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बेमौसम बारिश ने गणित बिगाड़ दिया

बेमौसम बारिश ने गणित बिगाड़ दिया

BREAKING NEWS, TOP STORIES, आर्थिक, समाचार
भारत में खेती बारिश के भरोसे ही फलती-फूलती है, और उससे जुड़ा चक्र बाज़ार और बाज़ार आम आदमी को प्रभावित करता है । मानसूनी बारिश का इंतजार किसान शिद्दत से करता है, लेकिन यदि यही बारिश बेमौसमी हो तो आफत का सबब बनती है।अगले दिन कैसे बीतेंगे,चिंता का सबब है। पिछले कुछ दिनों से पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली बारिश ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें ला दी हैं। दरअसल, खेतों में गेहूं की फसल पक चुकी है। किसान अनाज खलिहानों से निकालकर मंडी ले जाने की तैयारी में है। इसी तरह सरसों की फसल भी पक चुकी है। पिछले दिनों से उत्तर भारत के कई राज्यों में हुई बेमौसमी बरसात से गेहूं-सरसों की फसल को काफी नुकसान हुआ। जहां सरसों में बीज तैयार हो चुका था, ओलावृष्टि से वो बिखरा है। दूसरी ओर जो सरसों मंडियों तक पहुंची थी, वह बारिश से भीग गयी। दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में ग्लोबल वार्मिंग से जो तापमान वृद्धि हुई है,...
हिंदू राष्ट्र विचारक- डॉ. हेडगेवार

हिंदू राष्ट्र विचारक- डॉ. हेडगेवार

BREAKING NEWS, TOP STORIES, राष्ट्रीय, समाचार
जन्मतिथि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा ( इस वर्ष 22 मार्च) पर विशेष-मृत्युंजय दीक्षितभारत के सबसे विशाल, समाजसेवी व राष्ट्रभक्त संगठन, “राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ” के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार का जन्म युगाब्द 4991 की चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नागपुर के एक गरीब वेदपाठी परिवार में हुआ था। डॉ. हेडगेवार जी के पिता का नाम श्री बलिराम पंत व माता का नाम रेवतीबाई था। हेडगेवार जी का बचपन बहुत ही गरीबी में बीता किन्तु गरीबी के उस वातावरण में भी व्यायाम, कुश्ती, लाठी चलाना आदि में उनकी रूचि रही। बचपन में विभिन्न भवनों पर फहराते हुए यूनियन जैक को देखकर वे सोचते थे कि हमारे भारत वर्ष का हिन्दुओं का झंडा तो भगवा ही है क्योंकि भगवान राम और कृष्ण, शिवाजी, महाराणा प्रताप सभी की जीवन लीलाएं इसी झंडे की छत्रछाया में संपन्न हुई हैं और यहीं से उनके ह्रदय में यूनियन जैक को उतार फेंकने की योजना तैयार होने लगी।केशव...
अगर बचानी ज़िंदगी, करें आज संकल्प।जल का जग में है नहीं, कोई और विकल्प।

अगर बचानी ज़िंदगी, करें आज संकल्प।जल का जग में है नहीं, कोई और विकल्प।

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(22 मार्च जल दिवस विशेष ) हम यह भूल जाते हैं कि पानी के बिना वे सब बेकार हैं। हम अपनी जरूरत से ज्यादा पानी का इस्तेमाल करते रहते हैं। कम से कम हममें से हर व्यक्ति अपने घरों और कार्यस्थलों में पानी का उचित इस्तेमाल तो कर ही सकता है। कई बार ऐसा देखा जाता है कि सड़क किनारे लगे हुए नलों से पानी बह रहा है और बेकार जा रहा है, लेकिन हम वहां से गुजर जाते हैं और नल को बंद करने की चिंता नहीं करते। हमें इन विषयों पर सोचना चाहिए और अपने रोज के जीवन में जहां तक संभव हो पानी बचाने की कोशिश करनी चाहिए। इस समय पृथ्वी ग्रह पर जीवन को बचाये रखने के लिए सबसे बड़ी जरूरत पानी को बचाने की है; यह सुनिश्चित करने के लिए जल संसाधनों का प्रबंधन कैसे किया जाएगा कि देश में सभी को समान मात्रा में पानी मिले। --- डॉ सत्यवान 'सौरभ' जैसे-जैसे जनसंख्या और अर्थव्यवस्था बढ़ती है, वैसे-वैसे पानी की मांग भी बढ़ती है। ...
हिन्दू नववर्ष ; सृष्टि चक्र का शाश्वत सनातन प्रवाह

