल 1740 सुप्रसिद्ध सेनानायक बाजीराव पेशवा का निधन खरगौन में

28 अप्रैल 1740 सुप्रसिद्ध सेनानायक बाजीराव पेशवा का निधन खरगौन में

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मराठा साम्राज्य को विस्तार देने वाले सुप्रसिद्ध सेनानायक --रमेश शर्मा पिछले डेढ़ हजार वर्षों में पूरे संसार का स्वरूप बदल गया है । 132 देश एक राह पर, 57 देश दूसरी राह पर और अन्य देश भी अपनी अलग-अलग राहों पर हैं। इन सभी देशों उनकी मौलिक संस्कृति के कोई चिन्ह शेष नहीं किंतु हजार आक्रमणों के बाद यदि भारत में उसका स्वरूप है जो उसके पीछे बाजीराव पेशवा जैसी महान विभूतियों का बलिदान है । जिससे आज भारत का स्वत्व प्रतिष्ठित हो रहा है । ऐसे महान यौद्धा का आज 28 अप्रैल को निर्वाण दिवस है । उनका पूरा जीवन युद्ध में बीता । वे अपने सैन्य अभियान के अंतर्गत मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र में थे । यहीं स्वास्थ्य बिगड़ा और उनका निधन हो गया । तब उनकी आयु मात्र उन्नीस वर्ष के थे, बीसवाँ वर्ष आरंभ किया ही था । कि उनके पिता पेशवा बालाजी राव का निधन हो गया और मराठा साम्राज्य के अधिपति छत्रपति शाहूजी महाराज न...
सिद्धार्टन की हस्र विदाई से केजरीवाल को झटका लगा

सिद्धार्टन की हस्र विदाई से केजरीवाल को झटका लगा

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*सिद्धार्टन के ब्राम्हण, सुंदरता, गांधी छाप वाद से भाजपा को मुक्ति मिली* *नड्डा के लिए भी सिद्धार्टन खतरे की घंटी व भस्मासुर साबित होंगे* ? ====================*आचार्य श्री विष्णुगुप्त*==================== भाजपा के दिल्ली प्रदेश के संगठन महामंत्री सिद्धार्टन की हस्र विदाई से अरविन्द केजरीवाल को जोरदार झटका लगा है, इस झटके से केजरीवाल को अब बाहर निकलना मुश्किल होगा, उसे एक साथ कई परेशानियों का सामना करना पडेगा, जैसे भाजपा का उग्र विरोध, उग्र बयानबाजी, उग्र जनससमयाओं की शिकायत के साथ ही साथ मजबूत भाजपा संगठन की चुनौती को स्वीकार करनी पडेगी। सबसे बड़ी बात यह है कि शराब घोटाले को लेकर सीबीआई के शिंकजे के बाद भी अरविन्द कजरीवाल को उतना नुकसान नहीं हो पा रहा था जितना नुकसान होना चाहिए था पर अब शराब घोटाले को लेकर भाजपा और भी अधिक शक्ति के साथ केजरीवाल को घेरेगी, उप राज्यपाल की कानून सम...
बीजेपी कार्डिनल और बिशप को लुभा रही है लेकिन ईसाइयों से दूर !

बीजेपी कार्डिनल और बिशप को लुभा रही है लेकिन ईसाइयों से दूर !

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बीजेपी कार्डिनल और बिशप को लुभा रही है लेकिन ईसाइयों से दूर ! उत्तर भारत, खासकर हिंदी पट्टी में ईसाइयों और भारतीय जनता पार्टी या हिंदू संगठनों के बीच कोई विशेष सौहार्द नहीं है। हिंदी पट्टी के क्षेत्रों में ईसाई धर्म प्रचारकों और हिंदू संगठनों के बीच दूरी लगातार बढ़ रही है, क्योंकि हिंदू अब इन क्षेत्रों में धर्मांतरण को बर्दाश्त करने के लिए तैयार नहीं हैं। खास बात यह है कि हिंदी भाषी क्षेत्र दक्षिण भारतीय मिशनरियों से भरे पड़े हैं, इनमें कैथोलिक चर्च का दबदबा है। और यह पादरी / नन दक्षिण भारतीय खासकर केरल के बिशपाें की संघ - भाजपा से बढ़ती नजदीकियों का अंदर ही अंदर विरोध कर रहे है। ईस्टर पर, केरल में भाजपा नेताओं ने बिशप हाउस और कुछ चुनिंदा ईसाईयों के घरों का दौरा किया, जहां उन्होंने यीशु मसीह और प्रधानमंत्री मोदी की एक छोटी तस्वीर वाले कार्ड वितरित किए। उसी दिन, प्रधानमंत्री मोदी ने ...
भारत की ज़रूरत “राष्ट्रीय अनाज बोर्ड”

भारत की ज़रूरत “राष्ट्रीय अनाज बोर्ड”

