राम,रामजन्मभूमि व राम का मुकदमा:एक आकलन
*बाबा कबीर* कहते हैं कि-
*सात समद की मसि करौ, लेखनि सब बनराइ*
*धरती सब कागद करौ,हरि गुन लिखा न जाई*
*अर्थात-* सात समुद्र के जल को स्याही बना दो,सभी जंगलों को लेखनी बना दो और पूरी धरती को कागज फिर भी ईश्वर के बारे में लिखने को ये अपर्याप्त हैं।
मेरी कोशिश होगी भाषाई अभद्रता से बचते हुए सहज साहित्य में बात लिखना। चूंकि, *"साहित्य अलंकृत होता है,सौंदर्य से भरपूर लेकिन भाषा रूढ़ होती है,अक्खड़ और कभी कभी उजड्ड भी।" अगर लेख में भाषा कहीं साहित्य से विद्रोह कर दे या बागी हो जाये तो क्षमा कीजियेगा।*
मान्यवर, मैं तो एक तुच्छ प्राणी हूँ और मेरी औकात नहीं है कि मैं अपने आराध्य प्रभु श्रीराम के विषय में कुछ लिख सकूँ। बस एक प्रयास भर है आप सब तक प्रभु श्रीराम व इस विवाद को सहज शब्दों में पहुंचाने का। मैंने उत्तर प्रदेश में उस त्रासदी को स्वयं झेला भी है और देखा भी है कि,कैसे मुल्ला मुलायम ने ...