हिन्दू नववर्ष ; सृष्टि चक्र का शाश्वत सनातन प्रवाह

TOP STORIES, राष्ट्रीय, संस्कृति और अध्यात्म
कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटलचैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि भारतीय संस्कृति में अपना विशिष्ट महत्व रखती है। यह तिथि नवसम्वत्सर - हिन्दू नववर्ष के उत्साह पर्व की तिथि है। यह तिथि भारतीय मेधा के शाश्वत वैज्ञानिकीय चिंतन - मंथन के साथ - साथ लोकपर्व के रङ्ग में जीवन के सर्वोच्च आदर्शों से एकात्मकता स्थापित करती है। वैज्ञानिकता पर आधारित प्राचीन श्रेष्ठ कालगणना पध्दति के अनुरूप ऋतु चक्र परिवर्तन एवं सूर्य - चन्द्र की गति के अनुरूप नव सम्वत्सर का प्रारम्भ होता है। भारतीय संस्कृति यानि हिन्दू संस्कृति के माहों ( मासों ) का नामकरण नक्षत्रों के नाम पर हुआ। और इसके लिए हमारे पूर्वजों ने व्यवस्था दी कि - जिस मास में जिस नक्षत्र में चन्द्रमा पूर्ण होगा , वह मास उसी नक्षत्र के नाम से जाना जाएगा। और इस पध्दति के अनुसार — चैत्र - चित्रा, वैशाख - विशाखा, ज्येष्ठ - ज्येष्ठ, अषाढ़ - अषाढ़ा, श्रावण - श्रवण, भ...
गुड़ी पड़वा : नवसंवत्सर का आरंभ

गुड़ी पड़वा : नवसंवत्सर का आरंभ

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वैज्ञानिक अनुसंधान के सभी पहलू हैं काल गणना आरंभ के इस नववर्ष में रमेश शर्मा आज सृष्टि के विकास आरंभ का दिन है, और संसार के लिये कालगणना के लिये नवसंवत्सर । अर्थात नये संवत् वर्ष का प्रथम दिन है । आज से विक्रम संवत् 2080 और युगाब्द 5125 आरंभ हो रहा है । इस संवत्सर का आरंभिक नाम नल और 24 अप्रैल से पिंगल होगा । वर्ष राजा के बुध और मंत्री का दायित्व शुक्र के पास रहेगा।युगाब्द महाभारत युद्ध के बाद सम्राट युधिष्ठिर के राज्याभिषेक की और विक्रम संवत् शकों की मुक्ति के बाद महाराज विक्रमादित्य के राज्याभिषेक की तिथि है । भारत में कोई तिथि, त्यौहार, परंपरा, उत्सव और उसका शब्द संबोधन यूँ ही नहीं होता । इसके पीछे सैकड़ो वर्षों का शोध, अनुसंधान का निष्कर्ष होता है । जिसमें प्रकृति से तादात्म्य निहित होता है । यह विशेषता इस नव संवत्सर तिथि की भी है । नवसंवत् आरंभ होने का यह दिन गुड़ी पड़वा दूसरा ...
भगवान झूलेलाल के अवतरण दिवस पर विशेष लेख