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भारत जनसंख्या के मामले में सबसे अव्वल है और इसी भारत में हर साल बारह से सोलह मिलियन टन अनाज पर्याप्त भंडारण सुविधा के अभाव में बर्बाद हो जाता है। इतने अनाज से देश के एक तिहाई गरीबों का पेट भरा जा सकता है। कृषि, उत्पादन, भंडारण और वितरण में सामंजस्य न बैठ पाने ऐसी तस्वीरें सामने का रही है जो विचलित करती है । जैसे - मंडियों व सरकारी गोदामों के बाहर पड़ा बारिश में भीगता अनाज। ग्लोबल वार्मिंग से मौसम के मिजाज में खासा बदलाव आया है। कब बारिश हो जाये कहना मुश्किल है। हालांकि, अब मौसम विभाग को उपग्रहों के संबल से मौसम की सटीक भविष्यवाणी करना संभव हुआ है। कुछ दिन पहले बता दिया जाता है कि फलां दिन मौसम खराब होगा या बारिश होगी। लेकिन वे तस्वीरें विचलित करती हैं जब मंडियों व सरकारी गोदामों के बाहर पड़ा गेहूं बारिश में भीगता दिखायी देता है। जाहिर है जिन विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों की जि...
इंग्लैंड में हिंदुओं का मजहब आधारित उत्पीड़न

इंग्लैंड में हिंदुओं का मजहब आधारित उत्पीड़न

BREAKING NEWS, TOP STORIES, धर्म, साहित्य संवाद
-बलबीर पुंज आखिर हिंदू-मुस्लिम संबंधों में तनाव क्यों है? तथाकथित सेकुलरवादियों की माने तो यह समस्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मई 2014 में सत्तारुढ़ होने के बाद से आरंभ हुई है और उससे पूर्व, इनके आपसी संबंधों में कटुता का कारण— राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या अन्य हिंदू संगठनों का व्यवहार है। परंतु ऐसा (कु)तर्क करने वाले इस प्रश्न का उत्तर कभी नहीं देते कि इन दोनों ही समुदायों के बीच पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में संबंध क्यों ठीक नहीं है? अभी हाल ही में यूनाइटेड किंगडम (यू.के.) स्थित प्रबुद्ध मंडल 'हैनरी जैक्सन सोसायटी' (एच.जे.एस.) की एक रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, जो रेखांकित करती है कि इंग्लैंड में भी हिंदू-मुस्लिमों के बीच रिश्ते काफी गर्त में है। इसका कारण यह बताया गया कि यू.के. स्थित हिंदू समाज, जिनकी संख्या वहां की मुस्लिम आबादी की लगभग एक चौथाई है— वे और उनके बच्चे मजहब के ना...
षड्यंत्र और राजनीति का हिस्सा धर्म परिवर्तन

षड्यंत्र और राजनीति का हिस्सा धर्म परिवर्तन

BREAKING NEWS, TOP STORIES, धर्म, राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट मानता है कि धर्म परिवर्तन एक गंभीर मुद्दा है और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। धर्म परिवर्तन राजनीतिक मुद्दा है या आस्था का मामला? लोगों को जबरन धर्मांतरण, प्रलोभन या लालच आदि के प्रावधानों और तरीकों के बारे में भी शिक्षित करने की आवश्यकता है। जबरन धर्मांतरण की सजा को पहले के 10 साल से घटाकर एक से पांच साल कर दिया गया। धर्म परिवर्तन से जुड़ा विवाह अवैध है। यदि धर्मांतरण में नाबालिग, महिला या अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का कोई सदस्य शामिल है, तो कारावास दो से सात साल है। -डॉ प्रियंका सौरभ आस्था परिवर्तन हृदय का विषय है। आप राजनीतिक भाषा शैली और ऐसे प्रतीकों को अपनाकर किसी के अंतर्मन नहीं बदल सकते। गांधी जी इसी कारण धर्म परिवर्तन के विरुद्ध थे। उनका मानना था कि समाज सुधार के काम में धर्म परिवर्तन की भूमिका नहीं है। जाहिर है, धर्म परिवर्तन के पीछे दिए गए तर्क...
पत्रकारिता विश्वविद्यालय में होगा स्वास्थ्य संसद 2023 का आयोजन

पत्रकारिता विश्वविद्यालय में होगा स्वास्थ्य संसद 2023 का आयोजन

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
28,29 एवं 30 अप्रैल को बिशनखेड़ी के नवीन परिसर में होगा तीन दिवसीय कार्यक्रम भोपाल : माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के बिशनखेड़ी स्थित नए परिसर में 28,29 एवं 30 अप्रैल को स्वास्थ्य संसद 2023 का आयोजन होने जा रहा है । आयोजन के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन विश्वविद्यालय परिसर में किया गया । स्वस्थ भारत न्यास के अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक आशुतोष कुमार सिंह ने बताया कि स्वस्थ भारत न्यास के आठवें स्थापना दिवस के अवसर पर यह आयोजन होने जा रहा है, जिसका नाम स्वास्थ्य संसद 2023 है । उन्होंने स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता की बात करते हुए कहा कि इसका विषय अमृतकाल में भारत का स्वास्थ्य एवं मीडिया की भूमिका होगा । विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अविनाश वाजपेयी ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि यह बड़ा आयोजन होगा जिसमें स्वास्थ्य एवं अपने-अपने क्षेत्रों के जा...
हिन्दू कौन

