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यदि स्पष्ट बहुमत न होता तो योगी सरकार अब तक गिर जाती।

यदि स्पष्ट बहुमत न होता तो योगी सरकार अब तक गिर जाती।

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राज्य, विश्लेषण
उत्तरप्रदेश में जो हो रहा है। वह सामान्य घटनाएं नहीं है।हर जिले में माफ़िया का साम्राज्य स्थापित था। यदि इसका सम्पूर्ण वर्णन किया जाय तो उस पूरी कहानी को पढ़ने वाला यह समझेगा कि यह उत्तरप्रदेश नहीं है। सोमालिया, युगांडा कि बात हो रही है।*इससे समझिये कि 12 हजार इनकाउंटर और तीन सौ बदमाश मारने के बाद भी अभी स्थिति पटरी पर नहीं आई है।* कोई पाँच हजार करोड़ कि संपत्ति जप्त हुई है।यह तो अब स्पष्ट हो चुका है कि उस समय कि नौकरशाही का एक वर्ग इन आपराधिक कृत्यों में शामिल था।*पूर्व DGP बृजलाल बताते है कि जिस समय पहली मुख्तार अंसारी पकड़ा गया तो वह जेल में दरबार लगाता था। जिले के DM उसके साथ बैडमिंटन खेलते थे।**अतीक अहमद को पकड़ने वाले पूर्व DSP देवेन्द्रराय जब उसके घर गये तो CRP के IG उसके साथ बैठे थे।**2017 तक कम से कम उत्तरप्रदेश के आधे जिले में एक ही सत्ता थी, माफ़िया राज करते थे।*इसमें धन कि सबस...
बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी!

बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी!

BREAKING NEWS, TOP STORIES, घोटाला, विश्लेषण, सामाजिक
रजनीश कपूरबात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी। लोग बेवजह उदासी का सबब पूछेंगे। कफ़ील आज़र अमरोहवी ने जब अपनीये नज़्म लिखी होगी तब उन्हें शायद इस बात का ध्यान नहीं होगा कि उनकी नज़्म के शेर कई परिस्थितियों मेंइस्तेमाल किए जाएँगे। जब भी कभी किसी रहस्यमयी घटना का आंशिक पर्दाफ़ाश होता है तो अक्सर इसी शेर कोयाद किया जाता है। आपने संसद में भी माननीय सांसदों से इस शेर को कई बार सुना होगा। आज इस शेर को एकबार फिर से याद किया जा रहा है। कारण है जम्मू कश्मीर की घाटी में घटी एक घटना का, जिसने पूरे देश कोअचंभे में डाल रखा है।पिछले दिनों एक ऐसा मामला सामने आया जिसमें एक शख़्स ने ख़ुद को प्रधान मंत्री कार्यालय का एक बड़ाअधिकारी बता कर जम्मू कश्मीर में ‘जेड प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा ले ली और उन्हीं के संरक्षण में सीमावर्ती राज्य केकई संवेदनशील इलाक़ों में भी चला गया। डॉ किरण पटेल नाम के इस अधिकारी ने सरकारी चिन्ह...
बताइये क्या यह ७५ साल का “भारत” है?*

बताइये क्या यह ७५ साल का “भारत” है?*

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
हमारे देश में बड़ी मुश्किल है, सत्ता से दूर या नज़दीक का नाता रखने वालों के लिए भारत जो कुछ है, वह नरेंद्र मोदी में सिमट गया है। प्रतिपक्ष राहुलगांधी, शरद पंवार,ममता बनर्जी और जाने किस किस की प्रतिच्छाया में भारत को पहचान रहे हैं। और यही वह भारत है, जिसे सत्ता लूटती है, जनता से छीनती है–और उसी को असली भारत बताकर का प्रचार करती है। भारत की राजनीति में इन दिनों का प्रिय विषय है, राहुल गांधी द्वारा विदेश में जाकर देश के लोकतंत्र पर वक्तव्य, सभी आजकल इसी में व्यस्त हैं। इस सबके बीच स्वीडन की संस्था, वी-डेम (वेरायटीज ऑफ़ डेमोक्रेसी) ने डेमोक्रेसी रिपोर्ट 2023 प्रकाशित की है, जिसमें कुल 179 देशों के लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में भारत 97वें स्थान पर चुनावी प्रजातंत्र इंडेक्स में 108वें स्थान पर है, यह 75 वर्ष की उपलब्धि है?। पिछले वर्ष के इंडेक्स में भारत का स्थान 100वां था। तंज़ानिया, बोलीविय...
न्यूट्रिएंट्स के भंडार हैं-‘मिलेट्स’ (श्रीअन्न)

न्यूट्रिएंट्स के भंडार हैं-‘मिलेट्स’ (श्रीअन्न)