भगवान झूलेलाल के अवतरण दिवस पर विशेष लेख

EXCLUSIVE NEWS, TOP STORIES, संस्कृति और अध्यात्म
नव संवत्सर के दिन भगवान झूलेलाल का अवतरण हिंदू धर्म के रक्षार्थ हुआ था भारतीय हिंदू सनातन संस्कृति के अनुसार वसंत ऋतु का पहला हिस्सा पतझड़ का हुआ करता है अर्थात पेड़ों, झाड़ियों, बेलों और पौधों के पत्ते सूखने लगते हैं, पीले होते हैं और फिर मुरझाकर झड़ जाते हैं। परंतु कुछ समय पश्चात उन्हीं सूखी, वीरान शाखाओं पर नाजुक कोमल कोंपलें आनी शुरू हो जातीं, यहीं से वसंत ऋतु अपने उत्सव के शबाब पर पहुंचती है। इस प्रकार पतझड़ और वसंत साथ-साथ आते हैं मानो यह संदेश देते हुए कि अवसान-आगमन, मिलना-बिछ़ुडना, पुराने का खत्म होना-नए का आना, एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इसी वसंत ऋतु में फागुन और चैत्र माह के महीने भी आते हैं। चैत्र माह के मध्य में प्रकृति अपने श्रृंगार एवं सृजन की प्रक्रिया में लीन रहती है और पेड़ों पर नए नए पत्ते आने के साथ ही सफेद, लाल, गुलाबी, पीले, नारंगी, नीले रंग के फूल भी खिलने लगते ...
डॉक्टर हेडगेवार जी का हिंदुत्व

डॉक्टर हेडगेवार जी का हिंदुत्व

BREAKING NEWS, TOP STORIES, संस्कृति और अध्यात्म
प्रशांत पोळ किसी व्यक्ति के कार्य का मूल्यांकन करना है, या उस व्यक्ति ने किये हुए कार्य का यश - अपयश देखना हैं, तो उस व्यक्ति के पश्चात, उसके कार्य की स्थिती क्या है, यह देखना उचित रहता हैं. उदाहरण हैं - छत्रपती शिवाजी महाराज. मात्र पचास वर्ष का जीवन. लगभग तीस वर्ष उन्होंने राज- काज किया और हिंदवी साम्राज्य खडा किया. किंतु उनके मृत्यु के पश्चात उस हिंदवी स्वराज्य की परिस्थिती क्या थी? हिंदुस्थान का शहंशाह औरंगजेब तीन लाख की चतुरंग सेना लेकर महाराष्ट्र मे आया था, इसी हिंदवी स्वराज्य को मसलने के लिए, सदा के लिए समाप्त करने के लिए. परिणाम? सारी जोड़-तोड़ करने के बाद, वह संभाजी महाराज से मात्र २ – ४ दुर्ग (किले) ही जीत सका. आखिरकार छल कपट कर के, ११ मार्च १६८९ को औरंगजेब ने संभाजी महाराज को तड़पा - तड़पा के, अत्यंत क्रूरता के साथ समाप्त किया. उसे लगा, अब तो हिंदुओं का राज्य, यूं मसल ...
सशक्त प्राचीन लोककला है कठपुलियों का संसार