हिन्दू कौन

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डॉ शशांक शर्मा(शारदा विश्विद्यालय, ग्रेटर नोएडा) विश्व के सबसे प्राचीन धर्म सनातन धर्म के मानने वालों हिन्दू कहा जाता है । किंतु इस शब्द "हिंदू" नाम की उत्पत्ति, इतिहास और प्रयोग के बारे में बहुत अधिक स्पष्टता नहीं है । हिंदू होना क्या है? क्या सिर्फ देवी देवताओं की पूजा करने वाले, होली दीवाली मनाने वाले, व्रत रखने वाले ही हिंदू हैं या फिर इसका अर्थ कुछ और भी है । बहुत सारे लोगों का मानना है कि हिंदुत्व कोई पंथ नहीं है , यह एक जीवन शैली है जो संस्कृतियों के पार जा सकती है । भारत के सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2005 में अपने एक वक्तव्य में हिंदुत्व को कोई पंथ नहीं माना है । एक दूसरा वर्ग भी है जो मानता है कि जब यूनानी भारत आये तो उन्होंने सिंधु नदी को हिन्दू कहा क्योंकि वे "स" को "ह" से उच्चारण करते थे । वैदिक व्याकरण की दृष्टि से सिंधु से हिंदू होना अनुकूल प्रतीत होता है क्योंकि वैदिक व्याकरण...
<strong>वर्तमान जीवन शैली पृथ्वी को अस्थिर कर रही हैं</strong>

वर्तमान जीवन शैली पृथ्वी को अस्थिर कर रही हैं

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
विश्व पृथ्वी दिवस, 22 अप्रैल को हर साल मनाया जाता है। भारत समेत लगभग 195 से ज्यादा देश पृथ्वी दिवस को मनाते हैं। इस साल 2023 में विश्व पृथ्वी दिवस (Earth Day) का 53वां आयोजन होगा। 2023 में पृथ्वी दिवस की थीम “ हमारे ग्रह में निवेश करें ” रखी गई है। प्रो. सुनील गोयल हम अपने जीवन के दौरान सैकड़ों हजारों निर्णय लेते हैं। हम जो चुनाव करते हैं और हम जो जीवन शैली जीते हैं उसका हमारे ग्रह पर गहरा प्रभाव पड़ता है। वास्तव में, हमारी जीवन शैली वैश्विक उत्सर्जन के अनुमानित दो तिहाई के लिए जिम्मेदार है। सबसे बड़ी जिम्मेदारी सबसे धनी लोगों की है: वैश्विक आबादी के सबसे अमीर एक प्रतिशत का संयुक्त उत्सर्जन सबसे गरीब 50 प्रतिशत के संयुक्त उत्सर्जन से बड़ा है। सही नीतियों, बुनियादी ढाँचे और प्रोत्साहनों को लागू करके जीवन शैली में आवश्यक परिवर्तनों का समर्थन करने में सरकारों और व्यवसायों की महत्वप...
<strong>तारिक फतेह क्यों चुभते थे कठमुल्लों को</strong>

तारिक फतेह क्यों चुभते थे कठमुल्लों को

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
आर.के. सिन्हा  तारिक फतेह को उनके चाहने वाले एक बेखौफ लेखक के रूप में याद रखेंगे। वे सच का साथ देते रहे। वे भारत के परम मित्र थे। उन्हें इस बात का गर्व रहा कि उनके पूर्वज हिंदू राजपूत थे। वे बार-बार कहते- लिखते थे कि भारत,पाकिस्तान और बांग्लादेश के तमाम मुसलमानों के पुऱखे हिंदू ही थे और उन्हें जबरदस्ती मुसलमान बनाया गया था । उनकी इस तरह की साफगोई कठमुल्लों को नागवार गुजरती थी। तारिक फ़तेह हिंदी पट्टी के मुसलमानों के दिल में चुभते हैं। उनकी तारीफ़ यह थी कि वह डंके की चोट पर अपने पूर्वजों को हिंदू बताते रहे। बहुत कम मुसलमान यह हिम्मत दिखा पाते हैं। वह मुस्लिम सांप्रदायिकता पर लगातार चोट करते रहे। तारिक फतेह पहली बार 2013 में भारत दौरे पर आए थे तब उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, 'पाकिस्तान को तो अब भूल जाइए। इसको एक न एक दिन कई टुकड़ों में टूटना ही है। वो दिन भी दूर नहीं जब बलूचि...