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
भारत के प्रस्ताव के आधार पर, यूएनजीए द्वारा वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष (आईवाईएम) के रूप में घोषित किया गया है। जानकारी देना चाहूंगा कि 5 मार्च 2021 को भारत के प्रस्‍ताव पर 72 देशों की स्‍वीकृति के बाद संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा ने 2023 को अंतरराष्‍ट्रीय मोटा अनाज वर्ष के रूप में मनाए जाने की घोषणा की थी।हाल ही में 18 मार्च शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर के सुब्रमण्यम हॉल में मोटे अनाज यानि कि 'श्रीअन्न' पर दो दिन तक चले वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। 19 मार्च को यह सम्मेलन समाप्त हो गया। भारत के मोटा अनाज मिशन से ढाई करोड़ लघु एवं सीमांत किसानों को लाभ होगा। पीएम मोदी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे देश में मिलेट्स को अब 'श्री अन्न' की पहचान दी गई है, यह सिर्फ खेती और खाने ...
अमर शहीद हेमू कालाणी के 100वें जन्म दिवस

अमर शहीद हेमू कालाणी के 100वें जन्म दिवस

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23 मार्च 2023 को अमर शहीद हेमू कालाणी के 100वें जन्म दिवस पर विशेष आलेख अमर शहीद हेमू कालाणी सिंध प्रांत के युवाओं में देशप्रेम का भाव जगाते रहे अखंड भारत का सिंध प्रांत वैसे तो सूफियाना अंदाज एवं आध्यात्म के लिए जाना जाता है, परंतु, सिंध प्रांत में व्यापार भी बहुत उन्नत स्तर पर होता रहा है एवं प्राचीन भारत में सिंध प्रांत के निवासी सामान्यतः सुखी, समृद्ध एवं सम्पन्न रहे हैं। साथ ही, भारत माता को अंग्रेजों की गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने में सिंधवासियों का भरपूर योगदान भी रहा है। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले सैकड़ों सिंधवासियों के नाम बहुत आदर के साथ लिए जाते हैं परंतु मुख्यतः इस सूची में शामिल नाम हैं - शहीद हरकृष्ण, शहीद संत कंवरराम, वीर हासाराम पमनानी, श्रीकिशन माटा, नेभनदास फतनानी, तेजूमल बालानी, सच्चा नन्द फेरुमल थावानी, आदि। सिंध के कई स्वतंत्रता सेनानियों न...
शहीद दिवस 23 मार्च को- भूल न जाना भगत सिंह के साथियों को

शहीद दिवस 23 मार्च को- भूल न जाना भगत सिंह के साथियों को

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
आर.के. सिन्हा कौन सा हिन्दुस्तानी होगा जिसके मन में शहीद भगत सिंह को लेकर गहरी श्रद्दा का भाव नहीं होगा। होगा भी क्यों नहीं। आखिर वे क्रांतिकारी, चिंतक और आदर्शों से लबरेज मनुष्य थे। उनसे अब भी भारत के करोड़ों नौजवान प्रेरणा पाते हैं। पर यह भी जरूरी है कि देश भगत सिंह के करीबी साथियों जैसे चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु, सुखदेव, बटुकेशवर दत्त, दुर्गा भाभी वगैरह के बलिदान को भी याद रखा जाए। राजगुरु का संबंध पुणे, महाराष्ट्र से था। उन्हें भगत सिंह तथा सुखदेव के साथ 23 मार्च, 1931 को लाहौर में फांसी पर लटका दिया गया था। वे भगत सिंह और सुखदेव के घनिष्ठ मित्र थे। इस मित्रता को राजगुरु ने मृत्यु पर्यंत निभाया। देश की आजादी के लिए दिये गये राजगुरु के बलिदान ने इनका नाम भारत इतिहास में  अंकित करवा दिया। अगर बात वीर स्वतंत्रता सेनानी सुखदेव की हो तो वो भी महा...
सांस्कृतिक और संस्कारिक एकता के मूल आधार है हमारे सामाजिक त्यौहार।

सांस्कृतिक और संस्कारिक एकता के मूल आधार है हमारे सामाजिक त्यौहार।

TOP STORIES, राष्ट्रीय, संस्कृति और अध्यात्म
हिंदुस्तान त्योहारों का देश है। त्योहार हमको सामाजिक और संस्कारिक रूप से जोड़ने का काम करते हैं। हमारी सांस्कृतिक और संस्कारिक एकता ही भारत की अखंडता का मूल आधार है। ‘‘व्रत -त्यौहारों के दिन हम देवताओं का स्मरण करते हैं, व्रत, दान तथा कथा श्रवण करते हैं, जिससे व्यक्तिगत उन्नति के साथ सामाजिक समरसता का संदेश भी समाज में पहुंचता है। इसमें ही भारतीय संस्कृति के बीज छिपे हैं। ’’ हमारे सामाजिक जीवन में कुछ ऐसे दिन आते हैं जिनसे मात्र एक व्यक्ति, या परिवार ही नहीं वरन पूरा समाज आनंदित और उल्लासित होता है। भारत को यदि पर्व-त्योहारों का देश कहा जाए तो उचित होगा। यहां भोजपुरी भाषा में एक कहावत है- ‘सात वार नौ त्यौहार’। -डॉo सत्यवान सौरभ कृषि प्रधान होने के कारण प्रत्येक ऋतु - परिवर्तन हंसी - खुशी मनोरंजन के साथ अपना - अपना उपयोग रखता है। इन्हीं अवसरों पर त्योहार का समावेश किया गया है , जो उच...
प्रभावशाली रही ऊर्जा मंत्री की “कैरट एंड स्टिक” पॉलिसी?

