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समाजवादी आस्था का दोहरा मापदंड

समाजवादी आस्था का दोहरा मापदंड

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समाजवादी आस्था का दोहरा मापदंड श्रावण माह शिव भक्ति का पवित्र माह है जिसमें उत्तर भारत के अनेक राज्यों में पवित्र कांवड़ यात्रा निकलती है। कांवड़ यात्रा में कांवड़िये पहले गंगा नदी तक पैदल जाकर पवित्र जल लेते हैं फिर शिवालयों जाकर महादेव का जलाभिषेक करते हैं। कांवड़िये अपनी यात्रा में 200 से 600 किमी तक पैदल चलते हैं। पूरी यात्रा में कांवड़िये सात्विक जीवन का पालन करते हैं। इस कठिन यात्रा में उनके पावों में छाले तक पड़ जाते हैं। कांवड़ यात्रा में स्त्रियाँ और बच्चे भी सम्मिलित होते हैं। जो सनातनी हिन्दू इस कथों यात्रा का व्रत नहीं ले पाते वे स्थान -स्थान पर कांवड़िओं की भिन्न- भिन्न प्रकार से सेवा करके अपना जीवन धन्य करना चाहते हैं। ये अत्यंत दुखद है कि छद्म धर्मनिरपेक्ष और वोट बैंक की राजनीति करने वाले राजनैतिक दलों ने इस वर्ष ऐसी पवित्र यात्रा पर क्षोभजनक अमार्यदित टिप्पणियां करीं। ...
ब्रिक्स में भारत का बढ़ता वर्चस्व संतुलित दुनिया का आधार

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ब्रिक्स में भारत का बढ़ता वर्चस्व संतुलित दुनिया का आधार-ललित गर्ग -ब्राजील के रियो डी जनेरियो में रविवार को हुए 17वें ब्रिक्स सम्मेलन में सदस्य देशों ने 31 पेज और 126 पॉइंट वाला एक जॉइंट घोषणा पत्र जारी किया। इसमें पहलगाम आतंकी हमले और ईरान पर इजराइली हमले की निंदा की गई। इससे पहले 1 जुलाई को भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की मेंबरशिप वाले क्वाड ग्रुप के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी पहलगाम हमले की निंदा की गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समिट में पहलगाम की आतंकी घटना पर कठोर शब्दों में कहा कि पहलगाम आतंकी हमला सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत पर चोट है। आतंकवाद की निंदा हमारा सिद्धांत होना चाहिए, सुविधा नहीं। मोदी ने शांति एवं सुरक्षा सत्र में कहा कि पहलगाम में हुआ ‘कायरतापूर्ण’ आतंकवादी हमला भारत की ‘आत्मा, पहचान और गरिमा’ पर सीधा हमला है। इसके साथ ही उन्होंने एक नई...
मतदाता सूची में सुधार पर सुप्रीम सहमति सराहनीय

मतदाता सूची में सुधार पर सुप्रीम सहमति सराहनीय

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मतदाता सूची में सुधार पर सुप्रीम सहमति सराहनीय-ललित गर्ग-बिहार में मतदाता सूची सुधार पर सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी सिर्फ एक न्यायिक फैसला नहीं, बल्कि लोकतंत्र के मूल्य को पुष्ट करने वाला ऐतिहासिक एवं प्रासंगिक निर्णय है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को बिहार में मतदाता सूची की समीक्षा के लिए आधार, राशन और वोटर कार्ड को भी मान्यता देने का सुझाव देकर आम लोगों की मुश्किल हल करने की कोशिश की है। इससे प्रक्रिया आसान होगी और आशंकाओं को कम करने में मदद मिलेगी। बेशक, फर्जी नाम मतदाता सूची में नहीं होने चाहिए लेकिन ऐसे अभियानों के दौरान आयोग का जोर ज्यादा से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से निकालने के बजाय, इस पर होना चाहिए कि एक भी नागरिक चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने से वंचित न रह जाए। विपक्ष को चाहिए कि वह इस फैसले को राजनीतिक हार न माने, बल्कि इसे एक अवसर माने, जनविश्वास अर्जित करने का, लोकतंत्र में आ...
मायावती ले सकती हैं आजम-ओवैसी का साथ

