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राम,रामजन्मभूमि व राम का मुकदमा:एक आकलन

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*बाबा कबीर* कहते हैं कि- *सात समद की मसि  करौ, लेखनि सब  बनराइ* *धरती सब कागद करौ,हरि गुन लिखा न जाई* *अर्थात-* सात समुद्र के जल को स्याही बना दो,सभी जंगलों को लेखनी बना दो और पूरी धरती को कागज फिर भी ईश्वर के बारे में लिखने को ये अपर्याप्त हैं। मेरी कोशिश होगी भाषाई अभद्रता से बचते हुए सहज साहित्य में बात लिखना। चूंकि, *"साहित्य अलंकृत होता है,सौंदर्य से भरपूर लेकिन भाषा रूढ़ होती है,अक्खड़ और कभी कभी उजड्ड भी।" अगर लेख में भाषा कहीं साहित्य से विद्रोह कर दे या बागी हो जाये तो क्षमा कीजियेगा।* मान्यवर, मैं तो एक तुच्छ प्राणी हूँ और मेरी औकात नहीं है कि मैं अपने आराध्य प्रभु श्रीराम के विषय में कुछ लिख सकूँ। बस एक प्रयास भर है आप सब तक प्रभु श्रीराम व इस विवाद को सहज शब्दों में पहुंचाने का। मैंने उत्तर प्रदेश में उस त्रासदी को स्वयं झेला भी है और देखा भी है कि,कैसे मुल्ला मुलायम ने ...

अरे समीर जी, देखिए अब तो एक मन्त्री की भी मौत कोरोना से हो गई

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ऐसा वाक्य सुनने के बाद मन्त्री की मौत पर खेद व्यक्त करूँ या कहने वाले की बुद्धि पर तरस खाऊँ? बन्धु! कोरोना बस कोरोना है, उसे किसी मन्त्री या सन्तरी से दोस्ती या दुश्मनी नहीं निभानी है। मौत किसी की भी हो, दुःखदायी है, लेकिन जब कुछ लोग कोरोना को इसलिए महामारी बताने लगें कि एक मन्त्री की भी मौत हो गई...या अमिताभ बच्चन, अमित शाह और कई बड़े-बड़े वीआईपियों को कोरोना हो गया, तो ऐसे लोगों की बुद्धि की हालत भी दुःखदायी है। लोग मीडिया की बढ़ाई-चढ़ाई और हवाहवाई ख़बरों को आँख मूँदकर सच मानने लगते हैं तो इसका मतलब यही है कि हम पढ़े-लिखे होकर भी अनपढ़ों से बहुत आगे नहीं हैं। विज्ञान की तमाम किताबें पढ़ने के बाद भी अच्छे-अच्छों के विवेक पर लगा ताला खुलने का नाम नहीं ले रहा है, इसीलिए धर्म के नाम पर चलाए जा रहे अन्धविश्वास आज के दौर में अब विज्ञान का आधार लेकर नए रूपों में सामने आने लगे हैं। ये प्रगतिशील ...

SHRI RAMJANMABHOOMI AND THE FUTURE OF BHARAT

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Lucknow. August 3, 2020. The central working president of Vishva Hindu Parishad(VHP) advocate shri Alok Kumar today said that the foundation stone for the construction of a grand Temple at the birth place of Bhagwan Shri Ram was laid in 1989. However, the construction of the Temple was embroiled in the hurdles created by various governments, the manipulations by political forces and the long delays in the Courts. It is after about 31 years that the construction of the Temple shall now begin in the presence of the Hon’ble Prime Minister on 05th of August 2020. We hope that in about three years, the devotees may be able to worship Shri Ramlala in the sanctum sanctorum of the grand Temple. The whole country would rejoice in the worship of the national heros.             We believe that this ...
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आज लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी की शत संवत्सरी पुण्यतिथि पर सर्वप्रथम लोकमान्य जी को वंदन करते हुए आप सभी से निवेदन करना चाहता हूं की मध्य प्रदेश के लोकप्रिय अखबारों और अन्य प्रिंट मीडिया  द्वारा इतनी बड़ी घटना का जिक्र न करना और अपने अखबार में लोकमान्य जी के प्रति श्रद्धांजलि भी अर्पित न करना, इसका समस्त मराठी भाषियों द्वारा विरोध व्यक्त किया जाता है। समस्त मराठी भाषियों से निवेदन है कि अपना आक्रोश व्यक्त कर समस्त प्रिंट मीडिया का विरोध करें। इस निंदा प्रस्ताव का समर्थन करते हुए म.प्र. सरकार से आग्रह है कि यह भूल नही राष्ट्रीय चरित्र को विलुप्त करने की साजिश है इस विषय में प्रिंट मीडिया पर योग्य कार्यवाही की जावे आश्चर्य कि लो.तिलक जी अग्रणी क्रांतिकारक तो थे ही वे अपने समय के जेष्ठ श्रेष्ठ पत्रकार भी थे उनकी अाग उगलती लेखनी राष्ट्र भक्तो मे जागृती के  स्वर फूंकती थी अंग्रेजी शासक उनकी ...
समय आ गया है आर्थिक चिन्तन का