सशक्त प्राचीन लोककला है कठपुलियों का संसार

TOP STORIES, विश्लेषण, सामाजिक
विश्व कठपुतली दिवस- 21 मार्च 2023 पर विशेषसशक्त प्राचीन लोककला है कठपुलियों का संसार- ललित गर्ग -कठपुतली विश्व के प्राचीनतम रंगमंच पर खेला जाने वाले मनोरंजक, शिक्षाप्रद एवं कला-संस्कृतिमूलक कार्यक्रम है। कठपुतलियों को विभिन्न प्रकार की गुड्डे गुड़ियों, जोकर आदि पात्रों के रूप में बनाया जाता है और अनेक प्राचीन कथाओं को इसमें मंचित किया जाता है। लकड़ी अर्थात काष्ठ से इन पात्रों को निर्मित किये जाने के कारण अर्थात् काष्ठ से बनी पुतली का नाम कठपुतली पड़ा। प्रत्येक वर्ष 21 मार्च को विश्व कठपुतली दिवस भी मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य इस प्राचीन लोक कला को जन-जन तक पहुंचना तथा आने वाली पीढ़ी को इससे अवगत कराना है। पुतली कला कई कलाओं का मिश्रण है, जिसमें-लेखन, नाट्य कला, चित्रकला, वेशभूषा, मूर्तिकला, काष्ठकला, वस्त्र-निर्माण कला, रूप-सज्जा, संगीत, नृत्य आदि। भारत में यह कला प्राचीन समय से प्...
फेक न्यूज और दुष्प्रचार भारतीय समाज में नई चुनौतियाँ

फेक न्यूज और दुष्प्रचार भारतीय समाज में नई चुनौतियाँ

BREAKING NEWS, TOP STORIES, घोटाला, विश्लेषण, सामाजिक
हर किसी की यह जिम्मेदारी है कि वह फेक न्यूज और गलत सूचना के संकट से लड़े। इसमें फेक न्यूज के लिए वित्तीय प्रोत्साहन को कम करने से लेकर आम जनता के बीच डिजिटल साक्षरता में सुधार तक सभी आयाम शामिल हैं। आज देश में कई एजेंसियों ने फेक न्यूज़ का सच लोगों तक लाने के लिए काम कर रही है लेकिन यह काफी नहीं है क्योंकि इनकी पहुँच अभी व्यापक नहीं है जिसके कारण फेक न्यूज़ पर लगाम लग सके या लोगों तक तुरंत सच पहुंचे. वहीँ बढ़ते फेक न्यूज़ के कारण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स भी इस पर काम कर रहे हैं क्योंकि कई बार इनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल उठे हैं जिस कारण व्हाट्सएप्प और फेसबुक ने फेक न्यूज़ को रोकने के लिए अपने फीचर में कई बदलाव भी किए हैं लेकिन इस पर अभी और काम करने की जरुरत है ताकि एक स्वच्छ वातावरण का निर्माण हो सके। -प्रियंका सौरभ फेक न्यूज को झूठी या भ्रामक जानकारी के रूप में प्रस्तुत किया जा...
भारतीय नृत्य परंपरा को सम्मान : हृदयरायण दीक्षित

भारतीय नृत्य परंपरा को सम्मान : हृदयरायण दीक्षित

TOP STORIES, जीवन शैली / फिल्में / टीवी, संस्कृति और अध्यात्म
गीत और संगीत मनुष्य मन को रसपूर्ण बनाते हैं। लेकिन दोनों में एक आधारभूत अंतर भी है। गीत का अर्थ होता है। अर्थ बुद्धि के माध्यम से मूल शब्दों के भाव को प्रकट करता है। गीत भी ध्वनि है। लेकिन उसका अर्थ बौद्धिक कार्रवाई से निकलता है। संगीत में ध्वनियों का प्रयोग होता है। प्राचीन भारतीय संगीत परंपरा में ध्वनि के अल्पतम अंश को भी सरस ढंग से प्रस्तुत किया जाता रहा है। षड्ज, ऋषभ, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत और निषाद शास्त्रीय संगीत के आधारभूत सुर हैं। संक्षेप में इन्हें सा, रे ग, म, प, ध और नि कहते हैं। शास्त्रीय संगीत परंपरा में राग हैं। प्रत्येक राग कोे सम्बंधित रागिनियाँ हैं। प्रत्येक राग में गाने का सुनिश्चित समय भी है। हिन्दू पूर्वजों ने नृत्य को भी शास्त्रीयता के अनुशासन में बाँधा है। नृत्य में गीत संगीत के साथ शरीर के भिन्न भिन्न अंगों का भी प्रयोग होता है। जान पड़ता है कि नृत्य का विकास नाट...