प्रभावशाली रही ऊर्जा मंत्री की “कैरट एंड स्टिक” पॉलिसी?

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण
 डॉ. अजय कुमार मिश्रा किसी भी राज्य के विकास में कई महत्वपूर्ण पहलुओं के आलावा ऊर्जा का विशेष स्थान होता है | यही एक इकाई है जिस पर औद्योगिक और निवेश करने वालो की अपेक्षाओं पर पूर्ति होना जरुरी है | उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए निवेशकों की बैठक में ऊर्जा क्षेत्र को सर्वाधिक प्रस्ताव प्राप्त हुए है | यानि की ऊर्जा एक महत्वपूर्ण इकाई के रूप में विकास के लिए अति आवश्यक भी है | परन्तु विगत के कुछ दिनों से ऊर्जा विभाग को लेकर के जिस तरह की छवि बन रही थी वह किसी से छिपी नहीं है | ऊर्जा विभाग के कई संगठनों ने 72 घंटो की स्ट्राइक का आव्हान किया था | जिससे उत्तर प्रदेश के कई जिलों में ऊर्जा सप्लाई को लेकर बड़ी समस्या उत्पन्न हो गयी थी | मीडिया की सुर्खियाँ यह विभाग लगातार बना रहा | कई दौर की बात-चीत के बाद समय से पहले संगठनों ने स्ट्राइक समाप्त करने की घोषणा किया, तब जाकर लोगों को राहत मिली...
भारत की प्राचीन जल संस्कृति को जीवंत करें-ललित गर्ग

भारत की प्राचीन जल संस्कृति को जीवंत करें-ललित गर्ग

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, सामाजिक
विश्व जल दिवस, 22 मार्च 2023 पर विशेष जल प्रदूषण एवं पीने के स्वच्छ जल की निरन्तर घटती मात्रा को लेकर बड़े खतरे खड़े हैं। धरती पर जीवन के लिये जल सबसे जरूरी वस्तु है, जल है तो जीवन है। जल ही किसी भी प्रकार के जीवन और उसके अस्तित्व को संभव बनाता है। जीव मंडल में पारिस्थितिकी संतुलन को यह बनाये रखता है। पीने, नहाने, ऊर्जा उत्पादन, फसलों की सिंचाई, सीवेज के निपटान, उत्पादन प्रक्रिया आदि बहुत उद्देश्यों को पूरा करने के लिये स्वच्छ जल बहुत जरूरी है। जिन पाँच तत्वों को जीवन का आधार माना गया है, उनमें से एक तत्व जल है। जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। मानव एवं जीव-जन्तुओं के अलावा जल कृषि के सभी रूपों और अधिकांश औद्योगिक उत्पादन प्रक्रियाओं के लिये भी बेहद आवश्यक है। परंतु आज पूरी दुनिया जल-संकट के साए में खड़ी है। अनियोजित औद्योगीकरण, बढ़ता प्रदूषण, घटते रेगिस्तान एवं ग्लेशियर...
मदरसों का विरोध क्यों?

मदरसों का विरोध क्यों?

BREAKING NEWS, TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
-बलबीर पुंज गत दिनों वाम-उदारवादी और स्वघोषित सेकुलरवादी, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर भड़क उठे। इसका कारण उनका वह हालिया वक्तव्य है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि असम में लगभग 600 मदरसे बंद किए जा चुके है और राज्य सरकार अब सभी मदरसों को बंद करना चाहती है। यूं तो भारतीय संविधान द्वारा अल्पसंख्यकों को अपने अनुरूप शिक्षण संस्था चलाने का अधिकार प्राप्त है। फिर मुख्यमंत्री सरमा ने ऐसा बयान क्यों दिया? आखिर उनके विचारों का निहितार्थ क्या है? क्या विश्व में पहली बार मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है? वैश्विक समुदाय आज जिस मजहबी कट्टरता से ग्रस्त है— उसे प्रेरित करने वाली मानसिकता को पोषित करने में अधिकांश मदरसों की भी महती भूमिका है। जिस तालिबान की जकड़ में अफगानिस्तान है, जहां उसने अन्य मध्यकालीन प्रतिबंधों के साथ लड़कियों पर प्राथमिक विद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय तक कि...