समय आ गया है आर्थिक चिन्तन का

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अब वो समय आ गया है, जब दिल्ली को वैश्विक अर्थव्यवस्था के संरचनात्मक रुझानों के बारे में भी चिंतन करना चाहिए, खासतौर से अमेरिका और चीन के बीच चल रही तनातनी को देखकर| इससे जुड़े कई सवाल हैं। जैसे, अमेरिका और चीन किस हद तक आपसी तनाव बढ़ाएंगे? क्या हमें भू-आर्थिक प्रतिस्पर्धा  के इस युग में किसी एक तरफ झुक जाना चाहिए? क्या भारत के लिए यह एक मौका है कि वह बाजार में विविधता की इच्छा रखने वालों और वैश्विक उत्पादन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए विनिर्माण क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा दे? यदि इसे आधार मानकर हम आगे बढ़ते हैं कि भारत को उच्च प्रौद्योगिकी वाले औद्योगिकीकरण, अधिक गुणवत्ता वाले विनिर्माण-कार्य, उत्पादों की आपूर्ति से जुड़ी व्यवस्था में अधिकाधिक रोजगार, और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखला में ज्यादा से ज्यादा भागीदारी की दरकार है, तो वैश्वीकरण में खलल डालने वाले इन रुझ...
पाक फिजाइया +प्लाफ़ बनाम  भारतीय वायुसेना

पाक फिजाइया +प्लाफ़ बनाम भारतीय वायुसेना

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1965 युद्ध में हम से चार गुणा छोटा मुल्क पाकिस्तान हमारी एयरफोर्स पर भारी पड़ गया था। उस युद्ध में पाकिस्तान के पास अधिक गुणवत्ता वाले अमरीकी F86 Sabre और ब्रिटिश Starfighter विमान थे जबकि भारत के पास Gnats, Mysteres, रात को न उड़ पाने वाले हंटर और धीमी गति से उड़ने वाले वैम्पायर एयरक्राफ्ट थे। उन दिनों पाकिस्तान अमेरिकी खेमे में था और उसे उस वक्त अमेरिका से भरपूर मदद मिल रही थी। उन्हें अमेरिका ने लेटेस्ट रडार सिस्टम दिए थे जिससे भारतीय विमानों पर नजर रखना आसान था। 1965 के युद्ध में भारत ने अपनी थल सेना की मदद के लिए पाक सेना पर सबसे पहला हवाई हमला 1 सितंबर को शुरू किया जिसमें 12 वैम्पायर और 14 मिस्टेरे जहाज थे। पाकिस्तान ने जवाब में F-86 साबरे ने 4 वैम्पायर विमान मार गिराए। पहले ही हमले की नाकामयाबी के बाद भारत ने वैम्पायर विमान हटा लिए। बकौल एयर फोर्स मार्शल अर्जुन सिंह  "भारत को स्ति...

भारतीय नाइट्रोजन अनुसंधान के अग्रणी वैज्ञानिक प्रो. यशपाल अबरोल का निधन

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नई दिल्ली, 29 जुलाई (इंडिया साइंस वायर): भारत में नाइट्रोजन अनुसंधान से जुड़े अग्रणी वैज्ञानिक प्रोफेसर यशपाल अबरोल का मंगलवार को निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे। प्रोफेसर अबरोल का निधन ऐसे समय में हुआ है जब दुनियाभर में नाइट्रोजन अनुसंधान कार्यों पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में, भारतीय नाइट्रोजन अनुसंधान से जुड़े एक प्रमुख वैज्ञानिक के निधन से इस अभियान को क्षति पहुँचना स्वाभाविक है। प्रोफेसर अबरोल को प्राकृतिक संरक्षण से जुड़े उनके कार्यों के लिए विशेष रूप से याद किया जाएगा। उनके परिवार में उनकी पत्नी और दो बेटे हैं। सोसायटी फॉर कन्जर्वेशन ऑफ नेचर और सस्टेनेबल इंडिया ट्रस्ट जैसी संस्थाओं के संस्थापक के रूप में उन्होंने प्राकृतिक संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया है। वह अंत समय तक इन संस्थाओं की देखरेख से जुड़े हुए प्रो. यशपाल अबरोल सस्टेनेबल इंडिया ट्रस्ट के ट्र...
क्या नई शिक्षा नीति से शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन आएंगे?