मायावती ले सकती हैं आजम-ओवैसी का साथ

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मायावती ले सकती हैं आजम-ओवैसी का साथअजय कुमार,वरिष्ठ पत्रकार उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 का विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही समीकरण बदल रहे हैं। मायावती, जो लंबे समय से दलित वोट बैंक की धुरी रही हैं, अब मुस्लिम वोटों को साधने की रणनीति पर काम कर रही हैं। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी (सपा) के कद्दावर नेता आजम खान के बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के करीब आने की चर्चाएं तेज हैं। यह घटनाक्रम सपा प्रमुख अखिलेश यादव के लिए सियासी चुनौती बन सकता है, क्योंकि उनकी पार्टी का आधार मुस्लिम और यादव वोटरों पर टिका है। मायावती ने 2024 के लोकसभा चुनावों में बसपा की कमजोर स्थिति को देखते हुए अपनी रणनीति बदली है। उनकी पार्टी, जो कभी दलितों की एकमात्र आवाज थी, अब केवल एक विधायक तक सिमट गई है। ऐसे में, मुस्लिम वोटरों को लुभाने के लिए मायावती पुराने गठजोड़ को फिर से तलाश रही हैं। आजम खान, जो सपा के वरिष्ठ नेता औ...
संघ प्रमुख 75 में ‘सेवानिवृत्ति’ के पक्ष में, तो मोदी क्यों अपवाद !

संघ प्रमुख 75 में ‘सेवानिवृत्ति’ के पक्ष में, तो मोदी क्यों अपवाद !

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संघ प्रमुख 75 में ‘सेवानिवृत्ति’ के पक्ष में, तो मोदी क्यों अपवाद ! अजय कुमार,वरिष्ठ पत्रकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में नागपुर में एक पुस्तक विमोचन समारोह के दौरान तल्ख टिप्पणी की कि 75 वर्ष की आयु पूरी होने पर नेताओं को सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए और नई पीढ़ी को अवसर देना चाहिए। यह बयान उन्होंने दिवंगत आरएसएस विचारक मोरोपंत पिंगले के हवाले से दिया, जिन्होंने कथित तौर पर कहा था कि 75 वर्ष की आयु में शॉल ओढ़ाए जाने का अर्थ है कि व्यक्ति को अब रुक जाना चाहिए और दूसरों को आगे आने देना चाहिए। भागवत का यह बयान, जो सामान्य प्रतीत होता है, ने भारतीय राजनीति में तीव्र चर्चा को जन्म दिया है, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि यह बयान ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वयं भागवत, दोनों सितंबर 2025 में 75 वर्ष के हो जाएंगे। इस बयान ने विपक्षी दल...
मतदाता सूची में सुधार पर सुप्रीम सहमति सराहनीय

मतदाता सूची में सुधार पर सुप्रीम सहमति सराहनीय

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मतदाता सूची में सुधार पर सुप्रीम सहमति सराहनीय-ललित गर्ग-बिहार में मतदाता सूची सुधार पर सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी सिर्फ एक न्यायिक फैसला नहीं, बल्कि लोकतंत्र के मूल्य को पुष्ट करने वाला ऐतिहासिक एवं प्रासंगिक निर्णय है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को बिहार में मतदाता सूची की समीक्षा के लिए आधार, राशन और वोटर कार्ड को भी मान्यता देने का सुझाव देकर आम लोगों की मुश्किल हल करने की कोशिश की है। इससे प्रक्रिया आसान होगी और आशंकाओं को कम करने में मदद मिलेगी। बेशक, फर्जी नाम मतदाता सूची में नहीं होने चाहिए लेकिन ऐसे अभियानों के दौरान आयोग का जोर ज्यादा से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से निकालने के बजाय, इस पर होना चाहिए कि एक भी नागरिक चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने से वंचित न रह जाए। विपक्ष को चाहिए कि वह इस फैसले को राजनीतिक हार न माने, बल्कि इसे एक अवसर माने, जनविश्वास अर्जित करने का, लोकतंत्र में आ...
टैरिफ युद्ध अमेरिका पर ही भारी पड़ सकता है

टैरिफ युद्ध अमेरिका पर ही भारी पड़ सकता है

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टैरिफ युद्ध अमेरिका पर ही भारी पड़ सकता है अमेरिका में श्री डानल्ड ट्रम्प के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के साथ ही दुनिया के लगभग समस्त देशों के साथ   ट्रम्प प्रशासन द्वारा टैरिफ युद्ध की घोषणा कर दी गई है। अमेरिका में विभिन्न देशों से होने वाले आयात पर   भारी भरकम टैरिफ लगाकर एवं टैरिफ की दरों में बार बार परिवर्तन कर तथा इन टैरिफ की दरों को लागू करने की तिथि में  परिवर्तन कर ट्रम्प प्रशासन टैरिफ युद्ध को किस दिशा में ले जाना चाह रहा है, इस सम्बंध में अब      स्पष्टता का पूर्णत: अभाव दिखाई देने लगा है। अब तो विभिन्न देशों को ऐसा आभास होने लगा है कि अमेरिकी  प्रशासन विभिन्न देशों पर टैरिफ की दरों के माध्यम से अपना दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है ताकि ये देश  अमेरिका के स...
नेताओं की सियासी फायदे वाली चुप्पी और हंगामे वाला ड्रामा