क्या नई शिक्षा नीति से शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन आएंगे?

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  (हमारे प्राचीन शैक्षिणिक इतिहास, उपलब्धियों, गलतफहमी का जायजा लेने और 21 वीं सदी के भारत के लिए भविष्य की शिक्षा योजना का चार्ट सही समय परआया है। पेशेवर योग्य शिक्षकों की कमी और गैर-शैक्षिक उद्देश्यों के लिए शिक्षकों की तैनाती में वृद्धि ने हमारी शिक्षा व्यवस्था को त्रस्त कर दिया है।)   भारत में ज्ञान प्रदान करने की एक अति समृद्ध परंपरा रही है। 'गुरुकुल' प्राचीन भारत में एक प्रकार की शिक्षा प्रणाली थी जिसमें एक ही घर में गुरु के साथ रहने वाले शिष्य (छात्र) थे। नालंदा इस  दुनिया में शिक्षा का सबसे पुराना विश्वविद्यालय-तंत्र था। दुनिया भर के छात्र भारतीय ज्ञान प्रणालियों से आकर्षित और अचंभित थे। आधुनिक ज्ञान प्रणाली की कई शाखाओं की उत्पत्ति भारत में हुई थी। प्राचीन भारत में शिक्षा को एक उच्च गुण माने ज...

प्रिंट मीडिया में सरकारी विज्ञापनों के लिए MIB ने जारी कीं ये गाइडलाइंस

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सूचना प्रसारण मंत्रालय के तहत आने वाले ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ (BOC) ने प्रिंट मीडिया एडवर्टाइजमेंट पॉलिसी पेश की है। ये एक अगस्त से प्रभावी होगी। इस बारे में जारी गाइडलाइंस में कहा गया है कि सरकार के सभी मंत्रालय या विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, स्वायत्त निकाय और सोसायटीज, केंद्रीय विश्वविद्यालय और भारत सरकार के सभी शैक्षणिक संस्थान अपने डिस्पले विज्ञापनों को  ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ के माध्यम से देंगे। हालांकि, वे क्लासीफाइड विज्ञापन जैसे(टेंडर नोटिस, नीलामी सूचना, भर्ती विज्ञापन आदि) बीओसी से सूचीबद्ध (empanelled) पब्लिकेशंस को बीओसी की दरों पर जारी कर सकते हैं और भर्ती संबंधी अपने विज्ञापन सीधे रोजगार समाचार (Employment News) में बीओसी की दरों पर पब्लिश करा सकते हैं। इसमें आगे कहा गया है कि सरकारी विज्ञापन प्राप्त करने के इच्छुक पब्लिकेशंस के आवेदनों प...

सामाजिक परिवर्तन के लिए जातिगत नामों की सख्त मनाही होनी चाहिए

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सरकारी महकमों, सभी वाहनों और राजनीति में केवल प्रथम नाम को तरजीह का सख्त कानून देश भर में जल्द लागू किया जाये. जातिगत गीतों, लेख, कविताओं पर पूर्ण प्रतिबन्ध का प्रावधान शांति पूर्ण समाज और समरसता के लिए बेहद जरूरी है. हाल ही में अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस,आर्म्ड बटालियन,जयपुर राजस्थान ने एक पत्र अपने सभी कमांडेंट को जारी किया है जिसमें सभी बटालियन के अधिकारियों को निर्देश दिए गए है कि उनके सभी अधिकारी और अधीनस्थ कर्मी अपनी वर्दी, अपने ऑफिस के कमरे के बाहर या अपनी टेबल की नाम पट्टिका पर लिखे गए नाम के साथ जातिगत या गोत्रगत नाम नहीं लगाएंगे और सरकारी आदेशों में इनका प्रयोग न करके केवल अपने प्रथम नाम से पुकारे या जाने जायँगे.  नाम पट्टिका पर  व आदेशों  और निर्देशों में पूरा स्टाफ अपना नाम व बेल्ट नंबर ही इस्तेमाल करेगा. क्या जबरदस्त आदेश आया है?  वास्तव में ऐसा ही हमारे देश के हर सरकारी महकमे ...