नेताओं की सियासी फायदे वाली चुप्पी और हंगामे वाला ड्रामा

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नेताओं की सियासी फायदे वाली चुप्पी और हंगामे वाला ड्रामासंजय सक्सेना,लखनऊ  भारत की राजनीति एक ऐसा मंच है, जहां हर दिन नया ड्रामा, नया विवाद और नई कहानियां जन्म लेती हैं। यह वह रंगमंच है, जहां राजनैतिक दल और उनके नेता कभी किसी मुद्दे पर गहरी चुप्पी साध लेते हैं, तो कभी मामूली-सी बात को लेकर हंगामा खड़ा कर देते हैं। यह चुप्पी और हंगामा, दोनों ही उनकी सियासत का हिस्सा हैं। एक सोची-समझी रणनीति, जो जनता के मन को भटकाने, सहानुभूति बटोरने या विरोधियों को घेरने के लिए रची जाती है। इस सियासत की परतें इतनी जटिल हैं कि आम आदमी अक्सर यह समझ ही नहीं पाता कि आखिर माजरा क्या है। ताजा मामला महाराष्ट्र में भाषा विवाद से जुड़ा हुआ है जहां मराठी की अस्मिता के नाम पर उत्तर भारतीयों को मारा-पीटा जा रहा है और इस पर उत्तर भारत में राजनीति करने वाले नेता तक मुंह खोलने से कतरा रहे हैं। कांग्रेस और उसके नेता रा...
टैरिफ युद्ध अमेरिका पर ही भारी पड़ सकता है

टैरिफ युद्ध अमेरिका पर ही भारी पड़ सकता है

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टैरिफ युद्ध अमेरिका पर ही भारी पड़ सकता है अमेरिका में श्री डानल्ड ट्रम्प के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के साथ ही दुनिया के लगभग समस्त देशों के साथ ट्रम्प प्रशासन द्वारा टैरिफ युद्ध की घोषणा कर दी गई है। अमेरिका में विभिन्न देशों से होने वाले आयात पर भारी भरकम टैरिफ लगाकर एवं टैरिफ की दरों में बार बार परिवर्तन कर तथा इन टैरिफ की दरों को लागू करने की तिथि में परिवर्तन कर ट्रम्प प्रशासन टैरिफ युद्ध को किस दिशा में ले जान...
 “रेखा गुप्ता का सियासी सफर: दिल्ली की सत्ता में बदलाव की दस्तावेज़ी कहानी”

 “रेखा गुप्ता का सियासी सफर: दिल्ली की सत्ता में बदलाव की दस्तावेज़ी कहानी”

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 "रेखा गुप्ता का सियासी सफर: दिल्ली की सत्ता में बदलाव की दस्तावेज़ी कहानी" 2025 के चुनावों के बहाने भारतीय लोकतंत्र, नेतृत्व और नारी शक्ति के उत्कर्ष की विश्लेषणात्मक प्रस्तुति लेखक: गोपाल शर्मा समीक्षक : उमेश कुमार सिंह  "दिल्ली 2025: रेखा गुप्ता का सियासी सफर" एक राजनीतिक यात्रा का ऐसा लेखबद्ध दस्तावेज़ है जो महज घटनाओं की श्रृंखला नहीं, बल्कि उन घटनाओं के पीछे की मानसिकता, रणनीति और नेतृत्व दृष्टिकोण को भी उजागर करता है। यह पुस्तक भारत की राजधानी दिल्ली के 2025 के ऐतिहासिक चुनावों के बहाने भारतीय लोकतंत्र के चरित्र, मतदाता की परिपक्वता और नेतृत्व परिवर्तन की जटिल प्रक्रियाओं की पड़ताल करती है। लेखक गोपाल शर्मा, जिन्होंने शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में वर्षों तक अपना योगदान दिया है, इस राजनीतिक यात्रा को एक अनुभवी साहित्यकार और गहन ...